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सबसे पहले बात कि कौन-कौन शामिल होता है
"कुछ समन्वयक, सुधी पाठक, वरिष्ठ लेखक और समाज के अध्येता"
क्या होता है?
समन्वयक अपनी मन बांध लेने वाली भाषा शैली में सभी को संबोधित करते हैं फिर शामिल पाठक स्वयं द्वारा पढ़ी हुयी पुस्तक पर चर्चा करने की इच्छा व्यक्त करते हैं और समन्वयक उनसे बारी-बारी से आग्रह करते हैं अपनी पुस्तक पर अवलोकन, अनुभव और सीख साझा करने को |
क्या-क्या मिल सकता है जो आपके लिए उपयोगी हो
सबसे पहले उन्हे संबोधित करता हूँ जो किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, उन्हे लग सकता है कि प्रतियोगी परीक्षा मे इन साहित्यिक किताबों का क्या महत्व :महत्व है, खूब महत्व है
सोंच व्यापक होगी, एक से एक मेहनती और त्यागशील, न्यायशील और बहादुर लोगों के बारे मे पढ़कर और सुनकर जो स्पष्टता आएगी वो आपको बेहतर और नियमित तैयारी के लिए प्रेरित करेगी
अगर आपके जीवन मे संघर्ष हैं तो हो सकता है कि आप ऐसे इंसान के बारे मे पढ़ लें या सुन लें जिन्होने विकट परिस्थितियों मे भी हिम्मत बांधकर मेहनत की और अपने साथ दूसरों का भी भला कर सके, माने फिर आपको अपनी दिक्कतें छोटी लगने लगेंगी|
हो सकता है कि आपको जीवन उद्देश्यहीन लग रहा हो, सब कुछ खत्म सा दिख रहा हो, तब भी आपको अपने जीवन को अर्थ देने के कई तरीके मिल सकते हैं
हो सकता है कि पढ़ाई के दौरान भी जीवन या पढ़ाई से जुड़ी कोई बात आपके पढ़ाई के हिस्से का वक़्त जाया कर रही हो, उस अवस्था मे एक अच्छी किताब के साथ बिताए नियमित कुछ मिनट्स आपके मन को शांति प्रदान कर आपकी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी को और बेहतर/दक्ष कर सकते हैं
हो सकता है कि किसी उधेड़बुन मे हों और आपको कोई रास्ता दिखाने वाली पुस्तक का नाम मिल जाए
हो सकता है कि आप कोई निर्णय न ले पा रही हों और कोई ऐसी पुस्तक के बारे मे चर्चा हो जाए जो आपको उस विषय पर स्पष्टता दे सके
हो सकता है कि आप कोई नया काम करना चाहते हों, तरीका न सूझ रहा हो और आपको किसी ऐसे इंसान कि पुस्तक के बारे मे पता चले जो उसी काम पर अपने अनुभव साझा किए हों |
एक जागरूक, जिम्मेदार और शिक्षित नागरिक के तौर पर आपका ध्यान जरूरी मुद्दों की तरफ जाएगा, जो हमारे परिवेश या हमारे लोगों को / उनके मन को प्रभावित करते हों
विभिन्न परिप्रेक्ष्य मे चीजों को समझने के लिए अलग अलग किताबों के बारे मे जानने का मौका
उम्र भर के अनुभवों का निचोड़ होता है किताबों में, आप उस समझ को हासिल कर लोगों के साथ बेहतर ताल मेल बैठा कर कार्य कर सकते/सकती हैं |
हम सबके जीवन मे कोई दोस्त होता है जिसका साथ अच्छा लगता है, क्योंकि उसकी बातें रुचिकर लगती हैं, कितना अच्छा हो कि इतिहास के किसी महान इंसान का आपको साथ मिल पाये, उनकी किताब पढ़कर |
एक समूह से परिचय होगा जो आपकी ही तरह साहित्य अध्ययन को अपनी दिनचर्या मे स्थान देकर, समाज की एक समवेशी छवि चाहता है अपने मन मे, लोगों को उनके संघर्षों और आकांक्षाओं के साथ स्वीकार करना चाहता है, कुछ बदलाव की बात और फिर अपने स्तर पर काम ताकि लोगों के जीवन मे गरिमा, स्वतन्त्रता, उत्कृष्टता और संपन्नता मिल पाये और ज्यादा से ज्यादा लोग देश के विकास और स्थायित्व मे अपने योगदान दे सकें |
और क्या सीख सकते हैं आपमें क्या बेहतरी हो सकती है पुस्तक परिचर्चा के बाद इसके लिए मेरा ये एक लेख पढ़ा जा सकता है, लिंक नीचे है :
