As mentioned in the objective of this website, to spread awareness about things that make our life easier and convenient, this article you are reading will bring to you knowledge and understanding of something great and crucial for safe aviation ensuring uninterrupted communication between pilots and ground officers of Airport Operators and ensuring safe landing, take offs and navigation through sky even in tough situations.
So ready to address the curiosity and ready to salute the staff working round the clock for safe Aviation!
Let's start :

(Picture courtesy:- Airports Authority of India)
While pilots and Air Traffic controllers are the visible faces of aviation safety, ATSEP- the Air Traffic Safety Electronics Personnel silently work behind the scenes.
These unsung invisible guardians of the sky are the ones who ensure that each and every communication facility, navigational aid and surveillance facility is operational, with each and every parameter within the optimum range and immediately restore normalcy whenever any abnormality is sensed.
Modern ATC depends on software-driven systems for flight data processing, coordination, and safety nets,
In this regard,
Through their unwavering commitment, technical excellence, and adherence to global standards, ATSEPs uphold our nation’s international reputation and ensure the highest level of operational credibility in aviation safety.
I hope this helps in building a good understanding of our work.
"Happy International ATSEP Day."
- Debashree Sarkar
The writer is an officer in CNS ( Communication Navigation & Surveillance ) wing of Airports Authority of India.
The article has been written in personal capacity for general information to the public and emphasizing the crucial importance of ATSEP for safe aviation.
Feedback and queries on the articles may be submitted through contact form or the same can be emailed to lovekushchetna@gmail.com
If you wish to share something necessary to be known by public just drop an email to id above, I will be Happy to publish it.
"एँ! ये कैसा ताला?" सस्ता ताला खरीदने पटड़ी की एक दुकान पर गया और एक ताले को जब हाथ में लिया तो चौंक गया मैं, "दवाओ तो बन्द। और हाथ से खींचो तो खुल जाए? बिना चाभी के ही? ये कैसा ताला है भाई?"
"अरे वो आप छोड़ दो साब।" दुकानदार खिसियाता सा बोला, "वो ढेर मत देखो। वो माल भी आपके लिए नहीं है।" और उसने बाई तरफ इशारा किया, "आप इधर वाले ताले देखो। ये हैं आपके लिए।"
"पर ये खराब ताले..? यहाँ रखे ही क्यों हैं? ये भी बिकते हैं क्या?"
"हाँ बिल्कुल बिकते हैं साब। पीछे वाले रोड़ पर गाँव से आए हुए मजदूरों की कच्ची बस्ती बनी है। वो ही ले जाते हैं ये बिना चाभी के ताले! उनकी जिंदगी में गम के बड़े बड़े ताले तो हैं पर खुशियों की छोटी सी चाभी नहीं।"
"अरे वा! तुम तो फिलॉसॉफर हो।" मैं कुछ गम्भीर तो हुआ लेकिन फिर हँस पड़ा, "पर ये ताले तो खुल जाते हैं बिना चाभी के ही? फिर इनका मतलब ही क्या?"
"उनको मतलब है साब।" दुकानदार का स्वर जैसे किसी गहरे कुएँ से आता लगा तो अब मेरी हँसी भी कुएँ में गिरी किसी अंगूठी सी गायब हो गई, "बो गरीब काम पर जाते हैं तो ऐसे ही टूटे तालों को लगाकर। उनके पास ऐसा होता ही क्या है जो एक चोर के पास नहीं हो?"
- संतोष सुपेकर (लघुकथा संग्रह - प्रस्वेद का स्वर से साभार )
ईमेल- santoshsupekar29@gmail.com
संतोष सुपेकर जी, 1986 से साहित्य जगत से जुड़े हैं, सैकड़ों लघुकथाएं. कविताएँ, समीक्षाएं और लेख लिखे हैं जो समाज में संवेदना और स्पष्टता पैदा करने में सक्षम हैं, आप नियमित अखबार-स्तम्भ और पत्र-पत्रिकाओं (लोकमत समाचार, नवनीत, जनसाहित्य, नायिका नई दुनिया, तरंग नई दुनिया इत्यादि) में लिखते रहे हैं और समाज की बेहतरी हेतु साहित्य कोश में अपना योगदान सुनिश्चित करते रहे हैं | (लेखक के बारे मे विस्तार से जानने के लिए यहाँ क्लिक करें )
अगर आपके पास भी कुछ ऐसा है जो लोगों के साथ साझा करने का मन हो तो हमे लिख भेजें नीचे दिए गए लिंक से टाइप करके या फिर हाथ से लिखकर पेज का फोटो Lovekushchetna@gmail.com पर ईमेल कर दें
फीडबैक / प्रतिक्रिया या फिर आपकी राय, के लिए यहाँ क्लिक करें |
शुभकामनाएं
Growth is in terms of financial well being and financial growth as a whole.
While development is more inclusive, it concerns or includes the quality of life of people of a country, their education, access to proper health facilities, resource distribution, inequality level in society and many other such factors.