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एक बार यूं ही बैठे बैठे मैं सोच रही थी कि मैं इतिहास की छात्रा रह रही हूं, अगर मुझसे कोई पूछे कि भारतीय इतिहास में कौन सा पात्र तुमको सबसे ज्यादा प्रभावित करता है, तो मन में अशोक, अकबर जैसे कुछ नाम आए पर मन को संतोष नहीं हुआ। फिर मुझे कबीर, मीराबाई, सूरदास इन महान लोगों के नाम याद आए। कबीर जी भी मेरी दृष्टि में बहुत अच्छे कवि हैं, उनकी तर्किक बातें और धर्म की बुरी बातों पर आलोचना मुझे सच में बहुत प्रभावित करती है। सूरदास ने भी कृष्ण के बचपन का जो वर्णन किया है वह अद्भुत है। इतनी सारी खूबियों से प्रभावित होने के बाद भी मुझे "मीराबाई" का चरित्र सबसे ज्यादा प्रभावित करता है।
अब बात आती है ऐसा क्यों?
इसका एक कारण है उसे आप भावनात्मक भी कहा सकता है, क्योंकि कृष्ण मेरे भी आराध्य हैं, कृष्ण सूरदास के भी अराध्य हैं पर उनसे थोड़ा सा कम प्रभावित हूं। मीराबाई का उद्देश्य था कृष्ण प्रेम, उसके लिए उन्होंने सारे जतन किए, यहां कृष्ण को आप "सच्चे उद्देश्य" से जोड़कर देखेंगे तो ज्यादा व्यापकता से समझ पाएंगे।
मीराबाई का साहस मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित करता है, उस समय जब औरतें घूंघट से बाहर नहीं झांक पाती थीं, उस वक्त भक्ति में मगन मीरा झूठी लोक लाज त्याग कर वृन्दावन चली जाती हैं। उस समय जब स्त्रियां घर में बोलती भी नहीं थी, उन्होंने अपना जीवन अपनी शर्तों पर जिया। तुलसीदास को पत्र लिखा और उनके उत्तर पर कि जिनके हृदय न राम वैदेही,
तजिये ताहि कोटि बैरी सम।
अपना घर छोड़ दिया, इतना साहस उनमें कृष्ण प्रेम के कारण ही आया। ऐसा नहीं था वह केवल कृष्ण से प्रेम करती थी, उन्हें सब की फिक्र थी, उनको विष देने वालों की भी। मेरे लिए मीराबाई एक आदर्श है, वह कृष्ण के प्रेम में डूबी, पर उनका प्रेम उनका साहस बना, उनको ऊंचाईयां दी, उनको अमर कर दिया।
वह मुझे महिला सशक्तीकरण की अग्रदूत लगती हैं, कि मैं यह लक्ष्य चाहती हूं और अगर लक्ष्य सही है, सच के साथ और जनहित या आत्म उन्नति के लिए है तो सबकुछ कुबूल है, घर छोड़ना, बाहरी आंधी-पानी, असुरक्षा। वो चाहती तो रोती रहती कि मेरी भक्ति में मेरे ससुराल वाले ही बाधक बन रहे हैं, पर उन्होंने रोना नहीं लड़ना चुना, सांप भेजो, विष भेजो, मीराबाई को सब स्वीकार था क्योंकि उनके पास कृष्ण आज के संदर्भ में सही उद्देश्य था।
वह दर्पण सी पवित्र बनी। आज की स्त्री चाहे तो अपने उद्देशय को ना पाने का कारण दूसरों को बताती रहे, या तो लड़ जाए। मैंने एक बार कहीं सुना था और यह बात मेरे संघर्षों के दौर में ज्योति बनकर मेरे साथ रहती है कि
"कृष्ण है तो जहर का प्याला आएगा ही",
जहर का प्याला नहीं आया है तो मान कर चलना कि कृष्णा भी नहीं मिले हैं।
मैं कृष्ण पर ध्यान केन्द्रित करती हूं और जहर का प्याला अपने आप ही अमृत में बदल जाता है, जैसे मीरा बाई का बदल जाता था।
यहां पर कृष्ण सिर्फ भगवान कृष्ण से नहीं है, कोई भी उद्देश्य यदि सच्चा है तो उसके लिए हमारे भीतर मीराबाई सा समर्पण होना चाहिए।
शुभकामनाएं
- सौम्या गुप्ता
सौम्या गुप्ता जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं, उनकी रचनाओं से जीवन, मानव संवेदना एवं मानव जीवन के संघर्षों की एक बेहतर समझ हांसिल की जा सकती है, वो बताती हैं कि उनकी किसी रचना से यदि कोई एक व्यक्ति भी लाभान्वित हो जाये, उसे कुछ स्पष्टता, कुछ साहस मिल जाये, या उसमे लोगों की/समाज की दिक्कतों के प्रति संवेदना जाग्रत हो जाये तो वो अपनी रचना को सफल मानेंगी, उनका विश्वास है कि समाज से पाने की कामना से बेहतर है समाज को कुछ देने के प्रयास जिससे शांति और स्वतंत्रता का दायरा बढे |
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शुभकामनाएं
संपूर्ण पुरुष समाज को समर्पित:-
मैं बचपन से ही इस बात को लेकर बहुत चिढ़ती थी कि भगवान ने मुझे लड़की क्यों बनाया? इतनी पाबंदियाँ झेलनी पड़ती है। लेकिन जब थोड़ी समझदार हुई, तो समझ आया कि लड़का होना भी आसान नहीं है। घर में अगर एक बेटा हो या बड़ा बेटा हो तो पिता की तबियत बिगड़ते ही वह बड़ा बेटा, चाहे जितना ही छोटा क्यों न हो, घर की सारी जिम्मेदारी संभालने की कोशिश में लग जाता है। मैंने महिलाओं को अक्सर यह कहते सुना है कि हमें तो कभी छुट्टी नहीं मिलती, और एक सीमा तक यह सच भी है कि महिलाएँ पुरुषों से ज्यादा घंटे काम करती हैं।
