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सुंदरता के मायने- सौम्या गुप्ता

एक कविता प्रशंसा को लेकर जिसके माध्यम से कवयित्री ने कई लोगों की आवाज को हम तक पहुंचाया है :

समाज के पैमाने पर 
सुंदरता की प्रशंसा पाने के लिए 
मैंने बहुत इच्छा की 
पर समाज को चाहिए 
गोरा रंग, आकर्षक काया 
इसीलिए कभी वो प्रशंसा 
मैं पा न सकीं 

फिर खुद को देखा मैंने 
खुद को संवारने की कोशिश छोड़कर 
ज्ञान पाने के लिए प्रयास किए 
छोड़ दी अपेक्षाएं उसकी प्रशंसा पाने की 
जो समय के साथ चला जाना है 
फिर पाया सच्चा ज्ञान और मिली सच्ची प्रशंसा 
जो शरीर की नहीं, थी मन की, ज्ञान की,
समाज के द्वारा नहीं, कुछ सच्चे लोगों से,
जो समझते है भौतिकता से आगे की बातें।

-सौम्या गुप्ता

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश 

सौम्या गुप्ता जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं |

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प्रोत्साहन का कमाल : उत्साह, आत्मविश्ववास और दक्षता बढ़ाने वाला

आज एक साथी से बात चल रही थी कि कैसे बड़ों द्वारा मिला प्रोत्साहन हमारी ऊर्जा बढ़ा देता है, आत्मविश्वास बढ़ा देता है इस तरह कि दिन बहुत बढ़िया जाता है |

अपने पुराने दिनो की बात याद करूँ तो एक दिन की बात है कि मेरे मामाजी जोकि वन विभाग मे अधिकारी थे उस समय, हमारे घर आए हुये थे अपने कुछ सहकर्मियों के साथ उस वक़्त मै ग्यारहवीं मे था, क्योंकि मेरे माता पिता सम्मान करते थे मामा जी का तो, उनकी बात का बड़ा महत्व था मेरे लिए या कह लीजिये कि मै अपने माता-पिता के चश्मे से से देखता था मै लोगों को, जैसा कि ज़्यादातर बच्चे करते हैं, मुद्दे कि बात पर आता हूँ, हुआ ये कि मैंने भौतिकी (वही विषय जिसमे मैंने बाद मे परास्नातक किया ) के ग्यारहवीं और बारहवीं दोनों (जी हाँ उस काल मे बोर्ड परीक्षा मे ग्यारहवीं और बारहवीं दोनों का पाठ्यक्रम आता था  ) के सूत्र को दो बड़े से चार्ट्स पर स्केच पेन से लिखकर बैठक कि दीवार पर लगा रखे थे, वही मेरे बैठने कि जगह थी,

जैसे ही मेरे मामा के सहकर्मी ने मेरे चार्ट्स पर कुछ टिप्पड़ी कि मेरे मामा ने तुरंत ये बात कही कि ये लड़का आगे चलकर आईएएस बनेगा, उस वक़्त मै आईएएस के बारे मे इतना जानता था कि ये उच्च स्तर कि प्रतियोगी परीक्षा से बनते हैं, वैसे मेरा उस वक़्त  आईएएस बनने के लिए पढ़ाई करने का कोई इरादा न था लेकिन क्योंकी बड़े मामा ने ये बात कही तो मै अपनी क्षमताओं को लेकर आश्वस्त हो गया कि मतलब दम और बुद्धि है मुझमे वैसी, हालांकि मै आईएएस तो नहीं बना लेकिन उस बढ़े हुये आत्मविश्वास के चलते अपना बेस्ट दे पाया हर उस काम मे जो मैंने अपने हांथ मे उठाया, बाकी चीज़ें तो समय और परिस्थिति पर निर्भर करती हैं लेकिन "अपनी क्षमताओं पर विश्वास हों बहुत जरूरी है अपना बेस्ट दे पाने और फोकस होकर काम कर पाने के लिए" |


ऐसे ही मेरे पापा के फुफेरे भाई जोकि एक बैंक मे प्रबन्धक थे मेरी नज़र मे सम्मानीय हैसियत रखते थे ने मेरे दसवीं के परीक्षा परिणाम को देखा और, मुझसे देश की आईआई टी पर बात कर रहे थे उस एक पल ने भी  मुझे अपनी क्षमताओं और योग्यताओं पर विश्वास दिलाया था हालांकि नीव बढ़िया न हो पाने और अन्य परिस्थितियाँ अनुकूल न होने के चलते मै ग्रेजुएशन के लिए आईआई टी मे प्रवेश न पा सका  और बाद मे पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए आईआई दिल्ली मे प्रवेश सुनिश्चित किया, ताऊ जी ने जो लायक होने का इशारा दिया उसने भरपूर रोल अदा किया 


ऐसे ही हमारे मुहल्ले के एक पत्रकार ताऊ जी ने मेरे दसवीं के रिज़ल्ट पर जो पूछताछ की थी मुझसे कि मै खुद को आम से खास मानने लगा था | 

बाल मन ठहरा, बचपन मे रिज़ल्ट के साथ मिली एक प्लेट भी बहुत माने रखती थी, पुरस्कार तो प्रतीक होते हैं उनका आकार और कीमत मायने नहीं रखती |


"यहाँ एक बात पाठकों के मन मे आ सकती है कि क्या सारा आत्मविश्वास दूसरों के बताने पर ही आया कि कुछ खुद का भी था, मै बताए देता हूँ कि खुद से भी विश्वास था कि जब मै पुस्तक के प्रश्न हल कर ले रहा हूँ या बीएचयू मे आए हुये पिछले साल के पेपर सॉल्व कर ले रहा हूँ  तो असल परीक्षा मे तो अच्छा करूंगा ही, और साथ मे मुझे अपने नियमित अभ्यास पर भी भरोसा था, लेकिन जब बड़े तारीफ करते हैं तो आश्वस्त हो जाते हैं आप क्योंकि आप कहीं भी रहो एक दो लोग ऐसे जरूर मिल जाते हैं जो छोटी छोटी सतही चीजों पर आपको नीचा महसूस कराते हैं और आत्मविश्वास को तोड़ने का प्रयास करते हैं, मेरे आस पास भी कुछ ऐसे लोग थे जो मुझे नीचा दिखाया करते थे केवल इस बात के लिए कि मै अपने पापा के काम मे हांथ बंटाने और स्कूल कोचिंग के अलावा दुनियादारी के बाकी पचड़ों मे इंटरेस्ट नहीं लेता था, भला ये भी कोई नीचा दिखाने की बात हुयी ! हाहाहाहा !


