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बचपन बचपन ( लघुकथा ) - मीरा जैन

दिव्यांम के जन्मदिन पर गिफ्ट में आए ढेर से  नई तकनीक के इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों में कुछ को  दिव्यम चला नहीं पा रहा था घर के अन्य सदस्यों ने भी हाथ आजमाइश की लेकिन किसी को भी सफलता नहीं मिली तभी कामवाली बाई सन्नो का 11 वर्षीय लड़का किसी काम से घर आया सभी को खिलौनों में बेवजह मेहनत करता देख वह बड़े ही धीमे में व संकोची लहजे में बोला -
'आंटी जी ! आप कहें तो मैं इन  खिलौनों को चला कर बता दूं' पहले तो मालती  उसका चेहरा देखती रही फिर मन ही मन सोच रही थी कि इसे दिया तो निश्चित ही तोड़ देगा फिर भी सन्नो का लिहाज कर बेमन से हां कर दी और देखते ही देखते मुश्किल खिलौनों को उसने एक बार में ही स्टार्ट कर दिया सभी आश्चर्यचकित थे , मालती ने सन्नो को हंसते हुए ताना मारा -
' वाह री सन्नो ! तू तो हमेशा कहती है पगार कम पड़ती है और इतने महंगे खिलौने छोरे को दिलाती है जो मैंने आज तक नहीं खरीदे '
 इतना ही सुनते ही सन्नों की आंखें नम हो गई उसने भरे गले से कहा- ' मैडम जी ! यह खिलौनों से खेलता नहीं बल्कि खिलौनों की दुकान पर काम करता है।'

- मीरा जैन

उज्जैन मध्य प्रदेश 


अपनी रचनाओं से संवेदना और स्पष्टता जगाने वाली विख्यात लेखिका श्रीमती मीरा जैन का जन्म 2 नवबंर 1960 को जगदलपुर  (बस्तर) छ.ग. में हुआ, आपने  लघुकथा , आलेख व्यंग्य , कहानी, कविताएं , क्षणिकाएं जैसी लेखन विधाओं में रचनाएं रचकर साहित्य कोश में अमूल्य योगदान दिया है और आपकी 2000 से अधिक रचनाएं विभिन्न भाषाओं की देशी- विदेशी पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। और आकाशवाणी सरीखे माध्यमों से जनसामान्य के लिए प्रसारित भी।          
आप अनेक मंचो से बाल साहित्य , बालिका महिला सुरक्षा उनका विकास , कन्या भ्रूण हत्या , बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ , बालकों के लैगिंग यौन शोषण , निराश्रित बालक बालिकाओं  को समाज की मुख्य धारा से जोड़ना स्कूल , कॉलेजों के विद्यार्थियों को नैतिक शिक्षा आदि के अनेक विषयो पर उद्बोधन एवं कार्यशालाएं आयोजित कर चुकी हैं।

पता
516 साईं नाथ कॉलोनी,सेठीनगर
 उज्जैन ,मध्य प्रदेश 
पिन-456010
मो.9425918116
jainmeera02@gmail.com

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आज्ञा की अवहेलना ( लघुकथा ) - मीरा जैन

जैसे ही जलज ने घर मे कदम रखा बुजुर्ग पिता ने बिना किसी लाग लपेट केअपने मन की बात कही या यूँ कहे आदेश दिया -
' बेटा !  मोहल्ले के कम्युनिटी हाल मे वास्तु के सामानों की शानदार प्रदर्शनी लगी है घर मे सुख- शांति, समृद्धि व खुशहाली आदि के लिए ढेर सारी वस्तुएं हैं आस पास के सभी महिला-पुरुष
आवश्यकतानुसार
 वस्तु ले लेकर आ रहे हैं बहू के साथ जाकर चार छ: वस्तुएं ले आ नहीं तो सारी अच्छी अच्छी वस्तुएं बिक जायेंगी '
जलज पिता की बातों से बेपरवाह सोफे पर पसर गया . अपने आदेश कीअवहेलना से खफा मोहन जी भी नाराज से अपने कमरे मे चले गई.
कुछ देर पश्चात जलज कमरे मे पहुँच पिता से मनुहार के अंदाज मे बोला -
' चलो पापा ! चाय बन गई है '
नाराजगी भरे स्वर मे मोहन जी ने जवाब दिया-
' अभी नहीं पीनी है मुझे चाय '
जलज ने पिता का हाथ अपने दोनों हाथों मे लेकर चूमते हुए कहा-
' जिसके पास पिता हो उसे किसी भी वास्तु की आवश्यकता नहीं होती
है  मेरे प्यारे पापा '
इतना सुन मोहन जी  भी भाव विभोर अपने बेटे को अपलक निहारने लगे बेटे द्वारा की गई आज्ञा की अवहेलना से मोहन जी की आँखें खुशी से नम हो गई थी।