पर एक पक्ष यह भी है कि महिलाएँ बीमार होने पर थोड़ा कम खाना बना सकती हैं, कुछ काम कम कर सकती हैं, अगर परिवार अच्छा है तो, पर पुरुषों के पास यह सुविधा नहीं होती। लगभग हर मध्यमवर्गीय और निम्नवर्गीय परिवार का पुरुष न बीमार होने पर जल्दी डाॅक्टर के पास जा पाता है, न कोई छुट्टी लेता है। जब तक वो ल़डका रहता है,घर की जिम्मेदारियों से तालमेल, फिर बहन की शादी, फिर अपनी शादी और घर में वो भी उलझा सा ही रह जाता है।
भावनात्मक रूप से अगर कोई पुरुष टूट भी जाए, तो वो किसी के सामने रो भी नहीं सकता क्योंकि हमारे समाज में ये भ्रम फैला हुआ है कि 'मर्द को दर्द नहीं होता'। लड़कियों और महिलाओं से ये अभिव्यक्ति तो नहीं छीनी जाती। मुझे लगता है कि ये धारणा टूटनी ही चाहिए और महिलाओं को ये मोर्चा उठाना चाहिए कि वो हर तरह के इमोशन को अभिव्यक्त कर सकें और साथ ही पुरूषों को भी अपनी हर तकलीफ़ साझा करने के लिए प्रोत्साहित कर सकें, ऐसा महिलाओं को ही इसलिए करना चाहिए कि वो ही माँ, बहन, पत्नी के रूप में पुरुष के जीवन में सिखाने में सबसे अहम् भूमिका निभाती है।
अमूमन पुरुषों में हार्ट अटैक तथा अन्य ऐसी ही तनाव से जुड़ी हुई बीमारियों ज्यादा होती है क्योंकि वो अपने इमोशन को दबाकर करते है। मैंने पढ़ा था कही 'बिन घरनी घर भूत का डेरा' पर इस समाज को और देश को जितनी महिलाओं की जरूरत है उतनी पुरुषों की भी।
आज झूठे महिला सशक्तिकरण की आड़ में पर जो महिलाएँ यह कहती है कि पुरुषों ने हमारा दमन किया है तो अब हम भी करेंगे, उनसे मेरा कहना है कि हमारी शक्ति सृजन की है, विनाश की नहीं। दुनिया को आधा पुरुषों ने नष्ट कर दिया तो दुनिया को आधा हम भी नष्ट करेंगे- ये नहीं करना।
साथ मिलना है महिला और पुरुष दोनों को, चेतना के स्तर पर दोनों एक हो और दोनों मिलकर इस समाज, देश और दुनिया को बचाएं।
"इस दुनिया को प्यार की जरूरत है, बदले की नहीं। "
जो हमारे जीवन में एक अहम भूमिका निभाते है, हम सबको जरूरत है कि हम उनके प्रति पूर्वाग्रहों से मुक्ति पाए।
पुरुषों में भी संवेदना होती है, आप जयशंकर प्रसाद की रचना, नारी तुम केवल श्रद्धा हो, रचना पढ़ सकते है। कितने ही गाने ऐसे है जिनमें महिलाओं को पुरुष कितना अच्छे से समझ सकते है उनको आप समझ सकते हैं, एक गाने की लाइन है, मेरी छाया है जो, आपके घर चली, सपना बनके मेरी आँखों में है पली, मैंने जब ये देखा कि इसको लिखने वाला भी एक " पुरुष" है तो मेरे लिए ये चौकाने वाली बात थी, इसीलिए पुरुषों के प्रति अपनी अवधारणाओं को बदलने की जरूरत है।
शुभकामनाएं
- सौम्या गुप्ता
सौम्या गुप्ता जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं, उनकी रचनाओं से जीवन, मानव संवेदना एवं मानव जीवन के संघर्षों की एक बेहतर समझ हांसिल की जा सकती है, वो बताती हैं कि उनकी किसी रचना से यदि कोई एक व्यक्ति भी लाभान्वित हो जाये, उसे कुछ स्पष्टता, कुछ साहस मिल जाये, या उसमे लोगों की/समाज की दिक्कतों के प्रति संवेदना जाग्रत हो जाये तो वो अपनी रचना को सफल मानेंगी, उनका विश्वास है कि समाज से पाने की कामना से बेहतर है समाज को कुछ देने के प्रयास जिससे शांति और स्वतंत्रता का दायरा बढे |
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शुभकामनाएं
लगातार बारिश से हो रहे भूस्खलनों ने इंडोनेशिया और वियतनाम में दर्जनों लोगों की जान ले ली है। पुर्तगाल एक बवंडर की चपेट में आया और नेचर पत्रिका में प्रकाशित एक नए अध्ययन से पता चलता है कि मुंबई में मॉनसून के दौरान होने वाली मौतों में से 8 फीसदी से अधिक बारिश की वजह से होती हैं। इनसे ज्यादातर कमजोर वर्ग के लोग प्रभावित होते हैं। इस वर्ष की पहली छमाही में ही मौसम संबंधी दिक्कतों के कारण 100 अरब डॉलर से अधिक का नुकसान हुआ। यह भविष्य का जोखिम नहीं बल्कि यह बदलती जलवायु की कठोर हकीकत है।
- राज्यों में अधिक ऋण से सामान्य सरकारी ऋण और उधारी की जरूरतें बढ़ जाती हैं, जिससे पूरी अर्थव्यवस्था के लिए धन की लागत प्रभावित होती है। राज्यों के बीच आय अंतर को कम करना और ऊंचे स्तर के ऋण मसले का समाधान करना प्रमुख नीतिगत चुनौतियां हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि वित्त आयोग इन मुद्दों से कैसे निपटता है।
विभिन्न समाचार पत्रों और पब्लिक डोमेन में उपलब्ध रिपोर्ट्स एवं दस्तावेजों पर आधारित तथा जन जागरूकता के उद्देश्य से संकलित, संकलन कर्ता भौतिकी में परास्नातक हैं ।
