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संपादक की कलम से माता पिता को संबोधित
“ हर फूल सुंदर होता है यदि उसे ध्यान से देखा जाए “
“हर बीज मे पौधा और फिर पेड़ बनने की संभावना होती
है जरूरत है तो उसे सही परवरिश और माहौल उपलब्ध कराने की ”
बच्चे देश का भविष्य है, यही आगे चलकर शिक्षक, डॉक्टर, इंजीनियर, व्यापारी, वकील,
साहित्यकार, पत्रकार, कलाकार, नेता, अधिकारी, वैज्ञानिक इत्यादि बनेंगे।
ये बच्चे आगे चलकर एक संवेदनशील इंसान बन सकें ताकि ये दूसरों की दिक्कतों को समझ सकें, सच
का साथ दे लोगों के साथ न्याय कर सकें, उसके लिए जरूरी है कि वो पहले एक विस्तृत सोच का
इंसान बने जो काबिल हो, जीविका आर्जित कर सकें अपने क्षेत्र में तथा अन्य लोगों और पेशों को
समझ सकें, उनके महत्व को जान सकें, अपने लिए अलग-2 क्षेत्रों के विकल्प ढूँढ सकें।
इसी उद्देश्य से इस पुस्तिका में साहित्यिक लेखों के साथ विज्ञान के तथ्य है जो बच्चों की सोच को
विस्तार देंगे और उनकी जिज्ञासा को बढ़ाकर उन्हें कार्य-कारण सिद्धांत से वैज्ञानिक चेतना की
तरफ अग्रसर करेंगे।
ऐसी शख्शियतों के नाम भी दिये गए हैं जिन्होने अपने काम के बल पर नाम कमाया और अपना
जीवन सफल बनाया ताकि बच्चे अपने सीमित दायरे से बाहर निकल इन महान लोगों के बारे मे
जान सकें और जीवन मे एक्सीलेन्स हासिल करने के लिए प्रेरित हो सके, ये भी हो सकता है कि
फिर बच्चे अन्य ऐसे महान लोगों के बारे मे जानने की जिज्ञासा व्यक्त करें |
“किसी काम को करते वक़्त, मिलने वाला आनंद ही वास्तव मे उस काम को करने का पुरस्कार है|”
पुस्तक से कुछ अंश :


शुभकामनाएं
-लवकुश कुमार
लेखक बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से भौतिकी मे स्नातक और आई आई टी दिल्ली से भौतिकी मे परास्नातक हैं और उनके लेखन का उद्देश्य समाज की उन्नति और बेहतरी के लिए अपने विचार साझा करना है ताकि उत्कृष्टता, अध्ययन और विमर्श को प्रोत्साहित कर देश और समाज के उन्नयन में अपना बेहतर योगदान दिया जा सके, साथ ही वह मानते हैं कि सामाजिक विषयों पर लेखन और चिंतन शिक्षित लोगों का दायित्व है और उन्हें दृढ़ विश्वास है कि स्पष्टता ही मजबूत कदम उठाने मे मदद करती है और इस विश्वास के साथ कि अच्छा साहित्य ही युवाओं को हर तरह से मजबूत करके देश को महाशक्ति और पूर्णतया आत्मनिर्भर बनाने मे बेहतर योगदान दे पाने मे सक्षम करेगा, वह साहित्य अध्ययन को प्रोत्साहित करने को प्रयासरत हैं।
जिस तरह बूँद-बूँद से सागर बनता है वैसे ही एक समृद्ध साहित्य कोश के लिए एक एक रचना मायने रखती है, एक लेखक/कवि की रचना आपके जीवन/अनुभवों और क्षेत्र की प्रतिनिधि है यह मददगार है उन लोगों के लिए जो इस क्षेत्र के बारे में जानना समझना चाहते हैं उनके लिए ही साहित्य के कोश को भरने का एक छोटा सा प्रयास है यह वेबसाइट ।
लेखक के विजन के बारे में जानने के लिए यहां क्लिक करें।
अगर आपके पास भी कुछ ऐसा है जो लोगों के साथ साझा करने का मन हो तो हमे लिख भेजें नीचे दिए गए लिंक से टाइप करके या फिर हाथ से लिखकर पेज का फोटो Lovekushchetna@gmail.com पर ईमेल करें।
“एक इंसान कैसा नागरिक बनेगा ये निर्भर करता है उसे मिलने वाले महौल से, ये माहौल घर का भी होता है और उसके स्कूल/कॉलेज का भी |”
(मुख्य अतिथि माननीय विधायक श्री मयूख मेहर जी और निदेशक श्री गिरीश पाठक जी के कर कमलों से दीप प्रज्वलन)
स्कूल या विद्यालय हम विद्या अर्जन के लिए जाते हैं, जहां विद्या अर्जन केवल सैद्धांतिक पक्ष नहीं, यह व्यवहारिक पक्ष भी लिए हुये है, जिसमे स्वयं और दुनिया को समझने, चीज़ें कैसे काम कर रहीं और जीव की वृत्तियाँ क्या हैं इनको समझने के साथ एक तार्किक और उदार सोंच विकसित करना भी शामिल है ताकि हम विभिन्न विषयों मे निपुण होकर रोजगार के काबिल बन सकें |

(विशिष्ट अतिथि श्री आशीष कुमार, commandant 55 Bn SSB Pithoragarh )
एक सिस्टम को सुचारु रूप से चलाने के लिए और स्थायित्व बनाए रखने के लिए हमे जरूरत होती है, जिम्मेदार, साहसी, उदार और लोगों मे सामंजस्य बैठाकर चलने वाले लोगों (कार्यबल) की, इसके लिए विद्यालय मे विभिन्न गतिविधियों द्वारा बच्चों को जीवन के लिए तैयार किया जा सकता है, सत्यनिष्ठा और संवेदना भी विद्यालय के दिनो से ही विकसित की जाए तो काम आसान हो जाए| न्याय, गरिमा, स्वतन्त्रता और सच्चाई की राह पर चलते रहने के साहस के लिए जरूरी स्पष्टता भी इसी वक़्त से प्रदान की जाए तो बेहतर रहता है |

बच्चे हमारे देश का भविष्य हैं, दुनिया के यह बच्चे शारीरिक रूप से स्वस्थ हों, मानसिक रूप से मजबूत, होनहार/काबिल, संवेदनशील, प्रगतिवादी और जुझारू हों, साथ ही वो अपने जीवन की उच्चतम संभावनाओं को पा सकें, अपने अंदर छिपी असीम शक्ति और क्षमता को समझ सकें इसके लिए इन्हें उचित पोषण के साथ सही माहौल, अभ्यास, संगति और ट्रेनिंग की भी जरूरत होती है|


बच्चे अपनी शुरुआती जीवन का अच्छा खासा समय स्कूल में देते हैं, वह भी बच्चों के साथ, जिसका एक अलग ही महत्व है, क्योंकि हमारे आस पास जब लोग कुछ सीख रहे हों तो, हमारे द्वारा भी सीखने की इच्छा बढ़ जाए, ऐसी काफी संभावनाएं रहती हैं, कुछ विशेष गतिविधियों के द्वारा हम उनमें ऐसे गुण डाल सकते हैं जो उन्हें भविष्य के अवसरों और संघर्षों के लिए तैयार कर सकते हैं और सबसे खास कि उनमें ऐसी आदतें विकसित कर सकते हैं जिससे उनका एक-एक दिन सार्थक हो पाएगा और बेहतर मानवीय संबंधों के साथ उचित प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर वो आनंदमय और उत्कृष्ट जीवन जी पाएंगे|

