Recent Articles Related To बच्चों के लिए साहित्य, उनके लिए सही आदर्श

उम्र ( लघुकथा ) - लवकुश कुमार

जीवन में बहुत से संयोग होते हैं, सुखद भी और दुखद भी, ऐसा ही एक संयोग मेरे साथ हुआ। सड़क दुर्घटना में मेरे बाएं हाथ की कालर बोन टूट गयी,हालत ये हुई कि, कुछ देर लेटना, कुछ देर बैठना। ऐसे ही एक दिन पत्नी मुझे बिस्तर पर लिटाकर गई और मेरा फोन चार्जिंग पर मुझसे कुछ दूरी पर लगा हुआ था, फोन की घण्टी बजती है। पत्नी मेरे बेटे को मुझे मोबाइल देने के लिए भेजती है पर जब तक बेटा आता है, फोन कट जाता है। इसीलिए बेटा मोबाइल मेरे पास रखकर चल देता है, मैं अपना मोबाइल उठाने की कोशिश में अपना हांथ बेड पर इधर उधर रख रहा था पर दोनों कंधों में क्लैविकल ब्रेस बंधा होने के चलते मेरे हाथ की गति ठीक से नहीं हो पा रही थी, मैं बस कोशिश कर रहा था, इतने में खेलने के लिए वापस जाते हुए मेरे बेटे ने अपने पिता को देख, दिक्कत को समझ लिया, वह आता है और मोबाइल को बेड से उठाकर मेरे हाथ में रखकर फिर खेलने चला जाता है। मैं अपने 6 साल के बेटे की संवेदनशीलता, तत्परता को देख मुग्ध हो जाता हूँ और सोचता हूँ कि क्या संवेदनएं हममें जन्म से होती हैं शायद जरूरत है तो सही माहौल और प्रोत्साहन देकर इन्हें बनाए रखने की, शायद बच्चों की संवेदनाओं को सामाजिक व्यवहार ही भ्रष्ट कर देता है। सच ही कहा जाता है कि अपने बच्चे को कुछ भी बड़ा बनाने से पहले उसे नेक इंसान बनाएं। वह समाज के साथ साथ आपके भी काम आएगा, हां अगर आपने उसे मतलबी बना दिया तो हो सकता है कि जरूरत निकल जाने पर वो आपसे भी परायों की तरह व्यवहार करें।

लवकुश कुमार 


लेखक भौतिकी में परास्नातक हैं और उनके लेखन का उद्देश्य समाज की उन्नति और बेहतरी के लिए अपने विचार साझा करना है ताकि उत्कृष्टता, अध्ययन और विमर्श को प्रोत्साहित कर देश और समाज के उन्नयन में अपना बेहतर योगदान दिया जा सके, साथ ही वह मानते हैं कि सामाजिक विषयों पर लेखन और चिंतन शिक्षित लोगों का दायित्व है और उन्हें दृढ़ विश्वास है कि स्पष्टता ही मजबूत कदम उठाने मे मदद करती है और इस विश्वास के साथ कि अच्छा साहित्य ही युवाओं को हर तरह से मजबूत करके देश को महाशक्ति और पूर्णतया आत्मनिर्भर बनाने मे बेहतर योगदान दे पाने मे सक्षम करेगा, वह साहित्य अध्ययन को प्रोत्साहित करने को प्रयासरत हैं, 

जिस तरह बूँद-बूँद से सागर बनता है वैसे ही एक समृद्ध साहित्य कोश के लिए एक एक रचना मायने रखती है, एक लेखक/कवि की रचना आपके जीवन/अनुभवों और क्षेत्र की प्रतिनिधि है यह मददगार है उन लोगों के लिए जो इस क्षेत्र के बारे में जानना समझना चाहते हैं उनके लिए ही साहित्य के कोश को भरने का एक छोटा सा प्रयास है यह वेबसाइट ।


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बचपन की मुस्कान - संजय सिंह 'अवध' ( बाल दिवस विशेष )

चलो जवानी की गलियों में,
बचपन की मुस्कानखोजने,
चालाकी से भरे स्वरों में,
वो मासूम ज़ुबान खोजने,

"आँखों में" खिलते सपनों से,
नींदें जो भी टूट गई थी,
चलो आज फिर उन
"नींदों में" फिर से 
वही उड़ान खोजने।