- मीरा जैन

उज्जैन मध्य प्रदेश 


अपनी रचनाओं से संवेदना और स्पष्टता जगाने वाली विख्यात लेखिका श्रीमती मीरा जैन का जन्म 2 नवबंर 1960 को जगदलपुर  (बस्तर) छ.ग. में हुआ, आपने  लघुकथा , आलेख व्यंग्य , कहानी, कविताएं , क्षणिकाएं जैसी लेखन विधाओं में रचनाएं रचकर साहित्य कोश में अमूल्य योगदान दिया है और आपकी 2000 से अधिक रचनाएं विभिन्न भाषाओं की देशी- विदेशी पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। और आकाशवाणी सरीखे माध्यमों से जनसामान्य के लिए प्रसारित भी।          
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उपवास ( लघुकथा ) - मीरा जैन

समीर ने घर मे कदम रखते ही सामने अक्षय को देख प्रश्न किया-
' क्या बात है बेटा ! आज तुम खेलने नहीं गये तबियत तो ठीक है ?'
उत्साहित स्वर मे अक्षय ने जवाब दिया-
' पापा ! आज मम्मी  के साथ मैने भी निराहार उपवास किया है अब
उनके साथ पूजा भी करूंगा '
' क्या--- ' अवाक समीर का उत्तेजित स्वर उभरा-
' नीना ! ये क्या तमाशा है अक्षय से भी उपवास करवा लिया इस धर्म कर्म
को अपने तक ही सीमित रखो बच्चों के पीछे नहीं पड़ो समझी  '
नीना ने सफाई पेश की-
' समीर ! अब अक्षय कोई छोटा बच्चा नहीं पूरे चौदह वर्ष का हो चुका
 है और उसने स्वेच्छा से उपवास किया है और इसमे बुराई क्या है तन
 और मन के साथ
श्रेष्ठ समाज का निर्माण भी समाहित है '
समीर ने खीझते हुए पूछा-
' अब तक मैने सुना था उपवास से तन स्वस्थ व आत्मा पवित्र होती है ये
समाज बीच कहाँ से आ गया ?'
नीना ने गंभीरता पूर्वक धीमे से कहा-
' समीर ! बात दरअसल ये है मै चाहती हूँ अक्षय को ये भी ज्ञात हो कि
 भूख क्या होती है भूख का महत्व उसे मालूम होना ही चाहिये
 ताकि बड़ा होकर दीन- हीन , निर्धन व्यक्तियों के प्रति
इसके मन मे सहिष्णुता एवं उदारता के भाव हो भूखों को भोजन कराने
की लालसा इसके मन मे जागृत रहे कुछ नहीं तो किसी जरूरतमंद को हेय दृष्टि से तो नहीं देखेगा ये भी संस्कारों की अनमोल कड़ी है जो स्वस्थ समाज के लिये अति आवश्यक है '
उपवास के इस नये रूप ने समाज सेवी समीर को भाव विभोर कर दिया।

- मीरा जैन

उज्जैन मध्य प्रदेश 


अपनी रचनाओं से संवेदना और स्पष्टता जगाने वाली विख्यात लेखिका श्रीमती मीरा जैन का जन्म 2 नवबंर 1960 को जगदलपुर  (बस्तर) छ.ग. में हुआ, आपने  लघुकथा , आलेख व्यंग्य , कहानी, कविताएं , क्षणिकाएं जैसी लेखन विधाओं में रचनाएं रचकर साहित्य कोश में अमूल्य योगदान दिया है और आपकी 2000 से अधिक रचनाएं विभिन्न भाषाओं की देशी- विदेशी पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। और आकाशवाणी सरीखे माध्यमों से जनसामान्य के लिए प्रसारित भी।          
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चाह ( लघुकथा ) - मीरा जैन

