banner

Pre-booking of books by the author started...

Books by Author Lovekush Kumar

Explore the books by author for excelling in your discipline.

Read Now

Physics

Explore for detailed physics solutions and tips.

Read Now

Society

Explore more about ideas and inspiring actions for a better society.

Read Now

Excellence

Explore more about ideas and inspiring actions for a better society.

Read Now

Human Values

Explore more about ideas and inspiring actions for a better society.

Read Now

Education

Explore more about ideas and inspiring actions for a better society.

Read Now

Appreciation and Promotion

Explore for "promotable images/quotes" at your social media for a better society.

Read Now

कुछ सवाल

सामाजिक स्थिति को लेकर कुछ जरुरी सवालों के लिए क्लिक करें।

अभी पढ़े

लघु कहानियां

लेखक द्वारा सामाजिक तानेबाने पर लिखित कुछ कहानियों के लिए क्लिक करें।

अभी पढ़े

भौतिकी (Physics in Hindi)

हिन्दी में भौतिकी की समझ को बेहतर करने के लिए क्लिक करें।

अभी पढ़े
Banner 2
Banner 3

Recent Articles

मानव व्यवहार और समाज के सम्बन्ध में कुछ उक्तियां: भाग-3
  • जहाज अपने चारों तरफ के पानी के वजह से नहीं डूबा करते, जहाज पानी के अंदर समा जाने की वजह से डूबते हैं"
  • "मनुष्य होने और मनुष्य बनने के बीच का लंबा सफर ही जीवन है |"
  • "विचारपरक संकल्प स्वयं के शांतचित्त रहने का उत्प्रेरक है"
  •  "सरलता चरम परिष्करण है"
  • सामाजिक न्याय के बिना  आर्थिक समृद्धि निरर्थक है।
  • बिना आर्थिक समृद्धि के सामाजिक न्याय नहीं हो सकता किंतु बिना सामाजिक न्याय के आर्थिक समृद्धि हो सकती है |
  • सत् ही यथार्थ है और यथार्थ ही सत् है।"
  • "इच्छा रहित होने का दर्शन काल्पनिक आदर्श (यूटोपिया) है, जबकि भौतिकता माया है।"
  • "आपकी मेरे बारे में धारणा, आपकी सोच दर्शाती है; आपके प्रति मेरी प्रतिक्रिया, मेरा संस्कार है।"
  •  "शोध क्या है, ज्ञान के साथ एक अजनबी मुलाकात।" 
  • "पालना झूलाने वाले हाथों में ही संसार की बागडोर होती है।"
  •  "इतिहास स्वयं को दोहराता है, पहली बार एक त्रासदी के रूप में, दूसरी बार एक प्रहसन के रूप में।"
  • "सर्वोत्तम कार्यप्रणाली से बेहतर कार्यप्रणालियाँ भी होती हैं।"

स्रोत - यूपीएससी सिविल सेवा ( मुख्य परीक्षा निबंध के विषय  )

Read More
दूसरों की परवाह या खुद को आराम ?

अगर किसी इंसान की प्रकृति ही ऐसी है कि उसे बस अपनी सुविधा असुविधा दिखती है, दूसरों की उसे कोई परवाह नहीं है तो उसकी यह प्रकृति उसके एक-एक कार्य में दिखाई देंगी।

 

जैसे अगर वो किसी सड़क को रिपेयर करेगा तो बजडी वहीं छोड़ देगा, उसे इस बात से कोई सरोकार नहीं कि कोई वाहन उस पर फिसलकर गिर सकता है।

जैसे अगर उसके बालू खनन के डंपर चल रहे हैं तो वो ड्राइवर को पैसे नहीं देगा, उस डंपर को ढकने के लिए भले ही बालू उड़कर सड़क को गंदा करे या किसी की आंखों और फेफड़ों में जाए ‌।

 

अगर वो किसी सड़क के डिवाइडर बनाएगा तो उसमें पाइप और सरिया ऐसे ही छोड़ देगा भले ही किसी राहगीर के गिरते ही उसके सीने में घुस जाए।

 

सड़क ऐसी बनाएगा कि एक ही बरसात में ही उसमें गड्ढे बन जायें

 

स्वाद बढ़ाने के लिए मसालों में ऐसा रसायन मिला देगा कि उससे लोगों को कैंसर तक हो जाए‌।

एक दृष्टि डालते हैं खुद पर जब हमें कोई दिखता है जो लोगों के हित अहित को लेकर चिन्तित हो तो उससे हम क्या कहते हैं?

