काम की बारीकियों को समझें, प्रक्रिया पर ध्यान दें। काम में आनंद आएगा।
यह लेख कार्य के प्रति दृष्टिकोण पर प्रकाश डालता है, जिसमें कार्य की बारीकियों को समझना और आनंद की खोज पर जोर दिया गया है। यह सर्वोत्तम पुरस्कार के रूप में काम से मिलने वाले आनंद पर बल देता है।
- सौम्या गुप्ता
बाराबंकी, उत्तर प्रदेश
सौम्या गुप्ता जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं |
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शुभकामनाएं
एक इंसान कुछ अपनी समझ में बेहतर करने के लिए कुछ ऐसा कर रहा है जोकि अपने आप में नया है, लीक से हटकर है, व्यक्तिगत नुकसान होने की भी संभावना है लेकिन दूसरों को कोई भी नुकसान नहीं होना है, फिर भी समाज के कुछ लोग बिना उस इंसान की गरिमा ओर व्यक्तिगत स्वतंत्रता की परवाह किए बस उसे टोंकना शुरू कर देते हैं यहां तक उसे मूर्ख कहना शुरू कर देते हैं ! होना तो ये चाहिए था कि लोग उसकी योजना को समझते और अगर वह व्यक्तिगत या सामाजिक रुप से लाभकारी हो तो उसमें हर संभव सहयोग करते लेकिन होता है उल्टा, जो खुद दो काम करने में चिड़चिड़ा हो जाता है वो दूसरे के नए काम और तरीके का मज़ाक उड़ानें का साहस जुटा लेता है।
इस माहौल को बदलना होगा और नवाचार के लिए माहौल बनाना होगा।
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अमूमन ऐसा देखा गया है कि किसी इंसान से कोई ग़लती या चूक हो गई या फिर कोई आंकड़ा बताने में कोई मानवीय गलती हो गई, इस पर ही कुछ लोग उस इंसान को नीचा दिखाने में लगे जाते हैं या अपमानजनक तरीके से बात करना शुरू कर देते हैं, जैसे कि बस इंतजार कर रहे हों कि अमुक इंसान से कोई ग़लती हो और इसे नीचा दिखाएं।
इससे कोई लाभ नहीं, न तो इस तरह कोई सामने वाले से कुछ अन्य चीजें जिसमें वो बेहतर है सीख सकता है और नहीं ऐसे इंसान से देशहित में या समाज हित में कोई कार्य ले सकता है।
पारस्परिक सम्मान बिना शर्त होना चाहिए, तब ही हम मिलकर कुछ बेहतर कर सकते हैं और एक दूसरे को निखारने में परस्पर सहयोग कर सकते हैं।
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निसीथ, धीमे चला भाई सड़क पर और लोग भी हैं, और देख सामने मार्केट भी है, अनुभव ने डरते हुये निसीथ से बाइक की स्पीड कम करने को कहा |
देख भाई मुझे चाहिए थ्रिल लाइफ में और फिर ये तो हाइवे है मैं क्यों धीमी करूँ बाइक, निसीथ ने लापरवाही से जवाब दिया |
धड़ाम!!! निसीथ ने इतने मे ही एक अधेड़ को टक्कर मार दी थी जिसके हांथ से सीरप की शीशी गिरकर फूट गयी थी, अधेड़ के घुटनों से निकला खून और सीरप सड़क पर अपना रंग छोड़ चुके थे
कुछ लोगों ने दोनों लड़कों को उठाया और कुछ ने उस अधेड़ आदमी को, चोट पीछे बैठे अनुभव को भी आई थी इसीलिए वो अपने साथी को गाली बकते हुये कह रहा था, "अबे गधे मना किया था न कि धीमे चल ये मार्केट एरिया है, तुझे थ्रिल ही महसूस करना है तो कोई बड़ी चुनौती वाला काम क्यों नहीं पकड़ता जीवन मे ये बाइक को ओवरस्पीड चलाकर खुद की और दूसरों की जान क्यों लेने पर तुला है!, देख इस आदमी के हांथ मे दवाई थी, तेरे थ्रिल के चक्कर मे इसकी तो ......................."