 स्वाति को देखते ही गोमती का पारा सातवें आसमान में पहुंच गया
' देखो-देखो , इस महारानी को  बड़ी शान से चली आ रही है आज साल भर का इतना बड़ा दिन है,  लक्ष्मी पूजन का महत्त्व ही नहीं है इसके लिये, अरे ! रीति-रिवाज , धर्म-संस्कृति भी कोई चीज होती है केवल पैसे के पीछे भागने से कुछ नहीं होगा समझी, एक दिन नहीं जाती तो कौन सा तूफान आ जाता----.'
मां का गुस्सा देख संदीप भी सहम  गया स्वाति भी चुपचाप अपने कमरे में चली गई.  मां के सामने संदीप की हिम्मत नहीं हो रही थी कि स्वाति को खाने की टेबल पर बुला ले, तभी दरवाजा खुला और स्वाति हाथ मुंह धो, कपड़े बदल कर खाने की टेबल पर आ खाना खाने लगी लेकिन उसकी आंखों में आंसू देख संदीप ने कहा-
' रो क्यों रही हो , मां का गुस्सा भी वाजिब है कम से कम आज के दिन तो तुम्हे घर पर ही रहना चाहिए था '
जवाब मे स्वाति बोली-
'  संदीप ! ये खुशी के आंसू है , मां ने क्या-क्या कहा मुझे कुछ ध्यान नहीं है , मैं तो उस क्षण से अब तक अभिभूत हूं जब गायत्री के परिजनों ने मेरे पैर पकड़ कहा-
' आप साक्षात देवी की अवतार हैं आपने जच्चा और बच्चा दोनों को बचा लिया हम लोगों ने तो उम्मीद ही छोड़ दी थी दीपावली में हमारे घर भी लक्ष्मी आई है हम भगवान से प्रार्थना करते हैं कि वह भी आपकी तरह नेक दिल और सेवाभावी बने '
 और मालूम संदीप ! आज मैने  उनसे  ऑपरेशन की फीस भी नहीं ली'
 स्वाति की बात सुन रही सासु मां का दिल भर आया सोचने लगी-
 ' मैं अपनी बहू सी कब बनूंगी '

- मीरा जैन

उज्जैन म०प्र०


अपनी रचनाओं से संवेदना और स्पष्टता जगाने वाली विख्यात लेखिका श्रीमती मीरा जैन का जन्म 2 नवबंर 1960 को जगदलपुर  (बस्तर) छ.ग. में हुआ, आपने  लघुकथा , आलेख व्यंग्य , कहानी, कविताएं , क्षणिकाएं जैसी लेखन विधाओं में रचनाएं रचकर साहित्य कोश में अमूल्य योगदान दिया है और आपकी 2000 से अधिक रचनाएं विभिन्न भाषाओं की देशी- विदेशी पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। और आकाशवाणी सरीखे माध्यमों से जनसामान्य के लिए प्रसारित भी।          
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मीरा जैन - साहित्यकार परिचय

अपनी रचनाओं से संवेदना और स्पष्टता जगाने वाली विख्यात लेखिका श्रीमती मीरा जैन का जन्म 2 नवबंर 1960 को जगदलपुर  (बस्तर) छ.ग. में हुआ, परिचय:
शिक्षा      - स्नातक 
जीवन साथी- इंजि. वीरचंद जैन
माता - श्रीमती केशर देवी मोदी
पिता - श्री विनयचंद जी मोदी 