ऐसे ही एक बार अँग्रेजी के शिक्षक ने कहा था कि लवकुश तुम पत्रकार बन सकते हो छोटी सी बात को डीटेल मे लिख देते हो, back in the mind उनकी वो बात है कहीं |


मेरे एक करीबी दोस्त शुभांशु भाई के वहाँ जब भी जाना होता था तो उनके घर मे सब लोग बड़े आत्मीय तरीके से मिलते थे चाहे वो अंकल-आंटी लोग हों या दीदी लोग, अंकल पोस्ट ऑफिस मे अकाउंटेंट थे और मै अपने दोस्त और दीदी लोगों की समझ से हमेशा प्रभावित रहा, नतीजा उनका भी मुझे मान देना मेरी सेल्फ स्टीम को बढ़ाता रहा , इन मुलाकातों और रेकोग्निसन का अमूल्य योगदान होता  है मेरे जैसे किसी भी इंसान के जीवन मे |


सरकारी सेवा मे शामिल होने पर पहली तैनाती सिक्किम जैसे खूबसूरत प्रदेश मे हुयी वहाँ सर्विस के शुरुआती दिनो मे ही प्रभारी विज्ञानी द्वारा मेरे हर रिपोर्ट मे डिटेल्स को शामिल करने कि आदत को सराहा गया और मैंने और अधिक  मन ( माने ज्यादा समर्पण भाव से ) से अपना काम किया और प्रयास किया लोग मुझे मेरे व्यवहार से बाद मे मुझे मेरे काम से पहले याद रखें|


मेरे बाबा को भी मेरी पढ़ाई पर गर्व था और वो इसे व्यक्त भी करते थे नतीजा यही हुआ कि जो कुछ पाया और सीखा हूँ अपनी पढ़ाई के बल पर, ये आत्मनिर्भर जीवन भी, मेरी लाइफलाइन रहा है बड़ों से मिला प्रोत्साहन, सबको प्रणाम इस नेक कार्य के लिए जिसमे ज्यादा समय न लगा बस लगा तो दया के भाव से किसी के प्रयासों को देखना, आप जरूर प्रोत्साहित करें लोगों को उनके अच्छी नियत से किए गए कार्यों  के लिए | 


संस्कृत मे परास्नातक और शादी के बाद, हिन्दी मे परास्नातक कर रही आरती जी अपने बचपन को याद करती हुयी कहती हैं कि जब वो पढ़ने बैठती थीं तो उनकी लगन देखकर उनके पिता जी उन्हे शाबाशी देते और कहते कि तुम अच्छा करोगी और प्रोत्साहन के तौर पर क्लास से पहले ही काफी कुछ पढ़ा देते थे जिसने उन्हे और अधिक प्रोत्साहित किया पढ़ने को और हमेशा एक कदम आगे रहने के प्रयास को |


प्रशंसा के कमाल के संबंध मे इस वैबसाइट से जुड़ी हुयी कवयित्री, सौम्या गुप्ता जी अपने  अनुभव याद करते हुये कहती हैं कि

बचपन से ही मेरी पढाई को लेकर बहुत प्रशंसा हुई और मेरी मौसी, मेरे  मामा और  टीचर तक मेरी बहुत तारीफ करते थे क्योंकि टीचर्स के अथक प्रयास ( जिसमे मुझे मार भी खानी पड़ी हाहाहा !) मेरी Maths बहुत अच्छी हो गई थी।

मुझे भजन, सोहना देवीगीत, जिसे लोकगीत कहते है भी अच्छे से आते थे, मेरे भजन के कारण मेरी नानी और चाची, ताई ने भी बहुत तारीफ की।

एक तारीफ जिसका मेरे जीवन में बहुत ज्यादा महत्व है, मैं डा. विजय अग्रवाल सर के भेजे आर्टिकल को सारांश में बदलती हूँ, उन्होंने मुझे ये ये काम सौंपा उसके एक साल बाद तक मैं उनसे डांट सुनती रही क्योंकि मेरी हिंदी भाषा और आर्टिकल लिखने की शैली स्तरीय नहीं  थी। वो मेरे लिए Best teacher है उन्होंने भले डांटकर ही सही पर मुझे बहुत सिखाया, उन्होंने छोटी होली के दिन मेरे आर्टिकल पर “Excellent, इतना भेजा। Keep it up your hard work”  पूरे तीन दिन होली में मैं भले ही  दोस्तों से न मिल पायी, घर मे ही रही लेकिन सर की इतनी लाइन ही मेरी होली को खुशनुमा बनाने के लिए काफी थी क्योंकि आप जब खुश होते है तो खुश रहने के रास्ते बाहर नहीं खोजने पड़ते, बस अंदर ही आपके काम को लेकर खुशी आपको ऊर्जा देती रहती है 

मैंने अपनी लेखनी को विकसित करने के लिए डा. विजय अग्रवाल सर के भेजे गए लेखों को सारांशित किया, इसका फायदा मुझे आज तक मिल रहा है|


सौम्या जी आगे याद करती हुयी लिखती हैं कि एक प्रशंसा और आशीर्वाद जिसने उनके जीवन को बदल दिया, उनके शब्दों मे 

