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शिक्षक/संत/महात्मा बनाम उनके द्वारा दिया हुआ ज्ञान? एक समीक्षा

आजकल एक बात बहुतायत मे देखने को आ रही है कि समाज के ज़्यादातर वर्ग अपनी पसंद के किसी उपदेशक को इतना मान दे रहे हैं कि उसकी बे सिर पैर की अंधविश्वास फैलाने वाली बातों को भी आँख मूंदकर मान ले रहे हैं, ऐसा अमूमन किसी इंसान को उसकी बात से ज्यादा उसके होने को महत्व दे देने से है, इसमे व्यक्तिगत और सतही  स्वार्थ हो सकता है लेकिन लंबे समय अंतराल मे यह आदत इंसान की विवेचन क्षमता पर नकारात्मक असर डालने वाली साबित हो सकती है|, यह देखना हास्यपाद है कि कुछ लोग तो सत्संग मे भी जीवन की गहराई जानने और उसकी सच्चाई जानने के बजाय हँसाने वाली और मन को अच्छी लागने वाली या अहंकार पुष्ट करने वाली बात सुनने जाते हैं  


आज किसी उपदेशक की बात सही हो सकती है, कल उसकी बात अतार्किक और सतही भी हो सकती है इसीलिए किसी भी उपदेशक की बात तब ही तक सुननी और माननी है जब तक उसकी बातों मे सत्य, तर्क और व्यावहारिकता है जोकि प्राणियों की गरिमा और उन्नयन की संवाहक/सरंक्षक होती  है | 


ऐसा देखा जा रहा है कि कुछ उपदेशक सेलेब्रिटी बन जा रहे हैं, यहाँ तक तो तब भी ठीक है लेकिन वो पल चिंता पैदा करने वाला है जब ऐसा देखा जाता है कि लोगों को लगता है कि अमुक उपदेशक को अगर सामने से देख लिया तो जीवन बन जाएगा और वो उसके भक्त बन जा रहे हैं, मुझे व्यक्तिगत रूप से यही लगता है कि अगर कोई तार्किक उपदेशक मिल गया है तो उसके प्रवचन सुनकर खुद को और तार्किक व समझदार बनाओ उनकी बातों को जीवन मे प्रयुक्त करो लेकिन अच्छे से टटोलकर क्योंकि अच्छा लगना और वास्तव मे अच्छा होना, दोनों मे अंतर है और तो ये तो कभी न सोंचो कि अमुक उपदेशक के सामने बैठ जाने से सब दुख दूर हो जाएंगे या कोई चमत्कार हो जाएगा|


संयोग होते हैं सुखद भी और दुखद भी, आपके जीवन मे भी हो सकते हैं, मानसिक रूप से तैयार रहिए सामना करने को, इस दुनिया मे बहुत कम चीज़ें हैं जिनका आप श्रेय ले सकते हैं या जिन्हे आप नियंत्रित कर सकते हैं |


सच्चाई का जीवन जीना है और सच्चाई की कमाई पर ही निर्वाह करना है, शरीर स्वस्थ रहे इसके प्रयास करने हैं और चेतना उठती रहे इसके लिए नियमित अध्ययन करना है, खुद की काबिलियत बढ़ाते हुये खुद को रचनात्मक कार्यों मे लगते हुये बिना डर औए बिना लालच वाला जीवन जीना है, फिर जो होगा देखा जाएगा ऐसा संकल्प करके चलना है"अशुभ कल्पनाएं उन्हे ही परेशान करती हैं जो यह सोंचते हैं कि सब कुछ अच्छा ही हो उनके साथ" लेकिन मेरा व्यक्तिगत रूप से मानना है हमारे बस मे आज को अच्छे से जीना है और ये संकल्प रखना कि कैसी भी परिस्थिति आ जाए सच और आत्मनिर्भरता का जीवन जीने के सारे प्रयास करने हैं हर हालत मे, "सही प्रयास अपने आपमे में ही जीत है |"  


जितने भी महान उपदेशक/शिक्षक/संत/महात्मा हुये हैं सबके उपदेश मे एक बात साझी रही है कि अपने कार्यों के केंद्र मे आत्मवलोकन, जगभलाई, आत्मनिर्भरता और सच्चाई रखिए | लेकिन होता क्या है कि हम इन महान लोगों के बताए रास्ते पर चलने के प्रयत्न करने के बजाय इनकी पूजा करने लगते हैं इस उम्मीद मे कि इनकी पूजा कर लेने भर से हमारी इच्छाएं पूरी हो जाएंगी और जिंदगी बिना किसी कष्ट के कटती रहेगी|

