“एक इंसान कैसा नागरिक बनेगा ये निर्भर करता है उसे मिलने वाले महौल से, ये माहौल घर का भी होता है और उसके स्कूल/कॉलेज का भी |”
(मुख्य अतिथि माननीय विधायक श्री मयूख मेहर जी और निदेशक श्री गिरीश पाठक जी के कर कमलों से दीप प्रज्वलन)
स्कूल या विद्यालय हम विद्या अर्जन के लिए जाते हैं, जहां विद्या अर्जन केवल सैद्धांतिक पक्ष नहीं, यह व्यवहारिक पक्ष भी लिए हुये है, जिसमे स्वयं और दुनिया को समझने, चीज़ें कैसे काम कर रहीं और जीव की वृत्तियाँ क्या हैं इनको समझने के साथ एक तार्किक और उदार सोंच विकसित करना भी शामिल है ताकि हम विभिन्न विषयों मे निपुण होकर रोजगार के काबिल बन सकें |

(विशिष्ट अतिथि श्री आशीष कुमार, commandant 55 Bn SSB Pithoragarh )
एक सिस्टम को सुचारु रूप से चलाने के लिए और स्थायित्व बनाए रखने के लिए हमे जरूरत होती है, जिम्मेदार, साहसी, उदार और लोगों मे सामंजस्य बैठाकर चलने वाले लोगों (कार्यबल) की, इसके लिए विद्यालय मे विभिन्न गतिविधियों द्वारा बच्चों को जीवन के लिए तैयार किया जा सकता है, सत्यनिष्ठा और संवेदना भी विद्यालय के दिनो से ही विकसित की जाए तो काम आसान हो जाए| न्याय, गरिमा, स्वतन्त्रता और सच्चाई की राह पर चलते रहने के साहस के लिए जरूरी स्पष्टता भी इसी वक़्त से प्रदान की जाए तो बेहतर रहता है |

बच्चे हमारे देश का भविष्य हैं, दुनिया के यह बच्चे शारीरिक रूप से स्वस्थ हों, मानसिक रूप से मजबूत, होनहार/काबिल, संवेदनशील, प्रगतिवादी और जुझारू हों, साथ ही वो अपने जीवन की उच्चतम संभावनाओं को पा सकें, अपने अंदर छिपी असीम शक्ति और क्षमता को समझ सकें इसके लिए इन्हें उचित पोषण के साथ सही माहौल, अभ्यास, संगति और ट्रेनिंग की भी जरूरत होती है|


बच्चे अपनी शुरुआती जीवन का अच्छा खासा समय स्कूल में देते हैं, वह भी बच्चों के साथ, जिसका एक अलग ही महत्व है, क्योंकि हमारे आस पास जब लोग कुछ सीख रहे हों तो, हमारे द्वारा भी सीखने की इच्छा बढ़ जाए, ऐसी काफी संभावनाएं रहती हैं, कुछ विशेष गतिविधियों के द्वारा हम उनमें ऐसे गुण डाल सकते हैं जो उन्हें भविष्य के अवसरों और संघर्षों के लिए तैयार कर सकते हैं और सबसे खास कि उनमें ऐसी आदतें विकसित कर सकते हैं जिससे उनका एक-एक दिन सार्थक हो पाएगा और बेहतर मानवीय संबंधों के साथ उचित प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर वो आनंदमय और उत्कृष्ट जीवन जी पाएंगे|

साथ ही कुछ और गुण जो विद्यालय मे विकसित किए जा सकते हैं, विभिन्न क्रियाकलापों द्वारा यथा :
साहस, मैत्री भाव, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, धर्म निरपेक्ष दृष्टिको, साहसिक कार्य तथा खेल भावना और निःस्वार्थ सेवा का आदर्श, साहचर्य और अनुशासन का विकास, सहिष्णुता, सहभागिता,स्वावलम्बन व स्वदेश-प्रेम, स्वच्छता,पर्यावरण संरक्षण, समानता का भाव, अध्यापकों, सहकर्मियों एवं कनिष्ठों का सम्मान, लैंगिक संवेदीकरण के मूल्य, कमजोर वर्गों के प्रति संग का भाव एवं सहानुभूति (करुणा) इत्यादि,
हाल ही सोर घाटी पिथौरागढ़ के आइकन इंटरनेशनल स्कूल के वार्षिक उत्सव में काफी कुछ ऐसा देखने के लिए मिला कि ऊपर वर्णित उद्देश्यों की पूर्ति के रास्ते पर चलता एक संस्थान मिल गया हो:

जैसा की Icon International School Pithoragarh के निदेशक श्री गिरीश पाठक जी अपने संदेश मे कहते हैं कि
“ हमारा मुख्य उद्देश्य सभी बच्चों के लिए सीखने, बढ़ने और विकसित होने के लिए एक गतिशील वातावरण बनाना है। हम मुख्य रूप से शिक्षण के साथ विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से सीखने पर ध्यान केंद्रित करते हैं। हमारी विशेषता बेहतर भविष्य के लिए वैश्विक और प्रेरणादायक नागरिक बनाना है। हम बच्चों के सर्वांगीण विकास और आत्म-प्रेरणा, आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास पर ध्यान केंद्रित करते हैं। बच्चों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करना हमारे लिए अत्यंत प्रसन्नता का विषय है। हम आपके प्रियजनों के लिए एक सकारात्मक और ऊर्जावान वातावरण बनाते हैं और उन्हें उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए तैयार करते हैं।
