अमुक गाना जितेंद्र और हेमा मालिनी जी की फिल्म किनारा से लिया गया है।
इस गाने की शुरुआत में बोल हैं
"नाम गुम जाएगा चेहरा ये बदल जाएगा
मेरी आवाज़ ही पहचान है, गर याद रहे।"
जो अर्थ मैंने निकाला उसके अनुसार आवाज वह संदेश है जो कवि दे रहा है, वह कहना चाह रहा है कि उसके जाने के बाद यही बात कोई और कहेगा, क्योंकि यह जीवन का सच है, फिर जो बोलेगा उसका नाम रखा जाएगा लेकिन यह बातें जो सच्चाई है जीवन की, दुनिया की, वह वही रहेगी।
दूसरा अर्थ यह निकलता है कि इंसान चला जाता है, उसका नाम भी चला जाता है लेकिन उसने जो अच्छे काम किए होते हैं समाज के भले के लिए वह आगे बढ़ते रहते हैं।
इसलिए इंसान को नाम के पीछे दौड़ने के बजाय समाज के लिए उपयोगी कामों को करने का प्रयास करना चाहिए।
- लवकुश कुमार
लवकुश कुमार भौतिकी में परास्नातक हैं और उनके लेखन का उद्देश्य समाज की उन्नति और बेहतरी के लिए अपने विचार साझा करना है ताकि उत्कृष्टता, अध्ययन और विमर्श को प्रोत्साहित कर देश और समाज के उन्नयन में अपना बेहतर योगदान दिया जा सके, साथ ही वह मानते हैं कि सामाजिक विषयों पर लेखन और चिंतन शिक्षित लोगों का दायित्व है और उन्हें दृढ़ विश्वास है कि स्पष्टता ही मजबूत कदम उठाने मे मदद करती है और इस विश्वास के साथ कि अच्छा साहित्य ही युवाओं को हर तरह से मजबूत करके देश को महाशक्ति और पूर्णतया आत्मनिर्भर बनाने मे बेहतर योगदान दे पाने मे सक्षम करेगा, वह साहित्य अध्ययन को प्रोत्साहित करने को प्रयासरत हैं।
जिस तरह बूँद-बूँद से सागर बनता है वैसे ही एक समृद्ध साहित्य कोश के लिए एक एक रचना मायने रखती है, एक लेखक/कवि की रचना आपके जीवन/अनुभवों और क्षेत्र की प्रतिनिधि है यह मददगार है उन लोगों के लिए जो इस क्षेत्र के बारे में जानना समझना चाहते हैं उनके लिए ही साहित्य के कोश को भरने का एक छोटा सा प्रयास है यह वेबसाइट ।
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युवाओं को संबोधित कुछ लेख
समाज में बदलाव हो रहे हैं, कुछ सकारात्मक और कुछ नकारात्मक कुछ लोग नुकसानदायक और भ्रामक चीजों का प्रसार कर रहे हैं, कुछ आवाजें अनसुनी रह जा रही हैं। क्यों न हम संगठित होकर, इन अनसुनी आवाजों को ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं, क्यों न हम अपने पक्ष से भी अवगत करायें लोगों को, क्यों न हम जरूरी और सही बातों को ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं, क्यों न हम बदलते समाज को एक बेहतर और समावेशी दिशा देने का नेक प्रयास करें।
समाज में हो रहे बदलाव हमें भी प्रभावित करते हैं देर-सबेर फिर क्यों न हम अपने डेली शेड्यूल में कुछ मिनट इस बात को लिखने में लगाएं कि हम कैसी दुनिया चाहते हैं।
संख्या मायने रखती है आप लिखिए तो सही कि आप कैसी दुनिया चाहते हैं, आपको क्या शिकायतें हैं, फिर मजेदार होगा सामने वाले का पक्ष सुनना ।
"आपके आस-पास कोई भी बदलाव, एक न एक दिन आपको प्रभावित करेगा", जिस तरह आप सड़क पर कितना भी नियम और सावधानी से चलें लेकिन किसी दूसरे की लापरवाही से आपको नुकसान हो सकता है। इसीलिए हम जब अपने जीवन को सुरक्षित और सहूलियत भरा बनाने के लिए दिन के कई घंटे देते हैं तो क्यों न कुछ मिनट अपने विचार साझा करने को भी दें ताकि हम बता सकें कि हम समाज की दिशा किधर को चाहते हैं, फिर ये देखना मजेदार होगा कि हमारी च्वाइस कई मामलों में विरोधाभासी भी हो सकती है।अपना मत और समझ साझा करने में संकोच न करें, जो आंखों से देखा और उम्र के साथ अनुभव किया है उसे साझा करने में संकोच कैसा!