प्रतीकों का सम्मान जरूरी है लेकिन इसके साथ उनकी बातों को अमल मे लाने के सच्चे प्रयास भी किए जाएँ तब ही आराधना / साधना सार्थक मानी जाएगी 

 

-लवकुश कुमार 

 


इसी विषय पर इतिहास मे परास्नातक सौम्या गुप्ता जी अपनी बात और समझ कुछ इस तरह व्यक्त करती हैं:-

आज हम कई रूपों मे भगवान को पूजते हैं, जैसे- राम, कृष्ण, बुद्ध, महावीर, पैगम्बर मोहम्मद साहब, ईसामसीह, गुरुनानक जी, साई बाबा।

ये जितने भी गुरु या महान लोग धरती पर आए, वो ये बताने आए थे कि कैसे हम अपनी आत्मा के मूल गुणों, वित्रता , प्रेम, करुणा और आनंद आदि , इन सब को खुद में पा सकते है। लेकिन हमने क्या किया हमने मान लिया कि उनकी पूजा करनी है बस और बाकी वो ही सब करेंगे और अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट गए।

उन्होंने हमें जो सिखाया अगर हम उस सिखाए हुए पर चलते तो आज लोग/देश सीमाओं में बंटे होते पर. धर्म, पंथ और जाति के नाम पर नहीं। पूरे विश्व में शांति होती, प्रेम, भाईचारा होता और इसी एकता का संदेश उन महान आत्माओं ने दिया था।

वो जीवन जीकर ईश्वर को पाने की कला सिखाने आए थे। हमने उन्हें भगवान माना और हमने अपने हर अच्छे-बुरे के लिए उनको ही जिम्मेदार ठहराया और अपने कर्मों/निर्णयों/प्राथमिकताओं/वृत्तियों  पर ध्यान ही नहीं दिया/अवलोकन नहीं किया |

जैसे हम भगवान की पूजा करते हैं वैसे ही अगर ज्ञान को, प्रकृति को, इंसानों की अच्छाइयों को पूजें, महान लोगों के जीवन के पदचिहनों पर चलें और वैसे ही नेक  काम करें जैसे उन महान आत्माओं ने किया तो दुनिया बेहतर, सुंदर होकर  डर, लालच और घृणा से मुक्त हो जाए |


-सौम्या गुप्ता जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं |

इस लेख के माध्यम से लेखिका क्या संदेश देना चाह रही है उसे कुछ प्रश्नों के माध्यम से आसानी से समझ सकते है :

इस लेख का मुख्य संदेश क्या है?

इस लेख का मुख्य संदेश यह है कि हमें उन महान गुरुओं की शिक्षाओं को याद रखना चाहिए और उनका पालन करना चाहिए। हमें ज्ञान, प्रकृति और मानवता की अच्छाइयों को महत्व देना चाहिए। हमें महान लोगों के जीवन के उदाहरणों से प्रेरित होकर अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने चाहिए।

हमें इन गुरुओं की शिक्षाओं का पालन क्यों करना चाहिए?

हमें इन गुरुओं की शिक्षाओं का पालन इसलिए करना चाहिए क्योंकि उन्होंने हमें जीवन जीने का सही तरीका सिखाया। उनकी शिक्षाएं हमें अपनी आत्मा के मूल गुणों को विकसित करने, दूसरों के प्रति अधिक दयालु होने और दुनिया में शांति और सद्भाव लाने में मदद करती हैं। वे हमें सिखाते हैं कि हमें अपने कर्मों के प्रति जिम्मेदार होना चाहिए।


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शुभकामनाएं

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क्या अध्यात्म में पैसे कमाने की मनाही है?

ऐसा नहीं है, अध्यात्म न तो पैसा कमाने से रोकता है और न ही एक समृद्ध जीवन जीने से।

बल्कि अध्यात्म में तो इंसान एक समृद्ध और संतुलित जीवन के लिए पूरे प्रयत्न करता है।

अध्यात्म तो बस खुद पर नजर रखने को कहता है, होश में आने को कहता है।

अध्यात्म कहता है कि जितना जरूरी पैसा कमाना है उतना ही कमाएं और पैसे कमाने के लिए ऐसे रास्ते अपनाएं जिनसे विश्व व्यवस्था मे लोगों की आज़ादी बनी रहे, किसी का शोषण न हो और किसी के साथ छल न हो, लोग सच्चाई के प्रकाश मे रहें और उन्हे झूठ के अंधेरे मे न रखा जाए उन्हे उथली खुशी न बेंची जाए |

व्यक्ति की गरिमा और बंधुत्व बना रहे और साथ देश और व्यक्ति की स्वतन्त्रता भी |

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अमूमन अध्यात्म में रूचि न होने के क्या कारण हो सकते हैं ?

