स्कूल या विद्यालय हम विद्या अर्जन के लिए जाते हैं, जहां विद्या अर्जन केवल सैद्धांतिक पक्ष नहीं, यह व्यावहारिक पक्ष भी लिए हुये है, जिसमे स्वयं और दुनिया को समझने, चीज़ें कैसे काम कर रहीं और जीव की वृत्तियाँ क्या हैं इनको समझने के साथ एक तार्किक और उदार सोंच विकसित करना भी शामिल है ताकि हम विभिन्न विषयों मे निपुण होकर रोजगार के काबिल बन सकें |
एक सिस्टम को सुचारु रूप से चलाने के लिए और स्थायित्व बनाए रखने के लिए हमे जरूरत होती है, जिम्मेदार, साहसी, उदार और लोगों मे सामंजस्य बैठाकर चलने वाले लोगों (कार्यबल) की, इसके लिए विद्यालय मे विभिन्न गतिविधियों द्वारा बच्चों को जीवन के लिए तैयार किया जा सकता है, सत्यनिष्ठा और संवेदना भी विद्यालय के दिनो से ही विकसित की जाए तो काम आसान हो जाए| न्याय, गरिमा, स्वतन्त्रता और सच्चाई की राह पर चलते रहने के साहस के लिए जरूरी स्पष्टता भी इसी वक़्त से प्रदान की जाए तो बेहतर रहता है |
बच्चे हमारे देश का भविष्य हैं, दुनिया के यह बच्चे शारीरिक रूप से स्वस्थ हों, मानसिक रूप से मजबूत, होनहार/काबिल, संवेदनशील, प्रगतिवादी और जुझारू हों, साथ ही वो अपने जीवन की उच्चतम संभावनाओं को पा सकें, अपने अंदर छिपी असीम शक्ति और क्षमता को समझ सकें इसके लिए इन्हें उचित पोषण के साथ सही माहौल, अभ्यास, संगति और ट्रेनिंग की भी जरूरत होती है|
बच्चे अपनी शुरुआती जीवन का अच्छा खासा समय स्कूल में देते हैं, वह भी बच्चों के साथ, जिसका एक अलग ही महत्व है, क्योंकि हमारे आस पास जब लोग कुछ सीख रहे हों तो, हमारे द्वारा भी सीखने की इच्छा बढ़ जाए, ऐसी काफी संभावनाएं रहती हैं, कुछ विशेष गतिविधियों के द्वारा हम उनमें ऐसे गुण डाल सकते हैं जो उन्हें भविष्य के अवसरों और संघर्षों के लिए तैयार कर सकते हैं और सबसे खास कि उनमें ऐसी आदतें विकसित कर सकते हैं जिससे उनका एक-एक दिन सार्थक हो पाएगा और बेहतर मानवीय संबंधों के साथ उचित प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर वो आनंदमय और उत्कृष्ट जीवन जी पाएंगे|
साथ ही कुछ और गुण जो विद्यालय मे विकसित किए जा सकते हैं, विभिन्न क्रियाकलापों द्वारा यथा राष्ट्रीय सेवा योजना, राष्ट्रीय कैडेट कोर इत्यादि :
राष्ट्रीय कैडेट कोर के उद्देश्य
क. युवकों/युवतियों को सुयोग्य नागरिक बनाने के लिये उनमें चरित्र, साहस, मैत्री भाव, अनुशासन - नेतृत्व, धर्म निरपेक्ष दृष्टिकोण साहसिक कार्य तथा खेल भावना और निःस्वार्थ सेवा आदर्शों की विकसित करना।
ख- संगठित प्रशिक्षित और प्रेरित युवकों/युवतियों की एक ऐसी जनशक्ति का निर्माण करना जो सशस्त्र सेना सहित जीवन के क्षेत्र में नेतृत्व प्रदान कर सके और राष्ट्रीय सेवा के लिये सदैव तत्पर रहे।
इस उद्देश्य का देश के विकास में क्या योगदान है?
यह उद्देश्य देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है। यह युवाओं को मजबूत चरित्र, अनुशासन, और नेतृत्व गुणों से लैस करता है, जो देश के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक विकास के लिए आवश्यक हैं। इसके साथ ही, यह सशस्त्र सेना में युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करके राष्ट्र की सुरक्षा में भी योगदान देता है।
आइए कुछ सवालों के माध्यम से बेहतर समझते हैं :
राष्ट्रीय कैडेट कोर का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
राष्ट्रीय कैडेट कोर का प्राथमिक उद्देश्य युवाओं को सुयोग्य नागरिक बनाना, उनमें चरित्र, साहस, मैत्री भाव, अनुशासन, नेतृत्व और निस्वार्थ सेवा की भावना का विकास करना है। इसके अतिरिक्त, कोर सशस्त्र सेना सहित जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्व प्रदान करने में सक्षम एक जनशक्ति का निर्माण करने का भी प्रयास करता है।
राष्ट्रीय कैडेट कोर युवाओं को किन गुणों का विकास करने के लिए प्रोत्साहित करता है?