जो इंसान अपनी समझ और आकांक्षाएं साझा नहीं करना चाहता वो समाज से अपनी सहूलियत की दिशा की अपेक्षा कैसे कर सकता है! बिना किसी पूर्वाग्रह के और बिना इस बात की चिंता किए कि लोग मेरे बारे में क्या सोचेंगे बेधड़क होकर अपनी बात रखिए और दूसरों को भी हिम्मत दीजिए। जो कुछ महसूस कर रहें उसे सामने व्यक्त करने का |
आपका एक लाइन का इनपुट भी मायने रखता है।
#opinion_matters
कई लोगों के सहयोग से एक समावेशी लेख तैयार हो सकता है जो अलग अलग पृष्ठभूमि के लोगों की समझ को बेहतर करने और उन्हें दूसरों की दिक्कत के प्रति संवेदनशील बनाने में काम आएगा, इस तरह हम समाज के कुछ लोगों को बेहतर करने का काम कर पायेंगे।
कुछ लोग पूछते हैं की ये जो इतना लिखते हो उसका कुछ फायदा भी होता है क्या कोई पढ़ता भी है?
तो ऐसे सभी लोगों से मेरा कहना है कि
1. एक वक्त मुझे जब चीजों को जानने की जरूरत थी तो मैने भी पुस्तकें पढ़ीं थीं, जिसे कुछ लोगों ने लिखा था, वैसे ही मैं भी लिख रहा हूं ताकि फिर किसी जिज्ञासु को मेरी लेखनी से कुछ स्पष्टता मिल जाए कोई रास्ता मिल जाए
2. किरण बेदी मैम ने भी यही कहा कि उन्हे लगता है कि उन्हे अपने अनुभव लिखने चाहिए वो जरूर किसी के काम आयेंगे
3. और फिर ये जनहित का कार्य है तो देर रात तक जाग भी सकते हो, मन प्रफुल्लित रहता है
4. अच्छे लोग मिलेंगे, लेखन एक बहुत ही जन उपयोगी काम है अगर आप सच लिख रहे हैं तो, बुद्धि इस तरह के सही काम में लगे रहेगो तो फिजूल में न उलझना पड़ेगा, लेखन एक सृजनात्मक कार्य है और सृजन का आनंद क्या होता है उनसे पूछो जिन्हे बागवानी शरीखे सृजनात्मक कार्यों का शौक है |
5. अगर एक इंसान को भी मेरा लिखा हुआ समझ आ गया या उपयोग का लग गया तो ये लिखना सफल मानूँगा, जब मैंने इतने साहित्य का उपयोग किया तो मै भी क्यों न साहित्य के कोश मे कुछ योगदान दूँ अपनी क्षमता मे |
6. लेखन हमे जीकर दिखाने को भी प्रेरित करता है |
3. साहित्य जरूरी क्यों?
ताकि हम अपने आस पास के लोगों के इतर खुद से दूर दराज के लोगों की जीवन, पहनावे और रहन सहन के बारे में जान सकें।
अच्छा जानना क्यों है दूर वालों के बारे में ? ताकि
हम जान सकें अगर उनमें कुछ बेहतर है हमसे, जिसे अपनाया जा सके।
हम जान सकें उनके जीवन के संघर्षों के बारे में ताकि हमें अपनी दिक्कतें बड़ी न लगें।
हम जान सकें उनकी आकांक्षाओं के बारे ताकि जब कभी उनके साथ काम करना पड़े या उनके लिए नीतियां बनाना पड़े तो हम हम उनके व्यवहार और जरूरतों के पीछे का कारण जान सकें।
इस तरह नए लोगों के साथ काम करना आसान होगा।
समाज के एक तबके का इंसान दूसरे तबके के इंसान के बारे में जान ही तब पाता है जब यदि तो वो उनके बीच समय बिताए, या उनके बारे में फ़िल्म देखें या फिर साहित्य ( कहानी, कविता, उपन्यास, लेख, रिपोर्ताज, जीवनियां, आत्मकथा इत्यादि) पढ़ें।
फिर वही प्रश्न कि आखिर जानना क्यों है ?