कि संयत होकर सोचो और बीच का रास्ता निकालो, जनहित को ऊपर रखो या फिर 

हम कहते हैं कि " अपना देखो दूसरों के बारे में इतना क्यों सोचना! "

हमारा जवाब क्या होगा इससे ही निर्धारित होता है कि समाज में किस तरह के लोगों की संख्या ज्यादा होगी।

 

विरोधाभास देखिए कि जो इंसान खुद दूसरों की सुविधा - असुविधा का ध्यान नहीं रखता वो भी दूसरों से अपेक्षा रखता है कि लोग उसकी सुविधा असुविधा का ध्यान रखें।

 

आप किस तरह का उदाहरण बनना चाहतें हैं?

 

किन लोगों में खुद की गिनती करवाना चाहते हैं ?

उनमें जो जो दूसरों की चिंता करते हैं और दिमाग पर जोर देकर रास्ता निकालते हैं या उनमें जो बस अपना आराम और अपना वित्तीय फायदा नुकसान देखते हैं और दूसरों की परवाह नहीं करते ?

 

जरूर विचार करिए और दूसरों से भी चर्चा करिए, समय निकालकर करिए |

Read More
मानव व्यवहार और समाज के सम्बन्ध में कुछ उक्तियां-भाग-२
  • अतीत' मानवीय चेतना तथा मूल्यों का स्थायी आयाम है 
  • एक अच्छा जीवन प्रेम से प्रेरित तथा ज्ञान से संचालित होता है
  • कहीं पर भी गरीबी हर जगह की समृद्धि के लिए खतरा है
  • जो समाज अपने सिद्धांतों के ऊपर अपने विशेषाधिकारों को महत्व देता है, वह दोनों से हाथ धो बैठता है
  • यथार्थ आदर्श के अनुरूप नहीं होता, बल्कि उसकी पुष्टि करता है
  • रूढ़िगत नैतिकता आधुनिक जीवन का मार्गदर्शक नहीं हो सकती
  • मूल्य वे नहीं जो मानवता है, बल्कि वे हैं जैसा मानवता को होना चाहिए
  • विवेक सत्य को खोज निकालता है
  • व्यक्ति के लिए जो सर्वश्रेष्ठ है, वह आवश्यक नहीं कि समाज के लिए भी हो
  • स्वीकारोक्ति का साहस और सुधार करने की निष्ठा सफलता के दो मंत्र

स्रोत - यूपीएससी  सिविल सेवा मुख्य परीक्षा- निबंध के विषय 

Read More
मानव व्यवहार और समाज के सम्बन्ध में कुछ उक्तियां
  • किसी को अनुदान देने से, उसके काम मे हाथ बँटाना बेहतर है 
  • फुर्तीला किन्तु संतुलित व्यक्ति ही दौड़ मे विजयी होता है |
  • किसी संस्था का चरित्र चित्रण, उसके नेतृत्व मे प्रतिबिम्बित होता है |
  •   जो बदलाव आप दूसरों मे देखना चाहते हैं- पहले स्वयं मे लाइये – गांधी जी
  • अधिकार ( सत्ता ) बढने के साथ उत्तरदायित्व भी बढ़ जाता है |
  • शब्द दो-धारी तलवार से अधिक तीक्ष्ण होते हैं |
  • आवश्यकता लोभ की जननी है तथा लोभ का आधिक्य नस्लें बर्बाद करता है |
  • स्त्री पुरुषों के समान सरोकारों को शामिल किए बिना विकास संकटग्रस्त है |
  • राष्ट्र के भाग्य निर्माण का स्वरूप-निर्माण उसकी कक्षाओं मे होता है |
  • हम मानवीय नियमों का तो साहसपूर्वक सामना कर सकते हैं, परंतु प्रकृतिक नियमों का प्रतिरोध नहीं कर सकते |

 

 