हमारे अनुसार प्रत्येक बच्चा एक बीज के समान है जिसमें उचित मार्गदर्शन और स्नेह से पोषित होने पर बढ़ने की क्षमता होती है। आज हम पिथौरागढ़ शहर के एक प्रतिष्ठित और तेजी से विकसित होते शैक्षणिक संस्थान के रूप में स्थापित हैं। वर्ष दर वर्ष हमारे सभी कर्मचारियों और छात्रों के प्रयासों ने विद्यालय को उत्कृष्टता की ओर अग्रसर किया है। हमारे पास एक गतिशील और मेहनती संकाय है जो छात्रों के लाभ के लिए शिक्षा में समर्पित है। हमारा वादा है कि हम आपके बच्चों को न केवल सफल इंसान बनाएंगे बल्कि अच्छे इंसान भी बनाएंगे। अंत में, हम उन सभी अभिभावकों को धन्यवाद देना चाहते हैं जिन्होंने हमारे संस्थान और इसके आदर्शों पर विश्वास जताया है। हम आपको आश्वस्त करते हैं कि आपके प्यारे बच्चे सुरक्षित हाथों में हैं। हमारा संपूर्ण स्टाफ विद्यालय के मूल्यों को समझता है और बच्चों को प्रोत्साहित करने में सहयोग करता है, और हमें विश्वास है कि बच्चे आपको और हमें गौरवान्वित करेंगे। एक बार फिर, आइकॉन परिवार में आपका स्वागत है। ”

बात को और बेहतर तरह से समझने को कुछ गतिविधियों का जिक्र जरूरी है, दर्शकों में से एक, आरती जी बताती हैं कि कार्यक्रम स्थल पर प्रवेश करते ही मेहमानों का स्वागत करने का दायित्व भी बच्चों का ही था, इस बात ने आरती जी को प्रभावित किया और वो चमकती आंखों के साथ प्रसन्नता के भाव के साथ कहती हैं कि इस तरह ये बच्चे अभी से निःसंकोच होकर लोगों का अभिवादन करना सीख पायेंगे और एक उल्लास, उम्मीद, महत्वपूर्ण महसूस कराने वाली और अपनेपन की भावना का संचार करने वाली मुस्कान के साथ मानवीय रिश्तों को वो आधार देना सीख पायेंगे जिस पर टिके रिश्ते में इंसान एक से एक बड़े कार्य कर जाता है और नए रिकार्ड बना डालता है।
वह आगे कहती हैं कि कार्यक्रम के मंच संचालन का कार्य भी बच्चों ( छात्र-छात्राओं ) ने ही किया जो मन बांध लेने वाला था, इस तरह सक्रिय भागीदारी से बच्चों में स्पष्टता, आत्मविश्वास, समझ, समन्वय क्षमता, स्थितियों से निपटने, धैर्य, टिके रहने कि क्षमता विकसित होगी, साथ ही वो विभिन्न गतिविधियों के महत्व को समझ पाएंगे और विभिन्न संस्थाओं के महत्व और योगदान को समझ पाएंगे|
एक और गेस्ट (अभिभावक) और पिथौरागढ़ एयरपोर्ट पर अधिकारी श्री सुनील वर्मा जी कहते हैं कि विभिन्न गतिविधियां बच्चों कि समझ को व्यापक करेंगी और साथ ही वह बताते हैं की वार्षिक उत्सव के प्रांगण मे एक विज्ञान के प्रोजेक्ट और किताबों का स्टॉल भी लगा था जहां से बच्चों के लिए साइन्स की किट के साथ साहित्य अध्ययन और पुस्तक पढ़ने कि आदत डालने के लिए आकर्षक और ज्ञानवर्धक पुस्तकों को किफ़ायती कीमत पर खरीदा जा सकता था | साथ हे कर्राटे सरीखी गतिविधियों का प्रशिक्षण बच्चों को आत्म रक्षा के लिए तैयार करेगा और ISRO सरीखी अग्रणी संस्थाओं पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम बच्चों को और जागरूक तथा उत्साहित और प्रेरित करेंगे |
कला और विज्ञान का यह संगम वाकई प्रशंशनीय है |

अभिभावकों मे ही एक श्री संदीप यादव जी जोकि पेशे से पिथौरागढ़ एअरपोर्ट पर एयर ट्रैफिक कंट्रोल अधिकारी हैं, बताते हैं कि बच्चों द्वारा मंच संचालन उनकी झिझक को खत्म कर उन्हे आत्मविश्वास देगा, जो उन्हे जीवन मे आगे चलकर, चाहे वो व्यावसायिक जीवन हो या व्यक्तिगत जीवन, अपनी बात निर्भीक होकर रखने में साथ ही लोगों से संवाद द्वारा जुड़ने में मदद करेगा | स्टेज पर कार्यक्रम मे प्रतिभाग करना अपने आपमे ही एक झिझक को कम करने वाली और व्यक्तित्व को निखारने वाली गतिविधि है |
विद्यालय प्रबंधन द्वारा समाज के गणमान्य व्यक्तियों को आमंत्रित कर बच्चों को संबोधित किया गया और उन्हे विभिन्न गतिविधियों द्वारा उनकी प्रतिभा के प्रदर्शन का मौका दिया गया, यह विद्यालय के वार्षिक उत्सव को सफल बनाता है और बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए एक बेहतर प्रयास को दिखाता है |
विद्यालय प्रबंधन से निम्नलिखित ईमेल पर संपर्क किया जा सकता है : iconschoolpithoragarh123@gmail.com
बच्चे संवेदनशील, साहसी, करूण और काबिल बने इसी अपेक्षा के साथ
ढेरों शुभकामनायें
बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से भौतिकी मे स्नातक और आई आई टी दिल्ली से भौतिकी मे परास्नातक हैं और उनके लेखन का उद्देश्य समाज की उन्नति और बेहतरी के लिए अपने विचार साझा करना है ताकि उत्कृष्टता, अध्ययन और विमर्श को प्रोत्साहित कर देश और समाज के उन्नयन में अपना बेहतर योगदान दिया जा सके, साथ ही वह मानते हैं कि सामाजिक विषयों पर लेखन और चिंतन शिक्षित लोगों का दायित्व है और उन्हें दृढ़ विश्वास है कि स्पष्टता ही मजबूत कदम उठाने मे मदद करती है और इस विश्वास के साथ कि अच्छा साहित्य ही युवाओं को हर तरह से मजबूत करके देश को महाशक्ति और पूर्णतया आत्मनिर्भर बनाने मे बेहतर योगदान दे पाने मे सक्षम करेगा, वह साहित्य अध्ययन को प्रोत्साहित करने को प्रयासरत हैं।