 संजय सिंह 'अवध'


ईमेल- green2main@yahoo.co.in

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उक्त मन को छूने वाली कविता के रचयिता भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण में ATC अधिकारी हैं और अपने कालेज के दिनों से ही, जैसा कि इनकी रचनाओं से घोतक है, जन जन में संवेदना, करूणा और साहस भरने के साथ अंतर्विषयक समझ द्वारा उत्कृष्टता के पथ पर युवाओं को अग्रसर करने को प्रयासरत हैं।

कवि के बारे में विस्तार से जानने के लिए यहां क्लिक करें।


कविता में 'ज़ुबान खोजने' का क्या अर्थ है?

'ज़ुबान खोजने' का अर्थ है, बचपन की भोली-भाली बातों और मासूमियत को वापस पाना। यह उन शब्दों और भावनाओं को खोजने की बात करता है जो हम बड़े होते हुए खो देते हैं।

इस कविता का केंद्रीय विचार क्या है?

इस कविता का केंद्रीय विचार जीवन के सफर में बचपन की यादों को संजोना, सपनों को पुनर्जीवित करना और फिर से उड़ान भरने की प्रेरणा लेना है।


इस कविता पर अपनी राय या प्रतिक्रिया आप संपर्क फॉर्म से भेज सकते हैं या lovekushchetna@gmail.com पर ईमेल कर सकते हैं।

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एक बचपन का जमाना था - डॉ अनिल वर्मा ( बाल दिवस विशेष )

एक बचपन का जमाना था,

जिस में खुशियों का खजाना था..

चाहत चाँद को पाने की थी,

पर दिल तितली का दिवाना था..

खबर ना थी कुछ सुबहा की,

ना शाम का ठिकाना था..

थक कर आना स्कूल से,

पर खेलने भी जाना था..

माँ की कहानी थी,

परीयों का फसाना था..

बारीश में कागज की नाव थी,

हर मौसम सुहाना था..

हर खेल में साथी थे,

हर रिश्ता निभाना था..

गम की जुबान ना होती थी,

ना जख्मों का पैमाना था..

रोने की वजह ना थी,

ना हँसने का बहाना था..

क्युँ हो गऐे हम इतने बडे,

इससे अच्छा तो वो बचपन का जमाना था।

इसलिए चाहे सिर पर न हो बाल

तब भी जीवन जियो बच्चों सा धमाल

 यदि है जीवन में कुछ उमंग 

कुछ शौक, कुछ तरंग

लगते हो तब ही जीवित से

वरना लगे जीवन में है बैरंग 

बाल दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 

- डॉ अनिल वर्मा 


डॉ अनिल वर्मा, कृषि रसायन में परास्नातक हैं और गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर उत्तराखंड में कृषि रसायन पर शोध कार्य कर चुके हैं।

इनके द्वारा शिक्षण और साहित्य के अध्ययन/अध्यापन का अनुभव एक बेहतर समाज के लिए उपयोगी है |

इस वेबसाइट पर लेखक द्वारा व्यक्त विचार लेखक/कवि के निजी विचार हैं और लेखों पर प्रतिक्रियाएं, फीडबैक फॉर्म के जरिये दी जा सकती हैं|

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भारत और विश्व के महान व्यक्तित्व -2

बच्चों को इन महान विभूतियों के बारें में पढ़ायें और उन्हें गुणवान तथा उच्च आदर्शों वाला इंसान बनाये, फिर वो ना छोटी बातों पर परेशान होंगे और ना ही छोटी बातों में फंसेंगे, फिर उनके उद्देश्य भी बड़े होएँगे और उनके काम में उत्कृष्टता दिखेगी और साथ ही वो दूसरों की दिक्कत के प्रति संवेदनशील भी होंगे और परिस्थितियों के साथ सामंजस्य बिठाकर सही और त्वरित निर्णय ले पाएंगे |

अच्छा हो कि इनकी जीवनी पर आधारित पुस्तकें एक डिस्प्ले रैक में लगा दें बच्चों के अध्ययन कक्ष में |