किताबों से हम क्या पा सकते हैं : Book Meet ( पुस्तकों पर चर्चा ) एक सार्थक प्रयास और जरूरी भी
एक रोचक लेख विशाल चंद जी की तरफ से - आप जो ढूंढ रहे हैं वह मिलेगा लाइब्रेरी में (मिचिको आओयामा) - लघु समीक्षा सह परिचय - समीक्षक विशाल चंद
मिलते हैं परिचर्चा मे |
शुभकामनायें
-लवकुश कुमार
जिस तरह बूँद-बूँद से सागर बनता है वैसे ही एक समृद्ध साहित्य कोश के लिए एक एक रचना मायने रखती है, एक लेखक/कवि की रचना आपके जीवन/अनुभवों और क्षेत्र की प्रतिनिधि है यह मददगार है उन लोगों के लिए जो इस क्षेत्र के बारे में जानना समझना चाहते हैं उनके लिए ही साहित्य के कोश को भरने का एक छोटा सा प्रयास है यह वेबसाइट ।
वेबसाइट के उद्देश्य के बारे में जानने के लिए यहां क्लिक करें।
अगर आपके पास भी कुछ ऐसा है जो लोगों के साथ साझा करने का मन हो तो हमे लिख भेजें नीचे दिए गए लिंक से टाइप करके या फिर हाथ से लिखकर पेज का फोटो Lovekushchetna@gmail.com पर ईमेल करें।

आप सभी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की हार्दिक बधाई
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस हम सभी के लिए केवल एक तिथि नहीं, बल्कि एक विचार है—एक ऐसा विचार जो हमें जिज्ञासा, तर्क और सत्य की खोज की ओर प्रेरित करता है। 28 फ़रवरी का यह दिन डॉ. सी. वी. रमन की स्मृति में मनाया जाता है, जिन्होंने “रमन प्रभाव” की खोज कर भारत को विश्व वैज्ञानिक मानचित्र पर गौरवान्वित किया। यह दिन हमें याद दिलाता है कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Temperament) का विकास मानव जाति के समग्र विकास के लिए कितना आवश्यक है। जब समाज प्रश्न पूछता है, प्रमाण खोजता है और अंधविश्वास से ऊपर उठकर सोचता है, तभी वास्तविक प्रगति संभव होती है।
भारत की धरती सदैव महान वैज्ञानिकों की कर्मभूमि रही है। डॉ. सी. वी. रमन, जिनकी खोज ने प्रकाश के नए आयाम खोले, और डॉ. एस. चंद्रशेखर, जिन्होंने ब्रह्मांड की गहराइयों को समझने में अमूल्य योगदान दिया—ऐसे अनेक भारतीय वैज्ञानिक हमारे लिए गर्व का विषय हैं। इनके साथ-साथ होमी भाभा, विक्रम साराभाई, ए. पी. जे. अब्दुल कलाम, मेघनाद साहा, एसएन बसु, जेसी बोस जैसे असंख्य वैज्ञानिकों ने भारत की वैज्ञानिक पहचान को वैश्विक मंच पर स्थापित किया।
फिर भी, हमें आत्ममंथन करने की आवश्यकता है। 140 करोड़ से अधिक जनसंख्या वाले देश के रूप में हमारे पास अपार प्रतिभा है, लेकिन नोबेल पुरस्कार जैसे वैश्विक सम्मान अब भी अपेक्षाकृत कम हैं। यह हमें संकेत देता है कि हमें अनुसंधान, नवाचार और वैज्ञानिक शिक्षा में और अधिक निवेश, सहयोग और अवसरों की आवश्यकता है।
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2026 का विषय “Women in Science: Catalyzing Viksit Bharat” हमें यह याद दिलाता है कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब विज्ञान में महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व को समान अवसर और सम्मान मिलेगा।
"विज्ञान तब ही पूर्ण होगा जब उसमें समाज के हर वर्ग की आवाज़ शामिल होगी।"
आइए, इस राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर हम संकल्प लें कि हम जिज्ञासु बनेंगे, प्रमाण आधारित सोच को अपनाएँगे और विज्ञान को केवल विषय नहीं, बल्कि जीवन शैली बनाएँगे।
"यही वैज्ञानिक दृष्टिकोण मानवता को एक बेहतर, तार्किक और प्रगतिशील भविष्य की ओर ले जाएगा।"
जय विज्ञान!
