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मेरे सपनों की दुनिया कैसी हो - सौम्या गुप्ता

मेरे सपनों की दुनिया ऐसी हो जहां 

  1. लोग अपनी काया से अधिक अपनी चेतना को महत्व दें , luxury से ज्यादा ज्ञान को महत्व दे, खुद के साथ दूसरों को भी समझें।
  2. लोग अपने जीवन में निर्णय निर्माण और स्वयं की समझ के लिए गीता जैसे वेदांत्तिक ग्रंथों को महत्व दें, आज हमारी ग्रंथो के बारे मे जो समझ है वो बहुत manipulated है, हमारी संस्कृति में हमारे ग्रंथों का सबसे बड़ा योगदान होता है इसीलिए उसकी सही समझ आवश्यक है। क्योंकि हमारी संस्कृति हमारे निर्माण में बहुत बड़ी भूमिका निभाती है।
  3. हम सब unite हो मुझे दुनिया को धर्म जाति लिंग के नाम पर बंटा हुआ देखकर सबसे ज्यादा दुख होता है। सीमाएं देशों, राज्यों को बांटे वहाँ तक तो ठीक है पर हमारे मनों में कोई भेद न हो।

    सौम्या गुप्ता जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं |

आप कैसी दुनिया चाहते/चाहती हैं, साझा करने का मन हो तो हमे लिख भेजें  नीचे दिए गए लिंक से टाइप करके या फिर हांथ से लिखकर पेज का फोटो  Lovekushchetna@gmail.com पर ईमेल कर दें

फीडबैक या प्रतिक्रिया या फिर आपकी राय, इस फार्म को भर सकते हैं

शुभकामनाएं

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दर्शन एक कठिन विषय क्यों है? एक प्रयास इस पर स्पष्टता देने का

देश के जाने माने पूर्व प्रशासनिक सेवा अधिकारी डॉ विजय अग्रवाल सर के आज के लाइफ मैनेजमेंट के ऑडियो का सन्दर्भ लेते हुए मै इस विषय पर अपनी समझ साझा कर रहा हूँ (ऑडियो का लिंक - LM 22-09-25):

इस लेक्चर में डॉ साहब अपनी प्रिय शिष्या सौम्या जी जोकि इतिहास में परास्नातक हैं के एक प्रश्न का जवाब देते हुए कहते हैं कि जैसे हर गाना गाने वाला इंसान गायन की बारीकियों को नहीं समझता, वैसे ही हर जीने वाला शख्स, जीवन की बारीकियों को नहीं समझता, दर्शन इसीलिए एक कठिन विषय है क्योंकि जीवन एक शतरंज की बिसात की तरह है जो हर चाल के बाद बदल जाती है, ऐसे ही हमारे जीवन की परिस्थितियां बदलने से, तरीके, कदम और निर्णय बदलने पड़ सकते हैं |(सन्दर्भ के लिए ऊपर के लिंक से ऑडियो सुनें)


अब कुछ अपनी बात, मेरा व्यक्तिगत रूप से मानना है की जीवन जीने के कई तरीके  हैं ( तरीका निर्भर करता हैं  दर्शन पर माने आप जीवन को लेते कैसे हैं, कैसे देखते हैं आप जीवन को, उच्च प्राथमिकता में किस चीज़ को रखते हैं  ) अब क्योंकि आपके द्वारा जीवन को देखने का नजरिया उस वक़्त की परिस्थितियों पर भी निर्भर करता है, इसीलिए दर्शन एक कठिन विषय जान पड़ता है क्योंकि इसमें अनुभव करने का पहलू शामिल है| 


भारतीय दर्शन की दो मुख्य धाराएँ आस्तिक और नास्तिक हैं। आस्तिक दर्शनों में छह मुख्य दर्शन शामिल हैं : न्याय, वैशेषिक, सांख्य, योग, मीमांसा (पूर्वमीमांसा) और वेदान्त। वहीं, नास्तिक दर्शनों में चार्वाक, बौद्ध और जैन दर्शन प्रमुख हैं।  