-लवकुश कुमार
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शुभकामनाएं
कई लोग मिलते हैं जो कहते हैं कि जीवन में कुछ अच्छा, कुछ बड़ा करना चाहते हैं, लेकिन जब ध्यान से देखो तो पता चलता है कि जो काम उन्होंने अपने हाँथ में ले रखा है फिल-हाल वो उसे ही अच्छे से नहीं करते क्योंकि उस काम में उनका मन नहीं लगता(क्योंकि उसे वो छोटा समझते हैं, जिम्मेदारी का भाव नदारद है ) |
मेरा मानना है कि जो भी काम हाँथ में लिया है उसे आप बेहतर से बेहतर तरीके से करके ही अपने आज को सार्थक बना सकते हो, आगे के जीवन का तो पता नहीं कि कब आपको अपने सपनो का बड़ा और अच्छा काम करने का मौका मिले लेकिन जो काम आपने आज हाँथ में लिया है उसे तो अच्छा करिए ताकि आज का दिन सार्थक हो सके और मुझे पूरा अनुभव है की इससे आपको संतुष्टि भी मिलेगी और आगे के रास्ते खुलेंगे, उत्कृष्टता आएगी और साथ में आनंद, "जीवन आज को बेहतर से जीने में है नाकि सपने देखते रहने में", बेहतर का सपना भी देखें और प्रयास भी करें लेकिन आज के काम जिसको आपने हाँथ में ले रखा है उसे बेहतरीन तरीके और जिम्मेदारी से करें निपटाऊ नहीं, तब ही देश महानता की तरफ बढेगा जब हर कोई अपने काम को करीने से करे तब ही वो दूसरों से भी एक्स्पेक्ट कर सकता है की वो उसे अच्छी और उत्कृष्ट सेवा दे |
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मेरे सपनों की दुनिया ऐसी हो जहां
१ .लोग अपने साथ साथ दूसरों की भावनाओं को भी समझे अतः उनके हर सुख दुःख में क्षमतानुसार शामिल होंने का प्रयास करें, दिक्कत किसीको भी आ सकती है !
२-लोग गरीब व बेसहारा लोगों को अपनी क्षमता के अनुसार सेवा प्रदान करें!
३-जाति के नाम पर भेदभाव न करें हर वर्ग के लोगों की सुविधा-असुविधा का ध्यान रखना चाहिए! और उनकी आकांक्षाओं के साथ साथ उनके संघर्षों को समझें!
उमा जी एक ग्रहणी हैं जो समाजशास्त्र और हिन्दी मे स्नातक हैं और शिक्षण कार्य का अनुभव रखती हैं |
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मेरे सपनों की दुनिया ऐसी हो जहां
हेम चन्द्र पांडे जी, भारत सरकार के भारत मौसम विज्ञान विभाग मे मौसम विज्ञानी-ए हैं, लेख मे व्यक्त राय उनकी व्यक्तिगत राय है |
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मेरे सपनों की दुनिया ऐसी हो जहां
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1. लोग संवेदनशील हों, दूसरों की तकलीफ, सुविधा-असुविधा का ध्यान रखें, आकांक्षाओं को समझे और संघर्षों को भी, फिर इस समझ के लिए वो चाहे तो साहित्य का सहारा लें या फिर अच्छी फिल्मों का
2. लोग जीवन मे आनंद, अपने कार्य की उत्कृष्टता मे ढूँढे या फिर रचनात्म्क कार्यों मे न की सतही मज़े और नशे मे
3. लोग अपने पराये की भावना से ग्रसित न हों, सही को सही और गलत को गलत कहने का साहस और सच के पक्ष मे खड़े होने का सामर्थ्य रखते हों |
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धन्यवाद
कुछ लोग पूछते हैं की ये जो इतना लिखते हो उसका कुछ फायदा भी होता है क्या कोई पढ़ता भी है?
तो ऐसे सभी लोगों से मेरा कहना है कि
1. एक वक्त मुझे जब चीजों को जानने की जरूरत थी तो मैने भी पुस्तकें पढ़ीं थीं, जिसे कुछ लोगों ने लिखा था, वैसे ही मैं भी लिख रहा हूं ताकि फिर किसी जिज्ञासु को मेरी लेखनी से कुछ स्पष्टता मिल जाए कोई रास्ता मिल जाए
2. किरण बेदी मैम ने भी यही कहा कि उन्हे लगता है कि उन्हे अपने अनुभव लिखने चाहिए वो जरूर किसी के काम आयेंगे
3. और फिर ये जनहित का कार्य है तो देर रात तक जाग भी सकते हो, मन प्रफुल्लित रहता है
4. अच्छे लोग मिलेंगे, लेखन एक बहुत ही जन उपयोगी काम है अगर आप सच लिख रहे हैं तो, बुद्धि इस तरह के सही काम में लगे रहेगो तो फिजूल में न उलझना पड़ेगा, लेखन एक सृजनात्मक कार्य है और सृजन का आनंद क्या होता है उनसे पूछो जिन्हे बागवानी शरीखे सृजनात्मक कार्यों का शौक है |
5. अगर एक इंसान को भी मेरा लिखा हुआ समझ आ गया या उपयोग का लग गया तो ये लिखना सफल मानूँगा, जब मैंने इतने साहित्य का उपयोग किया तो मै भी क्यों न साहित्य के कोश मे कुछ योगदान दूँ अपनी क्षमता मे |
6. लेखन हमे जीकर दिखाने को भी प्रेरित करता है |
शुभकामनाएं