स्वयं भी पढ़ें और बच्चों के साथ प्रेरणादायक प्रसंग साझा करें |

1

डॉ राजेंद्र प्रसाद - भारत के प्रथम राष्ट्रपति

2

गणेश शंकर विद्यार्थी - त्याग और बलिदान के आराधक

3

सेठ जमनलाल बजाज-एक और भामाशाह

4

कार्ल मार्क्स - दास कैपिटल के लेखक और प्रतिनिधित्व के हिमायती 

5

राष्ट्रमाता कस्तूरबा गांधी - भारतीय नारियों के लिए आदर्श 

6

महावीर स्वामी- अहिंसा और अपरिग्रह के प्रतीक (जैन सिद्धांत )

7

प्रफुल्ल चंद्र राय- विद्या और पदवी लोक कल्याण के उद्देश्य के लिए 

8

जगद्गुरु शंकराचार्य- अपनी माँ से कहते हैं सैकडो, लाखों माताओं की रक्षा, बालकों को अज्ञान और आडंबर के महापाप से बचाने के लिए यदि तुझे अपने बेटे का बलिदान करना पड़े, तो क्या तुझे प्रसन्नता नहीं होगी ?

9

स्वामी दयानंद सरस्वती - आर्य समाज की स्थापना 

10

महात्मा बुद्ध - बौद्ध धर्म की स्थापना - अप्पो दीपो भव

11

रानी लक्ष्मी बाई - आदर्श वीरांगना

12

बहन निवेदिता - भारतीय संस्कृति की अनन्य आराधिका

13

गुरुनानकदेव - व्यवहारिक अध्यात्मवाद, एक महान समाज सुधारक

14

स्वामी रामतीर्थ - व्यावहारिक वेदांत के प्रचारक, त्याग और तपस्या का विद्यार्थी जीवन, परोपकार की सक्रिय साधना

15

महायोगी अरविंद - नव जागरण के देवदूत

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

इन जीवनियों को आप किफायती लागत में गायत्री परिवार की वेबसाइट से भी प्राप्त कर सकते हैं |

ऐसी ही किताबों के लिए लिंक

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भारत और विश्व के महान व्यक्तित्व -1

बच्चों को इन महान विभूतियों के बारें में पढ़ायें और उन्हें गुणवान तथा उच्च आदर्शों वाला इंसान बनाये, फिर वो ना छोटी बातों पर परेशान होंगे और ना ही छोटी बातों में फंसेंगे, फिर उनके उद्देश्य भी बड़े होएँगे और उनके काम में उत्कृष्टता दिखेगी और साथ ही वो दूसरों की दिक्कत के प्रति संवेदनशील भी होंगे और परिस्थितियों के साथ सामंजस्य बिठाकर सही और त्वरित निर्णय ले पाएंगे |

अच्छा हो कि इनकी जीवनी पर आधारित पुस्तकें एक डिस्प्ले रैक में लगा दें बच्चों के अध्ययन कक्ष में |


1. होमी भाभा - नाभिकीय प्रोग्राम 
2. सी. वी. रमन ( रमन इ‌फेक्ट )- नोबेल पुरस्कार 
3. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम (मिसाइल मैन)
4. विक्रम साराभाई (अंतरिक्ष वैज्ञानिक)
5. Sardar V. Patel. (freedom fighter)
6. Subhas C. Bose (freedom fighter)
7. Jawahar lal Nehru (freedom fighter)
8. P.C. Ray 
9. श्री विश्वे श्वरैया बृहत भारत के विश्वकर्मा 
10. सेठ जमनालाल बजाज
11. महात्मा गाँधी  (वर्तमान जगत के युग पुरुष )
12.संत विनोबा भावे 
13. ईश्वर चन्द्र विद्यासागर सुधार तथा परोपकार के देवता
14. संत सुकरात (सेवा और सहिष्णुता के आदी) 

15. अब्राहम लिंकन - मानव समानाधिकार के सूत्रधार  

इन जीवनियों को आप किफायती लागत में गायत्री परिवार की वेबसाइट से भी प्राप्त कर सकते हैं |

अब्राहम लिंकन और अन्य के लिए लिंक

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बच्चों के लिए कैरियर से जुड़े कुछ शब्द, उनका मतलब और महत्व -1