लेखन विधा- लघुकथा , आलेख व्यंग्य , कहानी, कविताएं , क्षणिकाएं आदि ।

पत्र-प्रत्रिकायें जिनमें रचनायें प्रकाशित हुई है 2000 से अधिक रचनाएं निम्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं- 
 कादम्बिनी , सरिता , गृहशोभा, हंस , नया ज्ञानोदय , सरस सलिल , अहा !जिदंगी , मेरी सहेली , गृहलक्ष्मी,  वनिता , बिंदिया. नवनीत , जागरण सखी , मेरी सजनी , वीणा , नई गुदगुदी , साहित्य अमृत, कथादेश, माधुरी , मनस्वी , वेद अमृत , मनोरमा, विश्व हिंदी साहित्य मारीशस, देवपुत्र , नंदन , बाल भरती, मंगलयात्रा , साक्षात्कार . स्वदेश , पंजाब सौरभ, बाल भास्कर, बाल हंस, बच्चो का देश, शबनम ज्योति,अणुव्रत, द्वीप लहरी, अमृत कलश, प्रभात खबर, समाज्ञा ,नई दुनिया, दैनिक जागरण, अमर उजाला,  समान्तर ,दैनिक भास्कर, नव भारत टाइम्स , राजस्थान पत्रिका ,हरिभूमि, प्रभात खबर, भारतदर्शन न्यूजीलैडं,  ,हिंदी चेतना(कनाडा) नवनीत , बाल किलकारी(बिहार सरकार), उजाला, पंजाब केसरी, जनवाणी, नवभारत , सेतू-.यू.एस.  कथा देश , अक्षरा, लोकमत , अक्षरा , चम्बा न्यूज , द राइजिंग स्टेप, साहित्य समीर दस्तक, विश्व गाथा, अक्षर खबर , संगिनी , साहित्य गुंजन, राज एक्सप्रेस , समावर्तन , दिव्यालोक , दैनिक अग्नि पथ ,अवन्तिका , अक्षर विश्व , शब्द प्रवाह, साहित्य समीर दस्तक , प्रभाश्री ज्ञान सागर आदि अनेक।
वे संग्रह जिनमे मेरी लघुकथाएॅ हैं-  तीसरी ऑख , द्वीप लहरी , समान्तर ,क्षितिज ,चर्चित ,मिन्नी (पंजाबी), सेतु , कालीमाटी ,दोहरे चेहरे , महा मानव , सागर के मोती, बुजुर्ग जीवन की, लघुकथाएं , कलश, दृष्टि, मन के मोती, गुलाबी गलियां आदि अनेक।
 नेपाली, गुजराती , पंजाबी , सिंधी , ओड़िया, बंगाली, असमिया, भोजपुरी,  अंग्रेजी,मलयालम , मराठी ,भाषा मेें भी अनुवाद एंव प्रकाशन।
आकाशवाणी जगदलपुर एवम् इंदौर से व्यंग्य,लघुकथाओं व अन्य रचनाओं का प्रसारण. म.प्र.दूरदर्शन से कविताओं का प्रसारण , बोल हरियाणा बोल तथा रेडियो दस्तक से प्रसारण।
 प्रकाशीत किताबें-
1- पुस्तक का नाम - मीरा जैन की सौ लघुकथाएं 
   प्रकाशन का वर्ष - सन् 2003 , 
   प्रकाशक       - मानव प्रकाशन
   द्वितीय संस्करण - प्रकाशन का वर्ष - सन् 2011 
   प्रकाश  - अध्ययन प्रकाशन ,दिल्ली
   तृतीय संस्करण - प्रकाशन का वर्ष - सन् 2013     
   चतुर्थ संस्करण - प्रकाशन का वर्ष - सन् 2016
2- पुस्तक का नाम - 101 लघुकथाएं
   प्रकाशन का वर्ष - सन् 2010दिसम्ब
 द्वितीय संस्करण जून2012 
 तृतीय संस्करण अगस्त 2014
   प्रकाशकश- पत्रिका प्रकाशन जयपुर , राज.
3- पुस्तक का नाम - दीन बनाता है दिखावा ,लेख,
 प्रकाशन का वर्ष - सितंबर 2013 
 द्वितीय संस्करण - प्रकाशन का वर्ष -2016
 प्रकाशक - बोधि प्रकाशन  जयपुर राज.
4- पुस्तक का नाम - मीरा जैन की कवितायें , कविता संग्रह ,      
    प्रकाशन का वर्ष - 2014
   प्रकाशक - अयन प्रकाशन दिल्ली
5- पुस्तक का नाम - सम्यक लघुकथाएं
   प्रकाशन का वर्ष - सन् 2016 फरवरी
   प्रकाशक  - बोधि प्रकाशन जयपुर , राज.
6- पुस्तक का नाम - श्रेष्ठ जीवन की संजीवनी 
प्रकाशन का वर्ष - फरवरी 2018  
 प्रकाशक   - बोधि प्रकाशन जयपुर , राज
7- पुस्तक का नाम - हेल्थ हादसा, व्यंग्य संग्रह,  
   प्रकाशन का वर्ष - मार्च 2019  
   प्रकाशक  - सूर्य मंदिर प्रकाशन
      8- पुस्तक का नाम - मानव मीत लघुकथाएं  
  प्रकाशन का वर्ष - मार्च 2019  
  प्रकाशक - सूर्य मंदिर प्रकाशन बीकानेर
पुस्तक का नाम-
 9-जीवन बन जाए आनंद का पर्याय,
लेख संग्रह 
 प्रकाशन वर्ष - 2020 
प्रकाशक -इंडिया नेट बुक, दिल्ली 
 पुस्तक का नाम -
10-भोर में भास्कर , लघुकथा संग्रह
प्रकाशन वर्ष    -  2022
 प्रकाशक इंडिया नेटवर्क नेट बुक दिल्ली 
11-मीरा जैन के सदाबहार लघुकथाएं 
प्रकाशक- जिज्ञासा प्रकाशन प्रकाशन- वर्ष 2023
 विशेष-                 
 2011में ‘‘ मीरा जैन की सौ लघुकथाएं‘‘विक्रम विश्व विद्यालय उज्जैन द्वारा शोध कार्य करावाया जा चुका है ।     

2022 - महाराष्ट्र, सावित्रीबाई फूले यूनिवर्सिटी पुणे द्वारा लघुकथाओं पर शोध कार्य जारी।

2024 - विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन द्वारा मेरी लघुकथाओं पर शोधकर जारी है