साथ ही कुछ और गुण जो विद्यालय मे विकसित किए जा सकते हैं, विभिन्न क्रियाकलापों द्वारा यथा :
साहस, मैत्री भाव, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, धर्म निरपेक्ष दृष्टिको, साहसिक कार्य तथा खेल भावना और निःस्वार्थ सेवा का आदर्श, साहचर्य और अनुशासन का विकास, सहिष्णुता, सहभागिता,स्वावलम्बन व स्वदेश-प्रेम, स्वच्छता,पर्यावरण संरक्षण, समानता का भाव, अध्यापकों, सहकर्मियों एवं कनिष्ठों का सम्मान, लैंगिक संवेदीकरण के मूल्य, कमजोर वर्गों के प्रति संग का भाव एवं सहानुभूति (करुणा) इत्यादि,
हाल ही सोर घाटी पिथौरागढ़ के आइकन इंटरनेशनल स्कूल के वार्षिक उत्सव में काफी कुछ ऐसा देखने के लिए मिला कि ऊपर वर्णित उद्देश्यों की पूर्ति के रास्ते पर चलता एक संस्थान मिल गया हो:

जैसा की Icon International School Pithoragarh के निदेशक श्री गिरीश पाठक जी अपने संदेश मे कहते हैं कि
“ हमारा मुख्य उद्देश्य सभी बच्चों के लिए सीखने, बढ़ने और विकसित होने के लिए एक गतिशील वातावरण बनाना है। हम मुख्य रूप से शिक्षण के साथ विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से सीखने पर ध्यान केंद्रित करते हैं। हमारी विशेषता बेहतर भविष्य के लिए वैश्विक और प्रेरणादायक नागरिक बनाना है। हम बच्चों के सर्वांगीण विकास और आत्म-प्रेरणा, आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास पर ध्यान केंद्रित करते हैं। बच्चों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करना हमारे लिए अत्यंत प्रसन्नता का विषय है। हम आपके प्रियजनों के लिए एक सकारात्मक और ऊर्जावान वातावरण बनाते हैं और उन्हें उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए तैयार करते हैं।
हमारे अनुसार प्रत्येक बच्चा एक बीज के समान है जिसमें उचित मार्गदर्शन और स्नेह से पोषित होने पर बढ़ने की क्षमता होती है। आज हम पिथौरागढ़ शहर के एक प्रतिष्ठित और तेजी से विकसित होते शैक्षणिक संस्थान के रूप में स्थापित हैं। वर्ष दर वर्ष हमारे सभी कर्मचारियों और छात्रों के प्रयासों ने विद्यालय को उत्कृष्टता की ओर अग्रसर किया है। हमारे पास एक गतिशील और मेहनती संकाय है जो छात्रों के लाभ के लिए शिक्षा में समर्पित है। हमारा वादा है कि हम आपके बच्चों को न केवल सफल इंसान बनाएंगे बल्कि अच्छे इंसान भी बनाएंगे। अंत में, हम उन सभी अभिभावकों को धन्यवाद देना चाहते हैं जिन्होंने हमारे संस्थान और इसके आदर्शों पर विश्वास जताया है। हम आपको आश्वस्त करते हैं कि आपके प्यारे बच्चे सुरक्षित हाथों में हैं। हमारा संपूर्ण स्टाफ विद्यालय के मूल्यों को समझता है और बच्चों को प्रोत्साहित करने में सहयोग करता है, और हमें विश्वास है कि बच्चे आपको और हमें गौरवान्वित करेंगे। एक बार फिर, आइकॉन परिवार में आपका स्वागत है। ”

बात को और बेहतर तरह से समझने को कुछ गतिविधियों का जिक्र जरूरी है, दर्शकों में से एक, आरती जी बताती हैं कि कार्यक्रम स्थल पर प्रवेश करते ही मेहमानों का स्वागत करने का दायित्व भी बच्चों का ही था, इस बात ने आरती जी को प्रभावित किया और वो चमकती आंखों के साथ प्रसन्नता के भाव के साथ कहती हैं कि इस तरह ये बच्चे अभी से निःसंकोच होकर लोगों का अभिवादन करना सीख पायेंगे और एक उल्लास, उम्मीद, महत्वपूर्ण महसूस कराने वाली और अपनेपन की भावना का संचार करने वाली मुस्कान के साथ मानवीय रिश्तों को वो आधार देना सीख पायेंगे जिस पर टिके रिश्ते में इंसान एक से एक बड़े कार्य कर जाता है और नए रिकार्ड बना डालता है।
वह आगे कहती हैं कि कार्यक्रम के मंच संचालन का कार्य भी बच्चों ( छात्र-छात्राओं ) ने ही किया जो मन बांध लेने वाला था, इस तरह सक्रिय भागीदारी से बच्चों में स्पष्टता, आत्मविश्वास, समझ, समन्वय क्षमता, स्थितियों से निपटने, धैर्य, टिके रहने कि क्षमता विकसित होगी, साथ ही वो विभिन्न गतिविधियों के महत्व को समझ पाएंगे और विभिन्न संस्थाओं के महत्व और योगदान को समझ पाएंगे|
एक और गेस्ट (अभिभावक) और पिथौरागढ़ एयरपोर्ट पर अधिकारी श्री सुनील वर्मा जी कहते हैं कि विभिन्न गतिविधियां बच्चों कि समझ को व्यापक करेंगी और साथ ही वह बताते हैं की वार्षिक उत्सव के प्रांगण मे एक विज्ञान के प्रोजेक्ट और किताबों का स्टॉल भी लगा था जहां से बच्चों के लिए साइन्स की किट के साथ साहित्य अध्ययन और पुस्तक पढ़ने कि आदत डालने के लिए आकर्षक और ज्ञानवर्धक पुस्तकों को किफ़ायती कीमत पर खरीदा जा सकता था | साथ हे कर्राटे सरीखी गतिविधियों का प्रशिक्षण बच्चों को आत्म रक्षा के लिए तैयार करेगा और ISRO सरीखी अग्रणी संस्थाओं पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम बच्चों को और जागरूक तथा उत्साहित और प्रेरित करेंगे |
कला और विज्ञान का यह संगम वाकई प्रशंशनीय है |