- सुमित पाण्डेय
सुमित जी शिवालिक चिल्ड्रेन साइन्स फ़ाउंडेशन मे एक कुशल विज्ञान मित्र हैं जो अपनी टीम के साथ अपने वर्कशॉप्स, चर्चा और प्रयोगों द्वारा विद्यालयों के बच्चों मे वैज्ञानिक चेतना, वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के सराहनीय प्रयास करते हैं |
https://www.youtube.com/@ShivalikScienceFoundation
https://www.facebook.com/p/Shivalik-children-science-foundation-100075990884854/
अभी, एक बेहतरीन अभिनेता al pacino के बेस्ट सीन देख रहा था, एक दृश्य देखा और इतना प्रभावित हुआ कि तुरंत एक लेख लिखने लगा, एक जरूरी लेख।
लिंक लेख के अंत में;
लेख पर आते हैं, हम ज्यादातर हालातों में इस काबिल जरूर होते हैं कि अपने से किसी कमजोर की मदद कर सकें, और इससे जो आनंद और गर्व की अनुभूति होती है वो अप्रतिम होती है।
हम कई बार शिकायत करते हैं कि हमें दुनिया से यह नहीं मिला, वह नहीं मिला लेकिन क्या साथ में हम यह भी सोचते हैं कि हम अपने से छोटों या less privileged लोगों के लिए कुछ करके एक मिशाल पेश कर रहे हैं?
हम समाज में सच्चाई, ईमानदारी और भलमानसानियत की उम्मीद करते हैं, क्या आपको पता है कि इनकी रक्षा करनी होती है, इन्हें संरक्षण देना होता है तब ही ये मजबूत होकर दूसरों की रक्षा के लायक बन पाते हैं।
इसीलिए मेरा मेरे सुधी पाठकों से आग्रह है, जब भी अवसर मिले, ऐसे प्रयास करें कि सत्य की रक्षा हो और ईमानदारी को संरक्षण मिले।
आज अगर आपके पास संसाधन हैं, ताकत है तो उससे ईमानदारी को बल दें, अपने काम से प्यार करने वालों को प्रोत्साहित करने में लगाएं ताकि कल जब बूढ़े हों तब ये न कहना पड़े कि काम से प्यार करने वाले और ईमानदार लोग इतने कम क्यों हैं ? जब तक आपके पास ताकत है उससे सही चीजों को संरक्षण दें, उन्हें बल दें।
लिंक - https://youtu.be/Jd10x8LiuBc?si=As-rK9Rilah8atQZ
आज सरकारी सेवा में मेरे सीनियर आदरणीय संदीप यादव सर का जन्मदिन है, जितना उनको जाना, अपने सहकर्मियों के लिए मददगार और एक स्वस्थ माहौल का पोषक, परस्पर हितों और परस्पर सम्मान का हिमायती पाया, अतः यह लेख हम सबके प्रिय संदीप सर को समर्पित।
सभी पाठकों को शुभकामनाएं
-लवकुश कुमार
नाम हमारी पहचान बनता है, नाम का असर हमारे व्यक्तित्व पर पड़ता है, इसीलिए मेरे विचार से हमे अपने बच्चों का नाम केवल इस बात पर न रखना चाहिए कि वो सुनने मे अच्छा या सबसे अलग और यूनीक लग रहा है, बल्कि ऊपर लिखी बात को भी ध्यान मे रखना चाहिए, बच्चों का जीवन बेहतर हो और वो समझदार बने इसके लिए हम सभी प्रयास करते हैं, कितना अच्छा हो कि उनका नाम ही ऐसा रख दिया जाए जो हमारे उद्देश्य मे मदद करे|
नामों की सूची से पहले आइए पढ़ लेते हैं,नाम के महत्व पर दो घटनाएँ :
घटना-1
क्या नाम है तुम्हारा?,
लवकुश, मैंने जवाब दिया
अच्छा! लव और कुश दोनों
हाँ जी दोनों, मै मुस्कुरा दिया
सही है तुम काम भी तो दो कर रहे हो,