स्रोत - यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा निबंध के विषय 

Read More
व्यवहार नहीं कार्य की गुणवत्ता, जिम्मेदारी और जवाबदेही का भाव देखिए

लोगों का आंकलन करते वक्त उनका व्यवहार नहीं उनके कार्य की गुणवत्ता, जिम्मेदारी लेनी की इच्छा और जवाबदेही का भाव देखिए।

जो इंसान कार्य के प्रति समर्पित है, संभावना है कि डेडलाइन के चलते या ज्यादा काम के चलते वो कभी-कभी अपने व्यवहार को संयत न रख पाए वहीं जो लोग कामचोर प्रवृत्ति के होते हैं, उनके लिए अपने व्यवहार को संयत रखना अपेक्षाकृत आसान होता है।

इसीलिए ये न देखिए कि कौन आपको हर त्योहार बधाई संदेश भेज रहा है या आपकी आत्मप्रशंसा की बातों में हां में हां मिला रहा है, बल्कि ये देखिए कि कौन अपने कार्यों और जिम्मेदारियों को अच्छे से पूरा कर रहा।

देश और समाज में समृद्धि और संपन्नता गुणवत्तापूर्ण और जिम्मेदारी के साथ किए गए कार्यों से आती है नकि बधाई संदेश फारवर्ड करने से।

-लवकुश कुमार 

Read More
प्रतीक्षा - एक लघुकथा

और अनुपमा, कैसी हो ? साधना ने अपनी सहेली के हास्टल के कमरे में घुसते ही पूछा।

ठीक हूं यार, तू बता कैसी है और कैसे हैं मेरे होने वाले जीजा जी, साधना का हांथ पकड़ते हुए आंखों में एक चमक और चेहरे पर ठिठोली का भाव लाते हुए, अनुपमा ने भी सवाल दाग दिया।

वो भी ठीक हैं ( चेहरे पर लालिमा और मुस्कुराहट के साथ ), उनका तबादला बनारस हो गया है और आज ही वो बिजनौर के कार्यालय से रिलीव भी हो गए हैं, साधना ने जवाब दिया, पापा कह रहे थे कि मेरे फाइनल सेमेस्टर के एग्जाम के तुरंत बाद सगाई और नवंबर में शादी!

अब जल्द ही मेरा अकेलापन दूर हो जाएगा, साधना खिलखिलाते हुए बोली।

नहीं प्यारी, अकेलापन दूर नहीं होगा बस दब जायेगा, अनुपमा ने मुस्कुराते हुए आध्यात्मिक ज्ञान का साझा किया |

अकेलापन दूर होता है जब हम किसी बड़े काम में लगते हैं, ऐसा काम जो हमें हमारी उच्चतम संभावनाओं तक ले जाए, अनुपमा ने आगे समझाया |

तो तू कब ढूंढ रही है कोई जो तुझे तेरी उच्चतम संभावनाओं तक ले जाए, साधना ने कुछ खीझकर कहा।

प्रतीक्षा में हूं कि कब कोई मिलेगा ऐसा, जल्दबाजी में मैं किसी ऐसी गाड़ी में नहीं बैठना चाहती जिसमें मुझे खुद ही धक्का लगाना पड़े, इससे बेहतर है कि मैं पैदल ही चलती रहूं, अनुपमा ने गहरी सांस भरते हुए कहा।

- लवकुश कुमार

Read More
ये वेबसाइट क्यों और इसमे इतनी कैटेगरीज क्यों ? – एक पहल

इस तरह की वेबसाइट पहले ही कई हैं जिसमे अपना अनुभव या ज्ञान साझा करते हैं लोग, उसी तरह यह भी एक वेबसाइट है बस अंतर इस बात का है कि इंसान के अनुभवों मे जो कुछ अंतर होता है वो होता है अलग-अलग परिस्थितियों के चलते, इसीलिए यहाँ मै अपने तरीके से अपने अनुभव व्यक्त करने का प्रयास कर रहा हूँ  जो उनके लिए तो उपयोगी होंगे ही जिन्हे वही माहौल मिल रहा जो मुझे मिल रहा और उनके लिए भी उपयोगी हो सकता है जो अन्य माहौल से हैं और अपनी समझ को और समावेशी करना चाहते हैं |