अभिभावकों मे ही एक श्री संदीप यादव जी जोकि पेशे से पिथौरागढ़ एअरपोर्ट पर एयर ट्रैफिक कंट्रोल अधिकारी हैं, बताते हैं कि बच्चों द्वारा मंच संचालन उनकी झिझक को खत्म कर उन्हे आत्मविश्वास देगा, जो उन्हे जीवन मे आगे चलकर, चाहे वो व्यावसायिक जीवन हो या व्यक्तिगत जीवन, अपनी बात निर्भीक होकर रखने में साथ ही लोगों से संवाद द्वारा जुड़ने में मदद करेगा | स्टेज पर कार्यक्रम मे प्रतिभाग करना अपने आपमे ही एक झिझक को कम करने वाली और व्यक्तित्व को निखारने वाली गतिविधि है |
विद्यालय प्रबंधन द्वारा समाज के गणमान्य व्यक्तियों को आमंत्रित कर बच्चों को संबोधित किया गया और उन्हे विभिन्न गतिविधियों द्वारा उनकी प्रतिभा के प्रदर्शन का मौका दिया गया, यह विद्यालय के वार्षिक उत्सव को सफल बनाता है और बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए एक बेहतर प्रयास को दिखाता है |
विद्यालय प्रबंधन से निम्नलिखित ईमेल पर संपर्क किया जा सकता है : iconschoolpithoragarh123@gmail.com
बच्चे संवेदनशील, साहसी, करूण और काबिल बने इसी अपेक्षा के साथ
ढेरों शुभकामनायें
बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से भौतिकी मे स्नातक और आई आई टी दिल्ली से भौतिकी मे परास्नातक हैं और उनके लेखन का उद्देश्य समाज की उन्नति और बेहतरी के लिए अपने विचार साझा करना है ताकि उत्कृष्टता, अध्ययन और विमर्श को प्रोत्साहित कर देश और समाज के उन्नयन में अपना बेहतर योगदान दिया जा सके, साथ ही वह मानते हैं कि सामाजिक विषयों पर लेखन और चिंतन शिक्षित लोगों का दायित्व है और उन्हें दृढ़ विश्वास है कि स्पष्टता ही मजबूत कदम उठाने मे मदद करती है और इस विश्वास के साथ कि अच्छा साहित्य ही युवाओं को हर तरह से मजबूत करके देश को महाशक्ति और पूर्णतया आत्मनिर्भर बनाने मे बेहतर योगदान दे पाने मे सक्षम करेगा, वह साहित्य अध्ययन को प्रोत्साहित करने को प्रयासरत हैं।
जिस तरह बूँद-बूँद से सागर बनता है वैसे ही एक समृद्ध साहित्य कोश के लिए एक एक रचना मायने रखती है, एक लेखक/कवि की रचना आपके जीवन/अनुभवों और क्षेत्र की प्रतिनिधि है यह मददगार है उन लोगों के लिए जो इस क्षेत्र के बारे में जानना समझना चाहते हैं उनके लिए ही साहित्य के कोश को भरने का एक छोटा सा प्रयास है यह वेबसाइट ।
लेखक के विजन के बारे में जानने के लिए यहां क्लिक करें।
अगर आपके पास भी कुछ ऐसा है जो लोगों के साथ साझा करने का मन हो तो हमे लिख भेजें नीचे दिए गए लिंक से टाइप करके या फिर हाथ से लिखकर पेज का फोटो Lovekushchetna@gmail.com पर ईमेल करें।
स्कूल या विद्यालय हम विद्या अर्जन के लिए जाते हैं, जहां विद्या अर्जन केवल सैद्धांतिक पक्ष नहीं, यह व्यावहारिक पक्ष भी लिए हुये है, जिसमे स्वयं और दुनिया को समझने, चीज़ें कैसे काम कर रहीं और जीव की वृत्तियाँ क्या हैं इनको समझने के साथ एक तार्किक और उदार सोंच विकसित करना भी शामिल है ताकि हम विभिन्न विषयों मे निपुण होकर रोजगार के काबिल बन सकें |
एक सिस्टम को सुचारु रूप से चलाने के लिए और स्थायित्व बनाए रखने के लिए हमे जरूरत होती है, जिम्मेदार, साहसी, उदार और लोगों मे सामंजस्य बैठाकर चलने वाले लोगों (कार्यबल) की, इसके लिए विद्यालय मे विभिन्न गतिविधियों द्वारा बच्चों को जीवन के लिए तैयार किया जा सकता है, सत्यनिष्ठा और संवेदना भी विद्यालय के दिनो से ही विकसित की जाए तो काम आसान हो जाए| न्याय, गरिमा, स्वतन्त्रता और सच्चाई की राह पर चलते रहने के साहस के लिए जरूरी स्पष्टता भी इसी वक़्त से प्रदान की जाए तो बेहतर रहता है |
बच्चे हमारे देश का भविष्य हैं, दुनिया के यह बच्चे शारीरिक रूप से स्वस्थ हों, मानसिक रूप से मजबूत, होनहार/काबिल, संवेदनशील, प्रगतिवादी और जुझारू हों, साथ ही वो अपने जीवन की उच्चतम संभावनाओं को पा सकें, अपने अंदर छिपी असीम शक्ति और क्षमता को समझ सकें इसके लिए इन्हें उचित पोषण के साथ सही माहौल, अभ्यास, संगति और ट्रेनिंग की भी जरूरत होती है|
बच्चे अपनी शुरुआती जीवन का अच्छा खासा समय स्कूल में देते हैं, वह भी बच्चों के साथ, जिसका एक अलग ही महत्व है, क्योंकि हमारे आस पास जब लोग कुछ सीख रहे हों तो, हमारे द्वारा भी सीखने की इच्छा बढ़ जाए, ऐसी काफी संभावनाएं रहती हैं, कुछ विशेष गतिविधियों के द्वारा हम उनमें ऐसे गुण डाल सकते हैं जो उन्हें भविष्य के अवसरों और संघर्षों के लिए तैयार कर सकते हैं और सबसे खास कि उनमें ऐसी आदतें विकसित कर सकते हैं जिससे उनका एक-एक दिन सार्थक हो पाएगा और बेहतर मानवीय संबंधों के साथ उचित प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर वो आनंदमय और उत्कृष्ट जीवन जी पाएंगे|
साथ ही कुछ और गुण जो विद्यालय मे विकसित किए जा सकते हैं, विभिन्न क्रियाकलापों द्वारा यथा राष्ट्रीय सेवा योजना, राष्ट्रीय कैडेट कोर इत्यादि :
राष्ट्रीय कैडेट कोर के उद्देश्य
क. युवकों/युवतियों को सुयोग्य नागरिक बनाने के लिये उनमें चरित्र, साहस, मैत्री भाव, अनुशासन - नेतृत्व, धर्म निरपेक्ष दृष्टिकोण साहसिक कार्य तथा खेल भावना और निःस्वार्थ सेवा आदर्शों की विकसित करना।
ख- संगठित प्रशिक्षित और प्रेरित युवकों/युवतियों की एक ऐसी जनशक्ति का निर्माण करना जो सशस्त्र सेना सहित जीवन के क्षेत्र में नेतृत्व प्रदान कर सके और राष्ट्रीय सेवा के लिये सदैव तत्पर रहे।
इस उद्देश्य का देश के विकास में क्या योगदान है?