अनेक लघुकथाओं पर लघु फिल्मों का निर्माण

       सम्यक लघुकथाएं पूर्णतया बालकों से संबंधित श्रेष्ठ आचरण पर आधारित है .
       सन् 2007-8 में निर्धन वर्ग आयोग म.प्र.शासन राज्य स्तर पर मेरे द्वारा भेजे गये सुझावों को
       प्रथम प्रथमिकता में चयनित किया .  
       केंद्रिय मानव संसाधन विकास मंत्रालय तथा छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा मेरी किताबें क्रय  की  गई है ।
  अनेक भाषाओं में रचनाओं का अनुवाद एवं प्रकाशन
       पुरस्कार - अंतर्राष्ट्रीय , राष्ट्र एंव राज्य स्तरीय अनेक पुरस्कार- 
 नईदुनिया तथा टाटा शक्ति द्वारा लेखन के लिये  प्राइड स्टोरी अवार्ड 2014. 
 युग र्निमाण शिक्षण समिति तथा हिंदी साहित्य परिषद द्वारा हिंदी सेवा सम्मान 2015 से सम्मानित .
 पुस्तक 101 लघुकथाएं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम पुरूस्कार 2011 .
लघुकथा के लिये हस्ताक्षर संस्था द्वारा विशिष्ट पुरस्कार , 
दैनिक अग्नि पथ द्वारा वरिष्ठ लघुकथाकार साहित्य सम्मान 2013 ,
 शब्द प्रवाह साहित्य सम्मान 2013 , 
सामाजिक कार्यो में विशिष्ट योगदान एवम् साहित्यक उपलब्धियों हेतू नवकार सेवा संस्थान द्वारा विषिष्ट सम्मान .
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लेख को प्रथम पुरस्कार
महिला एवं बाल विकास उज्जैन संभाग म.प्र. द्वारा अंर्तराष्ट्रीय महिला दिवस 2016 में सम्मान , 
कथादेश द्वारा 2016 में लघुकथा पुरस्कृत . 
जे.एस.जी.आई.एफ. म.प्र.रीजन द्वारा विभिन्न क्षेत्रों की उपलब्धियॉ तथा समाज सेवा के क्षेत्र में  अद्वितीय कार्यो के लिये अवार्ड 2016-17 से नवाजा गया. 
अभिव्यक्ति मंच द्वारा कविता को राष्ट्रीय स्तर पर द्वितीय पुरस्कार 
जे.एस.जी.आई.एफ. द्वारा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट लेखन व समाज सेवा के क्षेत्र में आउट स्टेंडिंग परफारमेंस हेतू अवार्ड 2017 .
महिला सशक्तिकरण उज्जैन ने बेहतर समाज सेवा , समाजिक एकता व उत्कृष्ट लेखन के लिये अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2017 पर सम्मानित किया .  
       अभिव्यक्ति विचार मंच द्वारा राष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान 2017-18 से सम्मानित   आदि अनेक।
अखिल भारतीय साहित्य साधक मंच बंगलौर द्वारा राजभाषा साहित्य सम्मान
राष्ट्रीय संगठन सखी संगिनी द्वारा 2018 नारी सेवा सम्मान 
लघुकथाएं व लेख को विभिन्न संस्थाओं द्वारा 2018 में पुरस्कृत,

भोपाल से प्रकाशित मासिक पत्रिका 'साहित्य समीर दस्तक' एंव श्री विभगूंज वेलफेयर सोसायटी' द्वारा 'सम्यक लघुकथाएं' को 'शब्द गुंजन लघुकथा सम्मान-2018' से सम्मानित किया गया।

विचार प्रवाह मंच इंदौर द्वारा सम्मानित 2020
 डॉक्टर एस एन तिवारी  सम्मान 2021
अमृत महोत्सव के तहत माधव महाविद्यालय उज्जैन द्वारा श्रेष्ठ साहित्य साधिका सम्मान 2021

मातृ भाषा उन्नयन संस्थान भारत के द्वारा हिंदी दिवस 2022 सम्मानित
हिंदी साहित्य सम्मेलन बदनावर द्वारा साहित्य सम्मान 2022

मथुरा देवी स्मृति वट स्मृति षोडश सम्मान 20 22

हिंदी साहित्य अकादमी भोपाल द्वारा व्यंग्य संग्रह 'हेल्थ हादसा ' को शरद जोशी व्यंग्य सम्मान 2019

भारतीय साहित्य परिषद इंदौर द्वारा प्रादेशिक साहित्य गौरव सम्मान 2023

विचार प्रवाह साहित्यिक मंच  इंदौर द्वारा विशिष्ट लघुकथा के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान सम्मान 2023

इंटिग्रेटेड सोसायटी ऑफ मीडिया प्रोफेशनल लखनऊ द्वारा 
समग्र सहित्य पर मैथिली शरण गुप्त सम्मान 2022

अथाई समूह द्वारा सर्वश्रेष्ठ कथाकार सम्मान 2023

संस्था विद्यांजलि भारत मंच इंदौर द्वारा समग्र साहित्य पर धरोहर सम्मान 2023

 साहित्य संगीति जयपुर द्वारा लघुकथा संग्रह भोर में भास्कर को  सर्वोत्कृष्ट कृति जयपुर सम्मान 2024

