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Electric dipole in uniform electric field. Jamia Millia Islamia University BSc Nursing 2024

Torque is given by PESin ø, where ø is angle between field E and dipole moment P so if angle ø is zero or 180 degree only then torque will be zero while net force will be zero always because both charges will experience equal and opposite force .

opposite as both charges have opposite nature.

same force because same electric field in the region and same magnitude of charge as F=qE; so both q and E to be looked for analysis.

Note- Uniform electric field means same direction and magnitude at any point in the region of uniform field.

 

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Shear Modulus of a liquid ? Jamia Millia Islamia University BSc Nursing 2024

As you know that the shear modulus, also known as the modulus of rigidity, is a measure of a material's resistance to shear deformation, and since liquids readily deform under shear stress (i.e. readily changes their shape on application of stress so it can be said that NO resisatance ), so their shear modulus is considered to be zero

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Dependence of inertia. Jamia Millia Islamia University BSc Nursing 2024

Mass

Inertia is related to heaviness or lightness.

Velociy is responsible for momentum while inertia can come into play when body is in rest also.

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Angle for maximum resultant of two vectors? Jamia Millia Islamia University BSc Nursing 2024

Two vectors will have their vector sum maximum when they act parallel i.e angle between them is zero, option A here.

For mathematical explanation refer to the formula of parallelogram, it will give that resultant (R) will be maximum when the angle is zero.

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Choose correct option having dimension different from other. Jamia Millia Islamia University BSc Nursing 2024

As we know that from our text book:- 

Work and energy has same dimensions so energy upon volume and work upon volume will have same dimensions while work is force*displacement   (W= F*d) so work/volume will have dimension of  Force/area as volume has dimension of area*length.

Similarly voltage*charge is nothing but work so volatge*charge/volume will have same dimension as work/volume that is same as that for A & B so A,B and D have same dimensions leading to C as correct answer (different from A, B & D)

 