यह उद्देश्य देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है। यह युवाओं को मजबूत चरित्र, अनुशासन, और नेतृत्व गुणों से लैस करता है, जो देश के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक विकास के लिए आवश्यक हैं। इसके साथ ही, यह सशस्त्र सेना में युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करके राष्ट्र की सुरक्षा में भी योगदान देता है।
आइए कुछ सवालों के माध्यम से बेहतर समझते हैं :
राष्ट्रीय कैडेट कोर का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
राष्ट्रीय कैडेट कोर का प्राथमिक उद्देश्य युवाओं को सुयोग्य नागरिक बनाना, उनमें चरित्र, साहस, मैत्री भाव, अनुशासन, नेतृत्व और निस्वार्थ सेवा की भावना का विकास करना है। इसके अतिरिक्त, कोर सशस्त्र सेना सहित जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्व प्रदान करने में सक्षम एक जनशक्ति का निर्माण करने का भी प्रयास करता है।
राष्ट्रीय कैडेट कोर युवाओं को किन गुणों का विकास करने के लिए प्रोत्साहित करता है?
राष्ट्रीय कैडेट कोर युवाओं को चरित्र, साहस, मैत्री भाव, अनुशासन, नेतृत्व, धर्मनिरपेक्ष दृष्टिकोण, साहसिक कार्य, खेल भावना और निस्वार्थ सेवा जैसे गुणों का विकास करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
राष्ट्रीय कैडेट कोर युवाओं को राष्ट्रीय सेवा के लिए कैसे तैयार करता है?
राष्ट्रीय कैडेट कोर युवाओं को प्रशिक्षित करके और उन्हें प्रेरित करके राष्ट्रीय सेवा के लिए तैयार करता है। यह उन्हें सशस्त्र सेना सहित जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्व करने में सक्षम बनाता है, जिससे वे राष्ट्रीय सेवा के लिए सदैव तत्पर रहें।
अनुशासन को पाठ में किस प्रकार परिभाषित किया गया है?
पाठ में अनुशासन को दो तरह से परिभाषित किया गया है: पहला, अपनी अंतरात्मा द्वारा बताए गए ईश्वर के आदेशों का पालन करना, और दूसरा, उचित अधिकार द्वारा दिए गए मानवीय आदेशों का पालन करना। यह स्पष्ट करता है कि अनुशासन आत्म-त्याग की नींव है, जो एक बेहतर उद्देश्य के लिए आवश्यक है।
राष्ट्रीय सेवा योजमा
उद्देश्य - सामाजिक सेवा द्वारा व्यक्तित्व विकास
राष्ट्रीय सेवा योजना छात्र-छात्राओं के व्यक्तित्व में सहिष्णुता, सहभागिता, सेवाभाव, स्वावलम्बन वस्वदेश-प्रेम जैसे गुणों को समाहित करने का प्रयास करती है।
राष्ट्रीय सेवा योजना का सिद्धान्त वाक्य "मैं नहीं परन्तु आप" (NOT ME BUT YOU)
राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) का मुख्य उद्देश्य छात्रों को सामुदायिक सेवा और सामाजिक कार्यों में शामिल करना है। यह युवाओं को समाज के प्रति संवेदनशील बनाता है और उनमें जिम्मेदारी की भावना पैदा करता है। NSS स्वयंसेवकों को विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर काम करने का अवसर मिलता है, जैसे कि स्वच्छता, शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण। इसका उद्देश्य छात्रों को समाज के सक्रिय और जिम्मेदार नागरिक बनाना है।
आइए कुछ सवालों के माध्यम से बेहतर समझते हैं :
देश की एकता एवं अखण्डता आपके कर्त्तव्यों के सफल संचालन में निहित है।
एकता और अखंडता एक राष्ट्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। वे समाज में सामंजस्य स्थापित करते हैं, जिससे सभी नागरिकों को समान अवसर मिलते हैं। एकता विभिन्न संस्कृतियों, भाषाओं और धर्मों के लोगों को एक साथ लाती है, जबकि अखंडता राष्ट्र की सीमाओं की सुरक्षा और संप्रभुता को सुनिश्चित करती है। यह देश की प्रगति और विकास के लिए आवश्यक है।
कर्त्तव्यों का सफल संचालन, व्यक्ति द्वारा अपनी जिम्मेदारियों को ईमानदारी, समर्पण और कुशलता से पूरा करने को दर्शाता है। इसमें समय पर काम करना, निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करना और दूसरों के साथ सहयोग करना शामिल है। सफल संचालन से व्यक्ति और समाज दोनों को लाभ होता है, जिससे बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं और राष्ट्र का विकास होता है।
एक स्कूल/कॉलेज परिसर के बुनियादी मूल्य क्या होने चाहिए
1. समस्त विद्यार्थियों को समान रुप से उच्च शिक्षा प्रदान करना।
2. विद्यार्थियों में मानवीय मूल्यों को विकसित करना ।
3. परिसर को उच्च शिक्षा के प्रतिष्ठित संस्थान के रूप में विकसित करना।
4. विद्यार्थियों को उनके विषयों में सर्वोत्तम ज्ञान से परिपूर्ण करना।
5. सुनहरे भविष्य की प्राप्ति के लिये विद्यार्थियों की प्रतिभा का पता लगाना एवं विकसित करना।
6. विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास के लिये उनकी पाठ्येत्तर प्रतिभाओं को उजागर करना।
एक उच्च शिक्षा के संस्थान से अपेक्षित उद्देश्य
आइए एक सवाल के माध्यम से बेहतर समझते हैं :
इस पाठ में उल्लिखित 'अनुकरणीय संस्थान' की क्या भूमिका है?