राष्ट्रीय कैडेट कोर युवाओं को चरित्र, साहस, मैत्री भाव, अनुशासन, नेतृत्व, धर्मनिरपेक्ष दृष्टिकोण, साहसिक कार्य, खेल भावना और निस्वार्थ सेवा जैसे गुणों का विकास करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
राष्ट्रीय कैडेट कोर युवाओं को राष्ट्रीय सेवा के लिए कैसे तैयार करता है?
राष्ट्रीय कैडेट कोर युवाओं को प्रशिक्षित करके और उन्हें प्रेरित करके राष्ट्रीय सेवा के लिए तैयार करता है। यह उन्हें सशस्त्र सेना सहित जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्व करने में सक्षम बनाता है, जिससे वे राष्ट्रीय सेवा के लिए सदैव तत्पर रहें।
अनुशासन को पाठ में किस प्रकार परिभाषित किया गया है?
पाठ में अनुशासन को दो तरह से परिभाषित किया गया है: पहला, अपनी अंतरात्मा द्वारा बताए गए ईश्वर के आदेशों का पालन करना, और दूसरा, उचित अधिकार द्वारा दिए गए मानवीय आदेशों का पालन करना। यह स्पष्ट करता है कि अनुशासन आत्म-त्याग की नींव है, जो एक बेहतर उद्देश्य के लिए आवश्यक है।
राष्ट्रीय सेवा योजमा
उद्देश्य - सामाजिक सेवा द्वारा व्यक्तित्व विकास
राष्ट्रीय सेवा योजना छात्र-छात्राओं के व्यक्तित्व में सहिष्णुता, सहभागिता, सेवाभाव, स्वावलम्बन वस्वदेश-प्रेम जैसे गुणों को समाहित करने का प्रयास करती है।
राष्ट्रीय सेवा योजना का सिद्धान्त वाक्य "मैं नहीं परन्तु आप" (NOT ME BUT YOU)
राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) का मुख्य उद्देश्य छात्रों को सामुदायिक सेवा और सामाजिक कार्यों में शामिल करना है। यह युवाओं को समाज के प्रति संवेदनशील बनाता है और उनमें जिम्मेदारी की भावना पैदा करता है। NSS स्वयंसेवकों को विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर काम करने का अवसर मिलता है, जैसे कि स्वच्छता, शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण। इसका उद्देश्य छात्रों को समाज के सक्रिय और जिम्मेदार नागरिक बनाना है।
आइए कुछ सवालों के माध्यम से बेहतर समझते हैं :
देश की एकता एवं अखण्डता आपके कर्त्तव्यों के सफल संचालन में निहित है।
एकता और अखंडता एक राष्ट्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। वे समाज में सामंजस्य स्थापित करते हैं, जिससे सभी नागरिकों को समान अवसर मिलते हैं। एकता विभिन्न संस्कृतियों, भाषाओं और धर्मों के लोगों को एक साथ लाती है, जबकि अखंडता राष्ट्र की सीमाओं की सुरक्षा और संप्रभुता को सुनिश्चित करती है। यह देश की प्रगति और विकास के लिए आवश्यक है।
कर्त्तव्यों का सफल संचालन, व्यक्ति द्वारा अपनी जिम्मेदारियों को ईमानदारी, समर्पण और कुशलता से पूरा करने को दर्शाता है। इसमें समय पर काम करना, निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करना और दूसरों के साथ सहयोग करना शामिल है। सफल संचालन से व्यक्ति और समाज दोनों को लाभ होता है, जिससे बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं और राष्ट्र का विकास होता है।
एक स्कूल/कॉलेज परिसर के बुनियादी मूल्य क्या होने चाहिए
1. समस्त विद्यार्थियों को समान रुप से उच्च शिक्षा प्रदान करना।
2. विद्यार्थियों में मानवीय मूल्यों को विकसित करना ।
3. परिसर को उच्च शिक्षा के प्रतिष्ठित संस्थान के रूप में विकसित करना।
4. विद्यार्थियों को उनके विषयों में सर्वोत्तम ज्ञान से परिपूर्ण करना।
5. सुनहरे भविष्य की प्राप्ति के लिये विद्यार्थियों की प्रतिभा का पता लगाना एवं विकसित करना।
6. विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास के लिये उनकी पाठ्येत्तर प्रतिभाओं को उजागर करना।
एक उच्च शिक्षा के संस्थान से अपेक्षित उद्देश्य
आइए एक सवाल के माध्यम से बेहतर समझते हैं :
इस पाठ में उल्लिखित 'अनुकरणीय संस्थान' की क्या भूमिका है?