जब जीवन ही कठिन जान पड़ता है तो दर्शन भी कठिन जान पड़ता है, एक कारण हो सकता है लम्बे समय से चला आ रहा झूठ, हमारे जीवन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए डर, लालच और मोह से मुक्ति जोकि स्पष्टता (स्वयं को लेकर और इस दुनिया को लेकर ) और आत्मनिर्भरता से मिलनी है और आनंद के लिए कार्य में उत्कृष्टता, लेकिन आजकल क्या हो रहा है लोग मन बहलाने वाले सतही सुख को पाना चाहते हैं', अहंकार को पुष्ट करने को दिखावा करके लोगों से तारीफ पाना चाहते हैं और डर और असुरक्षा की भावना के चलते एक दूसरे से भेदभाव करते हैं अनैतिक तरीके से दूसरों की असुविधा और गरिमा की परवाह किये बिना बस असीमित धन और शक्ति हांसिल करना चाहते हैं, ऐसा ही होने के चलते जीवन जटिल होता जा रहा है लोगों का |


आपके स्तर पर आवश्यक चिंतन हेतु प्रस्तुत, आपकी राय  आमंत्रित है नीचे दिए गए लिंक से टाइप कर भेज दीजिये | या फिर lovekush@lovekushchetna.in पर ईमेल कर दीजिये 

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शुभकामनायें

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Life management ( जीवन प्रबंधन) - इस श्रेणी का एक परिचय

यह श्रेणी, मैंने डॉ विजय अग्रवाल सर से प्रेरित होकर बनायीं है, उनका कहना है की जैसे हर गाना गाने वाला इंसान गायन की बारीकियों को नहीं समझता, वैसे ही हर जीने वाला शख्स, जीवन की बारीकियों को नहीं समझता, प्रयास रहेगा की डॉक्टर साहब द्वारा जीवन प्रबंधन पर ऑडियो लेक्चर के लिंक को टॉपिक के अनुसार यहाँ उपलब्ध कराया जाये |

उदाहरण के लिए जीवन दर्शन विषय पर डॉक्टर साहब के एक कमेंट वाले ऑडियो का लिंक यहाँ दिया जा रहा है जिसमे वह अपनी एक स्टूडेंट सौम्य गुप्ता जी के सवाल का जवाब दे रहे हैं  : LM 22-09-25 

शुभकामनाएं  

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मेरे सपनों की दुनिया कैसी हो - -दो टूक

1. लोग संवेदनशील हों, दूसरों की तकलीफ, सुविधा-असुविधा का ध्यान रखें, आकांक्षाओं को समझे और संघर्षों को भी, फिर इस समझ के लिए वो चाहे तो साहित्य का सहारा लें या फिर अच्छी फिल्मों का

2.  लोग जीवन मे आनंद, अपने कार्य की उत्कृष्टता मे ढूँढे या फिर रचनात्म्क कार्यों मे न की सतही मज़े और नशे  मे 

3. लोग अपने पराये की भावना से ग्रसित न हों, सही को सही और गलत को गलत कहने का साहस और सच के पक्ष मे खड़े होने का सामर्थ्य रखते हों |

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धन्यवाद 

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भारत और विश्व के महान व्यक्तित्व -4

बच्चों को इन महान विभूतियों के बारें में पढ़ायें और उन्हें गुणवान तथा उच्च आदर्शों वाला इंसान बनाये, फिर वो ना छोटी बातों पर परेशान होंगे और ना ही छोटी बातों में फंसेंगे, फिर उनके उद्देश्य भी बड़े होएँगे और उनके काम में उत्कृष्टता दिखेगी और साथ ही वो दूसरों की दिक्कत के प्रति संवेदनशील भी होंगे और परिस्थितियों के साथ सामंजस्य बिठाकर सही और त्वरित निर्णय ले पाएंगे |

अच्छा हो कि इनकी जीवनी पर आधारित पुस्तकें एक डिस्प्ले रैक में लगा दें बच्चों के अध्ययन कक्ष में |

स्वयं भी पढ़ें और बच्चों के साथ प्रेरणादायक प्रसंग साझा करें |

1

वीर दुर्गा दास - दुर्गादास एक ऐसे नायक थे, जिनका सारा कर्तृत्व, कर्तव्य और संपूर्ण जीवन परस्वार्थ, परसेवा और परोपकार की पवित्र वेदी पर बलिदान होता रहा । वे न राजा थे और न राजकुमार । न उनका कोई पैतृक राज्य था और न बाद में ही उन्होंने कोई भू-खंड अपने अधिकार में करके उस पर अपना राजतिलक कराया । जबकि उन्होंने अपने बाहुबल और बुद्धिबल से मारवाड़ को स्वतंत्र कराया, मुगलों से तमाम जागीरें छीन ली, दिल्ली के बादशाह औरंगजेब को नीचा दिखाकर आर्य धर्म की पताका ऊँची कर दी ।