जैसे एक ही बात को कहने के तरीके अलग अलग होते हैं, कोई कविता, कोई शायरी, कोई व्यंग तो कोई सपाट लेख लिखकर व्यक्त करता है अपने विचार और संदेश वैसे ही पाठक भी कई तरह के होते हैं कोई कविता तो कोई कोई लेख या कोई और किसी अन्य साहित्यिक विधा मे बात सुनना/पढ़ना पसंद करता/करती है, मुझे विश्वास है कुछ पाठक/श्रोता ऐसे भी होंगे जिन्हे मेरी लेखन शैली प्रभावित करेगी और मेरी बात और संदेश/अनुभव को सही परिप्रेक्ष्य मे समझ सकेंगे, जिन पाठकों को कोई बात अजीब लगे, निसंकोच मुझे लिख भेजे ( वेबसाइट  पर दिये कांटैक्ट फॉर्म से  ) |


एक समय था जब मेरे युवा और संवेदनशील मन में समाज और स्वयं को लेकर बहुत सवाल थे और मेरे समय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा इन बातों पर मंथन पर खर्च होता था, लोगों और स्वयं के मन को समझने के लिए मै लोगों से बात करता था, कभी लोग न मिलें तो किताबें पढ़ता था और कभी ये ही न पता हो कि इस मामले के लिए कौन सी पुस्तक पढ़नी है तो ऐसे ही स्वयं सोचना, विचारना और वस्तुस्थिति का विश्लेषण करता था।

कुछ किताबों को पढ़कर मानो ऐसा लगा जैसे मेरे लिए ही लिखी गयी हों, मेरा भी ऐसा ही कुछ प्रयास है की कोई दुविधा और बेचैनी मे फंसा हुआ इंसान मेरे लेख, मेरे अनुभव या संदेश पढे और उसे लगे की अरे ये तो लग रहा कि उसके लिए ही लिखा हुआ लेख है|


मेरा प्रयास है कि जो युवा एक सीधा, सरल और समृद्ध जीवन जीना चाहते हैं मै इस मंच से उनकी जिज्ञासाओं को हल कर पाऊँ, मै अपने प्रयास मे कितना सफल रहा यह तो आप पाठक ही निर्धारित कर पाएंगे, प्रयास जारी रहेगा |

खासकर वो लोग जो सीधा और सरल जीवन जीना चाहते हैं लेकिन उन्हें इधर उधर से सुनने को मिलता है कि दुनिया में सीधा और सरल रहकर जीना मुश्किल है और लोग तमाम तरह के झूठ बोलने को उकसाते हैं और तरह तरह के दिखावे करने को बोलते हैं।

"जबकि बात केवल इतनी सी है कि सीधा और सरल होने के साथ हमें समझदार होना है और काबिल ( कौशल युक्त, सजग और जागरूक ) भी ताकि स्पष्टता रहे और हम अपनी क्षमताओं के अनुरूप आत्मनिर्भर बन सकें |"


एक बात स्पष्ट रूप से समझनी होगी कि आप अगर बात - बात पर झूठ बोलते हैं तो आपके लिए सच असहनीय हो जाता है और नतीजतन सच्चे लोग आपसे दूर होने लगते हैं और आप झूठे लोगों से घिर जाते हैं।

जो इंसान स्वयं ही झूठे बहाने बनाता हो उसके लिए झूठे और सच्चे इंसान में फर्क करना मुश्किल हो जाता है और किसी पर यकीन करना भी, या फिर कोई लंबे अरसे तक झूठे लोगों के बीच रहे जो बार-बार वादा करके तोड़ते हों या फिर कहते कुछ हों और करते कुछ इस तरह की परिस्थितियों का भुक्तभोगी इंसान  भी किसी पर जल्द यकीन नहीं कर पाता |


"अगर इंसान जीवन में एक सही उद्देश्य, सही काम को पकड़ ले तो उसे बाहरी परिस्थितियां और लोगों की बातें उस सीमा तक प्रभावित नहीं कर पाती कि वह अशांत हो जाए |"


क्रोध आपकी मजबूरी और आपके ऊपर दबाव (अपेक्षाओं का, डर का या आकांक्षाओं का ) को व्यक्त करने कि प्रक्रिया है, आपका जीवन जितना दबावमुक्त होगा और आप जितना खुलकर अपना पक्ष रखते होंगे उतना ही आपके अंदर क्रोध कम पनपता है, क्रोध अंदर ही होता है उसे भड़काने का काम करती हैं बाहर कि घटनाएँ, जरूरत है स्वयं पर नज़र रखने की|