ताकि समाज में आपसी संघर्ष कम हों और सब एक दूसरे को साथ लेकर चलें, एक दूसरे की तकलीफ़ों के प्रति संवेदनशील रहें ताकि स्थायित्व का मार्ग प्रशस्त हो और देश में शांति बनी रहे, जीवन में शांति बनी रहे।
उम्र के एक पड़ाव का इंसान उम्र के दूसरे पड़ाव के इंसान के विचारों और प्राथमिकताओं को जान पाता है, सुविधा असुविधा को जान पाता है नतीजतन तालमेल बिठाकर चलना आसान होता है, जीवन में शांति आती है और क्लेश कम से कम रहता है।
आज का इंसान, अपने पूर्वजों द्वारा अनुभव की गई जीवन और दुनिया की सच्चाई को पुस्तकों द्वारा पढ़कर अपने जीवन को सही दिशा दे सकता है, जिसमें अफसोस का कोई स्थान न हो, हो तो केवल उत्कृष्टता।
फिर क्या सोंच रहे हैं आप ? देंगे एक घंटा रोज का ? साहित्य अध्ययन को
और बच्चों को भी मैथ्स साइंस के साथ-२ साहित्य पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करेंगे और देश बेहतर और संवेदनशील ( जो दूसरों की तकलीफ़ को समझ सके ) नागरिक देने का प्रयास करेंगे ?
कुछ सवाल जिनके जवाब आपको स्पष्टता के साथ पता हो तो बेहतर “
जीवन में सबसे जरूरी क्या है ? डर लालच और मोह से मुक्ति? सबसे ज्यादा खुशी किस काम में मिलती है? टिकाऊ खुशी और स्थायी आनंद ? खुशी और आनंद में अंतर क्या है? उत्कृष्टता से आप क्या समझते हैं ? आत्मनिर्भरता महत्वपूर्ण क्यों है ? जीवन में संघर्षों के क्या मायने हैं? काम में गुणवत्ता को लेकर प्रतिबद्धता जरूरी क्यों है?
शुभकामनायें
काम की बारीकियों को समझें, प्रक्रिया पर ध्यान दें। काम में आनंद आएगा।
यह लेख कार्य के प्रति दृष्टिकोण पर प्रकाश डालता है, जिसमें कार्य की बारीकियों को समझना और आनंद की खोज पर जोर दिया गया है। यह सर्वोत्तम पुरस्कार के रूप में काम से मिलने वाले आनंद पर बल देता है।
- सौम्या गुप्ता
बाराबंकी, उत्तर प्रदेश
सौम्या गुप्ता जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं |
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शुभकामनाएं
एक इंसान कुछ अपनी समझ में बेहतर करने के लिए कुछ ऐसा कर रहा है जोकि अपने आप में नया है, लीक से हटकर है, व्यक्तिगत नुकसान होने की भी संभावना है लेकिन दूसरों को कोई भी नुकसान नहीं होना है, फिर भी समाज के कुछ लोग बिना उस इंसान की गरिमा ओर व्यक्तिगत स्वतंत्रता की परवाह किए बस उसे टोंकना शुरू कर देते हैं यहां तक उसे मूर्ख कहना शुरू कर देते हैं ! होना तो ये चाहिए था कि लोग उसकी योजना को समझते और अगर वह व्यक्तिगत या सामाजिक रुप से लाभकारी हो तो उसमें हर संभव सहयोग करते लेकिन होता है उल्टा, जो खुद दो काम करने में चिड़चिड़ा हो जाता है वो दूसरे के नए काम और तरीके का मज़ाक उड़ानें का साहस जुटा लेता है।
इस माहौल को बदलना होगा और नवाचार के लिए माहौल बनाना होगा।
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शुभकामनाएं
अमूमन ऐसा देखा गया है कि किसी इंसान से कोई ग़लती या चूक हो गई या फिर कोई आंकड़ा बताने में कोई मानवीय गलती हो गई, इस पर ही कुछ लोग उस इंसान को नीचा दिखाने में लगे जाते हैं या अपमानजनक तरीके से बात करना शुरू कर देते हैं, जैसे कि बस इंतजार कर रहे हों कि अमुक इंसान से कोई ग़लती हो और इसे नीचा दिखाएं।
इससे कोई लाभ नहीं, न तो इस तरह कोई सामने वाले से कुछ अन्य चीजें जिसमें वो बेहतर है सीख सकता है और नहीं ऐसे इंसान से देशहित में या समाज हित में कोई कार्य ले सकता है।
पारस्परिक सम्मान बिना शर्त होना चाहिए, तब ही हम मिलकर कुछ बेहतर कर सकते हैं और एक दूसरे को निखारने में परस्पर सहयोग कर सकते हैं।