" एक बार मैंने प्रीति मैम को अपनी इच्छा को बताने के लिए एक कविता भेजी और उन्होने वो कविता अपने दोस्तों भी भेजी, जिसके लिए मुझे ma'am कि सर कि और उनके दोस्तों कि तरफ से खूब तारीफ मिली और मैंने उसके बाद अपने कविता लेखन को और बल दिया, 

ma'am मुझे पहले सिखाती है, न सीखने पर डांटती है, और फिर सीख लेने पर प्रशंसा  भी करती है, इस प्रशंसा को पाने के लिए मुझे हमेशा आत्मसुधार, आत्मचिंतन व मनन पर ध्यान देना होता है, जिससे बहुत सुधार हुआ है।

मेरी हिंदी व्याकरण की गलतियाँ, DP बनाते समय होने वाली गलतियाँ, यहाँ तक की मेरी सोच की सकारात्मकता के लिए सबसे ज्यादा योगदान उनका रहा है।


सौम्या जी इस बात पर ज़ोर देती हैं कि 

"प्रशंसा हमेशा सच्ची होनी चाहिए,सही काम के लिए होनी चाहिए। प्रशंसा से आत्म बल बढ़ना चाहिए पर प्रशंसा की चाह एक आदत नहीं होनी चाहिए। अगर आप कोई ऐसा काम कर रहे है जो बहुत जरूरी है और उसके लिए आपका अंतर्मन आपसे कह रहा हो तो उसे कोई भी प्रसंशा न मिलने पर भी करना चाहिए बस आपका काम समाज के हित में हो।"


इनकी एक कविता भी है प्रशंसा को लेकर जिसके माध्यम से इन्होने कई लोगों की आवाज को हम तक पहुंचाया है :

समाज के पैमाने पर 
सुंदरता की प्रशंसा पाने के लिए 
मैंने बहुत इच्छा की 
पर समाज को चाहिए 
गोरा रंग, आकर्षक काया 
इसीलिए कभी वो प्रशंसा 
मैं पा न सकीं 

फिर खुद को देखा मैंने 
खुद को संवारने की कोशिश छोड़कर 
ज्ञान पाने के लिए प्रयास किए 
छोड़ दी अपेक्षाएं उसकी प्रशंसा पाने की 
जो समय के साथ चला जाना है 
फिर पाया सच्चा ज्ञान और मिली सच्ची प्रशंसा 
जो शरीर की नहीं, थी मन की, ज्ञान की,
समाज के द्वारा नहीं, कुछ सच्चे लोगों से,
जो समझते है भौतिकता से आगे की बातें।


अगर आपके पास भी कोई कहानी है प्रोत्साहन से कमाल की तो लिख भेजिये हमे  नीचे दिए गए लिंक से क्या पता उसे पढ़कर कोई और भी प्रोत्साहित हो जाए और देश समाज या स्वयं के काम आ जाए | या फिर lovekush@lovekushchetna.in पर ईमेल कर दीजिये 

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लेख मे शामिल सभी लेखकों की तरफ से ढेरों शुभकामनायें

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अपनी बात या अनुभव लिखने या कहने मे संकोच होता है- जरा सोंचिए ये बात

कई कारणों पर विचार कीजिये 

1. बिना संकोच के अपनी कहानी बयान करिए ये किसी की समझ और हौंसले को बढ़ा सकता है 💐💐

2. मान लीजिये कि प्रोत्साहन पर एक लेख लिखना है अगर आप अपने जीवन से एक भी घटना को साझा कर पाएंगे तो ये लेख को समृद्ध करने मे योगदान देगी|

3.हो सकता है कि आपका लिखा हुआ लेख या आपके भाषण मे कुछ ऐसा हो जो किसी नए इंसान के प्रश्नो का जवाब हो जिसके लिए वो उधेड़बुन मे हो 

4. कई लेखक एक ही बात और एक ही सत्य को अलग अलग तरीके से लिखते हैं और वो अलग अलग लोगों के काम आते हैं, फिर आप क्यों नहीं लिखते अपने तरीके से ? आप क्यों आवाज नहीं बनते उनके जो अपनी तकलीफ, अपनी आकांक्षा कह नहीं पाते |

5.समझदार इंसान राष्ट्र की संपत्ति हैं अगर आपके अनुभव साझा करने से किसी की सोंच विस्तृत होती है तो इससे आपको भी फायदा होगा घूम फिर कर |

अपने अनुभव साझा कीजिये, और साहित्य को समृद्ध कीजिये, इसी तरह के अन्य लेख भी मौजूद हैं, उनकी तरफ भी रुख किया जा सकता है|

शुभकामनाएं

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भारत और विश्व के महान व्यक्तित्व -3

बच्चों को इन महान विभूतियों के बारें में पढ़ायें और उन्हें गुणवान तथा उच्च आदर्शों वाला इंसान बनाये, फिर वो ना छोटी बातों पर परेशान होंगे और ना ही छोटी बातों में फंसेंगे, फिर उनके उद्देश्य भी बड़े होएँगे और उनके काम में उत्कृष्टता दिखेगी और साथ ही वो दूसरों की दिक्कत के प्रति संवेदनशील भी होंगे और परिस्थितियों के साथ सामंजस्य बिठाकर सही और त्वरित निर्णय ले पाएंगे |

अच्छा हो कि इनकी जीवनी पर आधारित पुस्तकें एक डिस्प्ले रैक में लगा दें बच्चों के अध्ययन कक्ष में |

स्वयं भी पढ़ें और बच्चों के साथ प्रेरणादायक प्रसंग साझा करें |

1

टॉल्स्टॉय- मानव जीवन के भाष्यकार 

2

रानी दुर्गावती - स्वतंत्रता के लिए प्राण अर्पण करने वाली, युद्ध लड़ने वाली विरंगना

3

पंडित-मदन-मोहन-मालवीय : बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्थापक