यूके की आतंरिक खुफिया एजेंसी एमआई ने अपने देश के सांसदों को चीनी छद्म-नियोक्ताओं से आगाह किया है। एजेंसी को खबर मिली है कि दरअसल ये चीनी जासूस हैं, जो ब्रिटेन सहित कई बड़े देशों में सांसदों व अन्य प्रभावशाली लोगों को किसी काम के बहाने भारी राशि देते हैं और उनसे खुफिया जानकारी लेते हैं। चीन ने इसी स्कीम के तहत पिछले 20 वर्षों में जहां दुनिया के अनेक गरीब देशों को एक ट्रिलियन डॉलर (भारत के बजट से दूना) दिए हैं, वहीं अमेरिका और ब्रिटेन को भी इतना ही पैसा दिया है। लेकिन इन्हें देने का तरीका छद्म है। इस योजना के तहत चीनी बैंक पहले चीनी टेक कंपनियों को कर्ज देती है। फिर ये कंपनियां अमेरिकी टेक कंपनियों से समझौता करती हैं। ताकि उनकी टेक्नोलॉजी हासिल हो सके। शोध संस्था एड्सडाटा के अनुसार अमेरिका की कई कंपनियां इसे सामान्य व्यापारिक समझौता समझकर अपनी टेक्नोलॉजी चीनी कंपनियों से शेयर कर देती हैं, जिसके जरिए चीन अपने टेक ज्ञान को आगे संवर्धित करता है। जबकि ट्रम्प ने अमेरिकी कंपनियों को अपने बेहतरीन सेमी-कंडक्टर्स और जीपीयू को चीन को बेचने से मना किया है। लेकिन चीन मध्यम दर्जे के सेमीकंडक्टर्स के सहारे भी डीपसीक एआई बनाने में सक्षम रहा। चीनी मंसूबों से हमें भी सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि चीनी चिप्स भारतीय सुरक्षा में सेंध लगा सकते हैं।- दैनिक भास्कर संपादकीय 21.11.2025
- सोलहवें वित्त आयोग ने इस सप्ताह अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी। रिपोर्ट को अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है, हालांकि उम्मीद है कि इसे 2026 के बजट सत्र में संसद के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। सोलहवें वित्त आयोग की अनुशंसाएं अप्रैल 2026 से शुरू होने वाले पांच वर्ष के लिए होंगी। ये अनुशंसाएं केंद्र और राज्यों के बीच कर राजस्व के वितरण को आकार देने के अलावा विभिन्न श्रेणियों के तहत राज्यों के बीच फंड आवंटन से संबंधित होंगी
- एक संघीय ढांचे में हमेशा यह उम्मीद रहेगी कि जो राज्य पिछड़ रहे हैं उन्हें मदद पहुंचाई जाएगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि अधिक समतापूर्ण विकास संभव हो सके। इसके अलावा आंकड़े दिखाते हैं कि प्रति व्यक्ति आधार पर दक्षिण भारत के राज्यों के संसाधन बेहतर हैं।
- चालू वर्ष में केरल की प्रति व्यक्ति व्यय 86,000 रुपये से अधिक है, बिहार में यह केवल 24,000 रुपये के करीब है। ध्यान देने वाली बात है कि 2020-21 और 2025-26 के बीच देश के सबसे गरीब राज्यों में प्रति व्यक्ति व्यय आय बढ़कर करीब दोगुना हो गया है। हालांकि इसका आधार कम रहा है जबकि अमीर दक्षिण भारतीय राज्यों में यह समेकित स्तर पर 59 फीसदी तक बढ़ा है।
- यद्यपि, व्यय में तेज वृद्धि आय में तेज वृद्धि में परिवर्तित नहीं हुई है। दक्षिणी राज्यों की औसत प्रति व्यक्ति आय 2009-10 में गरीब राज्यों की तुलना में 2.1 गुना थी, जो अब बढ़कर 2.8 गुना हो गई है। इससे संकेत मिलता है कि गरीब राज्यों को विकास कार्य करने में सक्षम बनाने के लिए कर बंटवारे में अधिक हिस्सेदारी आवश्यक हो सकती है, लेकिन यह तीव्र आर्थिक वृद्धि के लिए पर्याप्त नहीं है। तीव्र आर्थिक वृद्धि ही प्रति व्यक्ति आय बढ़ाकर इस अंतर को कम करने में मदद कर सकती है।
- केंद्र और राज्यों के समक्ष एक और चुनौती है। कुछ राज्यों पर बहुत अधिक ऋण है, जो विकास की संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 19 राज्यों में बकाया देनदारियां सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के 30 फीसदी से अधिक हैं, जिनमें केरल भी शामिल है। पंजाब और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में यह जीएसडीपी के 40 फीसदी से भी अधिक है।
विभिन्न समाचार पत्रों और पब्लिक डोमेन में उपलब्ध रिपोर्ट्स एवं दस्तावेजों पर आधारित तथा जन जागरूकता के उद्देश्य से संकलित, संकलन कर्ता भौतिकी में परास्नातक हैं ।
इतिहास शायद ही ऐसी संस्थाओं को पुरस्कृत करता है, जो बदलाव इनकार करती हों।
- सत्ताधारी दल चाहे जितना ताकतवर या योग्य हो, संतुलन बनाए रखने के लिए उसके सामने एक मजबूत विपक्ष होना ही चाहिए। लोकतंत्र सिर्फ चुनावी गणित नहीं। इसका अर्थ विकल्पों का लगातार बने रहना भी है। अगर एक धुरी जरूरत से अधिक ताकतवर हो जाए तो दूसरी ढह जाती है और लोकतंत्र की जीवंतता बनाए रखने वाला संतुलन खत्म हो जाता है। मजबूत विपक्ष की मौजूदगी ही सरकार को आत्ममंथन के लिए मजबूर करती है। उसकी जवाबदेही सुनिश्चित करती है।
