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ICON इंटरनेशनल स्कूल का वार्षिक उत्सव 2025 और एक प्रेरणा, विश्वास और उत्कृष्टता की यात्रा का आगाज

 “एक इंसान कैसा नागरिक बनेगा ये निर्भर करता है उसे मिलने वाले महौल से, ये माहौल घर का भी होता है और उसके स्कूल/कॉलेज  का भी |”

                    (मुख्य अतिथि माननीय विधायक श्री मयूख मेहर जी और निदेशक श्री गिरीश पाठक जी के कर कमलों  से दीप प्रज्वलन)

 

स्कूल या विद्यालय हम विद्या अर्जन के लिए जाते हैं, जहां विद्या अर्जन केवल सैद्धांतिक पक्ष नहीं, यह व्यवहारिक पक्ष भी लिए हुये है, जिसमे स्वयं और दुनिया को समझने, चीज़ें कैसे काम कर रहीं और जीव की वृत्तियाँ क्या हैं इनको समझने के साथ एक तार्किक और उदार सोंच विकसित करना भी शामिल है ताकि हम विभिन्न विषयों मे निपुण होकर रोजगार के काबिल बन सकें |

 

                                                                      (विशिष्ट अतिथि श्री आशीष कुमार, commandant 55 Bn SSB Pithoragarh )

एक सिस्टम को सुचारु रूप से चलाने के लिए और स्थायित्व बनाए रखने के लिए हमे जरूरत होती है, जिम्मेदार, साहसी, उदार और लोगों मे सामंजस्य बैठाकर चलने वाले लोगों (कार्यबल) की, इसके लिए विद्यालय मे विभिन्न गतिविधियों द्वारा बच्चों को जीवन के लिए तैयार किया जा सकता है, सत्यनिष्ठा और संवेदना भी विद्यालय के दिनो से ही विकसित की जाए तो काम आसान हो जाए| न्याय, गरिमा, स्वतन्त्रता और सच्चाई की राह पर चलते रहने के साहस के लिए जरूरी स्पष्टता भी इसी वक़्त से प्रदान की जाए तो बेहतर रहता है |

बच्चे हमारे देश का भविष्य हैं, दुनिया के  यह बच्चे शारीरिक रूप से स्वस्थ हों, मानसिक रूप से मजबूत, होनहार/काबिल, संवेदनशील, प्रगतिवादी और जुझारू हों, साथ ही वो अपने जीवन की उच्चतम संभावनाओं को पा सकें, अपने अंदर छिपी असीम शक्ति और क्षमता को समझ सकें इसके लिए इन्हें उचित पोषण के साथ सही माहौल, अभ्यास, संगति और ट्रेनिंग की भी जरूरत होती है|   

बच्चे अपनी शुरुआती जीवन का अच्छा खासा समय स्कूल में देते हैं, वह भी बच्चों के साथ, जिसका एक अलग ही महत्व है, क्योंकि हमारे आस पास जब लोग कुछ सीख रहे हों तो, हमारे द्वारा भी सीखने की इच्छा बढ़ जाए, ऐसी काफी संभावनाएं रहती हैं, कुछ विशेष गतिविधियों के द्वारा हम उनमें ऐसे गुण डाल सकते हैं जो उन्हें भविष्य के अवसरों और संघर्षों के लिए तैयार कर सकते हैं और सबसे खास कि उनमें ऐसी आदतें विकसित कर सकते हैं जिससे उनका एक-एक दिन सार्थक हो पाएगा और बेहतर मानवीय संबंधों के साथ उचित प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर वो आनंदमय और उत्कृष्ट जीवन जी पाएंगे|

साथ ही कुछ और गुण जो विद्यालय मे विकसित किए जा सकते हैं, विभिन्न क्रियाकलापों द्वारा यथा :

साहस, मैत्री भाव, अनुशासन,  नेतृत्व क्षमता, धर्म निरपेक्ष दृष्टिको,  साहसिक कार्य तथा खेल भावना और निःस्वार्थ सेवा का आदर्श, साहचर्य और अनुशासन का विकास, सहिष्णुता, सहभागिता,स्वावलम्बन व स्वदेश-प्रेम, स्वच्छता,पर्यावरण संरक्षण, समानता का भाव, अध्यापकों, सहकर्मियों एवं कनिष्ठों का सम्मान, लैंगिक संवेदीकरण के मूल्य, कमजोर वर्गों के प्रति संग का भाव एवं सहानुभूति (करुणा) इत्यादि,

हाल ही सोर घाटी पिथौरागढ़ के आइकन इंटरनेशनल स्कूल के वार्षिक उत्सव में काफी कुछ ऐसा देखने के लिए मिला कि ऊपर वर्णित उद्देश्यों की पूर्ति के रास्ते पर चलता एक संस्थान मिल गया हो:

जैसा की Icon International School Pithoragarh के निदेशक श्री गिरीश पाठक जी अपने संदेश मे कहते हैं कि

“ हमारा मुख्य उद्देश्य सभी बच्चों के लिए सीखने, बढ़ने और विकसित होने के लिए एक गतिशील वातावरण बनाना है। हम मुख्य रूप से शिक्षण के साथ विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से सीखने पर ध्यान केंद्रित करते हैं। हमारी विशेषता बेहतर भविष्य के लिए वैश्विक और प्रेरणादायक नागरिक बनाना है। हम बच्चों के सर्वांगीण विकास और आत्म-प्रेरणा, आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास पर ध्यान केंद्रित करते हैं। बच्चों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करना हमारे लिए अत्यंत प्रसन्नता का विषय है। हम आपके प्रियजनों के लिए एक सकारात्मक और ऊर्जावान वातावरण बनाते हैं और उन्हें उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए तैयार करते हैं।

हमारे अनुसार प्रत्येक बच्चा एक बीज के समान है जिसमें उचित मार्गदर्शन और स्नेह से पोषित होने पर बढ़ने की क्षमता होती है। आज हम पिथौरागढ़ शहर के एक प्रतिष्ठित और तेजी से विकसित होते शैक्षणिक संस्थान के रूप में स्थापित हैं। वर्ष दर वर्ष हमारे सभी कर्मचारियों और छात्रों के प्रयासों ने विद्यालय को उत्कृष्टता की ओर अग्रसर किया है। हमारे पास एक गतिशील और मेहनती संकाय है जो छात्रों के लाभ के लिए शिक्षा में समर्पित है। हमारा वादा है कि हम आपके बच्चों को न केवल सफल इंसान बनाएंगे बल्कि अच्छे इंसान भी बनाएंगे। अंत में, हम उन सभी अभिभावकों को धन्यवाद देना चाहते हैं जिन्होंने हमारे संस्थान और इसके आदर्शों पर विश्वास जताया है। हम आपको आश्वस्त करते हैं कि आपके प्यारे बच्चे सुरक्षित हाथों में हैं। हमारा संपूर्ण स्टाफ विद्यालय के मूल्यों को समझता है और बच्चों को प्रोत्साहित करने में सहयोग करता है, और हमें विश्वास है कि बच्चे आपको और हमें गौरवान्वित करेंगे। एक बार फिर, आइकॉन परिवार में आपका स्वागत है। ”

बात को और बेहतर तरह से समझने को कुछ गतिविधियों का जिक्र जरूरी है, दर्शकों में से एक, आरती जी बताती हैं कि कार्यक्रम स्थल पर प्रवेश करते ही मेहमानों का स्वागत करने का दायित्व भी बच्चों का ही था, इस बात ने आरती जी को प्रभावित किया और वो चमकती आंखों के साथ प्रसन्नता के भाव के साथ कहती हैं कि इस तरह ये बच्चे अभी से निःसंकोच होकर लोगों का अभिवादन करना सीख पायेंगे और एक उल्लास, उम्मीद, महत्वपूर्ण महसूस कराने वाली और अपनेपन की भावना का संचार करने वाली मुस्कान के साथ मानवीय रिश्तों को वो आधार देना सीख पायेंगे जिस पर टिके रिश्ते में इंसान एक से एक बड़े कार्य कर जाता है और नए रिकार्ड बना डालता है।

वह आगे कहती हैं कि कार्यक्रम के मंच संचालन का कार्य भी बच्चों ( छात्र-छात्राओं ) ने ही किया जो मन बांध लेने वाला था, इस तरह सक्रिय भागीदारी से बच्चों में स्पष्टता, आत्मविश्वास, समझ, समन्वय क्षमता, स्थितियों से निपटने, धैर्य, टिके रहने कि क्षमता विकसित होगी, साथ ही वो विभिन्न गतिविधियों के महत्व को समझ पाएंगे और विभिन्न संस्थाओं के महत्व और योगदान को समझ पाएंगे|

एक और गेस्ट (अभिभावक) और पिथौरागढ़ एयरपोर्ट पर अधिकारी श्री सुनील वर्मा जी कहते हैं कि विभिन्न गतिविधियां बच्चों कि समझ को व्यापक करेंगी और साथ ही वह बताते हैं की वार्षिक उत्सव के प्रांगण मे एक विज्ञान के प्रोजेक्ट और किताबों का स्टॉल भी लगा था जहां से बच्चों के लिए साइन्स की किट के साथ साहित्य अध्ययन और पुस्तक पढ़ने कि आदत डालने के लिए आकर्षक और ज्ञानवर्धक पुस्तकों को किफ़ायती कीमत पर खरीदा जा सकता था | साथ हे कर्राटे सरीखी गतिविधियों का प्रशिक्षण बच्चों को आत्म रक्षा के लिए तैयार करेगा और ISRO सरीखी अग्रणी संस्थाओं पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम बच्चों को और जागरूक तथा उत्साहित और प्रेरित करेंगे |