4

श्रीमती सरोजिनी नायडू - मातृभूमि की सच्ची सेविका

5

महारानी अहिल्याबाई - उदारता और महानता की प्रतिमूर्ति

6

स्वामी श्रद्धानंद  - भारतवर्ष के प्राचीन आदर्श,  गुरुकुल

7

कर्मयोगी केशवानंद - साधु- संन्यासियों

8

समर्थ गुरु रामदास - भक्ति और शक्ति के समन्वयी

9

वीर शिवाजी - शौर्य और धर्मनिष्ठा के प्रतीक

10

रवीन्द्र नाथ टैगोर - साहित्यिक ऋषि, नोबल पुरस्कार

11

  गुरु गोविंद सिंह- भक्ति और शौर्य के अमर साधक 

12

गणेश शंकर विद्यार्थी- त्याग और बलिदान के आराधक

13

देशबंधु चितरंजनदास - वकालत का अपूर्व आदर्श 

14

श्री विश्वेश्वरैया - स्वावलंबन द्वारा उच्च शिक्षा • सार्वजनिक लाभ के निर्माण कार्य जन जीवन में शिक्षा की महत्ता • राष्ट्रीय चरित्र का विकास, कैसा भी अवसर क्यों न हो, मनुष्य को अपना स्तर नहीं घटाना चाहिये ।। ऊँचा स्तर रखने से उसका प्रभाव अच्छा ही पड़ता है और आज नहीं तो कल लोग उसकी तरफ आकर्षित होते ही हैं

15

राजा राम मोहन राय - एक ब्रह्मोपासना का प्रचार

उन्नीसवीं सदी का समय भारतवर्ष के इतिहास में महान् परिवर्तनों का था 

इन जीवनियों को आप किफायती लागत में गायत्री परिवार की वेबसाइट से भी प्राप्त कर सकते हैं |

ऐसी ही किताबों के लिए लिंक 

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मानविकी का समाज के स्थायित्व में महत्व और इस क्षेत्र के लोगों के लिए जीविका के सीमित साधन !

मानविकी में हम कई विषयों में तरह तरह के परिप्रेक्ष्य में मानव, समाज के अंतर्संबंध, परिवर्तनों, भावों, संघर्षों, आकांक्षाओं और मानव और मानव सभ्यता के विकास को समझते हैं और इस विषय के लोग मानवीय संघर्ष या समस्याओं को सुलझाने में बेहतर साबित हो सकते हैं लेकिन दुर्भाग्यवश इनके लिए जीविका की संभावनाएं बहुत ही सीमित हैं वहीँ पर तकनीकी पृष्ठभूमि के व्यक्तियों के लिए असीमित संभावनाएं हैं जीविका की, ऐसा मेरा व्यक्तिगत मानना है, इस पर विस्तृत लेख बाद में लिखा जायेगा, आपकी राय चाहे वो भिन्न क्यों ना हो आमंत्रित है नीचे दिए गए लिंक से टाइप कर भेज दीजिये | या फिर lovekush@lovekushchetna.in पर ईमेल कर दीजिये 

https://lovekushchetna.in/contact.php

आपकी राय के इंतज़ार में

आपका

लवकुश कुमार

धन्यवाद 

 

 

 

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कैटेगरी- सीधे सीधे के अधीन लेखों का एक परिचय और रूप रेखा

इस कैटेगरी के अधीन लिखे जाने वाले लेख निम्न शर्तें पूरी करेंगे ऐसा प्रयास रहेगा 

1. कभी कभी कम वक्त में और कम शब्दों में कोई बात पहुंचानी हो तो उसे सीधे सीधे ज्यों को त्यों लिख दिया जाएगा माने उसमे ज्यादा समझाने का प्रयास कर पाने का समय नहीं होने के चलते सीधी बात या सवाल होगा, जबकी उस पर चिंतन मनन और समझ पाने की गहराई पाठक पर निर्भर होगी |

2. अमूमन ऐसा होता है कि कोई जरुरी बात या सवाल जो समाज के लिए जरुरी होता है लेकिन उसे साहित्यिक और गहरे तरीके से व्यक्त करने के लिए मेरे जैसे नए लेखकों के पास शब्द नहीं मिलते लेकिन क्योंकि वो सवाल बहुत जरुरी है तो उसे ज्यों का त्यों बिना किसी डिटेलिंग के ही साझा कर दिया जाता है, अजी डिटेलिंग और बैकग्राउंड इतना जरुरी होता है कि इनके बिना कुछ पाठक लेख को समझ ही नहीं पाते और लेख का लाभ उन्हें नहीं मिल पाता और लेखक के प्रयास की दक्षता घट जाती है, बहरहाल समय की कमी और मामले की प्रासंगिकता देखते हुए उसे साझा तो करना ही होता है| एक बात और होती है है कि अगर भूमिका ना हो तो पाठक पूरा लेख पढने के लिए उत्साहित ही नहीं हो पाते | बक्योंकि बात रखनी और आगे पहुंचानी जरुरी है क्योंकि "आपकी राय मायने रखती है "

3. इस वेबसाइट से जुड़े कुछ अभ्यर्थी जो लेखन में हाँथ आजमा रहे लेकिन संकोच का सामना करते हैं लिखने में उनके लिए यह तरीका उपयोगी है कि सपाट भाषा में अपने मन की बात बोल दी, सवाल पूछ लिया या जो देखा सुना या महसूस किया उस अनुभव को सपाट भाषा में व्यक्त कर दिया, कम से कम शुरुआत तो हुयी अन्यथा बढ़िया लेखन से शुरुआत के इंतज़ार में लेखन ही शुरू नहीं किया |

आशा करता हूँ की यह लेख सही परिप्रेक्ष्य देगा |

शुभकामनाएं  

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नन्ही चौपाल : एक प्रयास बाल निर्माण से राष्ट्र निर्माण का

अपने बेटे के एड्मिशन के लिए चुना पिथौरागढ़ की वादियों मे एक सुंदर स्कूल जी हाँ सुन्दर इसलिए ताकि स्कूल भेजने के लिए बच्चे को मनाना ना पड़े, अंदर प्रवेश करते ही सोने पर सुहागा वाली बात हो गयी, प्रधानाचार्य महोदया के कार्यालय के सामने ही बच्चों के लिए एक  आकर्षक और उपयोगी किताबों की सुंदर सी लाइब्रेरी देखी, और उसमे दिखी “नन्ही चौपाल” की एक पत्रिका, जी हाँ वही “नन्ही चौपाल” जिस पर ये लेख है |