- स्वच्छ हवा का अधिकार और प्रदूषण रहित वातावरण हमारा मूल अधिकार है और न्यायालय स्वयं बार-बार इस बात की पुष्टि कर चुका है
- पर्यावरण संरक्षण को सुविधा के लिए छोड़ा नहीं जा सकता। सतत या टिकाऊ विकास कोई बाधा नहीं है। यह एकमात्र वैध मार्ग है जो नागरिकों के अधिकारों और भारत के पर्यावरणीय भविष्य दोनों का सम्मान करता है।
- जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता से दूर जाने के खाने पर कोई भी चर्चा बारीकी से होनी चाहिए, न कि कठोर आदेशों जैसी ब्राजील के राष्ट्रपति लुइस इनासियो लूला दा सिल्या ने इसकी आवश्यकता पर बात करते हुए 'निर्भरता का उल्लेख किया जो यह दर्शाता है कि यह केवल 'गंदी' बनाम 'स्वच्छ ऊर्जा' का साधारण द्वैत नहीं है निर्भरता में नौकरियां, सार्वजनिक वित्त और पूरे क्षेत्रीय अर्थ तंत्र शामिल हैं।
- अचानक बदलाव सामाजिक अस्थिरता का जोखिम पैदा करता है
- एक मजबूत संघीय ढांचे में भी हर हाल में लोकतंत्र के जीवन के लिए शक्तियों और उसकी सीमा को लेकर स्पष्टता बनी रहनी चाहिए। साथ ही संवैधानिक पदों पर बैठे लोग अगर संविधान की मर्यादा का खयाल रखें, तो इससे लोकतंत्र को भी मजबूती मिलेगी।
विभिन्न समाचार पत्रों और पब्लिक डोमेन में उपलब्ध रिपोर्ट्स एवं दस्तावेजों पर आधारित तथा जन जागरूकता के उद्देश्य से संकलित, संकलन कर्ता भौतिकी में परास्नातक हैं ।
अपनी रचनाओं से संवेदना और स्पष्टता जगाने वाली विख्यात लेखिका श्रीमती मीरा जैन का जन्म 2 नवबंर 1960 को जगदलपुर (बस्तर) छ.ग. में हुआ, परिचय:
शिक्षा - स्नातक
जीवन साथी- इंजि. वीरचंद जैन
माता - श्रीमती केशर देवी मोदी
पिता - श्री विनयचंद जी मोदी
लेखन विधा- लघुकथा , आलेख व्यंग्य , कहानी, कविताएं , क्षणिकाएं आदि ।
पत्र-प्रत्रिकायें जिनमें रचनायें प्रकाशित हुई है 2000 से अधिक रचनाएं निम्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं-
कादम्बिनी , सरिता , गृहशोभा, हंस , नया ज्ञानोदय , सरस सलिल , अहा !जिदंगी , मेरी सहेली , गृहलक्ष्मी, वनिता , बिंदिया. नवनीत , जागरण सखी , मेरी सजनी , वीणा , नई गुदगुदी , साहित्य अमृत, कथादेश, माधुरी , मनस्वी , वेद अमृत , मनोरमा, विश्व हिंदी साहित्य मारीशस, देवपुत्र , नंदन , बाल भरती, मंगलयात्रा , साक्षात्कार . स्वदेश , पंजाब सौरभ, बाल भास्कर, बाल हंस, बच्चो का देश, शबनम ज्योति,अणुव्रत, द्वीप लहरी, अमृत कलश, प्रभात खबर, समाज्ञा ,नई दुनिया, दैनिक जागरण, अमर उजाला, समान्तर ,दैनिक भास्कर, नव भारत टाइम्स , राजस्थान पत्रिका ,हरिभूमि, प्रभात खबर, भारतदर्शन न्यूजीलैडं, ,हिंदी चेतना(कनाडा) नवनीत , बाल किलकारी(बिहार सरकार), उजाला, पंजाब केसरी, जनवाणी, नवभारत , सेतू-.यू.एस. कथा देश , अक्षरा, लोकमत , अक्षरा , चम्बा न्यूज , द राइजिंग स्टेप, साहित्य समीर दस्तक, विश्व गाथा, अक्षर खबर , संगिनी , साहित्य गुंजन, राज एक्सप्रेस , समावर्तन , दिव्यालोक , दैनिक अग्नि पथ ,अवन्तिका , अक्षर विश्व , शब्द प्रवाह, साहित्य समीर दस्तक , प्रभाश्री ज्ञान सागर आदि अनेक।
वे संग्रह जिनमे मेरी लघुकथाएॅ हैं- तीसरी ऑख , द्वीप लहरी , समान्तर ,क्षितिज ,चर्चित ,मिन्नी (पंजाबी), सेतु , कालीमाटी ,दोहरे चेहरे , महा मानव , सागर के मोती, बुजुर्ग जीवन की, लघुकथाएं , कलश, दृष्टि, मन के मोती, गुलाबी गलियां आदि अनेक।
नेपाली, गुजराती , पंजाबी , सिंधी , ओड़िया, बंगाली, असमिया, भोजपुरी, अंग्रेजी,मलयालम , मराठी ,भाषा मेें भी अनुवाद एंव प्रकाशन।
आकाशवाणी जगदलपुर एवम् इंदौर से व्यंग्य,लघुकथाओं व अन्य रचनाओं का प्रसारण. म.प्र.दूरदर्शन से कविताओं का प्रसारण , बोल हरियाणा बोल तथा रेडियो दस्तक से प्रसारण।
प्रकाशीत किताबें-
1- पुस्तक का नाम - मीरा जैन की सौ लघुकथाएं
प्रकाशन का वर्ष - सन् 2003 ,
प्रकाशक - मानव प्रकाशन
द्वितीय संस्करण - प्रकाशन का वर्ष - सन् 2011
प्रकाश - अध्ययन प्रकाशन ,दिल्ली
तृतीय संस्करण - प्रकाशन का वर्ष - सन् 2013
चतुर्थ संस्करण - प्रकाशन का वर्ष - सन् 2016
2- पुस्तक का नाम - 101 लघुकथाएं
प्रकाशन का वर्ष - सन् 2010दिसम्ब
द्वितीय संस्करण जून2012
तृतीय संस्करण अगस्त 2014
प्रकाशकश- पत्रिका प्रकाशन जयपुर , राज.