जिस तरह बूँद-बूँद से सागर बनता है वैसे ही एक समृद्ध साहित्य कोश के लिए एक एक रचना मायने रखती है, एक लेखक/कवि की रचना आपके जीवन/अनुभवों और क्षेत्र की प्रतिनिधि है यह मददगार है उन लोगों के लिए जो इस क्षेत्र के बारे में जानना समझना चाहते हैं उनके लिए ही साहित्य के कोश को भरने का एक छोटा सा प्रयास है यह वेबसाइट ।
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अगर आपके पास भी कुछ ऐसा है जो लोगों के साथ साझा करने का मन हो तो हमे लिख भेजें नीचे दिए गए लिंक से टाइप करके या फिर हाथ से लिखकर पेज का फोटो Lovekushchetna@gmail.com पर ईमेल करें।
स्कूल या विद्यालय हम विद्या अर्जन के लिए जाते हैं, जहां विद्या अर्जन केवल सैद्धांतिक पक्ष नहीं, यह व्यावहारिक पक्ष भी लिए हुये है, जिसमे स्वयं और दुनिया को समझने, चीज़ें कैसे काम कर रहीं और जीव की वृत्तियाँ क्या हैं इनको समझने के साथ एक तार्किक और उदार सोंच विकसित करना भी शामिल है ताकि हम विभिन्न विषयों मे निपुण होकर रोजगार के काबिल बन सकें |
एक सिस्टम को सुचारु रूप से चलाने के लिए और स्थायित्व बनाए रखने के लिए हमे जरूरत होती है, जिम्मेदार, साहसी, उदार और लोगों मे सामंजस्य बैठाकर चलने वाले लोगों (कार्यबल) की, इसके लिए विद्यालय मे विभिन्न गतिविधियों द्वारा बच्चों को जीवन के लिए तैयार किया जा सकता है, सत्यनिष्ठा और संवेदना भी विद्यालय के दिनो से ही विकसित की जाए तो काम आसान हो जाए| न्याय, गरिमा, स्वतन्त्रता और सच्चाई की राह पर चलते रहने के साहस के लिए जरूरी स्पष्टता भी इसी वक़्त से प्रदान की जाए तो बेहतर रहता है |
बच्चे हमारे देश का भविष्य हैं, दुनिया के यह बच्चे शारीरिक रूप से स्वस्थ हों, मानसिक रूप से मजबूत, होनहार/काबिल, संवेदनशील, प्रगतिवादी और जुझारू हों, साथ ही वो अपने जीवन की उच्चतम संभावनाओं को पा सकें, अपने अंदर छिपी असीम शक्ति और क्षमता को समझ सकें इसके लिए इन्हें उचित पोषण के साथ सही माहौल, अभ्यास, संगति और ट्रेनिंग की भी जरूरत होती है|
बच्चे अपनी शुरुआती जीवन का अच्छा खासा समय स्कूल में देते हैं, वह भी बच्चों के साथ, जिसका एक अलग ही महत्व है, क्योंकि हमारे आस पास जब लोग कुछ सीख रहे हों तो, हमारे द्वारा भी सीखने की इच्छा बढ़ जाए, ऐसी काफी संभावनाएं रहती हैं, कुछ विशेष गतिविधियों के द्वारा हम उनमें ऐसे गुण डाल सकते हैं जो उन्हें भविष्य के अवसरों और संघर्षों के लिए तैयार कर सकते हैं और सबसे खास कि उनमें ऐसी आदतें विकसित कर सकते हैं जिससे उनका एक-एक दिन सार्थक हो पाएगा और बेहतर मानवीय संबंधों के साथ उचित प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर वो आनंदमय और उत्कृष्ट जीवन जी पाएंगे|
साथ ही कुछ और गुण जो विद्यालय मे विकसित किए जा सकते हैं, विभिन्न क्रियाकलापों द्वारा यथा राष्ट्रीय सेवा योजना, राष्ट्रीय कैडेट कोर इत्यादि :
राष्ट्रीय कैडेट कोर के उद्देश्य
क. युवकों/युवतियों को सुयोग्य नागरिक बनाने के लिये उनमें चरित्र, साहस, मैत्री भाव, अनुशासन - नेतृत्व, धर्म निरपेक्ष दृष्टिकोण साहसिक कार्य तथा खेल भावना और निःस्वार्थ सेवा आदर्शों की विकसित करना।
ख- संगठित प्रशिक्षित और प्रेरित युवकों/युवतियों की एक ऐसी जनशक्ति का निर्माण करना जो सशस्त्र सेना सहित जीवन के क्षेत्र में नेतृत्व प्रदान कर सके और राष्ट्रीय सेवा के लिये सदैव तत्पर रहे।
इस उद्देश्य का देश के विकास में क्या योगदान है?
यह उद्देश्य देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है। यह युवाओं को मजबूत चरित्र, अनुशासन, और नेतृत्व गुणों से लैस करता है, जो देश के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक विकास के लिए आवश्यक हैं। इसके साथ ही, यह सशस्त्र सेना में युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करके राष्ट्र की सुरक्षा में भी योगदान देता है।
आइए कुछ सवालों के माध्यम से बेहतर समझते हैं :
राष्ट्रीय कैडेट कोर का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
राष्ट्रीय कैडेट कोर का प्राथमिक उद्देश्य युवाओं को सुयोग्य नागरिक बनाना, उनमें चरित्र, साहस, मैत्री भाव, अनुशासन, नेतृत्व और निस्वार्थ सेवा की भावना का विकास करना है। इसके अतिरिक्त, कोर सशस्त्र सेना सहित जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्व प्रदान करने में सक्षम एक जनशक्ति का निर्माण करने का भी प्रयास करता है।
राष्ट्रीय कैडेट कोर युवाओं को किन गुणों का विकास करने के लिए प्रोत्साहित करता है?