फिर क्या था प्रवेश की औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद प्रिंसिपल मैम से “नन्ही चौपाल” पत्रिका की एक प्रति मांग ली घर पर पढने के लिए, मैम को पत्रिका में मेरी रूचि ने प्रभावित किया और उन्होंने साथ में एक और प्यारी और छोटी सी बुकलेट दे दी, नाम था जिसका “धूप का संदूक ” जिसके लेखक हैं बच्चों की आवाज को मंच देने वाले आदरणीय विप्लव भट्ट सर |

फिर क्या ! काम शुरू हुआ पत्रिकाओं को पढने और उनके विश्लेषण का और जो कुछ मिला उसका निचोड़ कह लीजिये या सार कह लीजिये आपके सामने है :

  • यह बाल पत्रिका इस मायने में बहुत खास निकली कि इसके संपादक आदरणीय विप्लव भट्ट सर स्वयं ही नन्ही चौपाल नामक संस्था के संचालक हैं और विभिन्न क्रियाकलापों के माध्यम से अपनी पत्रिका में वर्णित कई बातों का प्रत्यक्ष अनुभव करवाते हैं बच्चों को |

इसकी बानगी से पहले भट्ट सर का विज़न देख लें :

“बच्चो की कल्पनाओ, जिज्ञासाओं और
सीखने की ललक को एक नया आकाश
देने वाले विप्लव भट्ट  एक बहुआयामी
कलाकार, शिक्षक और बाल-संवेदना के
संवाहक है और कठपुतली, जादू और
रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों
को विज्ञान, गणित व नैतिक शिक्षा से
जोड़ने का अद्भुत कार्य कर रहे है। ”


मेरा मानना है कि राष्ट्र की सेवा के कई तरीके हैं जिनमे

बच्चो की कल्पनाओ, जिज्ञासाओं और

सीखने की ललक को एक नया आकाश

देने के लिए प्रयत्न एक उच्च कोटि की राष्ट्र सेवा है।”


  • ये मेरी आदत रही है कहीं भी अगर कुछ ऐसा देखूं जो जनहित में है, जो जन कल्याण के लिए आगे बढाया जाना चाहिए तो उस कार्य को अपने सीमित शब्दों और सीमित समझ में प्रोत्साहित करने का प्रयास करना अपना धर्म समझता हूँ, इसी आदत के अनुरूप पत्रिका में दिए गए भट्ट सर के मोबाइल नंबर -9456762889 पर एक सन्देश लिख दिया:    
  • “नमस्कार सर, आशा करता हूँ कि आप सकुशल होंगे

आपकी लिखित कृतियों, धूप का संदूक और नन्ही चौपाल प्राप्त हुई।

बच्चों के विकास और भलाई के प्रति आपका समर्पण देख बहुत सुखद अहसास हुआ, आपके इन उन्मुखी और नवाचारी कार्यों के लिए साधुवाद 💐💐

आपके इन कार्यों में मैं अगर कोई सहयोग कर सकूं तो मुझे खुशी होगी।”  


क्या लगता है आपको क्या जवाब आया होगा उनकी तरफ से ?

जवाब नीचे है :

“ आपका हृदय से आभार बच्चों का बहुत ऋण है मेरे जीवन पर अतः बस उनसे ही सीखा हुआ प्रयास कर रहा हूँ

आपका प्रोत्साहन पूंजी है आशा करता हूँ जल्द ही आपसे मुलाक़ात होगी

हार्दिक आभार”

बच्चों के उत्साहवर्धन के लिए निमित्त कुछ दिनों बाद ही उनका सन्देश प्राप्त होता है कि

“हमारे कार्यक्रमों में शिरकत करें, बच्चों का उत्साहवर्धन करें और कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएँ।

हम मानते हैं कि आपके करकमलों से बच्चों का उत्साह और भी दोगुना होगा।”

ये महत्ता है बच्चों के उत्साहवर्धन की |


आईये कुछ प्रश्न और उत्तरों से समझते से “नन्ही चौपाल” के कार्यों और योगदान को, जिनको आगे बढाने और विस्तृत दायरे तक पहुंचाने और अन्य उत्साही लोगों को ऐसे ही नवाचारी प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित करने को यह लेख लिखा जा रहा है :

लेखक का दृष्टिकोण:

विप्लव भट्ट जी 'नन्ही चौपाल' बाल संगठन के साथ ही बाल पत्रिका व चैनल
के माध्यम से बच्चों की आवाज़ को मंच देते है, वही स्व-निर्मित
शैक्षिक खिलौनों की प्रयोगशाला 
के जरिये बच्चों को किताबो से
परे 
सीखने का अवसर भी प्रदान करते हैं। आपका 'नन्ही चौपाल
'ऑन, व्हील्स' कार्यक्रम दूर-दराज़ के बच्चों तक रचनात्मक ज्ञान
पहुंचाने का, अभिनव प्रयास है।



"हर बच्चे के भीतर छिपा है एक वैज्ञानिक, एक कलाकार,
एक विचारक...। ज़रूरत है तो बस उसे एक चौपाल देने की,
जहां वह स्वयं को खुलकर अभिव्यक्त कर सके।"

- नन्हीं चौपाल


नन्ही चौपाल के मुख्य उद्देश्य क्या हैं?