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सम्यक जीवन और बेहतरी के लिए कुछ प्राथमिकताएं और घर का माहौल; भाग -2
  • घरों में पढाई की लौ जगे, माता पिता अपने कामों के बाद घर में कुछ देर साहित्य पढ़ें इससे कमाई भले थोड़ी कम होगी लेकिन खुद भी ज्ञान का अर्जन होगा समझ बेहतर होगी साथ ही जब बच्चे देखेंगे कि माता पिता भी पढ़ रहें तब वो भी पढ़ेंगे और इस तरह स्वाध्याय के दम से आपके कोचिंग / ट्यूशन के पैसे बचेंगे और एक बार बच्चों का मन अध्ययन मे लगा गया तो वो फिजूल के काम बंद कर देंगे |  
  • महान लोगों की फोटो घर में लगायें और बच्चों को उनके संघर्ष और उपलब्धियों के बारे में बताएं, साथ ही खुद भी उनसे प्रेरणा लेकर अपने जीवन मे संघर्षों के बावजूद सत्य और मेहनत का रास्ता न छोड़ें |
  • बच्चों को तकनीकी पढाई के साथ खेल कूद और साहित्य में रुझान लगायें
  • अगर गुंजाईश हो सके तो बच्चों को देशाटन करवाए, विज्ञानं केंद्र की सैर, ताकि उनमे जिज्ञासा बढे और वो आगे बढ़ने के लिए और मेहनत से पढ़ें, देश दुनिया के बारे में जाने, देश दुनिया के बड़े लोगों के बारे में जाने, उनके संघर्ष और प्राथमिकताओं को समझे और एक बेहतर आदर्श को देख जीवन जिये, कोई भी दिक्कत देख घबराएँ नहीं |
  • बच्चों को दिक्कतों में हारने के बजाय जूझना सिखाएं, अपने व्यवहार से, जब आप खुद दिक्कतों को देख परेशान होने ये खीझने के बजाय उससे निपटने का रास्ता निकलेंगे तो बच्चे भी यही सीखेंगे, बच्चों मे धैर्य और तार्किकता के बीज डालें | “चीज़ें समय लेती हैं ”
  • प्राथमिकतायें कम लेकिन ठोस हों ऐसी सीख दें
  • किसी भी तरह की कुंठा से बचाएं, क्योंकि कुंठा हमारा वक़्त बर्बाद करती है, उन्हें कोई कमतर न दिखा पाए इस तरह उन्हें तैयार करे इसके लिए उन्हें अध्यात्मिक अध्ययन के निकट ले जाएँ, कुंठा तब आती है जब हम उस चीज़ के बारे मे सोंचते हैं जो हमारे पास नहीं है और उस चीज़ का सदुपयोग नहीं कर पाते जो हमारे पास है |
  • जो भी साधन, गुण और काबिलियत आपके पास हैं उनका भरपूर उपयोग कर अपने काम को अच्छे से करें न कि दूसरों से तुलना करके खुद को कुंठा मे डालें|
  • याद रखें कि सबकी परिस्थितियाँ भी अलग हैं और जरूरतें भी, दिखावे से ज्यादा असली जरूरत पर विचार करके ही चीजों को हासिल करने का सोंचे, अपनी इच्छाओं कि पूर्ति के लिए अपने जीवन की शांति और खेलने, पढ़ने का समय भी अगर काम मे लगा दिया तो संतुलन बिगड़ जाएगा |
  • अपनी क्षमतानुसार घर में छोटी लाइब्रेरी बनायें जिसमे हर जरुरी वर्ग का साहित्य हो ताकि बच्चों की बुद्धि समावेशी हो
  • बच्चों में शिक्षक के प्रति आदर पैदा करें ताकि वो उनसे सीख सके, और शिक्षकों मे भी ज़िम्मेदारी का बोध बढ़े |
  • बच्चों को परहित के लिए तैयार करें इस तरह वो अस्थायी असफलता से घबराएगा नहीं और सफलता मिलने पर गुरुर न करेगा और इसका नतीजा ये होगा की वो बहुत आगे तक जायेगा, उसको स्वाद लगने दें परहित से मिलने वाले आनंद का, फिर मेहनत और उन्नति तो खुद कर लेगा, दूसरे का भला और उन्नति का करते करते उसकी भी उन्नति हो जाएगी |

    बाकी बातें अगले भागों मे |
    शुभकामनाएं 

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सम्यक जीवन और बेहतरी के लिए कुछ प्राथमिकताएं और घर का माहौल; भाग -4

बच्चों के शिक्षकों से समय समय पर मिलते रहे और आपकी संतान पढाई और अन्य गतिविधियों में कैसा प्रदर्शन कर रही इसकी जानकारी लें, आपकी जागरूकता शिक्षकों को और ज्यादा जिम्मेदारी का अहसास करवाएंगी |

