सभी पाठकों को मेरा नमस्कार आज युवा दिवस है तो सोचा की मन के कुछ उद्गार व्यक्त किये जाएं।
आपको पता ही है कि युवा दिवस स्वामी विवेकानंद जी की जयंती के उपलक्ष्य में मनाते हैं।
उन्होंने युवावस्था में ही अपने कार्यों, लेखों और भाषण से समता, अध्यात्म और उत्कृष्टता का संदेश बहुत दूर तक पहुंचाया।
अध्यात्म के क्षेत्र में उन्होने काफी कुछ लिखा जो स्पष्टता देने वाला था।
वह जीवन में बड़े उद्देश्यों को लेकर चले जिससे आमजन का हित जुड़ा था, कुशाग्र बुद्धि वाले इंसान थे और उन्होंने प्रयास किया की कुछ ऐसा करें की आम जन का जीवन बेहतर हो उनके जीवन में आजादी आए उत्कृष्टता आए आनंद आए।
मैं भी आज युवा दिवस के अवसर पर अपने युवा साथियों से अपेक्षा करता हूं कि वह एक स्वस्थ शरीर, स्वस्थ दिमाग के लिए प्रयासरत रहें, समर्पित रहे और अपने व्यक्तिगत जीवन में चीजों और सुखों को इकट्ठा करने के इतर अपना समय ऐसे कार्यों में भी दें जिससे आमजन का जीवन बेहतर होता है अगर आमजन किसी अंधेरे में है तो उन्हें ज्ञान के उजाले में लाएं, अगर आमजन को पौष्टिक खाना नहीं मिल पा रहा है तो प्रयास करें कि वह समता आए समाज में कि उन्हें भी पौष्टिक भोजन मिले, अगर किसी बच्चे से उसका बचपन छिन रहा है उसके माता-पिता मजबूर हैं उसे अपने काम में खींचने को तो प्रयास करें कि ऐसी समता आए की माता-पिता को अपने बच्चों को अपने काम में ना खींचना पड़े।
लोगों में इतनी समझ आए कि वह ऐसी कोई भी गतिविधि में भाग ना लें जिससे शरीर खराब होता हो और इन सबके बावजूद भी कोई बीमार पड़ जाए तो उसे समुचित स्वास्थ्य लाभ के लिए चिकित्सा उपलब्ध हो सके इसके लिए प्रयास करें ।
आने वाली पीढियां को स्वच्छ हवा और जल मिल सके इसके लिए प्रयास करें बोलें, लिखें चर्चा करें ।
खुद भी एक आजाद जीवन की कर दिखाएं मिशाल बने और प्रयास करें की आपसे जो कुछ काम हो सके अन्य लोगों के जीवन में भी आजादी आए, सुकून आए ।
आप युवा हैं ढेर सारी ताकत है जोश है इसका इस्तेमाल केवल व्यक्तिगत विलासिता ग्रहण करने के पीछे न लगाकर कुछ हिस्सा जनउपयोगि काम में भी लगाएं,
आज जिन पेड़ों के हम फल खा रहे हैं वह किसी और ने लगाए थे तो हमें भी प्रयास करना चाहिए कि हम भी कुछ ऐसे काम करें कि आने वाली पीढ़ियों को कुछ उससे लाभ हो।
24 घंटे में ज्यादातर वक्त अगर हम विलासिता पूर्ण जीवन पाने के लिए ही बिताते हैं तो कुछ घंटे बिता कर देखिए आमजन की समस्याओं पर काम करके देखिए, आपको जो सुकून मिलेगा वह अप्रतिम होगा ऐसा सुकून होगा ऐसा आनंद होगा जो भूलेगा नहीं।
युवा हैं अकेले भी चल जाने की दम रखिए अगर मानवता के लिए लीक से हटने की जरूरत है तो लीक से हटिए।
सुविधा के बजाय सत्य को चुनिए ।
किसी अंधी दौड़ का हिस्सा मत बनिए, वही करिए जिससे समाज दुनिया में शांति बढ़े, समता बढ़े लोगों के बीच सौहार्द्र बढे, आपसी विश्वास बढ़े, सुरक्षा की भावना बढ़े ।
उनके बीच प्रेम बढ़े,
युवा हैं अकेले चलने से मत डरिए सुविधा नहीं सत्य को चुनिए।
देश समाज की दिक्कतों को पहचानिए, जागिए और तब तक मत रूकिए जब तक समाज में समता न आ जाए।
-लवकुश कुमार
लेखक बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से भौतिकी मे स्नातक और आई आई टी दिल्ली से भौतिकी मे परास्नातक हैं और उनके लेखन का उद्देश्य समाज की उन्नति और बेहतरी के लिए अपने विचार साझा करना है ताकि उत्कृष्टता, अध्ययन और विमर्श को प्रोत्साहित कर देश और समाज के उन्नयन में अपना बेहतर योगदान दिया जा सके, साथ ही वह मानते हैं कि सामाजिक विषयों पर लेखन और चिंतन शिक्षित लोगों का दायित्व है और उन्हें दृढ़ विश्वास है कि स्पष्टता ही मजबूत कदम उठाने मे मदद करती है और इस विश्वास के साथ कि अच्छा साहित्य ही युवाओं को हर तरह से मजबूत करके देश को महाशक्ति और पूर्णतया आत्मनिर्भर बनाने मे बेहतर योगदान दे पाने मे सक्षम करेगा, वह साहित्य अध्ययन को प्रोत्साहित करने को प्रयासरत हैं।
जिस तरह बूँद-बूँद से सागर बनता है वैसे ही एक समृद्ध साहित्य कोश के लिए एक एक रचना मायने रखती है, एक लेखक/कवि की रचना आपके जीवन/अनुभवों और क्षेत्र की प्रतिनिधि है यह मददगार है उन लोगों के लिए जो इस क्षेत्र के बारे में जानना समझना चाहते हैं उनके लिए ही साहित्य के कोश को भरने का एक छोटा सा प्रयास है यह वेबसाइट ।
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