2

सुभाष चंद्र बोस - स्वाधीनता के पुजारी

3

दादाभाई नौरोजी  -स्वाधीनता के मंत्र- द्रष्टा

4

जानकी मैया- समाज - सुधार और जनसेवा मे संलग्न

5

जमशेद जी टाटा - आर्थिक पुनर्निर्माण के अग्रदूत

6

द्वारकानाथ घोष - धन, मन और चरित्र के धनी

7

पंजाब- केसरी लाला लाजपत राय - भारतीय स्वाधीनता को करने में जिन शिल्पियों का आदरणीय योगदान रहा है, पंजाब- केसरी लाला लाजपत राय का अन्यतम स्थान है

8

स्वामी विवेकानन्द - धर्म और संस्कृति के महान उन्नायक

9

स्वामी रामकृष्ण परमहंस-  युग चेतना के सूत्रधार 

10

कार्ल मार्क्स - समानता के पक्षकार 

इन जीवनियों को आप किफायती लागत में गायत्री परिवार की वेबसाइट से भी प्राप्त कर सकते हैं |

ऐसी ही किताबों के लिए लिंक 

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बच्चों का मोबाइल फोन के प्रति आकर्षण कम करने के कुछ उपाय: एक प्रयास

फोन के प्रति आकर्षण कम करना है तो उससे भी आकर्षक या कम से कम उसके टक्कर की किसी चीज़ की व्यवस्था करें

  • पहले तो खुद भी फोन का इस्तेमाल कम से कम करने 
  • पढ़ने के लिए प्रिंटेड संस्करण इस्तेमाल करे, पढ़ने के बाद उसे साझा करें
  • आपको पढ़ता देख बच्चा भी पढ़ेगा 
  • घर मे एक रंग बिरंगे कागज वाली रुचिकर किताबें रखे, कहानी, कविता, रंग भरने वाली, जीवनी। चुट्कुले
  • maple press और firstcry जैसे मंच पर एक से एक बेहतर किताबें हैं, 
  • बच्चों को रचनात्मक कार्यों मे लगायें 
  • इन्हे गायन, वादन या अभिनय, स्टोरी टेल्लिंग जैसी कार्यशाला मे ले जाएंगे
  • उन्हे विज्ञान से जुड़ा हुआ भ्रमण कराएं ताकि उनके जिज्ञासु मन मे सवाल रहें नाकी फोन की याद 
  • घर मे एक पुस्तकों को प्रदर्शित हुयी अलमिराह रखें ताकि बच्चे किताबें देखकर उनकी तरफ आकर्षित हो सकें
  • पेन ड्राइव के थ्रू कहानियों को स्पीकर सिस्टम पर प्ले कर सकते हैं, शांत और मनमोहक background म्यूजिक वाली कहानी  download करने का लिंक साझा कर रहा हूँ -हिन्दी की चुनिन्दा लघु कहानियाँ यहां से सुन सकते हैं-लघु कहानियाँ, इस लिंक को भारत सरकार की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से भी एक्सेस किया जा सकता है- राजभाषा की वैबसाइट के लिए यहाँ क्लिक करें
  • ये कुछ प्रयास हैं|आप भी अपने इनपुट भेज सकते हैं 

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एक कहानी ये बताने के लिए कि आपके पड़ोसी की दिक्कत आपकी दिक्कत बन सकती है |

घर के बड़े बुजुर्गों के मुह से सुनी हुयी कथा :

 

एक *चूहा* एक व्यापारी के घर में बिल बना कर रहता था।

एक दिन *चूहे* ने देखा कि उस व्यापारी और उसकी पत्नी एक थैले से कुछ निकाल रहे हैं। चूहे ने सोचा कि शायद कुछ खाने का सामान है।

उत्सुकतावश देखने पर उसने पाया कि वो एक *चूहेदानी* थी।

ख़तरा भाँपने पर उस ने पिछवाड़े में जा कर *कबूतर* को यह बात बताई कि घर में चूहेदानी आ गयी है।

कबूतर ने मज़ाक उड़ाते हुए कहा कि मुझे क्या? मुझे कौनसा उस में फँसना है?