इस पाठ में उल्लिखित 'अनुकरणीय संस्थान' पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों को बढ़ावा देने और रोजगार के अवसर पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों को रोजगार देने के लिए एक मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा, जो स्थायी विकास के लिए प्रतिबद्ध होगा।
मानवीय मूल्यों के विकास में एक विद्यालय/परिसर का महत्व -
1. विद्यार्थियों में समानता का भाव विकसित करना ।
2. अध्यापकों, सहकर्मियों एवं कनिष्ठों का सम्मान करना।
3. लैंगिक संवेदीकरण के मूल्यों को आत्मसात करना।
4. पेर्यावरण निर्वात एवं स्वच्छता के प्रति जागरुकता विकसित करना।
5. समाज के कमजोर वर्गों के प्रति संग का भाव एवं सहानुभूति (करुणा) होना।–
आइए एक सवाल के माध्यम से बेहतर समझते हैं :
मानवीय मूल्यों का विकास क्यों महत्वपूर्ण है?
मानवीय मूल्यों का विकास छात्रों को समाज में सकारात्मक योगदान देने के लिए आवश्यक गुणों को विकसित करने में मदद करता है। यह समानता, सम्मान, लैंगिक संवेदीकरण, और पर्यावरणीय जागरूकता को बढ़ावा देता है, जिससे छात्र दूसरों के प्रति अधिक संवेदनशील और जिम्मेदार बनते हैं।
संकलन - पब्लिक डोमैन मे उपलब्ध जानकारी, अकादमिक समझ और शैक्षिक परिसरों के भ्रमण से जुड़ा अनुभव
- लवकुश कुमार
संकलनकर्ता और लेखक बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से भौतिकी मे स्नातक और आई आई टी दिल्ली से भौतिकी मे परास्नातक हैं और उनके लेखन का उद्देश्य समाज की उन्नति और बेहतरी के लिए अपने विचार साझा करना है ताकि उत्कृष्टता, अध्ययन और विमर्श को प्रोत्साहित कर देश और समाज के उन्नयन में अपना बेहतर योगदान दिया जा सके, साथ ही वह मानते हैं कि सामाजिक विषयों पर लेखन और चिंतन शिक्षित लोगों का दायित्व है और उन्हें दृढ़ विश्वास है कि स्पष्टता ही मजबूत कदम उठाने मे मदद करती है और इस विश्वास के साथ कि अच्छा साहित्य ही युवाओं को हर तरह से मजबूत करके देश को महाशक्ति और पूर्णतया आत्मनिर्भर बनाने मे बेहतर योगदान दे पाने मे सक्षम करेगा, वह साहित्य अध्ययन को प्रोत्साहित करने को प्रयासरत हैं।
जिस तरह बूँद-बूँद से सागर बनता है वैसे ही एक समृद्ध साहित्य कोश के लिए एक एक रचना मायने रखती है, एक लेखक/कवि की रचना आपके जीवन/अनुभवों और क्षेत्र की प्रतिनिधि है यह मददगार है उन लोगों के लिए जो इस क्षेत्र के बारे में जानना समझना चाहते हैं उनके लिए ही साहित्य के कोश को भरने का एक छोटा सा प्रयास है यह वेबसाइट ।
लेखक के विजन के बारे में जानने के लिए यहां क्लिक करें।
अगर आपके पास भी कुछ ऐसा है जो लोगों के साथ साझा करने का मन हो तो हमे लिख भेजें नीचे दिए गए लिंक से टाइप करके या फिर हाथ से लिखकर पेज का फोटो Lovekushchetna@gmail.com पर ईमेल करें।
अरे राजेश, ये किताब क्यों पैक कर रहे लिफाफे में?
मनीष भाई, गिफ्ट पैक हो रहा है गिफ्ट, अपने अतुल भाई की शादी के लिए।
अबे ! शादी में किताब कौन देता है?
क्यों? जरूरी है क्या जो परंपरा चल रही है उसी हिसाब से चले, कुछ नया नहीं कर सकते ?
भाई, मेरा मतलब है कि एंजॉयमेंट के दिन किताब !