अभिनव कला परिषद भोपाल द्वारा अभिनव शब्द शिल्पी अलंकरण से सम्मानित 2023

 अभ्युदय अंतरराष्ट्रीय महिला लेखन प्रेरणा पुरस्कार 2023

म. प्र लेखिका संघ भोपाल द्वारा लघुकथा संग्रह भोर में भास्कर के लिए राष्ट्रीय स्तर पर श्रीराजकुमार केसवानी सम्मान 2024

माता कौशल्या साहित्य संस्कृति शोध संस्थान वी डॉ.माया ठाकुर फाउंडेशन रायपुर द्वारा 
लघुकथा भूषण सम्मान 2024

रक्त मित्र फाउंडेशन मथुरा उत्तर प्रदेश द्वारा नारी शक्ति पद्मश्री सम्मान 2024

 पतंजलि योग समिति छत्तीसगढ़ द्वारा साहित्य सम्मान 2024

मां राजपति देवी स्मृति साहित्य सम्मान 2024-प्रयागराज

किस्सा कोतहा सम्मान आगरा 2024

राजराजेश्वरी म्यूजिकल ग्रुप इंदौर साहित्य सम्मान 2024

प्रेस क्लब ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट भोपाल द्वारा साहित्य सम्मान 2024
प्रांति इंडिया साहित्य सम्मान 2024
अभ्युदय अंतरराष्ट्रीय श्लाका
सम्मान 2024
अंतर्राष्ट्रीय सरस्वती साहित्य सम्मान 2025
श्रीमती आशा सुपेकर स्मृति सम्मान 2025

सम्प्रति-पूर्व सदस्य बाल कल्यााण समिति
 पद-प्रथम श्रेणी न्यायायिक मजिस्ट्रेट बोर्ड , बा.क.स 
 चेयर पर्सन-गर्ल सेव चाइल्ड कमेटी जे.एस.जी.आई.एफ. 2016-17-18 
2019 गृह मंत्रालय भारत सरकार द्वारा  देश के विद्ववानों की सूची में शामिल
             
अनेक मंचो से बाल साहित्य , बालिका महिला सुरक्षा उनका विकास , कन्या भ्रूण हत्या , बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ , बालकों के लैगिंग यौन शोषण , निराश्रित बालक बालिकाओं  को समाज की मुख्य धारा से जोड़ना स्कूल , कॉलेजों के विद्यार्थियों को नैतिक शिक्षा आदि के अनेक विषयो पर उद्बोधन एवं कार्यशाला ।

पता 
मीरा जैन 
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मो. बा-9425918116
https://www.meerajain.in
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संजय सिंह 'अवध' - साहित्यकार परिचय

श्री संजय सिंह, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण में सन् २०१२ से वायु यातायात नियंत्रण अधिकारी (ATCO) के रूप में कार्यरत हैं। 

“अवध” ये उपनाम इन्हें विद्यालय के दिनों में अपने भूगोल के अध्यापक से उपाधि के रूप में प्राप्त हुआ जिन्होंने इनको इस उपनाम से लिखने को प्रेरित किया। 

केंद्रीय विद्यालय बैरागढ़ भोपाल से विद्यालयीन शिक्षा ग्रहण करने के पश्चात, संजय सिंह “अवध” ने राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय भोपाल से इंजीनियरिंग में स्नातक प्राप्त किया।

बचपन से ही लेखन के शौकीन संजय सिंह “अवध” अभी तक कई सारे मंचों पर भी अपनी कविताओं की प्रस्तुति दे चुके हैं और अपने कालेज के दिनों से ही, जैसा कि इनकी रचनाओं से घोतक है, जन जन में संवेदना, करूणा और साहस भरने के साथ अंतर्विषयक समझ द्वारा उत्कृष्टता के पथ पर युवाओं को अग्रसर करने को प्रयासरत हैं।

आपने युवाओं से जुड़ने और उन्हें अनुनादित कर उनका श्रेष्ठ बाहर लाने के लिए अपना यूट्यूब चैनल ( यहां क्लिक करें ) भी बनाया है।

जैसा कि आपकी एक कविता उड़ान में उद्धृत है आप इस बात के हिमायती हैं कि व्यक्ति को खुलकर, अपने काम में उत्कृष्टता के दम पर ऊंची से ऊंची उड़ान को ध्येय बनाकर नैतिकता का साथ लिए हुए प्रयासरत रहना चाहिए।

क्योंकि आप शतरंज और बैडमिंटन भी खेलते हैं शौकिया तौर पर इस तरह खेल भावना भी झलकती है आपकी रचनाओं में, इसके साथ ही देश के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर अपनी सेवाएं देने का जो अवसर मिला और उससे प्राप्त अनुभव का पुट भी रहता है आपकी रचनाओं में और ये तत्व इन्हें एक अलग ही कलेवर देते हैं जो पाठकों में रुचि जगाने और स्पष्टता देने में सफल साबित होता है।