  • खुद भी आप आपा-धापी में न रहें, जहाँ तक हो सके एक सुवावस्थित जीवन जियें, आपको देख बच्चे भी वही अनुसरण करेंगे जीवन में जो कुछ जरुरी है आपकी उन्नति और शांति के लिए उसी को समय दें, अनावश्यक औपचारिकताओं और दिखावे में न उलझें |
  • पैसे को लेकर भी एक विचार रखें की आत्मनिर्भरता और गरिमामय जीवन के लिए जितना जरुरी है उतना कमाना है ये ध्येय रखें नाकि अकूत संपत्ति का चाह, बच्चों को काबिल बना दें वो अपनी व्यवस्था खुद कर लेंगे उनके लिए अतिरिक्त प्रबंध करने की लालसा के चलते अपने स्वस्थ्य के साथ और अपनी गरिमा के साथ समझौता न करें, बच्चे कर्मशील तब ही बनेंगे जब वैसी परिस्थिति बनेगी, संपत्ति संचयन सही तरीके से हो और उतना ही जितना गरिमामय जीवन को जरुरी है, बच्चे बैठकर बिना कुछ किये खा सकें इसके लिए कमाएंगे तो बच्चों के बिगड़ने की संभावना बन जाएगी |
  • न खुद दीन हीन बनकर रहें और नहीं बच्चों को बेचारा दिखने की सीख दें, सीना तानकर चलें, चीज़ों की सही कीमत अदा करें और समाज के दबे कुचले लोगों के जीवन स्तर को उठाने के लिए संघर्ष करें, जीवन एक दिन चले जाना है उससे पहले इसे किसी ऐसे काम में लगायें जिससे वो माहौल अच्छा हो जिसमे आप रहते हो
  • संगठित होकर रहना सीखिए, अन्याय के खिलाफ और अपने हक़ के लिए संगठित होकर बोलना सीखिए
  • जन कल्याण की सरकारी योजनाओं की जानकारी रखिये और अपने समाज के लोगों को जागरूक करिए
  • कमाने के साथ ध्यान दीजिये कि आपकी मेहनत का पैसा कहीं दिखावे या फ़िज़ूल के खर्च में तो नहीं जा रहा
  • अन्याय नहीं सहना है और अपने समाज के ईमानदार और जुझारू लोगों को सरकार में भेजना है ताकि बेहतर प्रतिनिधित्व हो सके
  • इंसान में अगर स्वयं और दुनिया की सही समझ है तो वो अपनी उन्नति और भले के लिए जरुरी कदम भी उठा लेगा और जरुरी नीतियाँ भी बना लेगा इसके लिए न तो उसे बताना पड़ेगा की ईमानदार रहो मेहनत करो और नहीं उसे ये बताना पड़ेगा की अपने साथ-साथ समाज के कमज़ोर लोगों की बेहतरी के लिए भी समय और संसाधन खर्च करो क्योंकि इससे वो माहौल बेहतर होता है जहाँ आप रहते हो
  • बात साफ़ है जिसने आजादी और गरिमा का जीवन जिया है जिसने सत्य को जान लिया उसका ये प्रयास रहेगा कि दूसरे भी सत्य को समझे इसके लिए साहित्य हमारी मदद करता है, जिन्होंने सालों की जिंदगी जी है और अंत में एक निष्कर्ष तक पहुंचे हैं उन्होंने अपने जीवन के अनुभव को अगर एक किताब की शक्ल देने की मेहनत की है तो उससे हमें जरुर फायदा लेना चाहिए
  • एक अच्छी किताब एक केवल एक किताब भार नहीं है, ये तो संगति है उस ऊँचे इंसान की जो हमारे साथ भौतिक रूप से तो नहीं हो सकता है लेकिन अपनी किताब के माध्यम से हमें वो सब कुछ बता पा रहा है जो अन्यथा वो साथ होने पर बताता |
  • किताबें हमें स्पष्टता देती हैं जिससे हम सही रास्ते पर चल पाते हैं बेधड़क अन्यथा दस तरह की मूर्खताएं कर अपना समय और उर्जा ख़राब करते हैं, भ्रम, डर और लालच ही इंसान से गलत काम करवाते हैं |
  • स्वयं को जानना ही है अध्यात्म; हो सकता है कि शुरुआत में तो अध्यात्म की पुस्तक आपको अरुचिकर लगे लेकिन धीरे धीरे आपको जब समझ आने लगेगा तो आप समझ जाओगे की ये तो उन पुस्तकों में से हैं जो सबसे पहले पढ़ी जानी चाहिए |
  • आप अगर ध्यान दें, तो पाएंगे कि समाज के जो हिस्से निरंतर आगे बढ़ रहे हैं उनमे संपत्ति के साथ एक और बात है जो साझा है वो है अध्ययन और संगति को उचित महत्व और सही चुनाव |
  • जैसे की हम एक शब्द-युग्म का इस्तेमाल करते हैं पढ़े-लिखे