मै उस वक़्त आंटा चक्की पर आंटा उठाने गया था
मै बचपन से ही अपनी पढ़ाई के साथ घर के छोटे मोटे कामों मे हांथ बटाता रहा
मेरा नाम भगवान श्री राम के पुत्रों के नाम पर होने के चलते हमेशा मुझ पर एक नैतिक दबाव रहा कि कोई ऐसा काम नहीं करना कि मेरा नाम चरितार्थ न हो सके, प्रयास रहा, मै अपने प्रयास मे कितना सफल रहा, यह तो समय और आप बताएँगे |
घटना-2
ऐसे ही एक घटना दिग्गज अभिनेता मनोज कुमार के जीवन से है, पूरब पश्चिम फिल्म मे उनका नाम भारत था और उस फिल्म मे उन्होने इतना अच्छा काम किया, कि लोग उन्हे भारत के नाम से ही जानने लगे, एक दिन जब वो किसी रेस्तरां मे सिगरेट पीने को हुये तो किसी ने उन्हे टोंक दिया और कहा कि आप तो भारत हैं, आपको ये शोभा नही देता |
सबसे खास बात है कि आप या आपका बेटा अपना नाम कई बार सुनता तो उसका अर्थ भी उसके अचेतन मन मे आता ही है, और अगर नाम का अर्थ कोई ऐसा सत्य है जो इंसान का ध्यान उस सत्य की तरफ खींचता है, तब वह सत्य के नजदीक रहता है और जीवन मे भटकने से बच जाता है और सही दिशा मे चलने को प्रेरित होता है |
सूची (अर्थ, गूगल पर ढूंढा जा सकता है। ज़्यादातर के अर्थ आपको पहले से ही पता होंगे, ऐसा मानकर मै अर्थ नही लिख रहा )
क्रम नाम (बालिका) नाम (बालक)
1 प्रेरणा अनित्य
2 श्रेया श्रेय
3 छाया स्पष्ट
4 छवि आदर्श
5 मधु मृदुल
6 मधुलिका आलोक
7 विदुषी वेद
8 संयोगिता संयोग
9 कृतज्ञता कृतज्ञ
10 संध्या प्रभाव
11 गार्गी सत्या
12 मनु सत्य
13 सावित्री पार्थ
14 कल्पना सार्थक
15 इंदिरा समर्थ
16 किरण सक्षम
17 सुधा धैर्य
18 अहिल्या समक्ष
19 सुचेता समय
20 तेजस्विनी तेजस्वी
इस सूची को तैयार करने मे कई लोगों का योगदान है, कुछ के नाम याद हैं- साक्षी जी, सौम्या जी, शिवम जी, आदित्य जी, आरती जी, और कुछ कभी मिले, कभी सुने गए, उनका भी आभार |
अर्थ जानने के लिए और किसी भी नाम के फायदे जानने के लिए या और ऐसे ही नाम सुझाने के लिए ईमेल करें - lovekushchetna@gmail.com
शुभकामनायें, ताकि आपका रखा नाम आपकी संतान को समझ और स्पष्टता देने मे मदद करे |
लवकुश कुमार
नाम हमारी पहचान बनता है, नाम का असर हमारे व्यक्तित्व पर पड़ता है, इसीलिए मेरे विचार से हमे अपने बच्चों का नाम केवल इस बात पर न रखना चाहिए कि वो सुनने मे अच्छा या सबसे अलग और यूनीक लग रहा है, बल्कि ऊपर लिखी बात को भी ध्यान मे रखना चाहिए, बच्चों का जीवन बेहतर हो और वो समझदार बने इसके लिए हम सभी प्रयास करते हैं, कितना अच्छा हो कि उनका नाम ही ऐसा रख दिया जाए जो हमारे उद्देश्य मे मदद करे|
नामों की सूची से पहले आइए पढ़ लेते हैं,नाम के महत्व पर दो घटनाएँ :
घटना-1
क्या नाम है तुम्हारा?,
लवकुश, मैंने जवाब दिया
अच्छा! लव और कुश दोनों
हाँ जी दोनों, मै मुस्कुरा दिया
सही है तुम काम भी तो दो कर रहे हो,
मै उस वक़्त आंटा चक्की पर आंटा उठाने गया था
मै बचपन से ही अपनी पढ़ाई के साथ घर के छोटे मोटे कामों मे हांथ बटाता रहा