दुनिया से धोखा तब मिलता है जब हम या तो डर या लालचवश या फिर अशांत अवस्था मे कोई कदम उठाते हैं या फिर कोई चुनाव ( पसंद/नापसंद ) करते हैं, ज्ञान और स्पष्टता के माध्यम से हम डर, लालच और मोह से मुक्त हो सकते हैं और अभ्यास से खुद को संयत रख सकते हैं ताकि अशांति की अवस्थाएँ कम हों और हम ठगे जाने से बच सकें |

ध्यान रखें की जब हमारे निर्णयों के केंद्र मे डर या लालच के बजाय असली जरूरत होगी तो ठगे जाने की संभावना कम होगी |


ये सब कुछ हमे सीखने, जानने को मिलता है आत्मवलोकन, साहित्य और आध्यात्मिक साहित्य के अध्ययन से, जिसके महत्व को रेखांकित करके यहाँ अध्ययन के लिए लोगों को प्रेरित करने का प्रयास किया जा रहा है |

"हमारी समझ और स्पष्टता के साथ हमारे आदर्श, चुनाव और पसंद-नापसंद ही हमारे जीवन की दिशा निर्धारित करते हैं |"  


इन्हीं सब बातों के दृष्टिगत, मैंने यह वेबसाइट बनाई ताकि युवाओं से अपने अनुभव साझा कर सकूं जिससे  ज्यादा से ज्यादा युवा, फिजूल कार्यों, दिखावों और सतही समस्याओं से उलझे बिना खुद की ऊर्जा और संसाधनों को स्वयं की और देश की समृद्धि में लगा सकें।


पढ़ें, सुने, अवलोकन करें और तर्क की कसौटी पर कसें फिर स्वीकार करें |

 

शुभकामनायें

-लवकुश कुमार

 

Read More
जिंदगी को अर्थ और एडवेंचर देना चाहते हो- एक विकल्प

जहां कहीं भी झूठ, उत्पीड़न, दबाव, लापरवाही या असंवेदनशीलता देखो, भिड़ जाओ।

 

ये है असली एडवेंचर जब आप अन्यायी लोगों से भिड़ते हो फिर कुछ जरुरी काम अपने आप होने लगते हैं:

१. आलस भाग जाएगा क्योंकि अब आपको शरीर भी मजबूत रखना है और मन भी।

२. अध्ययन में लग जाओगे क्योंकि अब बारिकियों में जाना पड़ेगा।

३. दोस्त बदल जाएंगे क्योंकि अब झूठे, सतही, मक्कार और डरपोक लोगों से दूर ही रहने का मन करेगा।

४. आवाज़ में मजबूती, दृढ़ता और संकल्प दिखेगा ।

माने जिंदगी में ठसक आ जाएगी, बस आप एक सही दिशा चुन लो जीवन के लिए। 

Read More
स्पष्टता और हौसला

अन्याय करने वाला आपको भ्रम में डालकर आपके हौसले को डगमगा सकता है अतः जिन चीजों को लेकर आप विरोध कर रहे हैं या जिन मांगों को लेकर आप संघर्ष कर रहे हैं, उनको लेकर स्पष्टता रखें ताकि आपको संशय या दुविधा में डालकर आपका हौसला न कम किया जा सके क्योंकि लोग हौसला तोड़कर ही पराजित करते हैं।

 

-लवकुश कुमार 

Read More
हौसला मायने रखता है।

हार-जीत से ज्यादा महत्वपूर्ण है हौसला 

अगर सही लड़ाई लड़कर हार भी गए तो वो जीत है क्योंकि आपने ये दिखा दिया कि ग़लत और अन्याय करने वाले बेरोकटोक अपना काम नहीं कर सकते, उन्हें कीमत चुकानी पड़ेगी।

आपका हौसला ही उन्हें उनके ग़लत होने का एहसास कराएगा उन्हें मजबूर करेगा कि वो अपने अन्यायपूर्ण निर्णय पर पुनर्विचार करें।

- लवकुश कुमार 

Read More