कला और विज्ञान का यह संगम वाकई प्रशंशनीय है |

अभिभावकों मे ही एक श्री संदीप यादव जी जोकि पेशे से पिथौरागढ़ एअरपोर्ट पर एयर ट्रैफिक कंट्रोल अधिकारी हैं, बताते हैं कि बच्चों द्वारा मंच संचालन उनकी झिझक को खत्म कर उन्हे आत्मविश्वास देगा, जो उन्हे जीवन मे आगे चलकर, चाहे वो व्यावसायिक जीवन हो या व्यक्तिगत जीवन, अपनी बात निर्भीक होकर रखने में साथ ही  लोगों से संवाद द्वारा जुड़ने में मदद करेगा | स्टेज पर कार्यक्रम मे प्रतिभाग करना अपने आपमे ही एक झिझक को कम करने वाली और व्यक्तित्व को निखारने वाली गतिविधि है |

विद्यालय प्रबंधन द्वारा समाज के गणमान्य व्यक्तियों को आमंत्रित कर बच्चों को संबोधित किया गया और उन्हे विभिन्न गतिविधियों द्वारा उनकी प्रतिभा के प्रदर्शन का मौका दिया गया, यह विद्यालय के वार्षिक उत्सव को सफल बनाता है और बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए एक बेहतर प्रयास को दिखाता है |

विद्यालय प्रबंधन से निम्नलिखित ईमेल पर संपर्क किया जा सकता है : iconschoolpithoragarh123@gmail.com


 

बच्चे संवेदनशील, साहसी, करूण और काबिल बने इसी अपेक्षा के साथ

ढेरों शुभकामनायें

  • लवकुश कुमार

    बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से भौतिकी मे स्नातक और आई आई टी दिल्ली से भौतिकी मे परास्नातक हैं और उनके लेखन का उद्देश्य समाज की उन्नति और बेहतरी के लिए अपने विचार साझा करना है ताकि उत्कृष्टता, अध्ययन और विमर्श को प्रोत्साहित कर देश और समाज के उन्नयन में अपना बेहतर योगदान दिया जा सके, साथ ही वह मानते हैं कि सामाजिक विषयों पर लेखन और चिंतन शिक्षित लोगों का दायित्व है और उन्हें दृढ़ विश्वास है कि स्पष्टता ही मजबूत कदम उठाने मे मदद करती है और इस विश्वास के साथ कि अच्छा साहित्य ही युवाओं को हर तरह से मजबूत करके देश को महाशक्ति और पूर्णतया आत्मनिर्भर बनाने मे बेहतर योगदान दे पाने मे सक्षम करेगा, वह साहित्य अध्ययन को प्रोत्साहित करने को प्रयासरत हैं।


    जिस तरह बूँद-बूँद से सागर बनता है वैसे ही एक समृद्ध साहित्य कोश के लिए एक एक रचना मायने रखती है, एक लेखक/कवि की रचना आपके जीवन/अनुभवों और क्षेत्र की प्रतिनिधि है यह मददगार है उन लोगों के लिए जो इस क्षेत्र के बारे में जानना समझना चाहते हैं उनके लिए ही साहित्य के कोश को भरने का एक छोटा सा प्रयास है यह वेबसाइट ।

    लेखक के विजन के बारे में जानने के लिए यहां क्लिक करें।


    अगर आपके पास भी कुछ ऐसा है जो लोगों के साथ साझा करने का मन हो तो हमे लिख भेजें नीचे दिए गए लिंक से टाइप करके या फिर हाथ से लिखकर पेज का फोटो Lovekushchetna@gmail.com पर ईमेल करें।

 

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अपरिचित (लघुकथा) - लवकुश कुमार

अक्षिता विस्मित भाव से, चेतना मैं तुम्हारी एक बात से चौंक जाती हूँ कि तुम अपरिचित लोगों से भी इतने खुलेपन के साथ कैसे बात कर लेती हो, तुम्हें डर नहीं लगता कि इससे कोई हानि भी हो सकती है या लोग तुम्हें ग़लत समझ सकते हैं?