मेरा नाम भगवान श्री राम के पुत्रों के नाम पर होने के चलते हमेशा मुझ पर एक नैतिक दबाव रहा कि कोई ऐसा काम नहीं करना कि मेरा नाम चरितार्थ न हो सके, प्रयास रहा, मै अपने प्रयास मे कितना सफल रहा, यह तो समय और आप बताएँगे |
घटना-2
ऐसे ही एक घटना दिग्गज अभिनेता मनोज कुमार के जीवन से है, पूरब पश्चिम फिल्म मे उनका नाम भारत था और उस फिल्म मे उन्होने इतना अच्छा काम किया, कि लोग उन्हे भारत के नाम से ही जानने लगे, एक दिन जब वो किसी रेस्तरां मे सिगरेट पीने को हुये तो किसी ने उन्हे टोंक दिया और कहा कि आप तो भारत हैं, आपको ये शोभा नही देता |
सबसे खास बात है कि आप या आपका बेटा अपना नाम कई बार सुनता तो उसका अर्थ भी उसके अचेतन मन मे आता ही है, और अगर नाम का अर्थ कोई ऐसा सत्य है जो इंसान का ध्यान उस सत्य की तरफ खींचता है, तब वह सत्य के नजदीक रहता है और जीवन मे भटकने से बच जाता है और सही दिशा मे चलने को प्रेरित होता है |
सूची (अर्थ, गूगल पर ढूंढा जा सकता है। ज़्यादातर के अर्थ आपको पहले से ही पता होंगे, ऐसा मानकर मै अर्थ नही लिख रहा )
| क्रम | नाम (बालक) | क्रम | नाम (बालिका) |
| 1 | निश्चय | 1 | चेतना |
| 2 | सचेत | 2 | चेष्टा |
| 3 | सतर्क | 3 | साक्षी |
| 4 | यथार्थ | 4 | सताक्षी |
| 5 | प्रत्यक्ष | 5 | स्तुति |
| 6 | प्रेम | 6 | श्रुति |
| 7 | समृद्ध | 7 | समृद्धि |
| 8 | आनंद | 8 | आनंदिता |
| 9 | उत्कृष्ट | 9 | उत्कृष्टता |
| 10 | गौरव | 10 | गर्विता |
| 11 | शिव | 11 | दुर्गा |
| 12 | ब्रह्म | 12 | सरस्वती |
| 13 | गर्व | 13 | गरिमा |
| 14 | ओज | 14 | आभा |
| 15 | संभव | 15 | सृष्टि |
| 16 | सरस | 16 | प्रकृति |
| 17 | सरल | 17 | सरला |
| 18 | सहज | 18 | प्रगति |
| 19 | सटीका | 19 | प्रतिभा |
| 20 | प्रेक्षण | 20 | प्रेक्षा |
इस सूची को तैयार करने मे कई लोगों का योगदान है, कुछ के नाम याद हैं- साक्षी जी, सौम्या जी, शिवम जी, आदित्य जी, आरती जी, और कुछ कभी मिले, कभी सुने गए, उनका भी आभार |
अर्थ जानने के लिए और किसी भी नाम के फायदे जानने के लिए या और ऐसे ही नाम सुझाने के लिए ईमेल करें - lovekushchetna@gmail.com
शुभकामनायें, ताकि आपका रखा नाम आपकी संतान को समझ और स्पष्टता देने मे मदद करे |
लवकुश कुमा
नाम हमारी पहचान बनता है, नाम का असर हमारे व्यक्तित्व पर पड़ता है, इसीलिए मेरे विचार से हमे अपने बच्चों का नाम केवल इस बात पर न रखना चाहिए कि वो सुनने मे अच्छा या सबसे अलग और यूनीक लग रहा है, बल्कि ऊपर लिखी बात को भी ध्यान मे रखना चाहिए, बच्चों का जीवन बेहतर हो और वो समझदार बने इसके लिए हम सभी प्रयास करते हैं, कितना अच्छा हो कि उनका नाम ही ऐसा रख दिया जाए जो हमारे उद्देश्य मे मदद करे|
नामों की सूची से पहले आइए पढ़ लेते हैं,नाम के महत्व पर दो घटनाएँ :
घटना-1
क्या नाम है तुम्हारा?,
लवकुश, मैंने जवाब दिया
अच्छा! लव और कुश दोनों
हाँ जी दोनों, मै मुस्कुरा दिया