इस पाठ में उल्लिखित 'अनुकरणीय संस्थान' पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों को बढ़ावा देने और रोजगार के अवसर पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों को रोजगार देने के लिए एक मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा, जो स्थायी विकास के लिए प्रतिबद्ध होगा।
मानवीय मूल्यों के विकास में एक विद्यालय/परिसर का महत्व -
1. विद्यार्थियों में समानता का भाव विकसित करना ।
2. अध्यापकों, सहकर्मियों एवं कनिष्ठों का सम्मान करना।
3. लैंगिक संवेदीकरण के मूल्यों को आत्मसात करना।
4. पेर्यावरण निर्वात एवं स्वच्छता के प्रति जागरुकता विकसित करना।
5. समाज के कमजोर वर्गों के प्रति संग का भाव एवं सहानुभूति (करुणा) होना।–
आइए एक सवाल के माध्यम से बेहतर समझते हैं :
मानवीय मूल्यों का विकास क्यों महत्वपूर्ण है?
मानवीय मूल्यों का विकास छात्रों को समाज में सकारात्मक योगदान देने के लिए आवश्यक गुणों को विकसित करने में मदद करता है। यह समानता, सम्मान, लैंगिक संवेदीकरण, और पर्यावरणीय जागरूकता को बढ़ावा देता है, जिससे छात्र दूसरों के प्रति अधिक संवेदनशील और जिम्मेदार बनते हैं।
संकलन - पब्लिक डोमैन मे उपलब्ध जानकारी, अकादमिक समझ और शैक्षिक परिसरों के भ्रमण से जुड़ा अनुभव
- लवकुश कुमार
संकलनकर्ता और लेखक बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से भौतिकी मे स्नातक और आई आई टी दिल्ली से भौतिकी मे परास्नातक हैं और उनके लेखन का उद्देश्य समाज की उन्नति और बेहतरी के लिए अपने विचार साझा करना है ताकि उत्कृष्टता, अध्ययन और विमर्श को प्रोत्साहित कर देश और समाज के उन्नयन में अपना बेहतर योगदान दिया जा सके, साथ ही वह मानते हैं कि सामाजिक विषयों पर लेखन और चिंतन शिक्षित लोगों का दायित्व है और उन्हें दृढ़ विश्वास है कि स्पष्टता ही मजबूत कदम उठाने मे मदद करती है और इस विश्वास के साथ कि अच्छा साहित्य ही युवाओं को हर तरह से मजबूत करके देश को महाशक्ति और पूर्णतया आत्मनिर्भर बनाने मे बेहतर योगदान दे पाने मे सक्षम करेगा, वह साहित्य अध्ययन को प्रोत्साहित करने को प्रयासरत हैं।
जिस तरह बूँद-बूँद से सागर बनता है वैसे ही एक समृद्ध साहित्य कोश के लिए एक एक रचना मायने रखती है, एक लेखक/कवि की रचना आपके जीवन/अनुभवों और क्षेत्र की प्रतिनिधि है यह मददगार है उन लोगों के लिए जो इस क्षेत्र के बारे में जानना समझना चाहते हैं उनके लिए ही साहित्य के कोश को भरने का एक छोटा सा प्रयास है यह वेबसाइट ।
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अगर आपके पास भी कुछ ऐसा है जो लोगों के साथ साझा करने का मन हो तो हमे लिख भेजें नीचे दिए गए लिंक से टाइप करके या फिर हाथ से लिखकर पेज का फोटो Lovekushchetna@gmail.com पर ईमेल करें।
अमुक गाना जितेंद्र और हेमा मालिनी जी की फिल्म किनारा से लिया गया है।
इस गाने की शुरुआत में बोल हैं
"नाम गुम जाएगा चेहरा ये बदल जाएगा
मेरी आवाज़ ही पहचान है, गर याद रहे।"
जो अर्थ मैंने निकाला उसके अनुसार आवाज वह संदेश है जो कवि दे रहा है, वह कहना चाह रहा है कि उसके जाने के बाद यही बात कोई और कहेगा, क्योंकि यह जीवन का सच है, फिर जो बोलेगा उसका नाम रखा जाएगा लेकिन यह बातें जो सच्चाई है जीवन की, दुनिया की, वह वही रहेगी।
दूसरा अर्थ यह निकलता है कि इंसान चला जाता है, उसका नाम भी चला जाता है लेकिन उसने जो अच्छे काम किए होते हैं समाज के भले के लिए वह आगे बढ़ते रहते हैं।
इसलिए इंसान को नाम के पीछे दौड़ने के बजाय समाज के लिए उपयोगी कामों को करने का प्रयास करना चाहिए।
- लवकुश कुमार
लवकुश कुमार भौतिकी में परास्नातक हैं और उनके लेखन का उद्देश्य समाज की उन्नति और बेहतरी के लिए अपने विचार साझा करना है ताकि उत्कृष्टता, अध्ययन और विमर्श को प्रोत्साहित कर देश और समाज के उन्नयन में अपना बेहतर योगदान दिया जा सके, साथ ही वह मानते हैं कि सामाजिक विषयों पर लेखन और चिंतन शिक्षित लोगों का दायित्व है और उन्हें दृढ़ विश्वास है कि स्पष्टता ही मजबूत कदम उठाने मे मदद करती है और इस विश्वास के साथ कि अच्छा साहित्य ही युवाओं को हर तरह से मजबूत करके देश को महाशक्ति और पूर्णतया आत्मनिर्भर बनाने मे बेहतर योगदान दे पाने मे सक्षम करेगा, वह साहित्य अध्ययन को प्रोत्साहित करने को प्रयासरत हैं।
जिस तरह बूँद-बूँद से सागर बनता है वैसे ही एक समृद्ध साहित्य कोश के लिए एक एक रचना मायने रखती है, एक लेखक/कवि की रचना आपके जीवन/अनुभवों और क्षेत्र की प्रतिनिधि है यह मददगार है उन लोगों के लिए जो इस क्षेत्र के बारे में जानना समझना चाहते हैं उनके लिए ही साहित्य के कोश को भरने का एक छोटा सा प्रयास है यह वेबसाइट ।
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Question to assess understanding of students/participants
Part-A: Answer the questions by choosing one of the two options given with each question:
Part B: Answer the following questions (1 Mark for each)
……………………………………………………………………
…………………………………………………………………………………
………………………………………………………………………………………..