राष्ट्रीय कैडेट कोर युवाओं को चरित्र, साहस, मैत्री भाव, अनुशासन, नेतृत्व, धर्मनिरपेक्ष दृष्टिकोण, साहसिक कार्य, खेल भावना और निस्वार्थ सेवा जैसे गुणों का विकास करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
राष्ट्रीय कैडेट कोर युवाओं को राष्ट्रीय सेवा के लिए कैसे तैयार करता है?
राष्ट्रीय कैडेट कोर युवाओं को प्रशिक्षित करके और उन्हें प्रेरित करके राष्ट्रीय सेवा के लिए तैयार करता है। यह उन्हें सशस्त्र सेना सहित जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्व करने में सक्षम बनाता है, जिससे वे राष्ट्रीय सेवा के लिए सदैव तत्पर रहें।
अनुशासन को पाठ में किस प्रकार परिभाषित किया गया है?
पाठ में अनुशासन को दो तरह से परिभाषित किया गया है: पहला, अपनी अंतरात्मा द्वारा बताए गए ईश्वर के आदेशों का पालन करना, और दूसरा, उचित अधिकार द्वारा दिए गए मानवीय आदेशों का पालन करना। यह स्पष्ट करता है कि अनुशासन आत्म-त्याग की नींव है, जो एक बेहतर उद्देश्य के लिए आवश्यक है।
राष्ट्रीय सेवा योजमा
उद्देश्य - सामाजिक सेवा द्वारा व्यक्तित्व विकास
राष्ट्रीय सेवा योजना छात्र-छात्राओं के व्यक्तित्व में सहिष्णुता, सहभागिता, सेवाभाव, स्वावलम्बन वस्वदेश-प्रेम जैसे गुणों को समाहित करने का प्रयास करती है।
राष्ट्रीय सेवा योजना का सिद्धान्त वाक्य "मैं नहीं परन्तु आप" (NOT ME BUT YOU)
राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) का मुख्य उद्देश्य छात्रों को सामुदायिक सेवा और सामाजिक कार्यों में शामिल करना है। यह युवाओं को समाज के प्रति संवेदनशील बनाता है और उनमें जिम्मेदारी की भावना पैदा करता है। NSS स्वयंसेवकों को विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर काम करने का अवसर मिलता है, जैसे कि स्वच्छता, शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण। इसका उद्देश्य छात्रों को समाज के सक्रिय और जिम्मेदार नागरिक बनाना है।
आइए कुछ सवालों के माध्यम से बेहतर समझते हैं :
देश की एकता एवं अखण्डता आपके कर्त्तव्यों के सफल संचालन में निहित है।
एकता और अखंडता एक राष्ट्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। वे समाज में सामंजस्य स्थापित करते हैं, जिससे सभी नागरिकों को समान अवसर मिलते हैं। एकता विभिन्न संस्कृतियों, भाषाओं और धर्मों के लोगों को एक साथ लाती है, जबकि अखंडता राष्ट्र की सीमाओं की सुरक्षा और संप्रभुता को सुनिश्चित करती है। यह देश की प्रगति और विकास के लिए आवश्यक है।
कर्त्तव्यों का सफल संचालन, व्यक्ति द्वारा अपनी जिम्मेदारियों को ईमानदारी, समर्पण और कुशलता से पूरा करने को दर्शाता है। इसमें समय पर काम करना, निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करना और दूसरों के साथ सहयोग करना शामिल है। सफल संचालन से व्यक्ति और समाज दोनों को लाभ होता है, जिससे बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं और राष्ट्र का विकास होता है।
एक स्कूल/कॉलेज परिसर के बुनियादी मूल्य क्या होने चाहिए
1. समस्त विद्यार्थियों को समान रुप से उच्च शिक्षा प्रदान करना।
2. विद्यार्थियों में मानवीय मूल्यों को विकसित करना ।
3. परिसर को उच्च शिक्षा के प्रतिष्ठित संस्थान के रूप में विकसित करना।
4. विद्यार्थियों को उनके विषयों में सर्वोत्तम ज्ञान से परिपूर्ण करना।
5. सुनहरे भविष्य की प्राप्ति के लिये विद्यार्थियों की प्रतिभा का पता लगाना एवं विकसित करना।
6. विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास के लिये उनकी पाठ्येत्तर प्रतिभाओं को उजागर करना।
एक उच्च शिक्षा के संस्थान से अपेक्षित उद्देश्य
आइए एक सवाल के माध्यम से बेहतर समझते हैं :
इस पाठ में उल्लिखित 'अनुकरणीय संस्थान' की क्या भूमिका है?
इस पाठ में उल्लिखित 'अनुकरणीय संस्थान' पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों को बढ़ावा देने और रोजगार के अवसर पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों को रोजगार देने के लिए एक मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा, जो स्थायी विकास के लिए प्रतिबद्ध होगा।
मानवीय मूल्यों के विकास में एक विद्यालय/परिसर का महत्व -
1. विद्यार्थियों में समानता का भाव विकसित करना ।
2. अध्यापकों, सहकर्मियों एवं कनिष्ठों का सम्मान करना।
3. लैंगिक संवेदीकरण के मूल्यों को आत्मसात करना।
4. पेर्यावरण निर्वात एवं स्वच्छता के प्रति जागरुकता विकसित करना।
5. समाज के कमजोर वर्गों के प्रति संग का भाव एवं सहानुभूति (करुणा) होना।–
आइए एक सवाल के माध्यम से बेहतर समझते हैं :
मानवीय मूल्यों का विकास क्यों महत्वपूर्ण है?
