- समावेशी विकास और भरोसेमंद शासन ही धनबल और बाहुबल की सियासत को कमजोर कर सकता है।
- केंद्रीय और राज्यों के विश्वविद्यालयों को शिक्षण मानकों और संसाधनों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
- अनुसंधान के लिए एक तटस्थ लेकिन सक्षम वातावरण, चाहे वह कला का क्षेत्र हो या विज्ञान का, वह आदर्श है जिसकी ओर भारत को लक्ष्य बनाना चाहिए।
- देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने उचित ही यह बात रेखांकित की है कि बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका में सरकारों के गिरने में शासन व्यवस्था एक प्रमुख कारण रही। जेन जी (सन 1997 से 2012 के बीच पैदा हुई पीढ़ी) के विद्रोहों ने भारत के पास-पड़ोस में मौजूद भ्रष्ट और गूंगी-बहरी सरकारों को गिरा दिया और यह सिलसिला आगे बढ़ता नजर आ रहा है।
- लवकुश कुमार
विभिन्न समाचार पत्रों और पब्लिक डोमेन में उपलब्ध रिपोर्ट्स और दस्तावेजों पर आधारित और जन जागरूकता के उद्देश्य से संकलित
लेखक भौतिकी में परास्नातक हैं और उनके लेखन का उद्देश्य समाज की उन्नति और बेहतरी के लिए अपने विचार साझा करना है ताकि उत्कृष्टता, अध्ययन और विमर्श को प्रोत्साहित कर देश और समाज के उन्नयन में अपना बेहतर योगदान दिया जा सके, साथ ही वह मानते हैं कि सामाजिक विषयों पर लेखन और चिंतन शिक्षित लोगों का दायित्व है और उन्हें दृढ़ विश्वास है कि स्पष्टता ही मजबूत कदम उठाने मे मदद करती है और इस विश्वास के साथ कि अच्छा साहित्य ही युवाओं को हर तरह से मजबूत करके देश को महाशक्ति और पूर्णतया आत्मनिर्भर बनाने मे बेहतर योगदान दे पाने मे सक्षम करेगा, वह साहित्य अध्ययन को प्रोत्साहित करने को प्रयासरत हैं |
अन्याय करने वाला आपको भ्रम में डालकर आपके हौसले को डगमगा सकता है अतः जिन चीजों को लेकर आप विरोध कर रहे हैं या जिन मांगों को लेकर आप संघर्ष कर रहे हैं, उनको लेकर स्पष्टता रखें ताकि आपको संशय या दुविधा में डालकर आपका हौसला न कम किया जा सके क्योंकि लोग हौसला तोड़कर ही पराजित करते हैं।
-लवकुश कुमार
हार-जीत से ज्यादा महत्वपूर्ण है हौसला ।
अगर सही लड़ाई लड़कर हार भी गए तो वो जीत है क्योंकि आपने ये दिखा दिया कि ग़लत और अन्याय करने वाले बेरोकटोक अपना काम नहीं कर सकते, उन्हें कीमत चुकानी पड़ेगी।
आपका हौसला ही उन्हें उनके ग़लत होने का एहसास कराएगा उन्हें मजबूर करेगा कि वो अपने अन्यायपूर्ण निर्णय पर पुनर्विचार करें।
- लवकुश कुमार
जिस दिन हम "तथाकथित" छोटे से छोटे पद वाले इंसान को भी इंसान समझकर उसकी गरिमा का सम्मान करते हुए मान देंगे उस दिन "तथाकथित" बड़े पद वाले लोगों के प्रति इनके मन से जलन कुछ कम हो जाएगी |
जैसे एक ड्राइवर भी चाहता है कि लोग उसे ड्राइवर नहीं उसके नाम से बुलाएँ जिसे उसके माता पिता ने बड़े प्यार से रखा होगा |
-लवकुश कुमार
सही काम में लगे रहो, बिना तारीफ की आकांक्षा के क्योंकि अमूमन लोग तारीफ और समर्थन आपकी नहीं अपनी जरूरत और सहूलियत के हिसाब से करते हैं, जिस दिन आपका काम जिस इंसान को महत्व का लग जायेगा फिर उसकी तरफ से तारीफ भी होगी और समर्थन की पेशकश भी।
-लवकुश कुमार
कल रात 10:30 के आस पास, 90's का एक गाना कई बार सुना (हैडफ़ोन लगाकर बिना किसी को डिस्टर्ब किये ), संगीत बड़ा अच्छा लगा, मनमोहक, किसी काम को जल्दी पूरा करने का दबाव न था, सुकून में था मन, और रचना हुयी एक लघुकथा (जो कुछ वक़्त समीक्षा में रहने के बाद वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी ) की और साथ ही कई पुरानी घटनाओं को शांत मन से याद कर पाया और उन पर लघुकथा की रचना के लिए शीर्षक लिखे (संख्या में 8), ये महत्ता होती है शांति की, सुकून की |
" दुनिया में सृजन और अन्वेषण के अनेक कार्य शून्य के क्षणों में ही हुए हैं | "