……………………………………………………………………………………………
………………………………………………………………………………………………
…………………………………………………………………………………………………
Part C: Match correct entries by drawing line b/w column-1 and column-2
|
S.No. |
Column-1 |
Column-2 |
|
1 |
Anemometer |
Pressure |
|
2 |
Windvane |
Wind speed and direction |
|
3 |
barometer |
Runway |
|
4 |
Windsock |
Wind direction |
|
5 |
ATRH |
Cloud |
|
6 |
Central line |
Wind speed |
|
7 |
Convection |
Air temperature and relative Humidity |
Part D: Write the answer in one line
Part E: Write full form of following
युवाओं को संबोधित कुछ लेख
समाज में बदलाव हो रहे हैं, कुछ सकारात्मक और कुछ नकारात्मक कुछ लोग नुकसानदायक और भ्रामक चीजों का प्रसार कर रहे हैं, कुछ आवाजें अनसुनी रह जा रही हैं। क्यों न हम संगठित होकर, इन अनसुनी आवाजों को ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं, क्यों न हम अपने पक्ष से भी अवगत करायें लोगों को, क्यों न हम जरूरी और सही बातों को ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं, क्यों न हम बदलते समाज को एक बेहतर और समावेशी दिशा देने का नेक प्रयास करें।
समाज में हो रहे बदलाव हमें भी प्रभावित करते हैं देर-सबेर फिर क्यों न हम अपने डेली शेड्यूल में कुछ मिनट इस बात को लिखने में लगाएं कि हम कैसी दुनिया चाहते हैं।
संख्या मायने रखती है आप लिखिए तो सही कि आप कैसी दुनिया चाहते हैं, आपको क्या शिकायतें हैं, फिर मजेदार होगा सामने वाले का पक्ष सुनना ।
"आपके आस-पास कोई भी बदलाव, एक न एक दिन आपको प्रभावित करेगा", जिस तरह आप सड़क पर कितना भी नियम और सावधानी से चलें लेकिन किसी दूसरे की लापरवाही से आपको नुकसान हो सकता है। इसीलिए हम जब अपने जीवन को सुरक्षित और सहूलियत भरा बनाने के लिए दिन के कई घंटे देते हैं तो क्यों न कुछ मिनट अपने विचार साझा करने को भी दें ताकि हम बता सकें कि हम समाज की दिशा किधर को चाहते हैं, फिर ये देखना मजेदार होगा कि हमारी च्वाइस कई मामलों में विरोधाभासी भी हो सकती है।अपना मत और समझ साझा करने में संकोच न करें, जो आंखों से देखा और उम्र के साथ अनुभव किया है उसे साझा करने में संकोच कैसा!
जो इंसान अपनी समझ और आकांक्षाएं साझा नहीं करना चाहता वो समाज से अपनी सहूलियत की दिशा की अपेक्षा कैसे कर सकता है! बिना किसी पूर्वाग्रह के और बिना इस बात की चिंता किए कि लोग मेरे बारे में क्या सोचेंगे बेधड़क होकर अपनी बात रखिए और दूसरों को भी हिम्मत दीजिए। जो कुछ महसूस कर रहें उसे सामने व्यक्त करने का |
आपका एक लाइन का इनपुट भी मायने रखता है।
#opinion_matters
कई लोगों के सहयोग से एक समावेशी लेख तैयार हो सकता है जो अलग अलग पृष्ठभूमि के लोगों की समझ को बेहतर करने और उन्हें दूसरों की दिक्कत के प्रति संवेदनशील बनाने में काम आएगा, इस तरह हम समाज के कुछ लोगों को बेहतर करने का काम कर पायेंगे।
कुछ लोग पूछते हैं की ये जो इतना लिखते हो उसका कुछ फायदा भी होता है क्या कोई पढ़ता भी है?
तो ऐसे सभी लोगों से मेरा कहना है कि
1. एक वक्त मुझे जब चीजों को जानने की जरूरत थी तो मैने भी पुस्तकें पढ़ीं थीं, जिसे कुछ लोगों ने लिखा था, वैसे ही मैं भी लिख रहा हूं ताकि फिर किसी जिज्ञासु को मेरी लेखनी से कुछ स्पष्टता मिल जाए कोई रास्ता मिल जाए
2. किरण बेदी मैम ने भी यही कहा कि उन्हे लगता है कि उन्हे अपने अनुभव लिखने चाहिए वो जरूर किसी के काम आयेंगे
3. और फिर ये जनहित का कार्य है तो देर रात तक जाग भी सकते हो, मन प्रफुल्लित रहता है
4. अच्छे लोग मिलेंगे, लेखन एक बहुत ही जन उपयोगी काम है अगर आप सच लिख रहे हैं तो, बुद्धि इस तरह के सही काम में लगे रहेगो तो फिजूल में न उलझना पड़ेगा, लेखन एक सृजनात्मक कार्य है और सृजन का आनंद क्या होता है उनसे पूछो जिन्हे बागवानी शरीखे सृजनात्मक कार्यों का शौक है |
5. अगर एक इंसान को भी मेरा लिखा हुआ समझ आ गया या उपयोग का लग गया तो ये लिखना सफल मानूँगा, जब मैंने इतने साहित्य का उपयोग किया तो मै भी क्यों न साहित्य के कोश मे कुछ योगदान दूँ अपनी क्षमता मे |
6. लेखन हमे जीकर दिखाने को भी प्रेरित करता है |
3. साहित्य जरूरी क्यों?
ताकि हम अपने आस पास के लोगों के इतर खुद से दूर दराज के लोगों की जीवन, पहनावे और रहन सहन के बारे में जान सकें।
अच्छा जानना क्यों है दूर वालों के बारे में ? ताकि
हम जान सकें अगर उनमें कुछ बेहतर है हमसे, जिसे अपनाया जा सके।
हम जान सकें उनके जीवन के संघर्षों के बारे में ताकि हमें अपनी दिक्कतें बड़ी न लगें।
हम जान सकें उनकी आकांक्षाओं के बारे ताकि जब कभी उनके साथ काम करना पड़े या उनके लिए नीतियां बनाना पड़े तो हम हम उनके व्यवहार और जरूरतों के पीछे का कारण जान सकें।
इस तरह नए लोगों के साथ काम करना आसान होगा।
समाज के एक तबके का इंसान दूसरे तबके के इंसान के बारे में जान ही तब पाता है जब यदि तो वो उनके बीच समय बिताए, या उनके बारे में फ़िल्म देखें या फिर साहित्य ( कहानी, कविता, उपन्यास, लेख, रिपोर्ताज, जीवनियां, आत्मकथा इत्यादि) पढ़ें।
फिर वही प्रश्न कि आखिर जानना क्यों है ?