अरे मनीष भाई उस दिन पढ़ने के लिए थोड़ी न है, यह तो एक पहल है कि जब दो लोग एक साथ मिल रहे हैं, एक दूसरे को उन्नति देने, एक दूसरे का साथ देने, एक दूसरे का ख्याल रखने को तो क्यों ना उस नेक काम की शुरुआत के आधार में एक अच्छी किताब हो, जिसकी कहानियां, नवयुगल में संवेदनशीलता लाएं, परस्पर सम्मान की भावना लाएं, एक दूसरे की गरिमा का सम्मान करने की इच्छा लाए, एक दूसरे की व्यक्तिगत चॉइस के साथ सामंजस्य बनाने की और समन्वय स्थापित करने की क्षमता निर्माण पर इशारा करें। इससे बढ़िया गिफ्ट और क्या हो सकता है जो उनकी शादी में प्रेम और आपसी सम्मान भरे और असहमति के बजाय सहमति के मुद्दों पर जोर देने को प्रेरित कर, हर निर्णय के केंद्र में जीवन की शांति को रखने को प्रेरित करें।
वह राजेश भाई बढ़िया लेक्चर देते हो, लेक्चर बाज आदमी हो एकदम, हाहाहा....
हां भाई क्यों नहीं, मेरे लेक्चर से अगर किसी के जीवन में शांति आ जाए तो मैं लेक्चर बाज ही सही।
दोनों हंसने लगते हैं..
एक नई पहल, एक बेहतरीन किताब, एक अमूल्य भेंट का रूप ले चुकी थी।
- लवकुश कुमार
लेखक भौतिकी में परास्नातक हैं और उनके लेखन का उद्देश्य समाज की उन्नति और बेहतरी के लिए अपने विचार साझा करना है ताकि उत्कृष्टता, अध्ययन और विमर्श को प्रोत्साहित कर देश और समाज के उन्नयन में अपना बेहतर योगदान दिया जा सके, साथ ही वह मानते हैं कि सामाजिक विषयों पर लेखन और चिंतन शिक्षित लोगों का दायित्व है और उन्हें दृढ़ विश्वास है कि स्पष्टता ही मजबूत कदम उठाने मे मदद करती है और इस विश्वास के साथ कि अच्छा साहित्य ही युवाओं को हर तरह से मजबूत करके देश को महाशक्ति और पूर्णतया आत्मनिर्भर बनाने मे बेहतर योगदान दे पाने मे सक्षम करेगा, वह साहित्य अध्ययन को प्रोत्साहित करने को प्रयासरत हैं,
जिस तरह बूँद-बूँद से सागर बनता है वैसे ही एक समृद्ध साहित्य कोश के लिए एक एक रचना मायने रखती है, एक लेखक/कवि की रचना आपके जीवन/अनुभवों और क्षेत्र की प्रतिनिधि है यह मददगार है उन लोगों के लिए जो इस क्षेत्र के बारे में जानना समझना चाहते हैं उनके लिए ही साहित्य के कोश को भरने का एक छोटा सा प्रयास है यह वेबसाइट ।
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जागरूकता, स्पष्टता और उत्साह के संचार के लिए "हारिए ना हिम्मत" पुस्तिका के वितरण का कार्य मैं अपने पंतनगर में तैनाती से कर रहा हूँ और यहाँ पिथौरागढ़ में भी अपने संपर्क में आने वाले लोगों/कर्मियों/अधिकारियों,कलाकारों और छात्रों को इसका वितरण किया हूँ ताकि वो इसे पढ़कर जीवन के मामलों में स्पष्टता हांसिल कर सकें और इस तरह खुद को परेशान, निरोत्साहित, अधीर करने और उधेड़ बुन में डालने वालों से विचारों से मुक्त हो सकें, अपने सामाजिक रिश्तों को सही परिप्रेक्ष्य में देखकर उन्हें उचित तरीके से बेहतर रूप में निभा सकें, अपने काम और तैयारी के बीच उचित प्राथमिकता लाकर उसमे संतुलन बैठा सकें और तो और अपने आस पास, मिलने वालों को बेहतर तरीके से जीवन से जुड़े मुद्दों पर राय दे सकें |
अगर आप भी स्वयं के लिए या अपने स्वजनों को भेंट स्वरुप इस पुस्तक को देना चाहते हैं तो नीचे दिए गए लिंक से इसे गायत्री परिवार की वेबसाइट पर इस पुस्तक को खरीद सकते हैं -
https://awgpstore.com/product?id=SC17
आपके निर्णय निर्माण के लिए इस किताब से मेरी कुछ सीख साझा कर रहा हूँ ताकि आप इसके महत्व को आसानी से समझ सकें :
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