3- पुस्तक का नाम - दीन बनाता है दिखावा ,लेख,
प्रकाशन का वर्ष - सितंबर 2013
द्वितीय संस्करण - प्रकाशन का वर्ष -2016
प्रकाशक - बोधि प्रकाशन जयपुर राज.
4- पुस्तक का नाम - मीरा जैन की कवितायें , कविता संग्रह ,
प्रकाशन का वर्ष - 2014
प्रकाशक - अयन प्रकाशन दिल्ली
5- पुस्तक का नाम - सम्यक लघुकथाएं
प्रकाशन का वर्ष - सन् 2016 फरवरी
प्रकाशक - बोधि प्रकाशन जयपुर , राज.
6- पुस्तक का नाम - श्रेष्ठ जीवन की संजीवनी
प्रकाशन का वर्ष - फरवरी 2018
प्रकाशक - बोधि प्रकाशन जयपुर , राज
7- पुस्तक का नाम - हेल्थ हादसा, व्यंग्य संग्रह,
प्रकाशन का वर्ष - मार्च 2019
प्रकाशक - सूर्य मंदिर प्रकाशन
8- पुस्तक का नाम - मानव मीत लघुकथाएं
प्रकाशन का वर्ष - मार्च 2019
प्रकाशक - सूर्य मंदिर प्रकाशन बीकानेर
पुस्तक का नाम-
9-जीवन बन जाए आनंद का पर्याय,
लेख संग्रह
प्रकाशन वर्ष - 2020
प्रकाशक -इंडिया नेट बुक, दिल्ली
पुस्तक का नाम -
10-भोर में भास्कर , लघुकथा संग्रह
प्रकाशन वर्ष - 2022
प्रकाशक इंडिया नेटवर्क नेट बुक दिल्ली
11-मीरा जैन के सदाबहार लघुकथाएं
प्रकाशक- जिज्ञासा प्रकाशन प्रकाशन- वर्ष 2023
विशेष-
2011में ‘‘ मीरा जैन की सौ लघुकथाएं‘‘विक्रम विश्व विद्यालय उज्जैन द्वारा शोध कार्य करावाया जा चुका है ।
2022 - महाराष्ट्र, सावित्रीबाई फूले यूनिवर्सिटी पुणे द्वारा लघुकथाओं पर शोध कार्य जारी।
2024 - विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन द्वारा मेरी लघुकथाओं पर शोधकर जारी है
अनेक लघुकथाओं पर लघु फिल्मों का निर्माण
सम्यक लघुकथाएं पूर्णतया बालकों से संबंधित श्रेष्ठ आचरण पर आधारित है .
सन् 2007-8 में निर्धन वर्ग आयोग म.प्र.शासन राज्य स्तर पर मेरे द्वारा भेजे गये सुझावों को
प्रथम प्रथमिकता में चयनित किया .
केंद्रिय मानव संसाधन विकास मंत्रालय तथा छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा मेरी किताबें क्रय की गई है ।
अनेक भाषाओं में रचनाओं का अनुवाद एवं प्रकाशन
पुरस्कार - अंतर्राष्ट्रीय , राष्ट्र एंव राज्य स्तरीय अनेक पुरस्कार-
नईदुनिया तथा टाटा शक्ति द्वारा लेखन के लिये प्राइड स्टोरी अवार्ड 2014.
युग र्निमाण शिक्षण समिति तथा हिंदी साहित्य परिषद द्वारा हिंदी सेवा सम्मान 2015 से सम्मानित .
पुस्तक 101 लघुकथाएं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम पुरूस्कार 2011 .
लघुकथा के लिये हस्ताक्षर संस्था द्वारा विशिष्ट पुरस्कार ,
दैनिक अग्नि पथ द्वारा वरिष्ठ लघुकथाकार साहित्य सम्मान 2013 ,
शब्द प्रवाह साहित्य सम्मान 2013 ,
सामाजिक कार्यो में विशिष्ट योगदान एवम् साहित्यक उपलब्धियों हेतू नवकार सेवा संस्थान द्वारा विषिष्ट सम्मान .
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लेख को प्रथम पुरस्कार
महिला एवं बाल विकास उज्जैन संभाग म.प्र. द्वारा अंर्तराष्ट्रीय महिला दिवस 2016 में सम्मान ,
कथादेश द्वारा 2016 में लघुकथा पुरस्कृत .
जे.एस.जी.आई.एफ. म.प्र.रीजन द्वारा विभिन्न क्षेत्रों की उपलब्धियॉ तथा समाज सेवा के क्षेत्र में अद्वितीय कार्यो के लिये अवार्ड 2016-17 से नवाजा गया.