अध्यात्म, स्वयं को जानने पर केन्द्रित है, यदि हम जान जाते हैं कि

हममे कुछ खामियां हैं या हमारे जीवन की प्राथमिकताओं में कुछ गड़बड़ है 

तब जो अगला चरण होता है वो है बदलाव के लिए कार्यवाही का,

जोकि बहुत कम लोग चाहते हैं,

दूसरों के व्यवहार को बदलने की इच्छा रखने वाले तो बहुत लोग मिल जायेंगे 

लेकिन स्वयं में बदलाव नहीं चाहते, स्वयं तो बस मनमानी करनी है, ऐसा सोंचने वालों की बहुतायत है |

दूसरा हमारे जीवंन के केंद्र में अहंकार ( झूठा ज्ञान ) होता है नतीजतन हम उसी केंद्र से निर्णय लेकर

वैसी ही प्राथमिकताएं निर्धारित करते हैं और उसी के अनुसार कर्म करते हैं,

अगर अध्यात्म की समझ पैदा हुयी तो प्राथमिकताओं में आमूल चूल परिवर्तन करने होंगे 

और इस तरह भीड़ से अलग हटना पड़ सकता है, जबकि लोग वह काम करके सुरक्षित महसूस करते हैं

जो ज्यादातर लोग कर रहे हों|

नतीजतन अमूमन लोग अध्यात्म से दूरी रखते हैं और इसे

अव्यवहारिक कहकर नकार देते क्योंकि उन्हें तो भीड़ का हिस्सा रहना है |

 

ये कुछ कारण हैं मेरी समझ में |

अगर आपके पास कोई और कारण हैं तो जरुर लिख भेजें फीडबैक फॉर्म से |

शुभकामनाएं

-लवकुश कुमार 

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दुनिया और जीवन को लेकर बेहतर समझ, स्पष्टता और साहसी जीवन के लिए कुछ उक्तियाँ - भाग -5

इन उक्तियों को मैंने अध्यात्मिक अध्ययन के दौरान अपनी डायरी मे लिखा और

अपने अनुभव एवं अवलोकन का पुट देते हुये आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ ;

विस्तृत समझ के लिए आप अध्यात्मिक साहित्य का रुख कर सकते/सकती हैं; 

आशा है ये आपके जीवन मे स्पष्टता और शांति लाएँगे और त्वरित निर्णय लेने

तथा अपनी पसंद-नापसंद की समीक्षा करने मे आपकी मदद करेंगे,

अपनी ज़िम्मेदारी पर ही अमल मे लाएँ, शुभकामनायें  

  1. हंसो से सीख ली जाती है

    हंसो को प्रेम दिया जाता है

    उनकी उपेक्षा, उनकी अवहेलना

    उनका अनादर नहीं किया जाता

  2. जिस दिन सोंच लोगे

    कि उड़ना है

    उस दिन पाओगे कि

    सब कुछ उड़ने मे ही

    मदद कर रहा है   

  3.  रिश्ते का आधार बदल दो

    आपके साथी का व्यवहार बदल जाएगा

  4. सही को अच्छे बुरे से ऊपर रखो

  5. सुख दुख से ऊपर कर्तव्य को रखो

  6. कामना और कष्ट से ऊपर कर्तव्य

  7. मजबूती का लक्षण कष्ट और कामना से आगे कर्तव्य

  8. आसानी से किसी भी बात को अपनी ड्यूटि मत मान लेना

  9. मजबूत इंसान की एक पहचान अपने लिये फैंसले खुद करता है, खुद को जानकर

  10. मान्यताओं की अपेक्षा तथ्य को सम्मान देने की हिम्मत रखना 

  11. अपनी नयी प्रतिमा बनाते रहना

  12. उस काम से मत भागना जहां टूटते हो, ना पढ़ाई से और ना व्यायाम से

  13. नहीं जानूँगा तो नहीं मानूँगा, पहले जानना फिर मानना

  14.  स्वयं से आगे समष्टि

  15. आराम से आगे उन्नति को रखना, शरीर मजबूत होता जाएगा

  16. जो तुमसे जुड़े उसे सच्चाई तक लेकर जाना

  17. अकेलेपन से डरने वाले सामाजिक गुलाम बनते हैं, अकेलेपन से मत डरना

  18. ठसक से रहना, उन्नति करना बेटा

  19. साथ से आगे सत्य को रखना, एक मिसाल कायम करना

     