ताकि समाज में आपसी संघर्ष कम हों और सब एक दूसरे को साथ लेकर चलें, एक दूसरे की तकलीफ़ों के प्रति संवेदनशील रहें ताकि स्थायित्व का मार्ग प्रशस्त हो और देश में शांति बनी रहे, जीवन में शांति बनी रहे।
उम्र के एक पड़ाव का इंसान उम्र के दूसरे पड़ाव के इंसान के विचारों और प्राथमिकताओं को जान पाता है, सुविधा असुविधा को जान पाता है नतीजतन तालमेल बिठाकर चलना आसान होता है, जीवन में शांति आती है और क्लेश कम से कम रहता है।
आज का इंसान, अपने पूर्वजों द्वारा अनुभव की गई जीवन और दुनिया की सच्चाई को पुस्तकों द्वारा पढ़कर अपने जीवन को सही दिशा दे सकता है, जिसमें अफसोस का कोई स्थान न हो, हो तो केवल उत्कृष्टता।
फिर क्या सोंच रहे हैं आप ? देंगे एक घंटा रोज का ? साहित्य अध्ययन को
और बच्चों को भी मैथ्स साइंस के साथ-२ साहित्य पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करेंगे और देश बेहतर और संवेदनशील ( जो दूसरों की तकलीफ़ को समझ सके ) नागरिक देने का प्रयास करेंगे ?
कुछ सवाल जिनके जवाब आपको स्पष्टता के साथ पता हो तो बेहतर “
जीवन में सबसे जरूरी क्या है ? डर लालच और मोह से मुक्ति? सबसे ज्यादा खुशी किस काम में मिलती है? टिकाऊ खुशी और स्थायी आनंद ? खुशी और आनंद में अंतर क्या है? उत्कृष्टता से आप क्या समझते हैं ? आत्मनिर्भरता महत्वपूर्ण क्यों है ? जीवन में संघर्षों के क्या मायने हैं? काम में गुणवत्ता को लेकर प्रतिबद्धता जरूरी क्यों है?
शुभकामनायें
परिवर्तन की ओट लिए जब,
कदम समय के चल जाते हैं,
तब नियति का घूँघट ओढ़े,
शिथिल प्रयास भी छल जाते हैं।
परिवर्तन में जो छँट जाते हैं,
नतमस्तक हो झुक जाते हैं,
ऐसे शीश धार से कट कर,
कभी नहीं फिर उठ पाते हैं।
परिवर्तन की राह पकड़ जो,
समय के रंग में ढल जाते हैं,
ऐसे शीश शैल से उठकर,
नभ में सूर्य से बन जाते हैं ।
जब इंकलाब के नारों से
बाधित ये अंतर्मन होता है,
तब ही परिवर्तन पाने को,
चिंगारी से आचमन होता है।
हवन कोई कितने भी कर ले,
जतन सहस्रों कर ले कोई,
परिवर्तन के अटल सत्य से,
चक्र काल का, बच नहीं पाता।
परिवर्तन हो पार्थ के मन में,
परिवर्तित हो शीश कुरु का,
विगत समय की चाल रोक कर,
परिवर्तन, कृष्ण जो कर जाते हैं,
मन में रण हो, या रण में मन,
परिवर्तन की ढाल लिए,
अर्जुन परिवर्तन कर जाते हैं।
परिवर्तन ऋतुओं का होकर,
जीवन में परिवर्तन करता,
जब परिवर्तन ग्रहों का होता,
राम भी उसको रोक ना पाते।
परिवर्तित यदि मृग ना होता,
तुलसी क़लम सींच ना पाते,
ना जाते लंका को रघुवर,
रावण घर घर सेंध लगाते।
परिवर्तन का कठिन दीर्घ पर,
सार बहुत ही कम होता है,
समय की सुइयाँ छिल ना जाएँ,
समय-समय से रंग ना जाये,
इस उद्देश्य जनित ज्वाला से ही,
ये जग परिवर्तन होता है।
- संजय सिंह 'अवध'
ईमेल- green2main@yahoo.co.in
उक्त मन को छूने वाली कविता के रचयिता भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण में ATC अधिकारी हैं और अपने कालेज के दिनों से ही, जैसा कि इनकी रचनाओं से घोतक है, जन जन में संवेदना, करूणा और साहस भरने के साथ अंतर्विषयक समझ द्वारा उत्कृष्टता के पथ पर युवाओं को अग्रसर करने को प्रयासरत हैं।
कवि के बारे में विस्तार से जानने के लिए यहां क्लिक करें।
यह कविता परिवर्तन के महत्व पर प्रकाश डालती है, जो मन, समय और जीवन के विभिन्न पहलुओं में होता है। यह परिवर्तन के विभिन्न रूपों और उनसे जुड़े परिणामों को उजागर करता है।
यह कविता परिवर्तन के महत्व को दर्शाती है और बताती है कि परिवर्तन हर जगह मौजूद है।
इस कविता में परिवर्तन की क्या भूमिका है?
इस कविता में, परिवर्तन जीवन का एक सार्वभौमिक पहलू है, जो मन, समय, ऋतुओं और यहां तक कि ग्रहों को भी प्रभावित करता है। परिवर्तन एक ऐसी शक्ति है जो न केवल व्यक्तिगत विचारों और भावनाओं को बदलती है, बल्कि पूरी दुनिया को भी प्रभावित करती है। यह निरंतरता, विनाश और सृजन की प्रक्रिया को दर्शाता है, जो जीवन के चक्र को आकार देता है।
कविता में 'यह जग परिवर्तन होता है' वाक्यांश का क्या अर्थ है?
यह वाक्यांश कविता के मुख्य विषय को सारांशित करता है: दुनिया में परिवर्तन हर जगह होता है। यह परिवर्तन की सार्वभौमिकता और सभी चीजों पर इसके प्रभाव को इंगित करता है। यह एक शक्तिशाली कथन है जो परिवर्तन की निरंतरता और महत्व पर जोर देता है।
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अक्सर लोगों को बात करते सुना है कि " दान तो हम भी करते हैं लेकिन बताते नहीं फिरते या वाट्सऐप स्टेटस नही लगाते! "
आज के बदलते परिदृश्य में जब आम इंसान स्व केंद्रित होता जा रहा और उसकी व्यक्तिगत चाह और आवश्यकताएं इतनी बढ़ती जा रही हैं कि दूसरों की तकलीफ़ या सामाजिक सरोकार के कार्यों के लिए उसके लिए समय, पैसा या अन्य संसाधन निकाल पाना मुश्किल होता जा रहा है, तब ऐसी हालत में किसी इंसान की व्यक्तिगत मदद में उसकी गोपनीयता का सम्मान करते हुए, अन्य संस्थागत मामलों में सामाजिक सरोकार के किए गए कार्यों का निस्वार्थ प्रचार एक निंदनीय नहीं सराहनीय कार्य है, इससे अन्य लोग प्रेरित होंगे और अपने व्यक्तिगत समस्याओं के निवारण के साथ सामाजिक सरोकार के कार्यों के लिए भी प्रयत्न करेंगे, यथा: रक्तदान, श्रमदान, संस्था को वित्तीय मदद, वस्त्रदान इत्यादि।
- आरती
लेखिका संस्कृत में परास्नातक हैं और हिंदी में परास्नातक की विद्यार्थी साथ ही सामाजिक मुद्दों और राष्ट्रहित के मामलों पर चिंतन उनकी दिनचर्या की प्राथमिकताओं में शामिल है।
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7 नवंबर 2025 को हमारे राष्ट्रगीत वंदे मातरम् ने 150 वर्ष पूरे किये। वंदे मातरम् अर्थात हम भारत माता की वंदना करते है। 1875 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने अपने उपन्यास आनंद मठ में यह गीत लिखा जो उपन्यास के सन्यासियों द्वारा गया जाता था, फिर यह गीत भारतीय जन चेतना का गीत बन गया। इसे बच्चे से लेकर बूढ़े, यहां तक की इस गीत को गाते हुए कितने ही क्रांतिकारियों ने फांसी पर चढ़कर अपने प्राणों की आहुति दे दी।
यह गीत स्वाधीनता संग्राम के लिए प्रेरणा था। हम अपने स्वधीनता के इतिहास को न बिसरा दे इसीलिए यह गीत 24 नवंबर 1950 को संविधान में जोड़ा गया।
क्या हम सच में भारत मां की वंदना करते हैं? क्योंकि आज इस गीत को भी कुछ लोग सांप्रदायिकता (धार्मिकता का उन्मादी रूप) के नजरिये से विशेष वर्ग से जोड़कर देखते हैं। यह संकीर्ण नजरिया यह बताता है कि हम हमारी स्वाधीनता का सही सम्मान नहीं करते। हमें यह सोचने की जरूरत है कि क्या हम में सच में राष्ट्र प्रथम अर्थात स्वयं से भी पहले राष्ट्र का हित सोचने की भावना है?