अभिव्यक्ति मंच द्वारा कविता को राष्ट्रीय स्तर पर द्वितीय पुरस्कार
जे.एस.जी.आई.एफ. द्वारा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट लेखन व समाज सेवा के क्षेत्र में आउट स्टेंडिंग परफारमेंस हेतू अवार्ड 2017 .
महिला सशक्तिकरण उज्जैन ने बेहतर समाज सेवा , समाजिक एकता व उत्कृष्ट लेखन के लिये अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2017 पर सम्मानित किया .
अभिव्यक्ति विचार मंच द्वारा राष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान 2017-18 से सम्मानित आदि अनेक।
अखिल भारतीय साहित्य साधक मंच बंगलौर द्वारा राजभाषा साहित्य सम्मान
राष्ट्रीय संगठन सखी संगिनी द्वारा 2018 नारी सेवा सम्मान
लघुकथाएं व लेख को विभिन्न संस्थाओं द्वारा 2018 में पुरस्कृत,
भोपाल से प्रकाशित मासिक पत्रिका 'साहित्य समीर दस्तक' एंव श्री विभगूंज वेलफेयर सोसायटी' द्वारा 'सम्यक लघुकथाएं' को 'शब्द गुंजन लघुकथा सम्मान-2018' से सम्मानित किया गया।
विचार प्रवाह मंच इंदौर द्वारा सम्मानित 2020
डॉक्टर एस एन तिवारी सम्मान 2021
अमृत महोत्सव के तहत माधव महाविद्यालय उज्जैन द्वारा श्रेष्ठ साहित्य साधिका सम्मान 2021
मातृ भाषा उन्नयन संस्थान भारत के द्वारा हिंदी दिवस 2022 सम्मानित
हिंदी साहित्य सम्मेलन बदनावर द्वारा साहित्य सम्मान 2022
मथुरा देवी स्मृति वट स्मृति षोडश सम्मान 20 22
हिंदी साहित्य अकादमी भोपाल द्वारा व्यंग्य संग्रह 'हेल्थ हादसा ' को शरद जोशी व्यंग्य सम्मान 2019
भारतीय साहित्य परिषद इंदौर द्वारा प्रादेशिक साहित्य गौरव सम्मान 2023
विचार प्रवाह साहित्यिक मंच इंदौर द्वारा विशिष्ट लघुकथा के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान सम्मान 2023
इंटिग्रेटेड सोसायटी ऑफ मीडिया प्रोफेशनल लखनऊ द्वारा
समग्र सहित्य पर मैथिली शरण गुप्त सम्मान 2022
अथाई समूह द्वारा सर्वश्रेष्ठ कथाकार सम्मान 2023
संस्था विद्यांजलि भारत मंच इंदौर द्वारा समग्र साहित्य पर धरोहर सम्मान 2023
साहित्य संगीति जयपुर द्वारा लघुकथा संग्रह भोर में भास्कर को सर्वोत्कृष्ट कृति जयपुर सम्मान 2024
अभिनव कला परिषद भोपाल द्वारा अभिनव शब्द शिल्पी अलंकरण से सम्मानित 2023
अभ्युदय अंतरराष्ट्रीय महिला लेखन प्रेरणा पुरस्कार 2023
म. प्र लेखिका संघ भोपाल द्वारा लघुकथा संग्रह भोर में भास्कर के लिए राष्ट्रीय स्तर पर श्रीराजकुमार केसवानी सम्मान 2024
माता कौशल्या साहित्य संस्कृति शोध संस्थान वी डॉ.माया ठाकुर फाउंडेशन रायपुर द्वारा
लघुकथा भूषण सम्मान 2024
रक्त मित्र फाउंडेशन मथुरा उत्तर प्रदेश द्वारा नारी शक्ति पद्मश्री सम्मान 2024
पतंजलि योग समिति छत्तीसगढ़ द्वारा साहित्य सम्मान 2024
मां राजपति देवी स्मृति साहित्य सम्मान 2024-प्रयागराज
किस्सा कोतहा सम्मान आगरा 2024
राजराजेश्वरी म्यूजिकल ग्रुप इंदौर साहित्य सम्मान 2024
प्रेस क्लब ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट भोपाल द्वारा साहित्य सम्मान 2024
प्रांति इंडिया साहित्य सम्मान 2024
अभ्युदय अंतरराष्ट्रीय श्लाका
सम्मान 2024
अंतर्राष्ट्रीय सरस्वती साहित्य सम्मान 2025
श्रीमती आशा सुपेकर स्मृति सम्मान 2025
सम्प्रति-पूर्व सदस्य बाल कल्यााण समिति
पद-प्रथम श्रेणी न्यायायिक मजिस्ट्रेट बोर्ड , बा.क.स
चेयर पर्सन-गर्ल सेव चाइल्ड कमेटी जे.एस.जी.आई.एफ. 2016-17-18
2019 गृह मंत्रालय भारत सरकार द्वारा देश के विद्ववानों की सूची में शामिल
अनेक मंचो से बाल साहित्य , बालिका महिला सुरक्षा उनका विकास , कन्या भ्रूण हत्या , बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ , बालकों के लैगिंग यौन शोषण , निराश्रित बालक बालिकाओं को समाज की मुख्य धारा से जोड़ना स्कूल , कॉलेजों के विद्यार्थियों को नैतिक शिक्षा आदि के अनेक विषयो पर उद्बोधन एवं कार्यशाला ।
पता
मीरा जैन
516 साईं नाथ कॉलोनी,सेठीनगर
उज्जैन ,मध्य प्रदेश
पिन-456010
मो. बा-9425918116
https://www.meerajain.in
jainmeera02@gmail.com
