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दुनिया और जीवन को लेकर समझ और स्पष्टता के लिए कुछ उक्तियाँ - भाग -2

इन उक्तियों को मैंने अपने बेटे और भतीजे के जन्मदिन वाले वीडियो मे डाला था, ज्यों का त्यों आपके सामने प्रस्तुत है 

बेटे आज तुम्हारे जन्मदिन पर मेरी तरफ से मेरी समझ और मेरे अनुभव से कुछ बातें-

 

  • जितना जीना बहादुरी और आज़ादी से जीना बेटा
  • समाज के हर तबके की दिक्कत और आकांक्षाएँ समझना
  • ना दुख से घबराना ना सुख की तरफ झुकना
  • सुख लालच देता है और दुख देता है डर
  • जीवन का सीमित ईंधन कामनाओ वासनाओ मे मत जलाना बेटा
  • लोगों के जीवन मे स्पष्टता, शांति और प्रेम लाने के प्रयास करना बेटा
  • लोगों को अपना आदर्श बनाने से पहले पड़ताल करना बेटा
  • आनंद और सुख मे अंतर करना सीखना बेटा
  • शांति को खुशी से ऊपर रखना और झूठे आनन्द से बचना
  • मन नए से डरता है, नए की समझ हंसिल करना बेटा
  • सहायता की प्रतीक्षा व्यर्थ है, जो संसाधन हों उनके साथ आगे बढ़ना
  • साहसी मन समस्या को नहीं स्वयं को सुलझाता है
  • अपने प्रति ईमानदार और अपने प्रति हल्के रहना बेटा

जन्मदिन की शुभकामनाएं और बधाई बेटा

संदर्भ - आचार्य प्रशांत  की शिक्षाओं और अन्य आध्यात्मिक साहित्य के साथ स्वयं की अनुभवजनित समझ पर आधारित 

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दुनिया और जीवन को लेकर समझ और स्पष्टता के लिए कुछ उक्तियाँ - भाग -1

इन उक्तियों को मैंने अपने बेटे और भतीजे के जन्मदिन वाले वीडियो मे डाला था, ज्यों का त्यों आपके सामने प्रस्तुत है 

बेटे आज तुम्हारे जन्मदिन पर मेरी तरफ से मेरी समझ और मेरे अनुभव से कुछ बातें-

  • ज्ञान हंसिल करो और निडर बनो
  • काबिलियत हांसिल करो और आत्मनिर्भर बनो
  • यथार्थ तुम उतरो यथार्थ के धरातल पर
  • स्वयं की समझ से जीवन को सही दिशा देना
  • ज़िंदगी झेलने के लिए नहीं खेलने के लिए है , खूब खेलो बेटा, मैदान हम देंगे, माहौल हम देंगे
  • न छोटे हो न कमजोर हो, अपनी ताकत जगाओ तो सही
  • अच्छे की तारीफ करना बेटा, साथी पाओगे, अच्छे लोग पाओगे
  • बुरे की आलोचना करना एक अलग नाम बनाओगे
  • छोटे से छोटे काम को भी अच्छे से करना, उत्कृष्टता पाओगे, शांति पाओगे
  • अनुभवी लोगों की बात को सुन लेना, सही लगे तो मान लेना, नुकसान से बचोगे
  • परिवार से इतर जनसमान्य के लिए भी काम करना
  • सत्य को अपना साथ देना और मजबूत करना
  • शिक्षा से खुद की और दुनिया की समझ हंसिल करना
  • बूढ़े और कमज़ोरों की रक्षा करना

जन्मदिन की शुभकामनाएं और बधाई बेटा

संदर्भ - आचार्य प्रशांत  की शिक्षाओं और अन्य आध्यात्मिक साहित्य के साथ स्वयं की अनुभवजनित समझ पर आधारित 

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“डर, अज्ञान, स्पष्टता और साहस” भाग-1

भय सफलता का सबसे बड़ा बाधक है |

साहसी और हिम्मतवर व्यक्ति हज़ार कठिनाइयों मे भी विचलित नहीं होते |

जीवन के किसी भी क्षेत्र मे व्यवस्था एवं क्रम बनाए रखने के लिए सुदृढ़ मनोबल एवं साहसी होने की अत्यंत आवश्यकता है |

भय विमुख होना मनुष्य का सबसे बड़ा सौभाग्य है |

मानसिक कमजोरी, दुख या हानि की काल्पनिक आशंका से ही प्रायः लोग भयभीत रहते हैं |

परिस्थितियों या शंकाओं के विरुद्ध मोर्चा लेने की शक्ति हो तो भय मिट सकता है| इसके लिए हृदय मे दृढ़ता चाहिए |

परमात्मा को भूलकर अन्य वस्तुओं के साथ लगाव रखने से ही भय उत्पन्न होता है |

मनुष्य शरीर से अलग कोई अविनाशी तत्व है |

डर का सबसे प्रमुख कारण है अज्ञानता | जिसे हम ठीक तरह से नहीं जानते उससे प्रायः डरा करते हैं |

घने जंगलों मे सिंह, व्याघ्रों के बीच निवास करने वाले आदिवासी उनसे जरा भी नहीं डरते, बल्कि आँख-मिचौली खेलते रहते हैं, जबकि सामान्य लोगों को सिंह, व्याघ्र की बात सुनने से भी डर लगता है |

अजनबी आदमी को देखकर तरह – तरह की आशंकाएं मन मे उठती हैं, पर जब उसका पूरा परिचय होता है तो पूर्व आशंका मित्रता मे बादल जाती है |

इस संसार मे लगभग सारे डर अज्ञानमूलक हैं |

स्रोत- पुस्तिका – “ भय मारक है, साहस पराक्रम संजीवनी ” लेखक – श्रीराम शर्मा आचार्य

 

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