मानवीय मूल्यों का विकास छात्रों को समाज में सकारात्मक योगदान देने के लिए आवश्यक गुणों को विकसित करने में मदद करता है। यह समानता, सम्मान, लैंगिक संवेदीकरण, और पर्यावरणीय जागरूकता को बढ़ावा देता है, जिससे छात्र दूसरों के प्रति अधिक संवेदनशील और जिम्मेदार बनते हैं।
संकलन - पब्लिक डोमैन मे उपलब्ध जानकारी, अकादमिक समझ और शैक्षिक परिसरों के भ्रमण से जुड़ा अनुभव
- लवकुश कुमार
संकलनकर्ता और लेखक बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से भौतिकी मे स्नातक और आई आई टी दिल्ली से भौतिकी मे परास्नातक हैं और उनके लेखन का उद्देश्य समाज की उन्नति और बेहतरी के लिए अपने विचार साझा करना है ताकि उत्कृष्टता, अध्ययन और विमर्श को प्रोत्साहित कर देश और समाज के उन्नयन में अपना बेहतर योगदान दिया जा सके, साथ ही वह मानते हैं कि सामाजिक विषयों पर लेखन और चिंतन शिक्षित लोगों का दायित्व है और उन्हें दृढ़ विश्वास है कि स्पष्टता ही मजबूत कदम उठाने मे मदद करती है और इस विश्वास के साथ कि अच्छा साहित्य ही युवाओं को हर तरह से मजबूत करके देश को महाशक्ति और पूर्णतया आत्मनिर्भर बनाने मे बेहतर योगदान दे पाने मे सक्षम करेगा, वह साहित्य अध्ययन को प्रोत्साहित करने को प्रयासरत हैं।
जिस तरह बूँद-बूँद से सागर बनता है वैसे ही एक समृद्ध साहित्य कोश के लिए एक एक रचना मायने रखती है, एक लेखक/कवि की रचना आपके जीवन/अनुभवों और क्षेत्र की प्रतिनिधि है यह मददगार है उन लोगों के लिए जो इस क्षेत्र के बारे में जानना समझना चाहते हैं उनके लिए ही साहित्य के कोश को भरने का एक छोटा सा प्रयास है यह वेबसाइट ।
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लोग अंधविश्वास में क्यों फंसते हैं?
लोकल न्यूजपेपर में पढ़ते हुए कि एक पिता ने बेटे की चाह में बेटी की बलि दे दी, इसे पढ़ते हुए मन दुःख के साथ-साथ आश्चर्य से भी भर गया, ख्याल आया कि कैसे अशिक्षित और असंवेदनशील लोग है!
इस अंधविश्वास का कारण क्या हो सकता है?
एक कारण जो मैं समझ पा रही हूं, हो सकता है कि जब हम दुखी होते हैं, तब हमारा मन आशा की किरण ढूंढता हैं। उस समय किसी को वो एक किरण मिल जाती है या एक भ्रम कि उस समय कुछ लोगों को उम्मीद नहीं दिखती है तो वो बाबाओं के पास जाते हैं, दरअसल होता ये है, हम उस घोर दुःख की घड़ी में जो हमारे साथ खड़ा होता है उसे हम अपना भगवान समझ लेते हैं और ये वक्त की बात है कि उस समय हमें कैसा इंसान मिलता है, उसी इंसान का हम अनुसरण करते है। इस विश्वास के साथ की हमारी दिक्कतें दूर हो जायेंगी लेकिन अगर ये विश्वास तर्कहीन हो और हम संवेदना और करूणा भूलकर केवल स्वार्थ के वशीभूत हो जायें तो यही विश्वास अंधविश्वास में बदल जाता है, एक सात्विक इंसान का साथ हमें प्रेममयी बनाता है जबकि एक पाशविक प्रवृत्ति के स्वकेंद्रित इंसान का साथ हमें स्वार्थी और संवेदनाहीन बना देता है।
इसीलिए जरूरी है कि ये अज्ञान खत्म हो लेकिन उसमें समय लगेगा। लेकिन जब भी आप किसी संकट से गुजर रहे हों उस वक्त या तो आप खुद की अंतरात्मा पर यकीन करे या उस समय भी आप सही इंसान इस आधार पर चुने कि क्या वह अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए दूसरों का अहित करने की बात तो नहीं कर रहा, उसके जीवन में सच कितना है, इस तरह एक चुनाव आपकी जिंदगी बदल सकता है सकारात्मक या नकारात्मक आपके चुनाव पर निर्भर करता है।
दिक्कतें आती जाती रहती हैं, विकल्प मौजूद रहते हैं, दिक्कत के समय में सच्चे इंसान को ही चुनें और दिक्कतों के ऊपर इंसानियत को रखें, खुद से पहले समष्टि को रखें, अपने हित के लिए कोई ग़लत उदाहरण पेश न करें।
आपकी राय क्या है जरूर अवगत करायें।
शुभकामनाएं
-सौम्या गुप्ता
बाराबंकी उत्तर प्रदेश
सौम्या गुप्ता जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं, उनकी रचनाओं से जीवन, मानव संवेदना एवं मानव जीवन के संघर्षों की एक बेहतर समझ हांसिल की जा सकती है, वो बताती हैं कि उनकी किसी रचना से यदि कोई एक व्यक्ति भी लाभान्वित हो जाये, उसे कुछ स्पष्टता, कुछ साहस मिल जाये, या उसमे लोगों की/समाज की दिक्कतों के प्रति संवेदना जाग्रत हो जाये तो वो अपनी रचना को सफल मानेंगी, उनका विश्वास है कि समाज से पाने की कामना से बेहतर है समाज को कुछ देने के प्रयास जिससे शांति और स्वतंत्रता का दायरा बढे |