चेतना मुस्कुराते हुए देखो अक्षिता, अपना तो सिंपल फंडा है जो वास्तव में हो वही दिखो जब मैं नए लोगों से फ्रैंकनेस से पेश आती हूँ तो सामने से भी मैं ऐसी ही उम्मीद रखती हूँ। इससे हम दोनों मुखौटे के साथ नहीं मिलते, मैं इससे लोगों से सच्चाई से मिलती हूं और जो मुझसे इत्तेफाक रखेंगे वही मिलेंगे, जो मेरे काम के महत्व को समझेंगे, किसी खास मौके पर हम मिले तो हम वही रहेंगे जो पहली बार में थे। हमारी ईमानदारी ही हमारे एसोसिएशन की मजबूत नींव बनेगी। इसीलिए मैं अपरिचित लोगों से ऐसे ही सच्चाई से मिलती हूँ। अगर हम खुद ही मुखौटा लगा लेंगे तो सामने वाले से सच्चा होने की उम्मीद नहीं कर सकते।अगर  बाद में कलई खुलने पर कोई साथ छूटना है तो अभी वो जुड़े ही क्यों?

©लवकुश कुमार

लेखक भौतिकी में परास्नातक हैं और उनके लेखन का उद्देश्य समाज की उन्नति और बेहतरी के लिए अपने विचार साझा करना है ताकि उत्कृष्टता, अध्ययन और विमर्श को प्रोत्साहित कर देश और समाज के उन्नयन में अपना बेहतर योगदान दिया जा सके, साथ ही वह मानते हैं कि सामाजिक विषयों पर लेखन और चिंतन शिक्षित लोगों का दायित्व है और उन्हें दृढ़ विश्वास है कि स्पष्टता ही मजबूत कदम उठाने मे मदद करती है और इस विश्वास के साथ कि अच्छा साहित्य ही युवाओं को हर तरह से मजबूत करके देश को महाशक्ति और पूर्णतया आत्मनिर्भर बनाने मे बेहतर योगदान दे पाने मे सक्षम करेगा, वह साहित्य अध्ययन को प्रोत्साहित करने को प्रयासरत हैं, 

जिस तरह बूँद-बूँद से सागर बनता है वैसे ही एक समृद्ध साहित्य कोश के लिए एक एक रचना मायने रखती है, एक लेखक/कवि की रचना आपके जीवन/अनुभवों और क्षेत्र की प्रतिनिधि है यह मददगार है उन लोगों के लिए जो इस क्षेत्र के बारे में जानना समझना चाहते हैं उनके लिए ही साहित्य के कोश को भरने का एक छोटा सा प्रयास है यह वेबसाइट ।


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दक्षता (लघु कथा) - लवकुश कुमार

यार उत्कर्ष, आजकल वेबसाइट पर बहुत आर्टिकल और लघुकथाएँ डाल रहे हो, दूसरे काम बंद कर दिए क्या? आखिर क्या राज है?

अभिनव - अरे उत्कर्ष, कोई है जो मुझे इस काम के लिए प्रोत्साहित करता है, इस काम की महत्ता को स्वीकार करता है और नियमित कुशल क्षेम पूछ इस काम के महत्व को दर्शाता है यहां तक कि ये काम नियमित चल सके उसके लिए सहयोग भी।

प्रोत्साहन से प्रसन्नता बढ़ती है और प्रसन्नता से दक्षता, परिणाम तुम्हारे सामने है और मुस्कुराने लगता है।

उत्कर्ष - अच्छा तो ये तारीफ का कमाल है। (वह आंखों में चमक के साथ बोलता है) सही भी है, हमें प्रोत्साहन मिलता है, तो हम खुश होते हैं और अधिक कुशलता से काम करते हैं।

©लवकुश कुमार

लेखक भौतिकी में परास्नातक हैं और उनके लेखन का उद्देश्य समाज की उन्नति और बेहतरी के लिए अपने विचार साझा करना है ताकि उत्कृष्टता, अध्ययन और विमर्श को प्रोत्साहित कर देश और समाज के उन्नयन में अपना बेहतर योगदान दिया जा सके, साथ ही वह मानते हैं कि सामाजिक विषयों पर लेखन और चिंतन शिक्षित लोगों का दायित्व है और उन्हें दृढ़ विश्वास है कि स्पष्टता ही मजबूत कदम उठाने मे मदद करती है और इस विश्वास के साथ कि अच्छा साहित्य ही युवाओं को हर तरह से मजबूत करके देश को महाशक्ति और पूर्णतया आत्मनिर्भर बनाने मे बेहतर योगदान दे पाने मे सक्षम करेगा, वह साहित्य अध्ययन को प्रोत्साहित करने को प्रयासरत हैं, 

जिस तरह बूँद-बूँद से सागर बनता है वैसे ही एक समृद्ध साहित्य कोश के लिए एक एक रचना मायने रखती है, एक लेखक/कवि की रचना आपके जीवन/अनुभवों और क्षेत्र की प्रतिनिधि है यह मददगार है उन लोगों के लिए जो इस क्षेत्र के बारे में जानना समझना चाहते हैं उनके लिए ही साहित्य के कोश को भरने का एक छोटा सा प्रयास है यह वेबसाइट ।


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