आज इस गीत को हमें सच्चे अर्थों में समझने की जरूरत है और इसकी भावनाओं को जीने की भी जरूरत है।
सुजलाम् सुफलाम् मलयजशीतलाम् शस्यश्यामलाम् मातरम् की पंक्ति ने भारतीय मानस में चेतना का संचार किया। इस एक पंक्ति में भारत की समृद्धि, सौंदर्य और शक्ति एक साथ मूर्तिमान हो उठे।
थोड़ा लिखा ज्यादा समझना, हमें हमारे राष्ट्रगीत के एक-एक शब्द को समझकर उसे अपने व्यवहार, जीवन मूल्यों और दिनचर्या में शामिल करना है |
शुभकामनाएं
-सौम्या गुप्ता
बाराबंकी उत्तर प्रदेश
सौम्या गुप्ता जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं, उनकी रचनाओं से जीवन, मानव संवेदना एवं मानव जीवन के संघर्षों की एक बेहतर समझ हांसिल की जा सकती है, वो बताती हैं कि उनकी किसी रचना से यदि कोई एक व्यक्ति भी लाभान्वित हो जाये, उसे कुछ स्पष्टता, कुछ साहस मिल जाये, या उसमे लोगों की/समाज की दिक्कतों के प्रति संवेदना जाग्रत हो जाये तो वो अपनी रचना को सफल मानेंगी, उनका विश्वास है कि समाज से पाने की कामना से बेहतर है समाज को कुछ देने के प्रयास जिससे शांति और स्वतंत्रता का दायरा बढे |
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आवारा श्वान मामले को संवेदना और गंभीरता से देखने की जरूरत है। आवारा श्वान और मवेशियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी जरूरी है। हम अगर उन्हें सड़कों पर रहने की मंजूरी दें, तो वास्तव में उन्हें मौत की ओर ढकेलेंगे। अगर आवारा पशुओं से इंसानों को नुकसान होता है, तो खुद पशुओं की जिंदगी भी खतरे में पड़ती है। अत: बेहतर मानवीय बदलाव के लिए न्यायालय की सक्रियता जरूरी है, इसमें राज्यों को पूरा साथ देना चाहिए
- भारत का प्रजातंत्र एडवर्सेरियल डेमोक्रेसी (द्वंद्वात्मक या प्रतिस्पर्धी प्रजातंत्र ) के सिद्धांत पर आधारित है, जिसमें लगातार जनमत तैयार कराने के लिए विचार सम्प्रेषण होता है।
- विज़न 2032 की सफलता का अर्थ केवल तकनीक का विस्तार नहीं, बल्कि सामाजिक नीतियों और संसाधनों के पुनर्गठन से नागरिकों तक लाभ पहुँचाने की सरकार की प्रतिबद्धता है। लोकतांत्रिक जवाबदेही और समावेशन के मानदंडों को अक्षुण्ण रखना सरकार की सर्वोपरि जिम्मेदारी होती है। यदि विजन 2032 के सिद्धांतों पर नीति- निर्माता, तकनीकी संस्थान और नागरिक समाज एकजुट होकर कार्य करें, तो भारत न केवल डिजिटल पहचान के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर विश्वसनीयता, पारदर्शिता और नैतिक शासन का उदाहरण भी स्थापित करेगा। यदि सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना सफल होती है, तो भारत का डिजिटल भविष्य ही नहीं लोकतांत्रिक मूल्यों की भी रक्षा होगी।
- आज जब हम वंदे मातरम् की रचना के 150 वर्ष पूर्ण होने का पावन अवसर मना रहे हैं, यह केवल स्मरण का नहीं, बल्कि आत्मावलोकन का क्षण भी है। क्या हम उस भाव को जी पा रहे हैं, जिसके लिए असंख्य देशभक्तों ने अपने प्राणों की आहुति दी ? क्या हम अपने जीवन में वही समर्पण, वही अनुशासन और वही मातृभूमि भक्ति स्थापित कर पाए हैं?
- प्रतिबद्ध व्यय का उच्च स्तर विकासात्मक कार्यों को करने की राज्य सरकारों की क्षमता को सीमित करता है।
- एफआरबीएम समीक्षा समिति ने 2017 में अनुशंसा की थी कि राज्यों का कर्ज 20 फीसदी तक रहना चाहिए। इसके अलावा राज्य सरकारें सरकारी उपक्रमों द्वारा लिए गए ऋण की भी गारंटी देती हैं जो 2023-24 में जीएसडीपी का 4.2 फीसदी था। यह राज्यों की वित्तीय हालत के लिए एक जोखिम है। उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश और पंजाब जैसे कुछ राज्य कुल आंकड़ों से कहीं अधिक गंभीर वित्तीय संकट में हैं और इन्हें अलग नीतिगत हस्तक्षेप की आवश्यकता हो सकती है।
विभिन्न समाचार पत्रों और पब्लिक डोमेन में उपलब्ध रिपोर्ट्स एवं दस्तावेजों पर आधारित तथा जन जागरूकता के उद्देश्य से संकलित, संकलन कर्ता भौतिकी में परास्नातक हैं ।