लेखक, कवि और चिंतक, श्री संजय सिंह 'अवध' की रचनाओं को उनके ब्लॉग ( यहां क्लिक करें ) से भी पढ़ा जा सकता है और उनकी ईमेल से उनसे संपर्क साधा जा सकता है - green2main@yahoo.co.in

युवाओं से संपर्क में नियमितता बनी रहे इसके लिए आपका वाट्सऐप चैनल ( यहां क्लिक करें ) भी है।

ज्यादा से ज्यादा लोग लाभान्वित हों आपकी रचनाओं से, इसी विश्वास के साथ।

लवकुश कुमार 

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सुख की कामना (लघुकथा ) - सौम्या गुप्ता

सुबह-2 गुलाबी ठंड को महसूस करती हुई स्तुति ने अपने मन में सोचा - अब तो और भी ज्यादा ठंड पड़ेगी, धूप नहीं निकलेगी, कपड़े नहीं सूखेंगे, दूसरी कितनी ही परेशानियां होंगी। हमेशा जब ज्यादा ठंडी होती है या ज्यादा गर्मी होती है तब हमें परेशानी होती है। हमें बसंत (मिलता-जुलता गर्मी-ठंडी का मौसम) बहुत पसंद आता है। अचानक एक बिजली सा विचार आया कि ये मिलता -जुलता मौसम हम अपनी जिंदगी में क्यों नहीं चाहते? सिर्फ सुख की कामना क्यों?

-सौम्या गुप्ता 


सौम्या गुप्ता जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं |


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इंसानियत (लघुकथा) - सुषमा सिन्हा

इंसानियत

गांव की कच्ची-पक्की सड़कें, ऊपर से बरसात का मौसम। जहां-तहां फिसलन और गड्ढे। वह ग्रामीण हाथ में छाता लिये जल्दी में कहीं जा रहा था।

अचानक से एक बाइक ठीक उसके बगले से गुजरी और देखते ही देखते पलट गयी। बाइक सवार लड़का हेलमेट में था, वरना बड़ी घटना घट सकती थी। बाइक के नीचे से वह खुद को निकालने का प्रयास करने लगा, किन्तु पैर में चोट आने की वजह से वह ऐसा नहीं कर पा रहा था। मदद के लिए आवाज देने लगा क्योंकि दो बाइक सवार एक साथ आते हुए दिखे, किन्तु वे दोनों बाइक सवार आगे जाकर रूके सो रुके ही रह गये।ग्रामीण से रहा नहीं गया। वह तेज चाल से चलते हुए घायल लड़के तक
पहुंचा और बड़ी मुश्किल से उसे बाहर निकालने में सफल हुआ। लड़का
जैसे-तैसे लड़खड़ाता हुआ खड़ा होकर उस ग्रामीण के प्रति कृतज्ञता प्रकट
करते हुए धन्यवाद बोला। फिर पलटकर सामने देखा। एक तरफ इंसानियत
जिन्दा थी तो दूसरी तरफ दम तोड़ रही थी। वे दोनों बाइक सवार अब तक
उसकी वीडियो बनाने में व्यस्त दिख रहे थे।

© सुषमा सिन्हा, वाराणसी 

ईमेल- ssinhavns@gmail.com

 आदरणीय सुषमा सिन्हा जी का जन्म वर्ष 1962 में गया (बिहार) में हुआ, इन्होने बीए ऑनर्स (हिंदी), डी. सी. एच., इग्नू (वाराणसी) उर्दू डिप्लोमा में शिक्षा प्राप्त की|

विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में विगत 32 वर्षों से कविता, लघु कथा, कहानी आदि प्रकाशित । इनकी प्रकाशित पुस्तकें निम्नलिखित हैं :-

पांच लघुकथा संग्रह

1. औरत (2004)

2. राह चलते (2008)

3. बिखरती संवेदना (2014)

4. एहसास (2017)

5. कथा कहानी (2023)

अपने शिल्प में निपुण सुषमा जी में अथाह सृजनशीलता है। 

अपनी सिद्ध लेखनी से सुषमा जी जीवन के अनछुए पहलुओं पर लिखती रही हैं और लघु कथा विधा को और अधिक समृद्धशाली कर रही हैं लेखिका और उनके लेखन, शिक्षा और सम्मान के बारे में जानने के लिए यहाँ क्लिक  करें |

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शुभकामनाएं

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हंसी (लघुकथा) - सुषमा सिन्हा