इसमें ये जो “लिखे “ इस शब्द को अगर सार्थक करना है तो मुझे लगता है कि हमें अपने बच्चों को पढने के साथ अपने विचारों को और समझ को लिखने के लिए प्रेरित करना चाहिए इससे होगा क्या ? इससे दो फायदे हो सकते हैं पहला की बच्चे अपनी बात को रखने में निपुण होंगे दूसरा ये कि समाज में कई तरह के लेखक हैं कोई अपने लेखन कौशल से कोई बात को प्रचारित करता है या प्रोत्साहित करता है तो कोई लेखक किसी बात को, तो क्यों ने हम भी अपनी बात को एक बड़े जन समूह या एक बड़े पाठक वर्ग के साथ साझा करें और उन बातों को सामने रखें जो जरुरी तो हैं लेकिन उन्हें किसी कारणवश उतना महत्व नहीं दिया गया जितना दिया जाना चाहिए, साथ ही ऐसा हो सकता है कि मौजूदा लेखक वर्ग अपनी लेखनी में हमारे कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों को उचित स्थान न दे रहे हों उस स्थिति में हम उस कमी को पूरा कर सकते हैं|

  • रही बात लेखन कौशल की तो वो अभ्यास से आएगा, शब्दकोष और तरीके के लिए उपलब्ध साहित्य को पढ़िए और खूब पढ़िए ताकि आपको अपने लेखन में समुचित सहयोग मिल सके फिर धीरे-धीरे अपकी लेखनी में धार आएगी और एक दिन प्रकाशित होकर बड़े जन समूह तक भी पहुंचे, कुछ नया नहीं लिख सकते तो अपने अनुभव  लिखने से शुरुआत करिए ये भी किसी न किसी के काम आयेंगे और आप अपने समाज का प्रतिनिधित्व भी कर पाएंगे|

    बाकी बातें अगले भागों मे |
    शुभकामनाएं 

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सम्यक जीवन और बेहतरी के लिए कुछ प्राथमिकताएं और घर का माहौल; भाग -3
  • आंबेडकर जी का साहित्य रखिये घर में, फुले जी का साहित्य रखिये घर में, जो नेता संघर्ष वाले जीवन से आकर ऊँचाई तक पहुंचे या जिन्होंने समाज के पिछड़ी तबकों के भले के लिए काम किया उनकी जीवनी या आत्मकथा रखिये घर में खुद भी पढ़िए और बच्चों को भी प्रेरित करिए          
  • ही लोगों का मान करना सीखिए, जिस तरह के लोगों का मान आप करेंगे आपके बच्चे भी उनका ही मान करेंगे
  • अगर आप शिक्षित, समझदार और ईमानदार लोगों का मान करेंगे तो आपके बच्चे भी उनका मान करेंगे और खुद भी वैसा ही बनने का प्रयास करेंगे, फिर आपको उनसे बेहतर बनने को कहना न पड़ेगा, माहौल सब कह देगा |
  • हमें समाज में एक निर्णायक भूमिका पानी है इस विचार को जिन्दा रखने और याद रखने के लिए नियमित मीटिंग कर इस बारे में प्रगति पर चर्चा करें ताकि इस तरह हम केवल स्वयं तक ही सीमित न रह जाएँ, जब प्रयास सामूहिक हो तो उत्साह भी बना रहता है और काम भी चलते रहते हैं |
  • निडर बनंगे तो आगे बढ़ने और मजबूती के लिए मेहनत करेंगे, दब्बू रहेंगे तो आगे बढ़ने की उत्कंठा ही न पैदा होगी
  • आपना  मत और अपनी बात/स्तिथि स्पष्ट रूप से बोलना सिखाइए ताकि ऐसे ही लोगों से संग हो सके,क्योकि संगति महत्वपूर्ण है |
  • जो इंसान केवल हाँ में हाँ में मिलाता है अपना मतलब निकलने को फिर वो ऐसे ही लोगों से घिर जाता है
  • अपनी असहमति को खुलकर व्यक्त करें और लोगों को भी आजादी दें की वो अपनी सहमति को खुलकर व्यक्त कर सकें, फिर तर्क के द्वारा लोगों की शंका समाधान करें इस तरह लोग सच्चे मन से आपके साथ होंगे और जिन्हें केवल झूठ ही पसंद है वो खुद ही दूर हट जायेंगे|
  • नेतृत्व की क्षमता रखें, स्कूल के वक़्त से ही बच्चों को स्कूल में होने वाले कार्यक्रम में हिस्से लेने को प्रोत्साहित करें और खासकर भाषण देने, मंच संचालन और समन्वय के कामो में
  • उन्हें सिखाएं की जो भी लोग उनके साथ जुड़े हैं उनके हित सुरक्षित रहें और उनके वाजिब हित पूरे हो सकें इस बात को ध्यान में रखकर ही काम करें
  • साहस आता है स्पष्टता  से अतः बच्चों को साहित्य अध्ययन के लिए प्रोत्साहित करें ताकि उनमे स्पष्टता रहे और वह साहस के साथ आगे बढ़ सकें |
  • बच्चों में कोई फूट न डाल पाए इस तरह तैयार करें उन्हें, उन्हें बताएं की अपना वो जो सच के रास्ते चले, उन्हे बताएं कि किसी के कहने मे न आकर वस्तु स्थिति का जायजा लें और संबन्धित व्यक्ति से खुद बात करें |
  • जो सफल हुए हैं उनसे किसी भी तरह का इर्ष्या भाव या प्रतिस्पर्धा की भावना रखे बिना उनसे सीखने के इच्छा रख वार्तालाप करें, बहंस के बजे चर्चा के रुझान के साथ बाते करें |
  • बच्चों को दूसरों की मदद के लिए प्रेरित करने के लिए खुद अपनी इनकम का 2 % जरूरतमंद लोग जिनसे आपका कोई स्वार्थ नहीं उनकी मदद के लिए आरक्षित करें, इस तरह बच्चों में दूसरों की मदद के लिए पहले खुद को समर्थ बनाने के लिए मेहनत करने की प्रेरणा मिलेगी |
  • खुद को मांगने वाला नहीं देने वाला समझ खुद मेहनत कर वो हासिल करना है जिसके हम हकदार हैं, किसी का चमचा नहीं बनना, खुद समर्थ हो ऐसा मानकर खुद ही सारे तरीके सीखने हैं|