मुझे तो यह जानकर आश्चर्य हो रहा है, प्रेम वो भी रचित से? तुम यह क्या कह रही हो संयोगिता?, साधना ने संयोगिता से पूछा, मुझे बड़ा अजीब लग रहा कि यह जानते हुए भी कि वो कैसा इंसान है, न तुम्हारा और न तुम्हारे खुले विचारों का वो सम्मान करता है, क्या तुमको वो स्वतंत्रता देगा? तुम स्वतंत्र नहीं रहोगी, जो तुम्हारा स्वभाव है, उसके प्रेम में पड़कर तुम, तुम नहीं रह जाओगी, तुम्हारी मुस्कुराहट भी खो जाएगी।
संयोगिता गहरी सांस लेकर, है कुछ बात, साधना, तुम मेरी दोस्त हो, मैं चाहे जिससे प्रेम करूँ, तुम अपनी सलाह मुझपर थोप नहीं सकती।
साधना निराश भाव से कहती है कि संयोगिता जिसे तुम बार बार प्रेम कर रही वह कुछ और है, आगे तुम्हारी मर्जी! पर याद रखना जो आकाश से प्रेम करते है, वो पंखों के बारे में सोचते है और जो कीचड़ से वे केंचुए बनकर ही रह जाते है, चुनाव तुम्हें करना है।
इफ यू लव द स्काई यू विल ग्रो विंग्स
- सौम्या गुप्ता
सौम्या गुप्ता जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं, उनकी रचनाओं से जीवन, मानव संवेदना एवं मानव जीवन के संघर्षों की एक बेहतर समझ हांसिल की जा सकती है, वो बताती हैं कि उनकी किसी रचना से यदि कोई एक व्यक्ति भी लाभान्वित हो जाये, उसे कुछ स्पष्टता, कुछ साहस मिल जाये, या उसमे लोगों की/समाज की दिक्कतों के प्रति संवेदना जाग्रत हो जाये तो वो अपनी रचना को सफल मानेंगी, उनका विश्वास है कि समाज से पाने की कामना से बेहतर है समाज को कुछ देने के प्रयास जिससे शांति और स्वतंत्रता का दायरा बढे |
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शुभकामनाएं
पिछले कुछ वर्षों के दौरान जघन्य अपराधों में नाबालिगों की संलिप्तता बढ़ी है। दिल्ली के विजय विहार इलाके में लूटपाट का विरोध करने पर एक आटो चालक की हत्या के आरोप में पांच नाबालिगों की गिरफ्तारी से देश में पलती- बढ़ती एक चिंताजनक प्रवृत्ति और उसकी दिशा को समझा जा सकता है। अभी किसी भी स्तर पर इस बात की चिंता नहीं दिखती है कि बेरोजगार युवाओं या विद्यालय न जाने वाले किशोरों के भविष्य को संवारने लिए क्या किया जाए। उनके बीच से जो किशोर आपराधिक प्रवृत्ति की ओर कदम बढ़ा दे रहे हैं, उन्हें लेकर हमारी नीति क्या हो। यहां तक कि हम बच्चों को नैतिक और सामाजिक मूल्यों से लैस नहीं कर रहे। दूसरी ओर, समाज में अनेक तरह की बनती विपरीत स्थितियां किशोरों को अपराध के गर्त में धकेल रही हैं। राजधानी में वह आटो चालक महज अपनी रोजी-रोटी कमाने निकला था । मगर कुछ शातिर लड़के योजनाबद्ध तरीके से उसे सुनसान जगह ले गए और उससे लूटपाट की कोशिश करने लगे । जब आटो चालक ने इसका विरोध किया, तो आरोपियों ने उस पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। पकड़े जाने पर इन आरोपियों ने यह बात कबूली है कि वे नशे के आदी हैं और इसके लिए पैसे जुटाने के इरादे से उन्होंने वारदात को अंजाम दिया।
समझा जा सकता है कि अपराध के दलदल में धंसते कुछ किशोर किस तरह खतरनाक हो रहे हैं। दिल्ली में हुई यह ताजा घटना एक उदाहरण भर है। यह दुखद ही है कि पढ़ने-लिखने की उम्र में कई किशोर हथियार लेकर सड़कों पर चल रहे हैं और आए दिन लूटपाट से लेकर हत्या तक के जघन्य अपराध में लिप्त पाए जा रहे हैं। गंभीर अपराधों में संलिप्त नाबालिगों को लेकर कानून अस्पष्ट और लचर होने का ही परिणाम है कि उनका दुस्साहस लगातार बढ़ता चला गया है। यह देखा गया है कि जघन्य अपराधों को अंजाम देने वाले कई नाबालिगों पर बाल सुधार गृह में भेजने का भी कोई असर नहीं होता। खासतौर पर सुनियोजित तरीके से हत्या और बलात्कार जैसे अपराधों के नाबालिग आरोपियों के प्रति क्या नीति अपनाई जानी चाहिए, अब इस मसले पर सरकार और समाज को एक बार विचार करना होगा ।
- अपराध के पांव - संपादकीय जनसत्ता १७.११.२०२५
विभिन्न समाचार पत्रों और पब्लिक डोमेन में उपलब्ध रिपोर्ट्स एवं दस्तावेजों पर आधारित तथा जन जागरूकता के उद्देश्य से संकलित, संकलन कर्ता भौतिकी में परास्नातक हैं ।
मैंने एक बार कहीं पढ़ा था, श्रंगार करती हुई स्त्रियों से ज्यादा सुंदर लगती है संघर्ष करती हुई स्त्रियाँ। ये लाइन मुझे इसलिए पसंद है क्योंकि मैं भी हार नहीं मानती, संघर्ष करती हूं और हर महिला करती है, किसी का संघर्ष जारी रहकर उसे ऊँचाइयों पर ले जाता है और कुछ का संघर्ष बस चार दीवारी में ही खत्म हो जाता है।
