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Pilot & ATC और कुछ ? हां CNS-ANS इनके बिना नहीं चलेगा - ATSEP दिवस के अवसर पर

12 नवंबर - अंतरराष्ट्रीय एटीएसईपी दिवस

 आपने एयरपोर्ट के नाम के साथ एटीसी का नाम सुना होगा, माने एयर ट्रैफिक कंट्रोलर, अमूमन लोग जानते हैं कि यह वो ऑफिसर होते हैं जो रेडियो तरंगों के द्वारा पायलट के टच में रहते हैं उन्हें नेविगेट करते हैं कि किस ऊंचाई पर उड़ना है कब लैंडिंग की परमिशन है, कब टेक ऑफ की परमिशन है, एयरपोर्ट पर मौसम कैसा है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिन इंस्ट्रूमेंट के थ्रू एटीसी पायलट से कनेक्ट करते हैं रेडियो फ्रीक्वेंसी पर, उन इंस्ट्रूमेंट को अप टू डेट और मेनटेन कौन करता है अगर उनमें से कोई इंस्ट्रूमेंट डाउन हो जाए तो उसे रिस्टोर कौन करेगा और इन सबके अलावा आपने एक शब्द सुना होगा रडार जिससे हम स्कैन करते हैं कि किसी एक पार्टिकुलर एरिया में कितने एयरक्राफ्ट फ्लाई कर रहे हैं, किधर को फ्लाई कर रहे वगैरह वगैरह, अपने सुना होगा कि कुछ एयरपोर्ट्स ऐसे हैं जहां पर कुहरे और बरसात की कंडीशन में भी लैंडिंग और टेक ऑफ होता है तो वह कौन से इंस्ट्रूमेंट होते हैं जो पायलट को हेल्प करते हैं इतनी लो विजिबिलिटी में भी लैंड करने में और कौन इन इंस्ट्रूमेंट को मेनटेन करता है, कौन इन्हें कैलीब्रेट करता है और चेक करता है कि इंस्ट्रूमेंट प्रॉपर कम कर रहे हैं, इन सबका जवाब है

" एयर ट्रैफिक सेफ्टी इलेक्ट्रॉनिक्स पर्सनल"

आइये विस्तार में समझते हैं इनकी जिम्मेदारियों, चुनौतियों और योगदान को, और शुरुआत करते हैं एक स्पष्टता देने वाली और मन को बांधने वाली कविता से जो लिखी है भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के ही एक अधिकारी श्री देवेश द्विवेदी, वरिष्ठ प्रबंधक एटीएसईपी ने :

ए ए आई का वादा , सुरक्षा सहित सेवा 

हमनें बखूबी निभाकर, जीता है भरोसा

धरती हो या गगन हो , सब जद में है मेरे

वो आसमां के पंछी रखना तू भरोसा ।। 

मेरी निगाहों से कोई ओझल न होगा (RADAR)

बात होती रहेगी, तू कितना भी दूर होगा. (HF/VHF)

अंगुली पकड़ के तेरी, तुझे राह हम दिखाते (NAVAID)

घने कुहरे में भी, तुझको हम रनवे दिखाते (ILS)

तेरे पहुँचने से पहले, पहुंचाएंगे तेरा संदेशा (AFTN)

वो आसमाँ के पंक्षी रखना तू भरोसा ।।

तकनीकियों की दुनियां में है अपना डेरा

हर उच्च मानक पर खरे उतरे हमेशा 

ये हुनर है हमारा और हर atsep का वादा

वो आसमां के पंछी रखना तू भरोसा ।। 

तू कहीं भी उड़े और उड़ता चले

हर कोने कोने तक मेरा सिग्नल मिले

ना डरना कभी ये सोचकर,

दुर्गम जगहों पर किसके भरोसे उड़े

ATSEP के सिपाही तुझे मिलेंगे सदा 

वो आसमां के पंछी रखना तू भरोसा ।। 

कभी मशीनों के साथ हम ठंडे हुए 

कभी तेज धूप में जलते रहे 

सब सहते पर न पीछे हटे

काम पूरे किए मुझे जो भी मिले

हर लक्ष्य को हमने समय से समेटा

वो आसमां के पंछी रखना तू भरोसा ।। 

तू ऊंचा उड़े और उड़ता रहे 

अपनी मंजिल पर सुरक्षित पहुँचता रहे

समय सबका बचे, कोई मुश्किल न पड़े

ATSEP की निगाह में तुम हो हमेशा

वो आसमां के पंछी रखना तू भरोसा ।।

- देवेश द्विवेदी, वरिष्ठ प्रबंधक एटीएसईपी 

 

आइए और समझते हैं:

  • एटीएसईपी, या वायु यातायात सुरक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स कार्मिक, विमानन सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 
  •  परिभाषा: एटीएसईपी तकनीकी विशेषज्ञ होते हैं जो संचार, नेविगेशन और निगरानी (सीएनएस) प्रणालियों के साथ-साथ वायु यातायात प्रबंधन (एटीएम) प्रणालियों के संचालन, रखरखाव, निरीक्षण और प्रबंधन के लिए ज़िम्मेदार होते हैं। 
  •  मुख्य कर्तव्य: - वीओआर, डीएमई, आईएलएस जैसे नेविगेशन सहायक उपकरणों की स्थापना, संचालन और रखरखाव। - रडार, एडीएस-बी, एमएलएटी, डब्ल्यूएएम सहित निगरानी प्रणालियों का रखरखाव। - ज़मीन से हवा और ज़मीन से ज़मीन संचार प्रणालियों (वीएचएफ, एचएफ, सैटकॉम, डेटा लिंक) का प्रबंधन और रखरखाव।
  •   वायु यातायात नियंत्रण स्वचालन प्रणालियों (एटीसी प्रणालियों) के लिए सहायता। - सभी उपकरणों और प्रणालियों के लिए ICAO और राष्ट्रीय विमानन सुरक्षा मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करना। एटीएसईपी का समर्पण विमानन प्रणालियों के सुचारू संचालन और सुरक्षा को सुनिश्चित करता है।

जहाँ पायलट और नियंत्रक विमानन सुरक्षा के प्रत्यक्ष चेहरे हैं, वहीं एटीएसईपी (एयर ट्रैफिक सेफ्टी इलेक्ट्रॉनिक्स पर्सनल) प आकाश के ये अदृश्य रक्षक ही यह सुनिश्चित करते हैं कि हर संचार सुविधा, नेविगेशन सहायता और निगरानी सुविधा चालू रहे, हर पैरामीटर इष्टतम सीमा के भीतर हो और जब भी कोई असामान्यता महसूस हो, तुरंत सामान्य स्थिति बहाल कर दें।

वे डीवीओआर, डीएमई, आईएलएस जैसे नेविगेशनल एड्स और रडार, एडीएस-बी जैसी निगरानी प्रणालियों की सटीकता बनाए रखने में मदद करते हैं, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि विमान सुरक्षित मार्गों और ग्लाइड पथों पर बने रहें। उनकी तकनीकी सटीकता सभी मौसमों में विमान की सटीक स्थिति और सुचारू लैंडिंग सुनिश्चित करती है। आधुनिक एटीसी उड़ान डेटा प्रोसेसिंग, समन्वय और सुरक्षा जाल के लिए सॉफ्टवेयर-संचालित प्रणालियों पर निर्भर करता है। इस संबंध में, एटीएसईपी स्वचालन और डेटाबेस सिस्टम के प्रबंधन में मदद करते हैं, सिस्टम एकीकरण, अपडेट, साइबर सुरक्षा और अतिरेक को संभालते हैं ताकि संचालन को लचीला और सुरक्षित रखा जा सके। एटीएसईपी त्वरित प्रतिक्रिया और त्वरित दोष सुधार द्वारा अधिकतम सिस्टम उपलब्धता सुनिश्चित करते हैं। वे आईसीएओ मानकों और अनुशंसित प्रथाओं और राष्ट्रीय सुरक्षा नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करते हैं, जिससे वैश्विक विमानन सुरक्षा में योगदान मिलता है। अपनी अटूट प्रतिबद्धता, तकनीकी उत्कृष्टता और वैश्विक मानकों के पालन के माध्यम से, एटीएसईपी हमारे देश की अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठा को बनाए रखते हैं और विमानन सुरक्षा में परिचालन विश्वसनीयता के उच्चतम स्तर को सुनिश्चित करते हैं।

------ तो क्या विचार हैं आपके बनना चाहेंगे, सीएनएस कार्मिक, यह भी एक तरीका है देश सेवा का।


स्रोत - समय समय पर CNS ( Communication Navigation & Surveillance ) कार्मिकों से बातचीत के अंश और कुछ तकनीकी लेख

 साभार :

श्री देवेश द्विवेदी , वरिष्ठ प्रबंधक, एटीएसईपी 

श्रीमती देबाश्री सरकर , प्रबंधक, एटीएसईपी

श्री राजेश भट्ट , प्रबंधक एटीएसईपी


संपादन - लवकुश कुमार 

संपादक भौतिकी में परास्नातक हैं और पिछले 6 साल से इंडिया मेट डिपार्टमेंट में सेवाएं देते हुए एविएशन क्षेत्र से जुड़े हैं।

यह लेख समान्य जानकारी के साथ एक जागरूकता लाने के उद्देश्य से व्यक्तिगत क्षमता में संपादक द्वारा संकलित और संपादित किया गया है।

इस लेख पर अपनी राय या प्रतिक्रिया आप संपर्क फॉर्म से भेज सकते हैं या lovekushchetna@gmail.com पर ईमेल कर सकते हैं।


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