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शुभकामनाएं
जीवन में बहुत से संयोग होते हैं, सुखद भी और दुखद भी, ऐसा ही एक संयोग मेरे साथ हुआ। सड़क दुर्घटना में मेरे बाएं हाथ की कालर बोन टूट गयी,हालत ये हुई कि, कुछ देर लेटना, कुछ देर बैठना। ऐसे ही एक दिन पत्नी मुझे बिस्तर पर लिटाकर गई और मेरा फोन चार्जिंग पर मुझसे कुछ दूरी पर लगा हुआ था, फोन की घण्टी बजती है। पत्नी मेरे बेटे को मुझे मोबाइल देने के लिए भेजती है पर जब तक बेटा आता है, फोन कट जाता है। इसीलिए बेटा मोबाइल मेरे पास रखकर चल देता है, मैं अपना मोबाइल उठाने की कोशिश में अपना हांथ बेड पर इधर उधर रख रहा था पर दोनों कंधों में क्लैविकल ब्रेस बंधा होने के चलते मेरे हाथ की गति ठीक से नहीं हो पा रही थी, मैं बस कोशिश कर रहा था, इतने में खेलने के लिए वापस जाते हुए मेरे बेटे ने अपने पिता को देख, दिक्कत को समझ लिया, वह आता है और मोबाइल को बेड से उठाकर मेरे हाथ में रखकर फिर खेलने चला जाता है। मैं अपने 6 साल के बेटे की संवेदनशीलता, तत्परता को देख मुग्ध हो जाता हूँ और सोचता हूँ कि क्या संवेदनएं हममें जन्म से होती हैं शायद जरूरत है तो सही माहौल और प्रोत्साहन देकर इन्हें बनाए रखने की, शायद बच्चों की संवेदनाओं को सामाजिक व्यवहार ही भ्रष्ट कर देता है। सच ही कहा जाता है कि अपने बच्चे को कुछ भी बड़ा बनाने से पहले उसे नेक इंसान बनाएं। वह समाज के साथ साथ आपके भी काम आएगा, हां अगर आपने उसे मतलबी बना दिया तो हो सकता है कि जरूरत निकल जाने पर वो आपसे भी परायों की तरह व्यवहार करें।
- लवकुश कुमार
लेखक भौतिकी में परास्नातक हैं और उनके लेखन का उद्देश्य समाज की उन्नति और बेहतरी के लिए अपने विचार साझा करना है ताकि उत्कृष्टता, अध्ययन और विमर्श को प्रोत्साहित कर देश और समाज के उन्नयन में अपना बेहतर योगदान दिया जा सके, साथ ही वह मानते हैं कि सामाजिक विषयों पर लेखन और चिंतन शिक्षित लोगों का दायित्व है और उन्हें दृढ़ विश्वास है कि स्पष्टता ही मजबूत कदम उठाने मे मदद करती है और इस विश्वास के साथ कि अच्छा साहित्य ही युवाओं को हर तरह से मजबूत करके देश को महाशक्ति और पूर्णतया आत्मनिर्भर बनाने मे बेहतर योगदान दे पाने मे सक्षम करेगा, वह साहित्य अध्ययन को प्रोत्साहित करने को प्रयासरत हैं,
जिस तरह बूँद-बूँद से सागर बनता है वैसे ही एक समृद्ध साहित्य कोश के लिए एक एक रचना मायने रखती है, एक लेखक/कवि की रचना आपके जीवन/अनुभवों और क्षेत्र की प्रतिनिधि है यह मददगार है उन लोगों के लिए जो इस क्षेत्र के बारे में जानना समझना चाहते हैं उनके लिए ही साहित्य के कोश को भरने का एक छोटा सा प्रयास है यह वेबसाइट ।
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चलो जवानी की गलियों में,
बचपन की मुस्कानखोजने,
चालाकी से भरे स्वरों में,
वो मासूम ज़ुबान खोजने,
"आँखों में" खिलते सपनों से,
नींदें जो भी टूट गई थी,
चलो आज फिर उन
"नींदों में" फिर से
वही उड़ान खोजने।
- संजय सिंह 'अवध'
ईमेल- green2main@yahoo.co.in
उक्त मन को छूने वाली कविता के रचयिता भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण में ATC अधिकारी हैं और अपने कालेज के दिनों से ही, जैसा कि इनकी रचनाओं से घोतक है, जन जन में संवेदना, करूणा और साहस भरने के साथ अंतर्विषयक समझ द्वारा उत्कृष्टता के पथ पर युवाओं को अग्रसर करने को प्रयासरत हैं।
कवि के बारे में विस्तार से जानने के लिए यहां क्लिक करें।
कविता में 'ज़ुबान खोजने' का क्या अर्थ है?
'ज़ुबान खोजने' का अर्थ है, बचपन की भोली-भाली बातों और मासूमियत को वापस पाना। यह उन शब्दों और भावनाओं को खोजने की बात करता है जो हम बड़े होते हुए खो देते हैं।
इस कविता का केंद्रीय विचार क्या है?