बच्चे बड़े होकर क्या बनना चाहते हैं, ये अमूमन माहौल से निर्धारित होता है या दूसरा की उन्हे एक्सपोजर कैसा मिला 

कुछ शब्द जो कैरियर बन सकते हैं, महत्व और योगदान दर्शाते हैं एक समाज के स्थायित्व के लिए 

उनके बारे मे  कुछ बातें यहाँ दी जा रही हैं :कुछ और पेशे आगे के लेख मे साझा किए जाएंगे |

क्रम संख्या पेशा योगदान और महत्व  कुछ उदाहरण 
1 साहित्यकार  लोगों को जीवन, दुनिया,चीजों, जगहों, समाज और खुद को लेकर समझ बेहतर हो इसके लिए किताबें, लेख, कवितायें, उपन्यास, निबंध, जीवनी, आत्मकथा रिपोर्ताज आदि लिखते हैं | मुंशी प्रेमचंद, शरत चन्द्र चट्टोपाध्याय, मनु भण्डारी, नागार्जुन, मुक्तिबोध आदि 
2 शिक्षक एक बेहतर, सजग, संवेदनशील, जागरूक, बहादुर, कौशलयुक्त और समझदार नागरिक बनाने के उद्देश्य से बच्चों को शिक्षित करते हैं | आपके स्कूल के शिक्षक/शिक्षिकाएँ जिनसे पढ़कर आपको अच्छा लगता है |
3 डॉक्टर लोग स्वस्थ रहकर अपना जीवन खुशी से जी सकें और खूब काम कर सकें, लोगों की मदद कर सकें इसके लिए बीमार पड़ने पर उनका इलाज़ करते हैं | आपके शहर, आपके प्रदेश, देश के वो डॉक्टर जिन्होंने आपको स्वस्थ करने मे भूमिका निभाई |
4 इंजीनियर 

हमारे जीवन को आसान बनाने के लिए मशीन, सड़कों, रेल, पुलों, इमारतों, सॉफ्टवेअर,बिजली उपकरणो, कारखानो का निर्माण आदि 

एम॰ विश्वेसरैया, ई॰ श्रीधरन आदि

 

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बच्चों के लिए साहित्य- उनके लिए सही आदर्श - श्रृंखला परिचय

आज आप बहुतायत संख्या में पाएंगे कि लोग कहते हैं कि आज की पीढ़ी ऐसी है, इनमें ये कमी है वो कमी है, जो भी कमियां या बुराइयां हैं तो उनका दोषी है कौन ?

 

बच्चों को जीवन मूल्य मिलते हैं उनके घर, स्कूल और मोहल्ले के माहौल से, साहित्य और सिनेमा से।

 

बच्चे आदर्श मानते हैं उन्हें जिनका सम्मान उनके बड़े करते हैं।

 

अगर आप आज अपने स्वार्थवश ग़लत इंसान का सम्मान करेंगे तो आपके बच्चे भी वैसे ही बनेंगे।

 

 

 

आने वाले समय में यही बच्चे अधिकारी, डाक्टर, इंजीनियर, वकील, कलाकार, न्यायधीश, शिक्षक, व्यापारी और नेता इत्यादि बनेंगे, उस वक्त हमारी इनसे क्या अपेक्षाएं होंगी, क्या वो इस पर खरे उतर पाएंगे?

 

इसके लिए हमें उन्हें अभी से तैयार करना होगा।

 

तकनीकी शिक्षा के साथ उन्हें जीवन और इस शरीर और मन की सही समझ देनी होगी।

 

उनमें संवेदनशीलता, समता, व्यक्ति की गरिमा, आज़ादी, सत्यनिष्ठा, परोपकार, त्याग, जिम्मेदारी और जवाबदेही जैसे मूल्यों के प्रति सम्मान अभी से विकसित करना होगा, नहीं तो कल हमारे पास भी अपनी उत्तरोत्तर पीढ़ी की आलोचना करने के सिवाय कोई और विकल्प न होगा।

 

बाहर के शासन और बाहर से लगाम से ज्यादा कारगर है इंसान का स्वयं में ये संकल्प कि वो विश्व व्यवस्था को बिगाड़ने या मनुष्यों के आपसी विश्वास को कम करने वाला कोई कार्य नहीं करेगा।

 

शुभकामनाएं 

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