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Fill in the blanks :
(1) If Q charge flows in time t, then current is ……………………………..
(2) Current is a …………………………….. quantity ( scalar/vector)
(3) Current is in the direction of flow of …………………………..charge ( positive/negative)
(4) Current is in the opposite direction of flow of ……………..charge ( positive/negative)
(5) Current density is a ………………………….quantity.( scalar/vector)
(6) Temperature coefficient for semiconductor is ……………………( positive/negative)
(7) Resistance for a conductor ………………………with temperature(increases/decreases)
(8) Resistance for a semiconductor ………………………with temperature(increases/decreases)
(9) Two silver wires with same length and different cross section. The thin wire will have ………… resistance(more/less)
(10) Two silver wires with same thickness. The short wire will have ……………………… resistance(more/less)
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1 |
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Q/t |
Scalar |
Positive |
Nagative |
Vector |
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7 |
8 |
9 |
10 |
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Nagative |
Increases |
decreases |
More |
less |
Fill in the blanks
(1) Varying electric field is the source of ……………………………..
(2) Varying magnetic field is the source of ……………………………..
(3) EM wave propagates in a direction perpendicular to both …………………………..
(4). Electromagnetic waves………………..get deflected by electric and magnetic fields. (do/do not)
(5) Electromagnetic waves are …………………………………in nature (transverse/ longitudinal)
Answers:-
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1 |
2 |
3 |
4 |
5 |
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Magnetic field |
Electric Field |
E & B |
Do not |
Transverse |
Fill in the blanks
1. Every atom is a sphere of radius of the order of …………………. M
2. Atom consists of small central core, called …………………………………… in which whole mass and positive charge is assumed to be concentrated.
3. Atom is electrically……………………………………….( neutral, negative, positive)
4. At a certain distance from the nucleus, whole of the KE of α-particle converts into …………………… and α-particle cannot go further close to nucleus, this distance is called distance of closest approach.
5. Bohr’s first postulate was that an electron in an atom could revolve in ……………………… without the emission of radiant energy.
6. The angular momentum (L) of the orbiting electron is quantized, i. e mvr =......................
7. Value of h (the Planck’s constant) is………………………………………
8. SI Unit of the Planck’s constant……………………………………
9. Bohr’s third postulate states that an electron might make a transition from one of its stable orbits to another stable orbit of lower energy. When it does so,………….. is emitted having energy equal to the energy difference between the initial and final states.