सही है तुम काम भी तो दो कर रहे हो,
मै उस वक़्त आंटा चक्की पर आंटा उठाने गया था
मै बचपन से ही अपनी पढ़ाई के साथ घर के छोटे मोटे कामों मे हांथ बटाता रहा
मेरा नाम भगवान श्री राम के पुत्रों के नाम पर होने के चलते हमेशा मुझ पर एक नैतिक दबाव रहा कि कोई ऐसा काम नहीं करना कि मेरा नाम चरितार्थ न हो सके, प्रयास रहा, मै अपने प्रयास मे कितना सफल रहा, यह तो समय और आप बताएँगे |
घटना-2
ऐसे ही एक घटना दिग्गज अभिनेता मनोज कुमार के जीवन से है, पूरब पश्चिम फिल्म मे उनका नाम भारत था और उस फिल्म मे उन्होने इतना अच्छा काम किया, कि लोग उन्हे भारत के नाम से ही जानने लगे, एक दिन जब वो किसी रेस्तरां मे सिगरेट पीने को हुये तो किसी ने उन्हे टोंक दिया और कहा कि आप तो भारत हैं, आपको ये शोभा नही देता |
सबसे खास बात है कि आप या आपका बेटा अपना नाम कई बार सुनता तो उसका अर्थ भी उसके अचेतन मन मे आता ही है, और अगर नाम का अर्थ कोई ऐसा सत्य है जो इंसान का ध्यान उस सत्य की तरफ खींचता है, तब वह सत्य के नजदीक रहता है और जीवन मे भटकने से बच जाता है और सही दिशा मे चलने को प्रेरित होता है |
सूची (अर्थ, गूगल पर ढूंढा जा सकता है। ज़्यादातर के अर्थ आपको पहले से ही पता होंगे, ऐसा मानकर मै अर्थ नही लिख रहा )
| क्रम | नाम (बालिका) | नाम (बालक) |
| 1 | श्रीधा | नित्य |
| 2 | श्रव्य | अवलोकन |
| 3 | अनुदेशिका | अनुदेश |
| 4 | निर्देशिका | निर्देश |
| 5 | जागृति | जागृत |
| 6 | जिज्ञासा | जिज्ञासु |
| 7 | नियति | वेदान्त |
| 8 | वैदेही | राम |
| 9 | अनुभूति | अनन्मय |
| 10 | तृष्णा | विवेक |
| 11 | शालिनी | शालीन |
| 12 | प्रतीक्षा | चैतन्य |
| 13 | कश्वी | जानव |
| 14 | दामिनी | रक्षित |
| 15 | प्राची | उत्कर्ष |
| 16 | मीरा | कृष्ण |
| 17 | रीत | अभिनव |
| 18 | प्रीति | प्रेम |
| 19 | युक्ति | जतन |
| 20 | श्रीधा | प्रयास |
इस सूची को तैयार करने मे कई लोगों का योगदान है, कुछ के नाम याद हैं- साक्षी जी, सौम्या जी, शिवम जी, आदित्य जी, आरती जी, और कुछ कभी मिले, कभी सुने गए, उनका भी आभार |
अर्थ जानने के लिए और किसी भी नाम के फायदे जानने के लिए या और ऐसे ही नाम सुझाने के लिए ईमेल करें - lovekushchetna@gmail.com
शुभकामनायें, ताकि आपका रखा नाम आपकी संतान को समझ और स्पष्टता देने मे मदद करे |
लवकुश कुमार
जिस स्तर पर एआई का इस्तेमाल हो रहा, इसके डेटा सेंटर ( संख्या में कई ) की कूलिंग के लिए बहुत मात्रा में पानी का इस्तेमाल होता है, चिंता का विषय यह है कि "क्या जितने भी लोग एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं उनमें इस जिम्मेदारी का एहसास है कि उनका एआई को दिया गया कोई भी काम सीधे पानी की खपत से जुड़ा है, ऐसा देखने में आया है कि यूट्यूब पर एआई जेनरेटेड कंटेंट की भरमार हो रखी है, बहुत से गैर जरूरी और एक जैसे ही, यह एक उदाहरण है...... बाकी पाठकों पर छोड़ता हूं.....