आज एक मूवी देखी Mission Over Mars, मुझे लगता है ये उन लोगों को जरूर देखनी चाहिए, जो हार नहीं मानना चाहते और लड़ना चाहते हैं अपनी आखिरी उम्मीद तक।
आप इसमें, कैसे हर मुश्किल का रास्ता निकाला जाता है देख सकते हैं। कैसे डर को भी हथियार बनाया जाता है। मंगल पर जाने वाले मिशन में एक टीम मेंबर को बुरे सपने आते है, और उनकी टीम लीडर उन सपनों को आधार पर जो गलत हो सकता था, उसका तोड़ निकाल लेती है।
जब वो महिलाएँ मिशन के सिवा कुछ नहीं सोचती हो तो किसी को कैसे कम बजट में काम कर सकते है, कैसे अपने पहले के रिसोर्स का उपयोग कर सकते हैं, कैसे मुश्किल में अनजाने ही भगवान हमारे मददगार बन जाते है या प्रकृति का संयोग हमारे पक्ष में होकर हितकारी हो जाता है? आखिरी क्षण जब हमें लगता है कि कुछ नहीं हो सकता तब कुछ ऐसा अचानक से दिख जाता है और लगता है कि ये किया जा सकता है। कैसे यह बात भी ध्यान रखनी चाहिए कि कैसे एक मिशन फेल भी हो सकता है, जब आपको सटीक गणना से पता चलता है, तभी आप सब सही कर पाते हैं, माने हमारे पास जानकारी और आंकड़े होने चाहिए बेहतर निर्णय निर्माण के लिए, कैसे हम सीमित संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकते हैं, जब हमारे पास काम के लिए सही जुनूनी लोग हो। इससे सीखा जा सकता है, आशा कभी मत खोए, हमेशा नजर समाधान की ओर हो। आपकी काम के प्रति सच्ची भावना आपको सफल बनाती ही है।
देर किस बात की आप भी देख डालिए इस फिल्म को और दे दीजिए एक समावेशी विस्तार अपनी समझ और दृष्टिकोण को।
Happy Movie Watching!
- सौम्या गुप्ता
बाराबंकी उत्तर प्रदेश
सौम्या गुप्ता जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं, उनकी रचनाओं से जीवन, मानव संवेदना एवं मानव जीवन के संघर्षों की एक बेहतर समझ हांसिल की जा सकती है, वो बताती हैं कि उनकी किसी रचना से यदि कोई एक व्यक्ति भी लाभान्वित हो जाये, उसे कुछ स्पष्टता, कुछ साहस मिल जाये, या उसमे लोगों की/समाज की दिक्कतों के प्रति संवेदना जाग्रत हो जाये तो वो अपनी रचना को सफल मानेंगी, उनका विश्वास है कि समाज से पाने की कामना से बेहतर है समाज को कुछ देने के प्रयास जिससे शांति और स्वतंत्रता का दायरा बढे |
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शुभकामनाएं
पल भर में है धूप खिली, अगले पल छाया अंधकार।
कुछ पल में ही तेज हवा, लगता है जैसे चमत्कार।।
गर्मी में यहाँ फूल खिलें, स्वर्ग सा मौसम बन जाता है।
देश विदेश के सैलानियों को ये लद्दाख बहुत भाता है।।
सर्दी में तापमापी का पारा, ऋणात्मक बीस भी जाता है।
ऊपर से तेज हवा का झोंका, कभी कभी सताता है।।
पश्चिमी विक्षोभों से अधिकतर, वर्षा और बर्फबारी है।
समुद्रतल से 3500 मीटर ऊपर कर्मभूमि हमारी है ।।
सर्दी में जम जाता आर्द्र बल्ब, गर्म पानी से उसे उठाना है।
गर्म कपड़ों में सीलबंद होकर, वेधशाला में जाना है।।
समुद्र तल से ऊँचाई पर, ताप और दाब घट जाता है।
कम ऑक्सीजन के चलते यहाँ रक्त दाब बढ़ जाता है।।
अधिक ठंड और कम आर्द्रता के संयोग का विज्ञान।
ट्रॉस हिमालय की गोद में बसा लेह लद्दाख महान।।
पर्यावरण और प्रकृति का यहाँ संगम होता निराला है।
पहाड़ों की बर्फ के परावर्तन से, होता तेज उजाला है।।
जब सूरज तेजी से चमके, ठंड का नहीं होता अहसास।
बार बार ही गला सूखता, बुझती नहीं है प्यास ।।
कम आर्द्रता के कारण, स्थिर आवेश प्रभाव दिखाता है।
किसी चीज को छूने से, यदाकदा झटका लग जाता है।।
बढ़ने लगती आर बी सी और घटने लग जाती है भूख।
कितना भी करो आप जतन, त्वचा जाती है बिल्कुल सूख ।।
जब जब सर्दी में तापमान, माइनस में चला जाता है।
बंद होता नलकूप और सीवरेज, पानी भी जम जाता है।।
बर्फ तोड़कर, आग सेक कर फिर पानी मिल पाता है।
मुश्किल है यहाँ सर्दी का जीवन, कैसे कोई सह पाता है।।
बड़े दयालु 'सोनम' सर जी, यहाँ कहलाते "मौसमपीर"।
इन्हीं के मार्गदर्शन में, रहते हैं हम सब मौसमवीर।।
- मनीष कुमार गुप्ता जयपुर, राजस्थान
मनीष जी भारत सरकार के भारत मौसम विज्ञान विभाग में सेवारत हैं और लेह में अपनी सेवाएं दे चुके हैं वह अपनी कई कविताओं से मौसम विज्ञान विभाग के सफर, उसके योगदान और महत्व पर प्रकाश डाल चुके हैं।
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