10. SI Unit of Rydberg’s constant is ………………..
Answers-
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1. |
2. |
3. |
4. |
5. |
6. |
7. |
8. |
9. |
10. |
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10^-10 |
Nucleus |
Neutral |
PE |
Stable |
nh/2π |
6.6*10^-34 J-s |
J-s |
Photon |
m^-1 |
यही दिन देखने को रह गए थे, पोंछा नहीं लगा सकती! भारी सामान नहीं उठा सकती !, वैभव की 65 वर्षीय माता जी ने अपनी सियाटिका दर्द के चलते डाक्टर द्वारा सुझाए परहेज़ को लेकर अपनी खिन्नता व्यक्त की।
वैभव को पहले तो यह सुनकर तकलीफ़ हुई कि अम्मा परहेज़ नहीं करना चाहती, फिर कुछ सोचकर मुस्कुराने लगे और बोले अम्मा कुछ 2-4 काम नहीं कर सकती उसका अफसोस करने के बजाय ये सोचो कि बहुत से जरूरी काम तो अभी भी कर सकती हो।
वैभव समझ चुके थे कि अम्मा की तकलीफ़ परहेज़ नहीं, देहभाव से जुड़ा अहंकार था, जिसे अब चोट लग रही थी क्योंकि अब उनका शरीर एक स्वस्थ व्यक्ति जैसा नहीं रहा था, जबकि शरीर तो एक साधन है और कई ऐसे महत्वपूर्ण कार्य अभी भी किए जा सकते हैं जिनमें शारीरिक रूप से पूर्ण सशक्तता आवश्यक नहीं होती।
- लवकुश कुमार
मान लें कि गर्म पानी की मात्रा इतनी ज्यादा है या उसका तापमान इतना अधिक है कि वो सारी बर्फ को पिघलाने की उर्जा रखता है |
इस मामले में दो चरण (स्टेज) होंगे पहला की “पूरी” बर्फ पहले नियत (constant) तापमान (जोकि 00 C होता है ) पर पानी में परिवर्तित हो जाये इस काम के लिए आवश्यक उर्जा होगी
Q1 = m L; जहाँ m बर्फ का द्रव्यमान है ग्राम में और L, गलन की गुप्त ऊष्मा (Latent Heat of melting) है कैलोरी प्रति ग्राम या जूल प्रति ग्राम में ; बर्फ के लिए इसका मान होता है 80 कैलोरी प्रति ग्राम
दूसरा चरण है कि इस बर्फ के पिघलने से बने पानी के तापमान को एक कॉमन तापमान तक बढ़ाना जिसमे आवश्यक उर्जा होगी
Q2 =mst ; जहां s पानी की विशिष्ट ऊष्मा है पानी के लिए जिसका मान 1 कैलोरी / ग्राम-0C होता है, t वह कॉमन तापमान है जिस तक बीकर का पूरा पानी पहुँच जायेगा जिसमे बर्फ से बने पानी का तापमान बढ़कर और पहले से मौजूद पानी का तापमान घटकर क्योंकि पहले से मौजूद पानी द्वारा उर्जा का लॉस (नुकसान) होगा |
ली गयी ऊष्मा = दी गयी ऊष्मा
अर्थात Q1 + Q2 = m’ s (t’ - t)
जहाँ m’ पहले से मौजूद पानी का द्रव्यमान है और t’ उसका शुरुआती (बर्फ डालने से पहले ) तापमान है
इस गर्म पानी द्वारा t’ से t तक ठंडा होने में m’ s (t’ - t) उर्जा, बर्फ और उसके पानी को दी जाएगी |
नोट- दोनों तरफ द्रव्यमान का मात्रक (unit ) एकसमान रखें |
यहां ऐसा माना गया है कि न तो बीकर और न ही वातावरण कोई ऊर्जा ले/दे रहा है।
इस लेख में मै अपने अनुभव और अध्यात्मिक अध्ययन के आधार पर
कुछ कारणों पर प्रकाश डालने का प्रयास कर रहा हूँ :
कटुता का उदय होता है परायेपन की भावना से
इंसान एक बेचैन चेतना है, अहम् ( झूठा ज्ञान या खुद को लेकर वहम ) को पुष्ट करने के लिए
वो उन लोगों को नीचा दिखाने का प्रयास करता है जिनको स्वयं से अलग मानता है,
कटुता में मुख्यता सामने वाले की गरिमा की परवाह
न करते हुए भाषा और व्यवहार में लापरवाही पायी जाती है,
