एक बात जिसको लेकर मैं पूरी तरीके से आश्वस्त हूं कि हमारे आसपास के माहौल में जहां हम उठते- बैठते हैं जिनसे मिलते हैं जो कुछ देखते-सुनते हैं वहां पर जिस तरह की बातें और कार्य हमें दिखाई देते हैं कहीं ना कहीं हम उनकी तरफ इंक्लाइन हो जाते हैं या हम कहें कि हम उनके बारे में सोचते हैं तो इसी बात को ध्यान में रखते हुए मुझे लगता है कि जो बदलाव समाज में जरूरी हैं या जिन बातों, जिन मुद्दों पर लोगों का ध्यान खींचना जरूरी है हम उन्हें अपने सोशल मीडिया के द्वारा अन्य लोगों तक पहुंचाएं ताकि वह भी समाज में सकारात्मक और बेहतर बदलाव के लिए उन विषयों पर सोचें, जानकारी हासिल करें और स्पष्टता मिलने के बाद उन्हें आगे बढ़ाएं ताकि अन्य लोग भी उन पर काम कर सकें और अपनी समझ को पुख्ता कर सके, इस कैटेगरी के लेख इसी उद्देश्य लिखे जाएंगे ताकि सीधे आप अपने सोशल मीडिया या कहें कि व्हाट्सएप के स्टेटस और जो अन्य सोशल मीडिया के उपकरण है उन पर साझा करके जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए अपना योगदान कर सकें, अगर कोई जरूरी बात हमारे दोस्तों की लिस्ट में 5-6 लोग भी साझा कर दें तो हम उस पर सोचने पर जरूर विचार करेंगे कि हां कई लोगों ने लिखा है तो यह बात क्या है फिर बात चाहे वह संवेदनशीलता की हो, ईमानदारी की हो प्रतिबद्धता की हो या सच्चाई की हो लोग उस पर सोचेंगे फिर वह केवल किताबी बातें नहीं रह जाएंगी क्योंकि अब वह माहौल में आ रही है लोग उस पर बात करेंगे उनके फायदे के बारे में जानेंगे।
शुभकामनाएं
- लवकुश कुमार
लेखक भौतिकी में परास्नातक हैं और उनके लेखन का उद्देश्य समाज की उन्नति और बेहतरी के लिए अपने विचार साझा करना है ताकि उत्कृष्टता, अध्ययन और विमर्श को प्रोत्साहित कर देश और समाज के उन्नयन में अपना बेहतर योगदान दिया जा सके, साथ ही वह मानते हैं कि सामाजिक विषयों पर लेखन और चिंतन शिक्षित लोगों का दायित्व है और उन्हें दृढ़ विश्वास है कि स्पष्टता ही मजबूत कदम उठाने मे मदद करती है और इस विश्वास के साथ कि अच्छा साहित्य ही युवाओं को हर तरह से मजबूत करके देश को महाशक्ति और पूर्णतया आत्मनिर्भर बनाने मे बेहतर योगदान दे पाने मे सक्षम करेगा, वह साहित्य अध्ययन को प्रोत्साहित करने को प्रयासरत हैं, जिस तरह बूँद-बूँद से सागर बनता है वैसे ही एक समृद्ध साहित्य कोश के लिए एक एक रचना मायने रखती है, एक लेखक/कवि की रचना आपके जीवन/अनुभवों और क्षेत्र की प्रतिनिधि है यह मददगार है उन लोगों के लिए जो इस क्षेत्र के बारे में जानना समझना चाहते हैं उनके लिए ही साहित्य के कोश को भरने का एक छोटा सा प्रयास है यह वेबसाइट ।
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गरिमा - आभा एक बात तो बता जरा।
आभा - हाँ गरिमा, पूछो?
गरिमा - संपादक महोदय जब मुझे लेखिका महोदया बुलाते हैं तो मुझे बहुत अच्छा लगता है जबकि नाम से जब वो बुलाते हैं तो इतना अच्छा नहीं लगता, ऐसा क्यों?
आभा - तू जवाब जानती है, फिर भी मुझसे पूछ रही है। लेखिका तो तू है, तुझे पता होना चाहिए और आभा हंसने लगती है।
गरिमा मुस्कुराते हुए- तू ऐसा ही समझ ले, अब बता।
आभा - इस संबोधन में तुम्हारे काम (लेखन) को महत्व दिया जा रहा है, जो तुम्हारा भी महत्व है, हर व्यक्ति खुद को महत्वपूर्ण समझना चाहता है और इसके संबोधन में तो तुम्हारे काम व तुम्हे दोनों को महत्व मिलता है, इसीलिए अच्छा लगता है दूसरे शब्दों में
'लेखिका' शब्द गरिमा तुम्हारे पेशे और पहचान का प्रतीक है। जब संपादक तुम्हे 'लेखिका' कहते हैं, तो वह तुम्हारे काम को मान्यता देते हैं और तुम्हे यह महसूस कराते हैं कि तुम एक पेशेवर हो और तुम सम्मानित महसूस कराती हो।
ठीक है न लेखिका महोदया ? और दोनों हंसने लगती हैं।
© सौम्या गुप्ता
सौम्या गुप्ता जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं |
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एक चोर, चोरी तब ही छोड़ता है जब वो स्वीकार कर लें कि चोरी एक ग़लत कृत्य है।