-लवकुश कुमार
यह लेखक के निजी विचार हैं।
जंगल के राजा मटकू शेर ने दिन-ब-दिन अपने जंगल की हालत को खस्ता होते देख सर्वे करवाया कि-
'आखिर हमारे जंगल में ऐसी कौन सी गड़बड़ी हो रही है? जिसके कारण विकास आधा अधूरा ही हो रहा है।'
सर्वे में पाया गया कि यहां बाहर से बहुत सी भेड़ें और बुजुर्ग जानवर आकर रहने लगे हैं भेड़ों से बात की तो ज्ञात हुआ कि उनके शरीर पर ऊन लदा हुआ है उन्हें काम करने से बहुत गर्मी का एहसास होता है इसीलिए वे काम नहीं कर पाती हैं, वहीं दूसरी और बुजुर्ग जानवरों ने कहा कि- 'हमे ठंड बहुत ज्यादा लगती है हम बीमार पड़ जाएंगे इसलिए खुले में काम नहीं कर सकते। '
इन लोगों के कारण जंगल पर खर्च का भार बढ़ रहा था और विकास कार्य में बाधा आ रही थी।
इस समस्या के निदान हेतु मटकू शेर ने अपने सभी साथियों से विचार विमर्श किया और एक-एक कर सभी को इस समस्या को दूर करने हेतु अवसर भी दिया, किंतु असफलता ही हाथ लगी अंत में न चाहते हुए भी एक बहुत शरारती बंदर,चंकु को नियुक्त किया|
चंकु बंदर इस समस्या से निजात पाने हेतु जी जान से जुट गया उसने भेड़ो एंव बुजुर्ग जानवरों को सुना, समझाया, मान मन्नौवल की, फिर भी वे टस के मस नहीं हुए आखिर हार कर चंकु बंदर ने अंतिम उपाय का सहारा लिया जिससे भेड़े और बुजुर्ग जानवर अपनी शक्ति अनुसार कार्य करने लगे और देखते ही देखते कुछ ही दिनों में जंगल ने तरक्की की राह पकड़ ली यह देख मटकू शेर बहुत खुश हुआ और उसने पूछा-
" चंकु ! तुम एक बात तो बताओ जिस समस्या का समाधान हम मे से कोई नहीं कर पाया तुमने इतनी जल्दी कर दिखाया आखिर कैसे ?"
चंकु ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया-
" शेर राजा ! मैने ज्यादा कुछ नहीं किया भेड़ो के शरीर पर लदे ऊन को काटकर उनके स्वेटर बना बुजुर्ग जानवरों को पहना दिये ।"
जवाब सुन मटकू शेर बहुत खुश हुआ और चंकु को उसकी सूझ बूझ से समस्या की जड़ तक पहुँचने के लिए पुरष्कृत किया और उसे विकास मंत्री बना दिया |
- मीरा जैन
उज्जैन, मध्य प्रदेश
मो.9425918116
jainmeera02@gmail.com
अपनी रचनाओं से संवेदना और स्पष्टता जगाने वाली विख्यात लेखिका श्रीमती मीरा जैन का जन्म 2 नवबंर 1960 को जगदलपुर (बस्तर) छ.ग. में हुआ, आपने लघुकथा , आलेख व्यंग्य , कहानी, कविताएं , क्षणिकाएं जैसी लेखन विधाओं में रचनाएं रचकर साहित्य कोश में अमूल्य योगदान दिया है और आपकी 2000 से अधिक रचनाएं विभिन्न भाषाओं की देशी- विदेशी पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। और आकाशवाणी सरीखे माध्यमों से जनसामान्य के लिए प्रसारित भी।
आप अनेक मंचो से बाल साहित्य , बालिका महिला सुरक्षा उनका विकास , कन्या भ्रूण हत्या , बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ , बालकों के लैगिंग यौन शोषण , निराश्रित बालक बालिकाओं को समाज की मुख्य धारा से जोड़ना स्कूल , कॉलेजों के विद्यार्थियों को नैतिक शिक्षा आदि के अनेक विषयो पर उद्बोधन एवं कार्यशालाएं आयोजित कर चुकी हैं|
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बचपन से न जाने कैसे गुजर कर
बेटियां
औरत बन जाती हैं
और
बना दी जाती हैं
पहले से ज्यादा मजबूत
जिन औरतों की हथेलियों पर तैरकर
बच्चे जवान हुए
जिसने अपनी पीठ को घिसकर
उन्हे और मुलायम बनाया,
जिनकी धरती रह ही नहीं सकती कभी सहज
जो दिन-रात
अपने बच्चों के लिये
खड़ी रही
दिहाड़ी के मजदूरों की तरह
वे आज खुद बंट रही है अपने ही घरों में
ले रही हैं मुर्दा सांसें
और
लगातार स्थानांतरित की जा रही हैं आश्रमों की ओर
यह दंश हमारे विभाजन से ज्यादा गहरा है
कोई कह दे कि
दुनियों की कोई माँए सहनशील नहीं रही