सात वर्षीय सोनू पढ़ रहा था कि अचानक वह कहने लगा, पापा आप मम्मी के बारे में एक बात सुनेंगे तो आपको हंसी आ जायगी। पापा ने भी उसी भोलेपन से पूछा, बताओ, मम्मी ऐसा क्या करती है कि तुम्हें हंसी आती है और मुझे भी हंसी आ जायगी। अब वह पापा के. और करीब आकर कहने लगा, जानते हैं पापा, मैं जब भी मम्मी के साथ मन्दिर जाता हूं तो देखता हूं । मम्मी भगवान जी के सामने एक थाली में लड्डू-पेड़े, फल, सब रखकर थोड़ी देर आंखें बंद कर लेती है फिर उसे उठा लेती है और कहती है कि भगवान जी ने खा लिया। उसके बाद वही लड्डू-पेड़े मुझे देती है कि प्रसाद खा लो, लेकिन पापा मैं हमेशा काउण्ट करता हूं।

भगवान जी एक भी फल-मिठाई नहीं खाते हैं। भगवान जी बोलते नहीं हैं, लेकिन मम्मी पता नहीं कैसे सुन लेती है। मांगते भी नहीं, तो भी मम्मी उन्हें लड्डू-पेड़ा देती है। खाते भी नहीं, परन्तु कहती है खा लिये। दादी तो बोलती है, सुनती भी है, मांगती भी है, उन्हें भूख भी लगती है, लेकिन मम्मी को जल्दी सुनायी ही नहीं देता। अब बताइये पापा, मम्मी सबकुछ उल्टा-पुल्टा करती है कि नहीं। इतना कहने के बाद सोनू, पापा के मुख को गौर से देखने लगा। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि पापा को हंसी क्यों नहीं आ रही है।

© सुषमा सिन्हा, वाराणसी 

ईमेल- ssinhavns@gmail.com

 आदरणीय सुषमा सिन्हा जी का जन्म वर्ष 1962 में गया (बिहार) में हुआ, इन्होने बीए ऑनर्स (हिंदी), डी. सी. एच., इग्नू (वाराणसी) उर्दू डिप्लोमा में शिक्षा प्राप्त की|

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पांच लघुकथा संग्रह

1. औरत (2004)

2. राह चलते (2008)

3. बिखरती संवेदना (2014)

4. एहसास (2017)

5. कथा कहानी (2023)

अपने शिल्प में निपुण सुषमा जी में अथाह सृजनशीलता है। 

अपनी सिद्ध लेखनी से सुषमा जी जीवन के अनछुए पहलुओं पर लिखती रही हैं और लघु कथा विधा को और अधिक समृद्धशाली कर रही हैं लेखिका और उनके लेखन, शिक्षा और सम्मान के बारे में जानने के लिए यहाँ क्लिक करें |


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सही दरवाजा (लघुकथा) - सौम्या गुप्ता

सहर्ष और प्रतीक्षा चाय के ढाबे पर बैठे हुए चाय की चुस्कियां ले रहे थे तभी सहर्ष ने कहा, पता है प्रतीक्षा आपसे पहले मैंने अपने कई मित्रों और परिचितों से मेरी पत्रिका के लिए लेख लिखने का अनुरोध किया, कुछ तो अच्छे पदों पर है और अच्छे संस्थानों से भी पढ़े हुए भी है पर किसी ने यह अनुरोध नहीं स्वीकार किया, किसी ने समय का बहाना बनाया किसी ने दूसरे बहाने बनाए और आपने मेरे एक बार कहने पर ही अपने लेखों को प्रकाशन हेतु देना शुरू कर दिया।

प्रतीक्षा ने कहा, सहर्ष दरअसल बात यह नहीं है कि आपने इतने लोगों से कहा, ये कुछ गलत दरवाजे पर दस्तक देने जैसा है, आपने सही दरवाज़े पर दस्तक दी इसीलिए आपको अपनी पत्रिका के लिए लेखिका भी मिल गई।

अब तो आपकी पत्रिका के लिए कितने ही लेखक और लेखिकाओं ने अपनी रचनाएं देनी शुरू कर दी है।

सहर्ष ने कहा, आप सही कह रही हो प्रतीक्षा, मैंने ही सही दरवाजे पर दस्तक नहीं दी, आज आप और दूसरे रचनाकार मेरी पत्रिका के लिए लिख रहे हो और इससे पहले भी जो लोग कर सकते थे, जिनको मैं खुद को अभिव्यक्त करने का मौका देना चाहता था, उन्होंने नहीं लिखा।

प्रतीक्षा ने कहा, आप सही कह रहे हैं, लेखन के लिए लेखकों से कहना ही बेहतर है, बजाय इसके कि हम नये लोगों को लेखक बनाने का प्रयास करे।

सौम्या गुप्ता जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं |


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