इस कविता का केंद्रीय विचार जीवन के सफर में बचपन की यादों को संजोना, सपनों को पुनर्जीवित करना और फिर से उड़ान भरने की प्रेरणा लेना है।
इस कविता पर अपनी राय या प्रतिक्रिया आप संपर्क फॉर्म से भेज सकते हैं या lovekushchetna@gmail.com पर ईमेल कर सकते हैं।
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हाल ही में मैंने एक मूवी देखी - "धनक"
पता नहीं क्यों पर उस मूवी की शुरुआत से ही जो दिख रहा था उसे मैंने अलग तरीके से लिया।
परी उसमें मुझे ईश्वर की तरह लगती है और हम जैसा होता है उसका भाई। परी के भाई की आंखें नहीं होती और वो आँखों को पाना चाहता है, उसका आंखों को पाने का जो रास्ता है वो जिंदगी में किसी बड़े लक्ष्य को पाने का रास्ता है। जब हम जिंदगी में कुछ बड़ा पाना चाहते है तो सफर में कुछ लोग अच्छे साथी की तरह मिलते है, कुछ आगे का रास्ता बताते है कुछ उसमें बाधा भी डालते है। कुछ लोग हमें उन बाधाओं से निकालते भी है। जिससे हमारी बड़ी इच्छा पूरी हो जाए उसे हम ईश्वर जैसा मानने लगते है, इस फिल्म में शाहरुख खान अभिनीत पात्र वो ईश्वर है।
लेकिन जिंदगी में कभी कभी ठहरने का मन करता है जैसे वो शादी वाला घर था उस फिल्म में और कभी-कभी पैरों के नीचे तपती रेत हमें तेज चलने को मजबूर करती है।
उस फिल्म का हर पात्र कुछ देर में चला जाता है, ये हमें सिखाता है कि लोग सिर्फ हमें आगे के रास्ते के बारे में बताने के लिए ही आते है, पूरी जिंदगी के लिए एक स्थाई सहारा ईश्वर ही होते है, जैसे उसमें परी होती है,लेकिन कभी-कभी ईश्वर भी हमारी परीक्षा लेने के लिए हमारा साथ छोड़ देते है, जैसे उसे आंखे मिलने से पहले परी बेहोश हो जाती है और उसका छोटा भाई उसे उठाते हुए बेहोश हो जाता है, ईश्वर भी यही चाहते है कि हम अपनी आखिरी साँस तक लड़े फिर वही होगा जो सही होगा उसमें उस बच्चे को आंखें मिल जाती है, हमें हमारी सही मंजिल मिल जाएगी।
उसमें कई बार वो लड़की ऐसी जगह पहुँचती है जहां पर वो उस मुकाम को मंजिल समझ सकती थी जैसे शादी वाले घर में जब उसको और उसके भाई को हमेशा के लिए रखने की और उसकी शादी की बात होती है पर वो विनम्रता से मना कर देती है क्योंकि उसके लिए उसके भाई की आंखे ही जरूरी और पहली प्राथमिकता थी।इसी तरह से हमें जीवन में किसी मंजिल को पाने के लिए छोटे छोटे स्वार्थों को त्यागना होता है तब हम वो बड़ी चीज पाते है जिसकी हमने ज्वलंत इच्छा की थी।
- सौम्या गुप्ता
सौम्या गुप्ता जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं, वो अपनी समझ और लेखन कौशल से समाज में स्पष्टता, दयालुता, संवेदनशीलता और साहस को बढ़ाने के लिए प्रयासरत हैं।
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अक्षिता विस्मित भाव से, चेतना मैं तुम्हारी एक बात से चौंक जाती हूँ कि तुम अपरिचित लोगों से भी इतने खुलेपन के साथ कैसे बात कर लेती हो, तुम्हें डर नहीं लगता कि इससे कोई हानि भी हो सकती है या लोग तुम्हें ग़लत समझ सकते हैं?
चेतना मुस्कुराते हुए देखो अक्षिता, अपना तो सिंपल फंडा है जो वास्तव में हो वही दिखो जब मैं नए लोगों से फ्रैंकनेस से पेश आती हूँ तो सामने से भी मैं ऐसी ही उम्मीद रखती हूँ। इससे हम दोनों मुखौटे के साथ नहीं मिलते, मैं इससे लोगों से सच्चाई से मिलती हूं और जो मुझसे इत्तेफाक रखेंगे वही मिलेंगे, जो मेरे काम के महत्व को समझेंगे, किसी खास मौके पर हम मिले तो हम वही रहेंगे जो पहली बार में थे। हमारी ईमानदारी ही हमारे एसोसिएशन की मजबूत नींव बनेगी। इसीलिए मैं अपरिचित लोगों से ऐसे ही सच्चाई से मिलती हूँ। अगर हम खुद ही मुखौटा लगा लेंगे तो सामने वाले से सच्चा होने की उम्मीद नहीं कर सकते।अगर बाद में कलई खुलने पर कोई साथ छूटना है तो अभी वो जुड़े ही क्यों?
©लवकुश कुमार
लेखक भौतिकी में परास्नातक हैं और उनके लेखन का उद्देश्य समाज की उन्नति और बेहतरी के लिए अपने विचार साझा करना है ताकि उत्कृष्टता, अध्ययन और विमर्श को प्रोत्साहित कर देश और समाज के उन्नयन में अपना बेहतर योगदान दिया जा सके, साथ ही वह मानते हैं कि सामाजिक विषयों पर लेखन और चिंतन शिक्षित लोगों का दायित्व है और उन्हें दृढ़ विश्वास है कि स्पष्टता ही मजबूत कदम उठाने मे मदद करती है और इस विश्वास के साथ कि अच्छा साहित्य ही युवाओं को हर तरह से मजबूत करके देश को महाशक्ति और पूर्णतया आत्मनिर्भर बनाने मे बेहतर योगदान दे पाने मे सक्षम करेगा, वह साहित्य अध्ययन को प्रोत्साहित करने को प्रयासरत हैं,
जिस तरह बूँद-बूँद से सागर बनता है वैसे ही एक समृद्ध साहित्य कोश के लिए एक एक रचना मायने रखती है, एक लेखक/कवि की रचना आपके जीवन/अनुभवों और क्षेत्र की प्रतिनिधि है यह मददगार है उन लोगों के लिए जो इस क्षेत्र के बारे में जानना समझना चाहते हैं उनके लिए ही साहित्य के कोश को भरने का एक छोटा सा प्रयास है यह वेबसाइट ।
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गरिमा - आभा एक बात तो बता जरा।
आभा - हाँ गरिमा, पूछो?
गरिमा - संपादक महोदय जब मुझे लेखिका महोदया बुलाते हैं तो मुझे बहुत अच्छा लगता है जबकि नाम से जब वो बुलाते हैं तो इतना अच्छा नहीं लगता, ऐसा क्यों?