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निसीथ, धीमे चला भाई सड़क पर और लोग भी हैं, और देख सामने मार्केट भी है, अनुभव ने डरते हुये निसीथ से बाइक की स्पीड कम करने को कहा |
देख भाई मुझे चाहिए थ्रिल लाइफ में और फिर ये तो हाइवे है मैं क्यों धीमी करूँ बाइक, निसीथ ने लापरवाही से जवाब दिया |
धड़ाम!!! निसीथ ने इतने मे ही एक अधेड़ को टक्कर मार दी थी जिसके हांथ से सीरप की शीशी गिरकर फूट गयी थी, अधेड़ के घुटनों से निकला खून और सीरप सड़क पर अपना रंग छोड़ चुके थे
कुछ लोगों ने दोनों लड़कों को उठाया और कुछ ने उस अधेड़ आदमी को, चोट पीछे बैठे अनुभव को भी आई थी इसीलिए वो अपने साथी को गाली बकते हुये कह रहा था, "अबे गधे मना किया था न कि धीमे चल ये मार्केट एरिया है, तुझे थ्रिल ही महसूस करना है तो कोई बड़ी चुनौती वाला काम क्यों नहीं पकड़ता जीवन मे ये बाइक को ओवरस्पीड चलाकर खुद की और दूसरों की जान क्यों लेने पर तुला है!, देख इस आदमी के हांथ मे दवाई थी, तेरे थ्रिल के चक्कर मे इसकी तो ......................."
-लवकुश कुमार
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शुभकामनाएं
कई लोग मिलते हैं जो कहते हैं कि जीवन में कुछ अच्छा, कुछ बड़ा करना चाहते हैं, लेकिन जब ध्यान से देखो तो पता चलता है कि जो काम उन्होंने अपने हाँथ में ले रखा है फिल-हाल वो उसे ही अच्छे से नहीं करते क्योंकि उस काम में उनका मन नहीं लगता(क्योंकि उसे वो छोटा समझते हैं, जिम्मेदारी का भाव नदारद है ) |
मेरा मानना है कि जो भी काम हाँथ में लिया है उसे आप बेहतर से बेहतर तरीके से करके ही अपने आज को सार्थक बना सकते हो, आगे के जीवन का तो पता नहीं कि कब आपको अपने सपनो का बड़ा और अच्छा काम करने का मौका मिले लेकिन जो काम आपने आज हाँथ में लिया है उसे तो अच्छा करिए ताकि आज का दिन सार्थक हो सके और मुझे पूरा अनुभव है की इससे आपको संतुष्टि भी मिलेगी और आगे के रास्ते खुलेंगे, उत्कृष्टता आएगी और साथ में आनंद, "जीवन आज को बेहतर से जीने में है नाकि सपने देखते रहने में", बेहतर का सपना भी देखें और प्रयास भी करें लेकिन आज के काम जिसको आपने हाँथ में ले रखा है उसे बेहतरीन तरीके और जिम्मेदारी से करें निपटाऊ नहीं, तब ही देश महानता की तरफ बढेगा जब हर कोई अपने काम को करीने से करे तब ही वो दूसरों से भी एक्स्पेक्ट कर सकता है की वो उसे अच्छी और उत्कृष्ट सेवा दे |
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मेरे सपनों की दुनिया ऐसी हो जहां
१ .लोग अपने साथ साथ दूसरों की भावनाओं को भी समझे अतः उनके हर सुख दुःख में क्षमतानुसार शामिल होंने का प्रयास करें, दिक्कत किसीको भी आ सकती है !
२-लोग गरीब व बेसहारा लोगों को अपनी क्षमता के अनुसार सेवा प्रदान करें!
३-जाति के नाम पर भेदभाव न करें हर वर्ग के लोगों की सुविधा-असुविधा का ध्यान रखना चाहिए! और उनकी आकांक्षाओं के साथ साथ उनके संघर्षों को समझें!
उमा जी एक ग्रहणी हैं जो समाजशास्त्र और हिन्दी मे स्नातक हैं और शिक्षण कार्य का अनुभव रखती हैं |
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मेरे सपनों की दुनिया ऐसी हो जहां
हेम चन्द्र पांडे जी, भारत सरकार के भारत मौसम विज्ञान विभाग मे मौसम विज्ञानी-ए हैं, लेख मे व्यक्त राय उनकी व्यक्तिगत राय है |
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मेरे सपनों की दुनिया ऐसी हो जहां
सौम्या गुप्ता जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं |
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