ऐसे शब्दों का प्रयोग किया जाता है जिससे सामने वाले में हीन भावना और विरक्ति पैदा हो |
कटुता कैसे फैलती है ? इसके जवाब में हम देख सकते हैं
कि जब किसी इंसान को कटुता का सामना करना पड़ता है तो
प्रतिक्रिया में वो सामने वाले के साथ भी कटुता का व्यवहार कर सकता है
या फिर ये सोंचकर अपने व्यवहार को संयत कर सकता है की कल हमे
इनसे कोई काम (स्वार्थ) निकालना है; इस स्थिति में भी कटुता की भावना जो
उसके अन्दर जन्म ली थी वो ख़त्म नहीं होती केवल दब जाती है और जब सामने
कोई स्वयं से कमज़ोर और तथाकथित पराया इंसान आता है और कोई विशेष परिस्थिति बनती है
तो वो दबी हुयी भावना क्रोध और कटुता के रूप में सामने आती है |
क्रोध तुरंत पैदा नहीं होता, क्रोध तो अन्दर रहता है
जो जितना ही दमित जीवन जीता है वो उतना क्रोधी होती है
बस ज्यादातर मामलों में क्रोध स्वयं से कमज़ोर इंसान पर ही बरसता है |
अतः अगर आप चाहते हैं की आपमें क्रोध और कटुता न आये तो दबावरहित जीवन जियें
जो लोग आपकी गरिमा का सम्मान न करें उनसे कोई भी काम हो दूरी बना लें अन्यथा कटुता बरदाश्त करते -करते
आपके व्यवहार में भी कटुता आ जानी है की क्योंकि समय के साथ इंसान ऐसे व्यवहार को सामान्य मान लेता है |
इससे इत्तर राय होने पर कांटेक्ट फॉर्म से अपना मत जरुर साझा करें |
शुभकामनायें
-लवकुश कुमार
ख़ास वो जो अपनी असहमति को खुलकर व्यक्त करने की स्पष्टता और साहस रखे,
ख़ास वो जो अपनी सुविधा-असुविधा के साथ दूसरों की सुविधा का भी ध्यान रखे,
ख़ास वो जो मानवता को केंद्र में रखकर परम्पराओं से हटने से भी गुरेज न करे,
ख़ास वो जो इंसान की सूरत नहीं सीरत को तरजीह दे,
ख़ास वो जो सच को सुविधा से ऊपर रखे,
ख़ास वो जो सही को अच्छे बुरे से ऊपर रखे,
ख़ास वो जो सुख दुख से ऊपर कर्तव्य को रखे और कर्त्तव्य निर्धारण में सत्य को केंद्र में रखे
ख़ास वो जो मान्यताओं की अपेक्षा तथ्य को सम्मान देने की हिम्मत रखे
खास वो जो स्वयं से आगे समष्टि को रखे
अकेलेपन से डरने वाले सामाजिक गुलाम बनते हैं, इस तरह ख़ास वो जो अकेलेपन से न डरे
ख़ास वो जो चालाकी का जवाब समझदारी से दे
सांसारिक संपत्ति, संपत्ति अर्जन, संचयन और प्रबंधन की काबिलियत दिखाता है, ऐसा इंसान अध्यात्मिक रूप से भी संपन्न हो ऐसा जरुरी नहीं|
हाँ अध्यात्मिक रूप से संपन्न इंसान के लिए जरुरी है की वो इतनी संपत्ति जरुर
अर्जित करके की आत्मनिर्भर और निर्भीक होकर जी सके तथा सच के समर्थन में मजबूती से खड़ा हो सके |
-लवकुश कुमार
अध्यात्म, स्वयं को जानने पर केन्द्रित है, यदि हम जान जाते हैं कि
हममे कुछ खामियां हैं या हमारे जीवन की प्राथमिकताओं में कुछ गड़बड़ है
तब जो अगला चरण होता है वो है बदलाव के लिए कार्यवाही का,
जोकि बहुत कम लोग चाहते हैं,
दूसरों के व्यवहार को बदलने की इच्छा रखने वाले तो बहुत लोग मिल जायेंगे
लेकिन स्वयं में बदलाव नहीं चाहते, स्वयं तो बस मनमानी करनी है, ऐसा सोंचने वालों की बहुतायत है |
दूसरा हमारे जीवंन के केंद्र में अहंकार ( झूठा ज्ञान ) होता है नतीजतन हम उसी केंद्र से निर्णय लेकर
वैसी ही प्राथमिकताएं निर्धारित करते हैं और उसी के अनुसार कर्म करते हैं,
अगर अध्यात्म की समझ पैदा हुयी तो प्राथमिकताओं में आमूल चूल परिवर्तन करने होंगे