आभा - तू जवाब जानती है, फिर भी मुझसे पूछ रही है। लेखिका तो तू है, तुझे पता होना चाहिए और आभा हंसने लगती है।
गरिमा मुस्कुराते हुए- तू ऐसा ही समझ ले, अब बता।
आभा - इस संबोधन में तुम्हारे काम (लेखन) को महत्व दिया जा रहा है, जो तुम्हारा भी महत्व है, हर व्यक्ति खुद को महत्वपूर्ण समझना चाहता है और इसके संबोधन में तो तुम्हारे काम व तुम्हे दोनों को महत्व मिलता है, इसीलिए अच्छा लगता है दूसरे शब्दों में
'लेखिका' शब्द गरिमा तुम्हारे पेशे और पहचान का प्रतीक है। जब संपादक तुम्हे 'लेखिका' कहते हैं, तो वह तुम्हारे काम को मान्यता देते हैं और तुम्हे यह महसूस कराते हैं कि तुम एक पेशेवर हो और तुम सम्मानित महसूस कराती हो।
ठीक है न लेखिका महोदया ? और दोनों हंसने लगती हैं।
© सौम्या गुप्ता
सौम्या गुप्ता जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं |
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आप इतना खुलकर कैसे बात कर लेते है, क्या आपको डर नहीं लगता? कि सामने वाला आपके बारे में गलत सोच सकता है?
नहीं मुझे लोगों का डर नहीं लगता क्योंकि मैंने शराफत का लबादा नहीं ओढ़ रखा है।
©लवकुश कुमार
लेखक भौतिकी में परास्नातक हैं और उनके लेखन का उद्देश्य समाज की उन्नति और बेहतरी के लिए अपने विचार साझा करना है ताकि उत्कृष्टता, अध्ययन और विमर्श को प्रोत्साहित कर देश और समाज के उन्नयन में अपना बेहतर योगदान दिया जा सके, साथ ही वह मानते हैं कि सामाजिक विषयों पर लेखन और चिंतन शिक्षित लोगों का दायित्व है और उन्हें दृढ़ विश्वास है कि स्पष्टता ही मजबूत कदम उठाने मे मदद करती है और इस विश्वास के साथ कि अच्छा साहित्य ही युवाओं को हर तरह से मजबूत करके देश को महाशक्ति और पूर्णतया आत्मनिर्भर बनाने मे बेहतर योगदान दे पाने मे सक्षम करेगा, वह साहित्य अध्ययन को प्रोत्साहित करने को प्रयासरत हैं,
जिस तरह बूँद-बूँद से सागर बनता है वैसे ही एक समृद्ध साहित्य कोश के लिए एक एक रचना मायने रखती है, एक लेखक/कवि की रचना आपके जीवन/अनुभवों और क्षेत्र की प्रतिनिधि है यह मददगार है उन लोगों के लिए जो इस क्षेत्र के बारे में जानना समझना चाहते हैं उनके लिए ही साहित्य के कोश को भरने का एक छोटा सा प्रयास है यह वेबसाइट ।
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बच्चों को इन महान विभूतियों के बारें में पढ़ायें और उन्हें गुणवान तथा उच्च आदर्शों वाला इंसान बनाये, फिर वो ना छोटी बातों पर परेशान होंगे और ना ही छोटी बातों में फंसेंगे, फिर उनके उद्देश्य भी बड़े होएँगे और उनके काम में उत्कृष्टता दिखेगी और साथ ही वो दूसरों की दिक्कत के प्रति संवेदनशील भी होंगे और परिस्थितियों के साथ सामंजस्य बिठाकर सही और त्वरित निर्णय ले पाएंगे |
अच्छा हो कि इनकी जीवनी पर आधारित पुस्तकें एक डिस्प्ले रैक में लगा दें बच्चों के अध्ययन कक्ष में |

स्वयं भी पढ़ें और बच्चों के साथ प्रेरणादायक प्रसंग साझा करें |
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वीर दुर्गा दास - दुर्गादास एक ऐसे नायक थे, जिनका सारा कर्तृत्व, कर्तव्य और संपूर्ण जीवन परस्वार्थ, परसेवा और परोपकार की पवित्र वेदी पर बलिदान होता रहा । वे न राजा थे और न राजकुमार । न उनका कोई पैतृक राज्य था और न बाद में ही उन्होंने कोई भू-खंड अपने अधिकार में करके उस पर अपना राजतिलक कराया । जबकि उन्होंने अपने बाहुबल और बुद्धिबल से मारवाड़ को स्वतंत्र कराया, मुगलों से तमाम जागीरें छीन ली, दिल्ली के बादशाह औरंगजेब को नीचा दिखाकर आर्य धर्म की पताका ऊँची कर दी । |
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सुभाष चंद्र बोस - स्वाधीनता के पुजारी |
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दादाभाई नौरोजी -स्वाधीनता के मंत्र- द्रष्टा |
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जानकी मैया- समाज - सुधार और जनसेवा मे संलग्न |
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जमशेद जी टाटा - आर्थिक पुनर्निर्माण के अग्रदूत |
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द्वारकानाथ घोष - धन, मन और चरित्र के धनी |
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पंजाब- केसरी लाला लाजपत राय - भारतीय स्वाधीनता को करने में जिन शिल्पियों का आदरणीय योगदान रहा है, पंजाब- केसरी लाला लाजपत राय का अन्यतम स्थान है |
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स्वामी विवेकानन्द - धर्म और संस्कृति के महान उन्नायक |
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स्वामी रामकृष्ण परमहंस- युग चेतना के सूत्रधार |
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कार्ल मार्क्स - समानता के पक्षकार |
इन जीवनियों को आप किफायती लागत में गायत्री परिवार की वेबसाइट से भी प्राप्त कर सकते हैं |