संदर्भ - आचार्य प्रशांत  की शिक्षाओं और अन्य अध्यात्मिक साहित्य के साथ स्वयं की अनुभवजनित समझ पर आधारित 

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दुनिया और जीवन को लेकर बेहतर समझ, स्पष्टता और साहसी जीवन के लिए कुछ उक्तियाँ - भाग -4

इन उक्तियों को मैंने अध्यात्मिक अध्ययन के दौरान अपनी डायरी मे लिखा और

अपने अनुभव एवं अवलोकन का पुट देते हुये आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ ;

विस्तृत समझ के लिए आप अध्यात्मिक साहित्य का रुख कर सकते/सकती हैं; 

आशा है ये आपके जीवन मे स्पष्टता और शांति लाएँगे और त्वरित निर्णय लेने

तथा अपनी पसंद-नापसंद की समीक्षा करने मे आपकी मदद करेंगे,

अपनी ज़िम्मेदारी पर ही अमल मे लाएँ, शुभकामनायें  

  • अतीत मे कोई गलतियाँ नहीं होतीं

    गलती होती है मात्र वर्तमान मे

  • अपने झूठों को पकड़ो

    देखो कितना आनंद आता है |

  • जिसमे दिल लगा गया हो

    उसके पीछे मत जाओ

    जो सही है

    उसमे दिल लगाओ

  • दिन ऐसा बिताओ की रात को

    बिलकुल पडो और सो जाओ

    खाली करो अपने आपको

  • तुम्हारी चालाकी ही

    तुम्हारा बंधन है

    जो सरल है

    वो स्वतंत्र है

  • कोई भी तुम्हें लूटता

    बाद मे है

    पहले तुम्हें

    ललचाता है |

  • आदमी मजबूर हो कैसे सकता है,

    जब तक उसका स्वार्थ, लालच या डर न हो ?

  • अगर कोई इंसान

    आपकी जिंदगी

     बन बैठा है

    तो संभावना यही

     है की आपके पास

    जीने की कोई ऊंची वजह नहीं है

संदर्भ - आचार्य प्रशांत  की शिक्षाओं और अन्य अध्यात्मिक साहित्य के साथ स्वयं की अनुभवजनित समझ पर आधारित 

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दुनिया और जीवन को लेकर बेहतर समझ, स्पष्टता और साहसी जीवन के लिए कुछ उक्तियाँ - भाग -3

इन उक्तियों को मैंने अध्यात्मिक अध्ययन के दौरान अपनी डायरी मे लिखा और

अपने अनुभव एवं अवलोकन का पुट देते हुये आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ ;

विस्तृत समझ के लिए आप अध्यात्मिक साहित्य का रुख कर सकते/सकती हैं; 

आशा है ये आपके जीवन मे स्पष्टता और शांति लाएँगे और त्वरित निर्णय लेने

तथा अपनी पसंद-नापसंद की समीक्षा करने मे आपकी मदद करेंगे,

अपनी ज़िम्मेदारी पर ही अमल मे लाएँ, शुभकामनायें  

  • आपको सामने वाले का

    व्यवहार चोट नहीं पहुंचाता

    आपको आपका अहंकार चोट

    पहुंचाता है

  • कल की सुबह

    अलग हो सकती है

    अगर आप आज की

     रात बादल डालें

  • तरीके आम हैं तो

    परिणाम खास कैसे होंगे ?

  • पुराने रास्तों पर

    चल चलकर

    नई मंज़िल तक

    कैसे पहुँचा जा सकता है ?

