

जागरूकता, स्पष्टता और उत्साह के संचार के लिए "हारिए ना हिम्मत" पुस्तिका के वितरण का कार्य मैं अपने पंतनगर में तैनाती से कर रहा हूँ और यहाँ पिथौरागढ़ में भी अपने संपर्क में आने वाले लोगों/कर्मियों/अधिकारियों,कलाकारों और छात्रों को इसका वितरण किया हूँ ताकि वो इसे पढ़कर जीवन के मामलों में स्पष्टता हांसिल कर सकें और इस तरह खुद को परेशान, निरोत्साहित, अधीर करने और उधेड़ बुन में डालने वालों से विचारों से मुक्त हो सकें, अपने सामाजिक रिश्तों को सही परिप्रेक्ष्य में देखकर उन्हें उचित तरीके से बेहतर रूप में निभा सकें, अपने काम और तैयारी के बीच उचित प्राथमिकता लाकर उसमे संतुलन बैठा सकें और तो और अपने आस पास, मिलने वालों को बेहतर तरीके से जीवन से जुड़े मुद्दों पर राय दे सकें |
अगर आप भी स्वयं के लिए या अपने स्वजनों को भेंट स्वरुप इस पुस्तक को देना चाहते हैं तो नीचे दिए गए लिंक से इसे गायत्री परिवार की वेबसाइट पर इस पुस्तक को खरीद सकते हैं -
https://awgpstore.com/product?id=SC17
आपके निर्णय निर्माण के लिए इस किताब से मेरी कुछ सीख साझा कर रहा हूँ ताकि आप इसके महत्व को आसानी से समझ सकें :
- दूसरों की निंदा करने में जितना समय हम देते हैं उतना ही अगर हम खुद की कमियां देख उन्हें ठीक करने में लगायें तो महानता की और बढ़ चलें |
- अध्यात्मिक चिंतन के बिना मनुष्य में विनीत भाव नहीं आता और ना उसमे अपने को सुधारने की क्षमता रह जाती है |
- राजनीतिक शक्ति आपके अधिकारों की रक्षा कर सकती है, पर जिस स्थान से हमारे सुख-दुःख की उत्पत्ति होती है उसका नियंत्रण राजनीतिक शक्ति नहीं कर सकती | यह कार्य अध्यात्मिक उन्नति से ही संपन्न हो सकता है |
- जब कोई मनुष्य अपने आपको अद्वितीय व्यक्ति समझने लगता है और अपने आपको चरित्र में सबसे श्रेष्ठ मानने लगता है, तब उसका अध्यात्मिक पतन होता है |
- जो व्यक्ति अपनी मानसिक शक्ति स्थिर रखना चाहते हैं, उनको दूसरों द्वारा आलोचनाओं से चिढना नहीं चाहिए |
- दूसरों का विश्वास तुम्हे अधिकाधिक असहाय और दुखी बनाएगा| मार्गदर्शन के लिए अपनी ही और देखो, दूसरों की और नहीं|
- तुम्हारी सत्यता तुम्हे दृढ बनाएगी और तुम्हारी दृढ़ता तुम्हे लक्ष्य तक लेकर जायेगी |
- महान व्यक्ति सदैव अकेले चले हैं और इस अकेलेपन के कारण ही वो दूर तक चले हैं| अकेले व्यक्तियों ने अपने सहारे ही संसार के महानतम कार्य संपन्न किये हैं | उन्हें एकमात्र अपनी ही प्रेरणा प्राप्त हुयी है | वे अपने ही आंतरिक सुख से सदैव प्रफुल्लित रहे हैं
- जिस दिन तुम्हे अपने हाथ-पैर और दिल पर भरोसा हो जावेगा, उसी दिन तुम्हारी अंतरात्मा कहेगी की बाधाओं को कुचलकर तू अकेला चल अकेला |
- लोभों के झोकें, मोहों के झोंके, नामवरी के झोंके, यश के झोंके, दबाव के झोंके ऐसे हैं कि आदमी को लम्बी राह पर चलने के लिए मजबूर कर देते हैं और कहाँ से कहाँ घसीट ले जाते हैं, बचो इनसे |
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