नन्ही चौपाल का मुख्य उद्देश्य बच्चों को उनकी रचनात्मकता, जिज्ञासा और सीखने की ललक को बढ़ावा देना है। इसके लिए वे विभिन्न गतिविधियों, जैसे कठपुतलीजादू और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को विज्ञानगणित और नैतिक शिक्षा से जोड़ते हैं। इसके अतिरिक्त, नन्ही चौपाल बच्चों को अपनी बात कहने और व्यक्त करने के लिए मंच भी प्रदान करता है।


विप्लव भट्ट बच्चों के लिए किस प्रकार के अभिनव प्रयास करते हैं?
विप्लव  भट्ट बच्चों के लिए कई अभिनव प्रयास करते हैं। वे बाल संगठन के साथ बाल पत्रिका और चैनल के माध्यम से बच्चों को अपनी आवाज देने का मंच प्रदान करते हैं। स्व-निर्मित शैक्षिक खिलौनों की प्रयोगशाला के माध्यम से बच्चों को किताबों से परे सीखने का अवसर प्रदान करते हैं। इसके अलावा, 'नन्ही चौपाल 'ऑन, व्हील्स' कार्यक्रम के माध्यम से दूर-दराज के बच्चों तक रचनात्मक ज्ञान पहुंचाने का प्रयास करते हैं।


विप्लव भट्ट बच्चों के जीवन में क्या महत्व रखते हैं?
विप्लव भट्ट बच्चों के जीवन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे बच्चों को उनकी रचनात्मकता को विकसित करनेसीखने के लिए प्रेरित करने और विज्ञानगणितऔर नैतिकता के मूल्यों को समझने में मदद करते हैं। वे बच्चों को अपनी बात रखने और खुद को व्यक्त करने के लिए एक मंच भी प्रदान करते हैं, जिससे बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है।


आप 'नन्ही चौपाल' के कार्यक्रमों के बारे मे जानने के लिए, सीखने के लिए और अन्य संबन्धित संपर्क के लिए उनकी पत्रिका मे दिये गए निम्नलिखित मोबाइल नंबर और ईमेल  आई डी से संपर्क साध सकते हैं – मो- 9456762889

nanhichaupal@gmail.com

अगर आप भी अपने क्षेत्र मे ऐसा ही कुछ करना चाहते हैं तो आप इनके यू-ट्यूब चैनल के साथ इनकी पत्रिकाओं से काफी कुछ सीख सकते हैं |

सन्दर्भ के लिए इनके यू-ट्यूब चैनल का लिंक यहाँ दिया जा रहा है और इनकी पत्रिका नन्ही चौपाल के एक अंक से कुछ छवियाँ संलग्न हैं ताकि इस नेक काम को और उसके लिए अपनाये गए अभिनव तरीके को बेहतर तरीके से समझा जा सके |

https://youtu.be/YTyv4fdfcmU?si=VJ6n1vfA0-KUAOph

आइये अब बात करते हैं विस्तृत तरीके से उनसे उन सूक्ष्म सकारात्मक परिवर्तनों पर पर जो नन्ही चौपाल के क्रियाकलापों से बच्चों मे लाये जा रहे हैं और योगदान सुनिश्चित कर रहे हैं राष्ट्र निर्माण मे |

जहाँ तक मैंने देखा, पढ़ा, समझा और महसूस किया है (अपने बचपन को याद करते हुए)

बच्चों के लिए शारीरिक विकास के लिए स्वास्थ्यवर्धक भोजन, खेल-कूद, व्यायाम और अच्छी नींद जरुरी होती है वहीँ उनके मानसिक विकास या जीवन/दुनिया/स्वयं को लेकर सही नजरिये का विकास हो या उनकी मानसिक, विश्लेषणात्मक, तार्किक क्षमताओं के विकास की बात हो या फिर उनके भावनात्मक विकास या फिर उन्हें एक बेहतर इंसान बनाने के लिए जरुरी मानवीय गुणों के लिए उनकी समझ पर काम करना हो तो हमें कई स्तर और कई परिप्रेक्ष्य में काम करना होता है, जिस पर हम आगे के लेख में बात करेंगे |

यहाँ पर ऐसे ही कुछ गुणों की सूची दी जा रही है जिन्हें विकसित करने के प्रयास के रूप मे विस्तृत प्रक्रिया अगले लेख में साझा करायी जाएगी, सन्दर्भ के लिए आप इनके यू-ट्यूब चैनल पर विजिट कर सकते हैं, उदाहरण के लिए खेल भावना (Sport’s Spirit) से बच्चे में हार जीत में एक सामान रहने और अगली बार बेहतर करने तक धैर्य आ जाता है इसके लिए हम बच्चों को खेलने के लिए पर्याप्त समय, स्थान और अन्य संसाधन की व्यवस्था करके ये सुनिश्चित कर सकते हैं, दूसरा गुण है वैज्ञानिक स्वाभाव (Scientific Temperament) जिससे तात्पर्य है कि बच्चे द्वारा चीज़ों के कार्य करने के पीछे वैज्ञानिक और तार्किक कारण ढूँढना, कार्य-कारण सिद्धांत जिसे हम वैज्ञानिक प्रयोग, विज्ञान प्रदर्शनी  या विज्ञान केंद्र के  भ्रमण से सुनिश्चित कर सकते हैं, अन्य के लिए जानकारी अगले लेख में |

सूची –

क्रम सं

गुण/उद्देश्य

1

खेल भावना

(Sport’sSpirit)

2

वैज्ञानिक स्वभाव (scientific temperament)