  • चालाकी का जवाब

    चालाकी नहीं

    समझदारी है

  • जो कमज़ोर नहीं

    उसे सुरक्षा देना

    उसे कमजोर करना है

  • हर कदम तुम्हें बदल देता है

    अगले कदम पर तुम,

    तुम नहीं रहोगे |

​​​​​​​  इसीलिए अपने आगे के कदमो की

           कल्पना या चिंता करना व्यर्थ है |

           तुम बस अभी जहां हो

           वहाँ से उठते एक कदम की सुध लो

  • झुंड मे नहीं चलती जवानी

    शेर की तरह चलती है |

  • दिन रात

    जिनकी आवाजें

    सुन रहे हो

    दिन रात

    जिनकी शक्लें

    देख रहे हो

    तुम्हारा मन वैसा ही

    हो जाना है |

  • आँख साफ करो,

    भीतर जाओ,

    अपनी जिंदगी को देखो |

  • शरीर की शुद्धि,

    अच्छी बात है,

    उससे कहीं ज्यादा

    अच्छी बात है ,

    शरीरभाव से मुक्ति |

  • असली मोटिवेशन

    ज्ञानवर्धन है

    न की उत्साहवर्धन

संदर्भ - आचार्य प्रशांत  की शिक्षाओं और अन्य अध्यात्मिक साहित्य के साथ स्वयं की अनुभवजनित समझ पर आधारित 

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दुनिया और जीवन को लेकर बेहतर समझ, स्पष्टता और साहसी जीवन के लिए कुछ उक्तियाँ - भाग -2

इन उक्तियों को मैंने अध्यात्मिक अध्ययन के दौरान अपनी डायरी मे लिखा और

अपने अनुभव एवं अवलोकन का पुट देते हुये आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ ;

विस्तृत समझ के लिए आप अध्यात्मिक साहित्य का रुख कर सकते/सकती हैं; 

आशा है ये आपके जीवन मे स्पष्टता और शांति लाएँगे और त्वरित निर्णय लेने

तथा अपनी पसंद-नापसंद की समीक्षा करने मे आपकी मदद करेंगे,

अपनी ज़िम्मेदारी पर ही अमल मे लाएँ, शुभकामनायें  

  • सुबह उठो लेकिन पुराना दिन दोहराने को नहीं

    नया दिन लाने को

  • लोग तुम्हें नहीं चाहते,

    तुम्हारे द्वारा उन्हे जो मिल रहा होता है

    उस चीज़ को चाहते हैं

  • जो भयानक है वो कुछ छीन नहीं सकता

    जो आकर्षक हो

    वो कुछ दे नहीं सकता

  • जिसकी ज़रूरतें जितनी बढ़ेंगी

    वो उतना बिकेगा

    जरूरतें कम रखना बेटा

  • तुम्हारे मन को कोई विचलित करे

    ये अन्याय है तुम्हारे साथ

  • रिझाने वालों को

    धोखेबाज जाना

    खुश नहीं होना है

  • रिझाना प्रेम नहीं

    चालबाजी है

  • जो कुछ तुम्हें

    बार बार याद आता हो

    तुम उससे कुछ ऊंचा याद रखो

  • तुम्हारा जन्म दूसरों से

    तुलना करने को

    नहीं हुआ है  तुम्हारा जन्म अपनी सच्चाई को  अभिव्यक्ति देने को हुआ है 

संदर्भ - आचार्य प्रशांत  की शिक्षाओं और अन्य अध्यात्मिक साहित्य के साथ स्वयं की अनुभवजनित समझ पर आधारित 

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दुनिया और जीवन को लेकर बेहतर समझ, स्पष्टता और साहसी जीवन के लिए कुछ उक्तियाँ - भाग -1

इन उक्तियों को मैंने अध्यात्मिक अध्ययन के दौरान अपनी डायरी मे लिखा और

अपने अनुभव एवं अवलोकन का पुट देते हुये आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ ;

विस्तृत समझ के लिए आप अध्यात्मिक साहित्य का रुख कर सकते/सकती हैं; 

आशा है ये आपके जीवन मे स्पष्टता और शांति लाएँगे, अपनी ज़िम्मेदारी पर

ही अमल मे लाएँ, शुभकामनायें  

  • जरा सीधा होकर जीना है

    जरा सरल

    जरा भोला होकर जीना है

    चालाकी थोड़ा कम

  • गलती स्वीकार कर लो

    गलती से मुक्ति की

    शुरूआत हो जाएगी

  • शरीर  की उम्र नहीं

    चेतना का स्तर देखो

    फिर सोंचो की बात सुननी है की नहीं

  • दूसरों के साथ होने मे

    और दूसरों से बंधे होने मे अंतर है

    साथ होना सीखा

    जो अकेला होना जानेगा वही साथ होना भी जानेगा

  • यही धर्म है आपका कि

    जब दस लोग मूर्खता कर रहे हों

    तो आप मूर्खता न करें

संदर्भ - आचार्य प्रशांत  की शिक्षाओं और अन्य अध्यात्मिक साहित्य के साथ स्वयं की अनुभवजनित समझ पर आधारित 