बाकी बातें अगले भागों मे |
शुभकामनाएं 

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सम्यक जीवन और बेहतरी के लिए कुछ प्राथमिकताएं और घर का माहौल; भाग -1
  • उद्देश्य में हो एक गरिमामय और आत्मनिर्भरता वाला व्यक्तिगत जीवन  समाज के निर्माण में निर्णायक भूमिका नाकि आपस में सम्मान पाने की होड़, अगर समाज के निर्माण मे निर्णायक भूमिका न निभा सकें तो अपने व्यक्तिगत जीवन मे ही सत्यनिष्ठा से जीवन जीकर एक सही मिसाल बने न कि झूठ और दिखावे का जीवन जीकर एक गलत उदाहरण |
  • अपने व्यक्तिगत उन्नयन के साथ अपने समाज के पिछड़े लोगों की मदद ताकि उनको उचित शिक्षा मिल पाए और वो भी समाज में एक गरिमामय उपस्थिति दर्ज कर सकें, इस तरह आपके आस-पास समृद्धि होगी तो आपको और अच्छा लगेगा|
  • छोटी छोटी औपचारिकताओं को लेकर विवाद के बजाय हमारे ध्यान में बड़ा उद्देश्य हो जिसमे शिक्षा, उन्नयन हो, आत्मनिर्भरता, सम्पन्नता और समाज में एक उचित स्थान के लिए के एक -दूसरे का  वाजिब साथ हो
  • बच्चों में साहित्य को लेक्रर रुझान विकसित करना होगा जिससे एक दूसरे को समझना और समन्वय बैठना आसान हो सके |
  • अध्यात्म की समझ को लेकर रुझान ताकि छोटी और सतही  चीज़ में उलझे बिना  बच्चे सही उद्देश्य के लिए मेहनत कर सकें
  • जहाँ समाज का एक तबका पूरे मनोयोग से शक्ति और सम्पन्नता के लिए लगे हैं वहीँ समाज का एक बड़ा तबका आपस के मतभेद में उलझे हैं, एक दूसरे कि टांग खींच रहे, और नीचा दिखा रहे, ऐसा बिलकुल न हो सारे क्रिया कलापों का उद्देश्य ऐसा हो कि एक दूसरे कि उन्नति मे सहयोग करना है, और खुद भी अपने काम मे उत्कृष्टता लाकर बेहतरी हासिल करनी है |
  • खुश होना ही है तो खुद के काम मे उत्कृष्टता लाकर खुश हो, किसी को नीचा दिखाकर खुश होना तो बहुत सतही है, किसी ने कुछ बेहतर किया हो तो उसकी तारीफ करें उसके प्रयासों कि तारीफ करें ताकि समाज के और लोग भी उससे प्रेरणा लेकर बेहतर काम करे, किसी कि सफलता का श्रेय अगर किस्मत को देंगे तो फिर लोग अपने काम मे कौशल लाने के बजाय बस किस्मत चमकाने के उपाय करते फिरेंगे|
  • साहित्य की समझ तो इंसान की समझ को वृहद् करती है और समावेशी बनती है, इसीलिए खुद भी साहित्य पढ़ें नियमित रूप से और दूसरों को भी पढ़ने का सुझाव दें, अगर साहित्य अध्ययन से आपके जीवन मे शांति का समावेश होगा तो लोग भी प्रेरित होंगे |
  • शारीरिक रूप से मजबूती, व्यायाम के द्वारा सुनिश्चित करें ताकि इस शरीर रूपी साधन का उपयोग आप स्वयं कि बेहतरी और एक आज़ाद जीवन जीने के लिए कर सकें, उत्तेजक भोजन से बचें |
  • मानसिक मजबूती के सारे साधन, माने मानव मन और दुनिया की स्पष्ट समझ, एक बार समझ आ गयी तो अकेले रहने से भी डर न लगेगा, और ये जो दुनिया का दबाव होता है की अकेले छोड़ देंगे इससे मुक्ति मिल जाएगी|