जिसने घर को जोड़ने के लिये
मशक्कत न की हो
जिसने कभी गद्दारी की हो अपने बच्चों के लिये
जो औरते ताप के दिनों में भी
अपने बच्चों को पीठ पर ढोया करती हैं
वे ही ज्यादा शिकार हुई है घरों में
औरतें औरत होती नहीं
बल्कि
सामाजिक मर्यादाओं को पालते-पालते
बना दी जाती हैं।
पूजा कुमारी
coolpooja311@gmail.com
अगर आपके पास भी कुछ ऐसा है जो लोगों के साथ साझा करने का मन हो तो हमे लिख भेजें नीचे दिए गए लिंक से टाइप करके या फिर हाथ से लिखकर पेज का फोटो Lovekushchetna@gmail.com पर ईमेल कर दें
फीडबैक / प्रतिक्रिया या फिर आपकी राय, के लिए यहाँ क्लिक करें |
खुशी से सराबोर सम्यक दौड़ता हुआ अर्पण से लिपट गया और अंकसूची बताते हुए कहने लगा- "अर्पण ! तुम्हारे कारण आज मै कक्षा में प्रथम आया हूं यदि उस दिन तुम मुझे अपनी साइकिल नही देते तो शायद मै परीक्षा देने स्कूल ही नही पहुंच पाता और फेल हो जाता । एक बात तो बताओ अर्पण ! खेलते खेलते हम दोनो में लगभग छ: माह पहले लड़ाई हो गई थी तब से हमारी बोलचाल बंद थी हम एक दूसरे को देखना तक पसंद नहीं करते थे, परीक्षा वाले दिन जब मैने स्कूल जाने के लिए साइकिल बाहर निकाली , उसका पहिया पंचर देख मेरे होश उड़ गए सोचने लगा-अब क्या होगा ? पापा भी बाहर गए हुए हैं , मै परीक्षा देने स्कूल कैसे पहुचुंगा, इसी घबराहट में मेरे आंसू छलक आए। कुछ समय पश्चात ही तुमने अपनी साइकिल मेरे हाथों में स्कूल जाने हेतु दे दी और ना चाहते हुए भी, मजबूरीवश तुम्हारी साइकिल लेकर चला गया पर एक बात तो बताओ तुम्हारे मन में मेरे प्रति अचानक प्रेम भाव कैसे उमड़ आया ?"
अर्पण ने सच बोलते हुए कहा- " "सम्यक ! सच तो यह है कि मै तुम्हारी साइकिल का पहिया पंचर देख बहुत खुश हुआ था कि तुम अब परीक्षा देने नहीं जा पाओगे लेकिन खिड़की से दादाजी ने साइकिल के कारण तुम्हें रोते हुए देख लिया उन्होंने तुरंत मुझे आदेश दिया- जाओ अपनी साइकिल सम्यक को देकर आओ पहले तो मैने ना नुकुर की किंतु बाद में मान गया जब दादाजी ने कहा-अर्पण बेटा मुसीबत में जो दूसरों के काम आए वही सच्चा इंसान होता है बाकी तो सब स्वार्थी , हो सकता है कभी तुम भी ऐसी स्थिति में फंस जाओ और तुम्हारी कोई मदद ना करे तो तुम पर क्या बीतेगी, साथ ही पड़ोसियों को तो हमेशा एक दूसरे से मिलकर ही रहना चाहिए, यूं भी परोपकारिता बहुत बड़ा धर्म है।"
सम्यक ने भी हां में हां मिलाते हुए कहा-
" मां, कहती है घर में बड़े बुजुर्गों की बात हमेशा माननी चाहिए वह हमें अच्छा इंसान बनाने में मदद करते हैं।"
- मीरा जैन
उज्जैन, मध्य प्रदेश
अपनी रचनाओं से संवेदना और स्पष्टता जगाने वाली विख्यात लेखिका श्रीमती मीरा जैन का जन्म 2 नवबंर 1960 को जगदलपुर (बस्तर) छ.ग. में हुआ, आपने लघुकथा , आलेख व्यंग्य , कहानी, कविताएं , क्षणिकाएं जैसी लेखन विधाओं में रचनाएं रचकर साहित्य कोश में अमूल्य योगदान दिया है और आपकी 2000 से अधिक रचनाएं विभिन्न भाषाओं की देशी- विदेशी पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। और आकाशवाणी सरीखे माध्यमों से जनसामान्य के लिए प्रसारित भी।
आप अनेक मंचो से बाल साहित्य , बालिका महिला सुरक्षा उनका विकास , कन्या भ्रूण हत्या , बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ , बालकों के लैगिंग यौन शोषण , निराश्रित बालक बालिकाओं को समाज की मुख्य धारा से जोड़ना स्कूल , कॉलेजों के विद्यार्थियों को नैतिक शिक्षा आदि के अनेक विषयो पर उद्बोधन एवं कार्यशालाएं आयोजित कर चुकी हैं।
मो.9425918116
jainmeera02@gmail.com
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