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दुनिया और जीवन को लेकर समझ और स्पष्टता के लिए कुछ उक्तियाँ - भाग -3

इन उक्तियों को मैंने अपने बेटे और भतीजे के जन्मदिन वाले वीडियो मे डाला था, ज्यों का त्यों आपके सामने प्रस्तुत है 

बेटे आज तुम्हारे जन्मदिन पर मेरी तरफ से मेरी समझ और मेरे अनुभव से कुछ बातें-

  • न चिंता, न चाहत, स्वभाव तुम्हारा है बादशाहत
  • एक बात याद रखना बेटा की

           जो भयानक है, वो कुछ छीन नहीं सकता

           और जो आकर्षक है, वो कुछ दे नहीं सकता

  • व्यर्थ है मन को बांधना, समझदार बनना
  • न एकाग्रता, न नियंत्रण, मात्र होश
  •  यथार्थ है सहज जानना
  • जवानी अकेले दहाड़ती है शेर की तरह, ऐसे जवान बनना
  • आदर्शों को अस्वीकार करना
  • बड़े होगे तो प्रेम को समझना बेटा :
  • दूसरे की चिंता करते रहने को प्रेम नहीं कहते
  • प्रेम की भीख नहीं मांगते, न प्रेम को दया मे देते हैं
  • प्रेम और मोह मे फर्क समझना बेटा
  • जो बढ़े घटे, आकर्षित करे, वो प्रेम नहीं
  • घटनाएँ बहायेंगी, तुम अडिग रहना
  • ऐसा कर्म जो आज़ादी दे दे
  • आज़ादी किससे ? डर और लालच से 
  • इस बात को समझना की जहां आशक्ति वहाँ दुख
  • जिज्ञासा करो , संशय नहीं
  • सुख और दुख मे फर्क ना महसूस हो जहां दिल को उस मुकाम पर लेते  जाना  बेटा
  • सपने से बाहर आकार स्वयं का अवलोकन करना बेटा
  • मान अपमान से परे हटकर सत्य और शांति के लिए काम करना
  • इस बात को समझना बेटा की बुद्धि नहीं, बुद्धि का संचालक महत्वपूर्ण है  

जन्मदिन की शुभकामनाएं और बधाई बेटा

संदर्भ - आचार्य प्रशांत  की शिक्षाओं और अन्य आध्यात्मिक साहित्य के साथ स्वयं की अनुभवजनित समझ पर आधारित 

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दुनिया और जीवन को लेकर समझ और स्पष्टता के लिए कुछ उक्तियाँ - भाग -2

इन उक्तियों को मैंने अपने बेटे और भतीजे के जन्मदिन वाले वीडियो मे डाला था, ज्यों का त्यों आपके सामने प्रस्तुत है 

बेटे आज तुम्हारे जन्मदिन पर मेरी तरफ से मेरी समझ और मेरे अनुभव से कुछ बातें-

 

  • जितना जीना बहादुरी और आज़ादी से जीना बेटा
  • समाज के हर तबके की दिक्कत और आकांक्षाएँ समझना
  • ना दुख से घबराना ना सुख की तरफ झुकना
  • सुख लालच देता है और दुख देता है डर
  • जीवन का सीमित ईंधन कामनाओ वासनाओ मे मत जलाना बेटा
  • लोगों के जीवन मे स्पष्टता, शांति और प्रेम लाने के प्रयास करना बेटा
  • लोगों को अपना आदर्श बनाने से पहले पड़ताल करना बेटा
  • आनंद और सुख मे अंतर करना सीखना बेटा
  • शांति को खुशी से ऊपर रखना और झूठे आनन्द से बचना
  • मन नए से डरता है, नए की समझ हंसिल करना बेटा
  • सहायता की प्रतीक्षा व्यर्थ है, जो संसाधन हों उनके साथ आगे बढ़ना
  • साहसी मन समस्या को नहीं स्वयं को सुलझाता है
  • अपने प्रति ईमानदार और अपने प्रति हल्के रहना बेटा

जन्मदिन की शुभकामनाएं और बधाई बेटा

संदर्भ - आचार्य प्रशांत  की शिक्षाओं और अन्य आध्यात्मिक साहित्य के साथ स्वयं की अनुभवजनित समझ पर आधारित 

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