बाकी बातें अगले भागों मे |
शुभकामनाएं 

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अध्ययन को लेकर रुझान कैसे विकसित करें बच्चों में ? - एक प्रयास बेहतर बदलाव और समृद्धि  के लिए

बच्चों का रुझान और जरुरतें , एक प्रयास बेहतर बदलाव और समृद्धि  के लिए

बच्चों को अगर भाग्यवादी नहीं बल्कि तर्कवादी बनाना है तो उन्हें अध्ययन के लिए प्रेरित करना होगा, उन्हें बताना होगा की अध्ययन से वो बेहतर तरीके से समझ पाएंगे कार्य-कारण सिद्धांत को और समझ पाएंगे की दुनिया में घट रही घटनाओं के पीछे क्या तर्क है, अलग अलग जगहों और अलग-अलग पेशों के लोगों का व्यवहार, प्राथमिकतायें अलग अलग क्यों होती है, क्यों एक काम एक इंसान के लिए सही और दूसरे के लिए गलत हो सकता है, क्यों कोई बात किसी के लिए छोटी और किसी के लिए बड़ी हो सकती है; इस तरह वो खुद को और दुनिया को बेहतर समझ पाएंगे और स्वयं के लिए क्या बेहतर है इस बात को समझकर लोगों के साथ ताल मेल बिठाकर अच्छे से आगे बढ़ पाएंगे|

और साथ ही  एक आत्मनिर्भर तथा गरिमामय जीवन के लिए पैसा कमाने के लिए सही रास्ता अपनाएंगे और साथ ही उसे सही और उचित मदों पर ही खर्च करने की दृष्टि विकसित कर पाएंगे |

 “अध्ययन की उपयोगिता समझ आ गयी तो रुझान आ ही जाना है |”

“तर्कवादी इंसान  किस्मत के सहारे  नहीं बैठता है बल्कि वो सही तरीके से खुद के लिए जो बेहतर उसे पाने के लिए उद्दयम करता है |”

“जिसकी इच्छाएं सीमित हों और जो तर्कवादी हो, कार्य कारण के सिद्धांत में विश्वास रखता है उसके द्वारा अंधविश्वास की शरण एक दुर्लभ बात हो जाती है |”

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