3

संवेदनशीलता

4

साक्षरता

5

विश्लेषण क्षमता

6

मदद की भावना

7

साझा करने की भावना

8

उत्कृष्टता की चाह

9

आत्मनिर्भर बन्ने की तमन्ना

10

खुद को व्यक्त करने की क्षमता और ललक

11

साहित्य में रुझान

12

जिज्ञासा

13

सीखते रहने की चाह

14

नवाचार

15

शिष्टाचार

16

अनुशासन

17

प्रबंधन और प्रशासन की क्षमता – मूलभूत

18

सामना करने का आत्मविश्वास और दृढ़ता

19

इमानदारी

20

सच्चाई

21

प्रतिबद्धता

22

पारस्परिक सम्मान

23

लोगों को अवसर देने और साथ लेकर चलने की भावना

24

लोगों का मनोबल बढ़ाने की चाह

25

वाक् कौशल

26

बहादुर, साहसी

27

प्रेमपूर्ण

28

वर्तमान का उपयोग

29

सतर्क रहना

30

अपने कर्तव्यों कि पहचान

31

व्यक्तिगत अधिकारों का सम्मान

32

गोपनीयता का सम्मान

33

विनम्रता

34

समय की मांग के अनुसार चीजों को छोड़ पाने की क्षमता

35

निष्पक्षता 

36

नए या कई काम देखकर घबराएँ न ऐसी कबिलियत

37

ज़िम्मेदारी उठाने की इच्छा

38

भीड़ से आगे खड़े होने का साहस

39

नए लोगों के सामने खुद को व्यक्त करने मे संकोच न करें ऐसा गुण

40

मजबूत शरीर कि चाह के लिए अनुशासन और व्यायाम

41

पर्यावरण को लेकर जागरूक

42

नेतृत्व क्षमता

43

समन्वय क्षमता

44

कला की समझ

45

रचनात्मकता

कई बातें होती हैं जिन्हे बच्चों मे विकसित करने के लिए अभ्यास और उचित माहौल देने की जरूरत होती है, जैसे MIHU (May I Help you) कार्मिक गगनदीप कौर जी इस बात पर ज़ोर देती हैं कि "अगर बच्चों को ज़िम्मेदार बनाना है -आपको बच्चे को शुरू से ही उसकी उम्र के हिसाब से छोटी-छोटी जिम्मेदारियां देना शुरू करना चाहिए। उदाहरण के लिए, उन्हें अपने खिलौने खुद समेटना सिखाएं- खेलने के बाद उन्हें उनकी जगह पर रखने के लिए प्रेरित करें,"

इसी तरह कार्यशाला मे बच्चों को छोटी छोटी ज़िम्मेदारी देकर, उनके पूरी होने पर उन्हे पुरस्कार देकर उनमे ज़िम्मेदारी उठाने कि इच्छा पैदा कि जा सकती है |


ऐसे ही इतिहास मे परास्नातक और उदीयमान कवयित्री सौम्या जी इस बात पर ज़ोर देती हैं कि

"बच्चों मे जो गुण विकसित करने हों माता पिता भी पहले वो गुण खुद मे लाएँ, माने अगर वो चाहते हैं कि बच्चे झूठ न बोलें और अपने वादे पूरे करें तो उन्हे भी यही बात आदत मे लानी होगी और अगर वो चाहते हैं कि उनके बच्चे पढ़ने मे मन लगाएँ तो उन्हे भी नियमित पढ़ना होगा बच्चों के सामने फिर चाहे उन्हे कोई परीक्षा देनी हो या न देनी हो"

 

माता-पिता बच्चों के साथ संवाद करने के लिए निम्नलिखित तरीकों का उपयोग कर सकते हैं:

ध्यान से सुनें: बच्चों को अपनी बातें कहने दें और उनकी बातों को ध्यान से सुनें। उनकी बातों को बीच में न काटें और उन्हें अपनी बात पूरी करने का मौका दें

खुले प्रश्न पूछें: ऐसे प्रश्न पूछें जो बच्चों को सोचने और अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित करें। उदाहरण के लिए, "आज स्कूल में आपका दिन कैसा रहा?" या "आपको सबसे ज़्यादा मज़ा किस चीज़ में आया?"

अपनी भावनाओं को व्यक्त करें: बच्चों को बताएं कि आप कैसा महसूस करते हैं। इससे वे अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए अधिक सहज महसूस करेंगे।

"इससे पहले कि बच्चों को महंगी चीजों मे खुशी ढूँढने कि आदत लगे उन्हे रचनात्मक कार्यों मे रुझान दिलवाकर आप उनके जीवन मे पैसे के अति महत्व को कम कर सकते हैं |"


इसी तर्ज पर स्कूल और कार्यशालाओं मे विभिन्न क्रियाकलापों से विभिन्न गुण बच्चों मे अभ्यास से विकसित किए जा सकते हैं और नन्ही चौपाल सरीखे मंच जहां बच्चे साप्ताहिक या किसी अन्य अंतराल पर इकट्ठे होकर सामूहिक रूप से एक दूसरे से प्रेरित होकर, एक दूसरे को देखते हुये अभ्यास से बहुत कुछ अच्छा सीख सकते हैं, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सहयोग कि भावना आदि गुण ल सकते हैं जो उनके जीवन को चेतना के उच्चतर स्तर पर ले जा सकते हैं |

 

इस सम्बन्ध में अगला लेख अन्य गुणो को विकसित करने के प्रयास के रूप मे क्रियाकलापों की विस्तृत परिचर्चा के साथ जल्द मिलेगा |

 

धन्यवाद और शुभकामनाएं

-लेखक

 

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भारत और विश्व के महान व्यक्तित्व -2

बच्चों को इन महान विभूतियों के बारें में पढ़ायें और उन्हें गुणवान तथा उच्च आदर्शों वाला इंसान बनाये, फिर वो ना छोटी बातों पर परेशान होंगे और ना ही छोटी बातों में फंसेंगे, फिर उनके उद्देश्य भी बड़े होएँगे और उनके काम में उत्कृष्टता दिखेगी और साथ ही वो दूसरों की दिक्कत के प्रति संवेदनशील भी होंगे और परिस्थितियों के साथ सामंजस्य बिठाकर सही और त्वरित निर्णय ले पाएंगे |

अच्छा हो कि इनकी जीवनी पर आधारित पुस्तकें एक डिस्प्ले रैक में लगा दें बच्चों के अध्ययन कक्ष में |

स्वयं भी पढ़ें और बच्चों के साथ प्रेरणादायक प्रसंग साझा करें |

1

डॉ राजेंद्र प्रसाद - भारत के प्रथम राष्ट्रपति

2

गणेश शंकर विद्यार्थी - त्याग और बलिदान के आराधक

3

सेठ जमनलाल बजाज-एक और भामाशाह

4

कार्ल मार्क्स - दास कैपिटल के लेखक और प्रतिनिधित्व के हिमायती 

5

राष्ट्रमाता कस्तूरबा गांधी - भारतीय नारियों के लिए आदर्श 

6

महावीर स्वामी- अहिंसा और अपरिग्रह के प्रतीक (जैन सिद्धांत )

7

प्रफुल्ल चंद्र राय- विद्या और पदवी लोक कल्याण के उद्देश्य के लिए 

8

जगद्गुरु शंकराचार्य- अपनी माँ से कहते हैं सैकडो, लाखों माताओं की रक्षा, बालकों को अज्ञान और आडंबर के महापाप से बचाने के लिए यदि तुझे अपने बेटे का बलिदान करना पड़े, तो क्या तुझे प्रसन्नता नहीं होगी ?