और इस तरह भीड़ से अलग हटना पड़ सकता है, जबकि लोग वह काम करके सुरक्षित महसूस करते हैं
जो ज्यादातर लोग कर रहे हों|
नतीजतन अमूमन लोग अध्यात्म से दूरी रखते हैं और इसे
अव्यवहारिक कहकर नकार देते क्योंकि उन्हें तो भीड़ का हिस्सा रहना है |
ये कुछ कारण हैं मेरी समझ में |
अगर आपके पास कोई और कारण हैं तो जरुर लिख भेजें फीडबैक फॉर्म से |
शुभकामनाएं
-लवकुश कुमार
इन उक्तियों को मैंने अध्यात्मिक अध्ययन के दौरान अपनी डायरी मे लिखा और
अपने अनुभव एवं अवलोकन का पुट देते हुये आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ ;
विस्तृत समझ के लिए आप अध्यात्मिक साहित्य का रुख कर सकते/सकती हैं;
आशा है ये आपके जीवन मे स्पष्टता और शांति लाएँगे और त्वरित निर्णय लेने
तथा अपनी पसंद-नापसंद की समीक्षा करने मे आपकी मदद करेंगे,
अपनी ज़िम्मेदारी पर ही अमल मे लाएँ, शुभकामनायें
हंसो से सीख ली जाती है
हंसो को प्रेम दिया जाता है
उनकी उपेक्षा, उनकी अवहेलना
उनका अनादर नहीं किया जाता
जिस दिन सोंच लोगे
कि उड़ना है
उस दिन पाओगे कि
सब कुछ उड़ने मे ही
मदद कर रहा है
रिश्ते का आधार बदल दो
आपके साथी का व्यवहार बदल जाएगा
सही को अच्छे बुरे से ऊपर रखो
सुख दुख से ऊपर कर्तव्य को रखो
कामना और कष्ट से ऊपर कर्तव्य
मजबूती का लक्षण कष्ट और कामना से आगे कर्तव्य
आसानी से किसी भी बात को अपनी ड्यूटि मत मान लेना
मजबूत इंसान की एक पहचान अपने लिये फैंसले खुद करता है, खुद को जानकर
मान्यताओं की अपेक्षा तथ्य को सम्मान देने की हिम्मत रखना
अपनी नयी प्रतिमा बनाते रहना
उस काम से मत भागना जहां टूटते हो, ना पढ़ाई से और ना व्यायाम से
नहीं जानूँगा तो नहीं मानूँगा, पहले जानना फिर मानना
स्वयं से आगे समष्टि
आराम से आगे उन्नति को रखना, शरीर मजबूत होता जाएगा
जो तुमसे जुड़े उसे सच्चाई तक लेकर जाना
अकेलेपन से डरने वाले सामाजिक गुलाम बनते हैं, अकेलेपन से मत डरना
ठसक से रहना, उन्नति करना बेटा
साथ से आगे सत्य को रखना, एक मिसाल कायम करना
संदर्भ - आचार्य प्रशांत की शिक्षाओं और अन्य अध्यात्मिक साहित्य के साथ स्वयं की अनुभवजनित समझ पर आधारित
इन उक्तियों को मैंने अध्यात्मिक अध्ययन के दौरान अपनी डायरी मे लिखा और
अपने अनुभव एवं अवलोकन का पुट देते हुये आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ ;
विस्तृत समझ के लिए आप अध्यात्मिक साहित्य का रुख कर सकते/सकती हैं;
आशा है ये आपके जीवन मे स्पष्टता और शांति लाएँगे और त्वरित निर्णय लेने
तथा अपनी पसंद-नापसंद की समीक्षा करने मे आपकी मदद करेंगे,
अपनी ज़िम्मेदारी पर ही अमल मे लाएँ, शुभकामनायें
अतीत मे कोई गलतियाँ नहीं होतीं
गलती होती है मात्र वर्तमान मे
अपने झूठों को पकड़ो
देखो कितना आनंद आता है |
जिसमे दिल लगा गया हो
उसके पीछे मत जाओ
जो सही है
उसमे दिल लगाओ
दिन ऐसा बिताओ की रात को
बिलकुल पडो और सो जाओ
खाली करो अपने आपको
तुम्हारी चालाकी ही
तुम्हारा बंधन है
जो सरल है
वो स्वतंत्र है
कोई भी तुम्हें लूटता
बाद मे है
पहले तुम्हें
ललचाता है |
आदमी मजबूर हो कैसे सकता है,
जब तक उसका स्वार्थ, लालच या डर न हो ?
अगर कोई इंसान
आपकी जिंदगी
बन बैठा है
तो संभावना यही
है की आपके पास
जीने की कोई ऊंची वजह नहीं है
संदर्भ - आचार्य प्रशांत की शिक्षाओं और अन्य अध्यात्मिक साहित्य के साथ स्वयं की अनुभवजनित समझ पर आधारित