9

स्वामी दयानंद सरस्वती - आर्य समाज की स्थापना 

10

महात्मा बुद्ध - बौद्ध धर्म की स्थापना - अप्पो दीपो भव

11

रानी लक्ष्मी बाई - आदर्श वीरांगना

12

बहन निवेदिता - भारतीय संस्कृति की अनन्य आराधिका

13

गुरुनानकदेव - व्यवहारिक अध्यात्मवाद, एक महान समाज सुधारक

14

स्वामी रामतीर्थ - व्यावहारिक वेदांत के प्रचारक, त्याग और तपस्या का विद्यार्थी जीवन, परोपकार की सक्रिय साधना

15

महायोगी अरविंद - नव जागरण के देवदूत

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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चुम्बकत्व से जुड़े हुए कुछ तथ्यों को खाली जगह भरकर याद करने का अभ्यास -1

निम्नलिखित अधूरे वाक्यों में खाली जगह को भरकर इन्हें पूरा करिए और अपनी समझ को अभ्यास से मजबूत करिए :

1. चुंबकीय द्विध्रुव का चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण M = m × 2I द्वारा दिया जाता है, जहाँ m .........................है और 2I दक्षिण से उत्तर की ओर निर्देशित द्विध्रुव लंबाई है।
2. चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ- ये काल्पनिक रेखाएँ हैं जो चुंबक के अंदर और उसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र का चित्रात्मक
प्रतिनिधित्व
करती हैं। उनके गुण नीचे दिए गए हैं:

(i) ये रेखाएँ निरंतर ....................लूप बनाती हैं।

(ii) क्षेत्र रेखा की स्पर्शरेखा उस बिंदु पर क्षेत्र की ............................बताती है।

(iii) रेखाओं का घनत्व जितना अधिक होगा, चुंबकीय क्षेत्र उतना ही ......................होगा।
(iv) ये रेखाएँ एक दूसरे को प्रतिच्छेद ..................करती हैं।


3. द्विध्रुव के ध्रुवों के बीच चुंबकीय क्षेत्र की दिशा चुंबकीय आघूर्ण (दक्षिण से उत्तर) के ....................दिशा में होती है, जबकि धारा लूप के अंदर यह चुंबकीय आघूर्ण की ...................में होती है।
4. एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में एक छड़ चुंबक पर बल आघूर्ण …………………………….. होता है।
5. चुंबकीय क्षेत्र में एक चुंबकीय द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा U = – MB cos θ = – M . B द्वारा दी जाती है, जहाँ θ, ...................................है।
6. एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में द्विध्रुव को θ1 से θ2 तक घुमाने में किया गया कार्य W = x (cos θ1 – cos θ2) द्वारा दिया जाता है यहाँ x ..................है |
7. धारा लूप एक ...................................................की तरह व्यवहार करता है जिसका द्विध्रुव आघूर्ण M=IA द्वारा दिया जाता है।
8. चुंबकीय आघूर्ण का SI मात्रक ........................है।
9.एक परिक्रमणशील इलेक्ट्रॉन का चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण ........................... द्वारा दिया जाता है। जहाँ v, r त्रिज्या के एक वृत्ताकार
पथ पर इलेक्ट्रॉन की गति है। L कोणीय संवेग है|
10.छड़ चुंबक एक समतुल्य ....................के रूप में कार्य करता है।
11.चुंबकत्व और गॉस का नियम-  किसी भी बंद सतह से गुजरने वाला शुद्ध चुंबकीय फ्लक्स (ФB) हमेशा ..................होता है।
12.चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण की SI इकाई A-m^2 या J/T है। यह एक .......................राशि है और इसकी दिशा दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव
की ओर होती है।

उत्तर : 

1. ध्रुव शक्ति 2.बंद, दिशा, अधिक प्रबल , नहीं 3. विपरीत, दिशा 4.MB Sin θ 5. M और B के बीच का कोण 6. MB 7.चुंबकीय द्विध्रुव 8.am^2 9.L = mvr 10.परिनालिका 11.शून्य 12.सदिश

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जीवन एक नदी है- सौम्या गुप्ता

जीवन एक नदी है,

इसको तुम बहने दो,

मत पकड़ो इसको मुट्ठी में,

स्वच्छंद हवा सा बहने दो।

 

नदियों की सुन्दर कल-कल हो,

ऊंचे से गिरता निर्झर हो,

रास्तें हो चाहे कंकटाकीर्ण,

जो कहता है ये कहने दो।

 

ये सोचो मत कल क्या होगा,

जो कल था वो था अच्छा,

या जो आएगा वो अच्छा होगा,

तुम आज से करके दोस्ती,

प्यारी राहों को चलने दो।

 

माना मंजिलें अभी मिली नहीं है,

हो हर पल सुकून ये जरूरी नहीं है,

पर कुछ क्षण तो खुद को ठहरने दो।

 

ये जीवन नदी है बहने दो,

जो कहता है ये कहने दो,

आज को बेहतर करो 

और खुद को खुलकर जीने दो।

 

घूमो- टहलो दुनिया देखो,

जीवन को तुम बहने दो,

 

दौड़ो- भागो मजबूत बनो,

पढ़ो लिखो और समझदार बनो,

व्यक्त करो दैवीयता को, 

और जीवन को बहने दो।

 

-सौम्या गुप्ता

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश 

सौम्या गुप्ता जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं |

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