निराश चूहा ये बात *मुर्गे* को बताने गया।

मुर्गे ने खिल्ली उड़ाते हुए कहा… जा भाई.. ये मेरी समस्या नहीं है।

हताश चूहे ने बाड़े में जा कर *बकरे* को ये बात बताई… और बकरा हँसते हँसते लोटपोट होने लगा।

उसी रात चूहेदानी में खटाक की आवाज़ हुई,  जिस में एक ज़हरीला *साँप* फँस गया था।

अँधेरे में उसकी पूँछ को चूहा समझ कर उस व्यापारी की पत्नी ने उसे निकाला और साँप ने उसे डस लिया।

तबीयत बिगड़ने पर उस व्यक्ति ने वैद्य को बुलवाया। वैद्य ने उसे *कबूतर* का सूप पिलाने की सलाह दी।

कबूतर अब पतीले में उबल रहा था।

खबर सुनकर उस व्यापारी के कई रिश्तेदार मिलने आ पहुँचे जिनके भोजन प्रबंध हेतु अगले दिन *मुर्गे* को काटा गया।

कुछ दिनों बाद उस व्यापारी की पत्नी सही हो गयी, तो खुशी में उस व्यक्ति ने कुछ अपने शुभचिंतकों के लिए एक दावत रखी तो *बकरे* को काटा गया।

*चूहा* अब दूर जा चुका था, बहुत दूर ……….।

_*अगली बार कोई आपको अपनी समस्या बतायेे और आप को लगे कि ये मेरी समस्या नहीं है, तो रुकिए और दुबारा सोचिये।*_

*_अपने-अपने दायरे से बाहर निकलिये। स्वयं तक सीमित मत रहिये ।*

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लिखना, अपना पक्ष रखना, सही बात को आगे बढ़ाना जरूरी क्यों: एक सोंच
  • समाज में बदलाव हो रहे हैं, कुछ सकारात्मक और कुछ नकारात्मक
  • कुछ लोग नुकसानदायक और भ्रामक चीजों का प्रसार कर रहे हैं, 
  • कुछ आवाजें अनसुनी रह जा रही हैं।
  • क्यों न हम संगठित होकर, इन अनसुनी आवाजों को ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं, क्यों न हम अपने पक्ष से भी अवगत करायें लोगों को, क्यों न हम जरूरी और सही बातों को ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं, क्यों न हम बदलते समाज को एक बेहतर और समावेशी दिशा देने का नेक प्रयास करें।
  • समाज में हो रहे बदलाव हमें भी प्रभावित करते हैं देर-सबेर फिर क्यों न हम अपने डेली शेड्यूल में कुछ मिनट इस बात को लिखने में लगाएं कि हम कैसी दुनिया चाहते हैं।
  • संख्या मायने रखती है आप लिखिए तो सही कि आप कैसी दुनिया चाहते हैं, आपको क्या शिकायतें हैं, फिर मजेदार होगा सामने वाले का पक्ष सुनना ।
  • "आपके आस-पास कोई भी बदलाव, एक न एक दिन आपको प्रभावित करेगा", जिस तरह आप सड़क पर कितना भी नियम और सावधानी से चलें लेकिन किसी दूसरे की लापरवाही से आपको नुकसान हो सकता है। इसीलिए हम जब अपने जीवन को सुरक्षित और सहूलियत भरा बनाने के लिए दिन के कई घंटे देते हैं तो क्यों न कुछ मिनट अपने विचार साझा करने को भी दें ताकि हम बता सकें कि हम समाज की दिशा किधर को चाहते हैं, फिर ये देखना मजेदार होगा कि हमारी च्वाइस कई मामलों में विरोधाभासी भी हो सकती है।
  • अपना मत और समझ साझा करने में संकोच न करें, जो आंखों से देखा और उम्र के साथ अनुभव किया है उसे साझा करने में संकोच कैसा!
  • जो इंसान अपनी समझ और आकांक्षाएं साझा नहीं करना चाहता वो समाज से अपनी सहूलियत की दिशा की अपेक्षा कैसे कर सकता है!
  • बिना किसी पूर्वाग्रह के और बिना इस बात की चिंता किए कि लोग मेरे बारे में क्या सोचेंगे बेधड़क होकर अपनी बात रखिए और दूसरों को भी हिम्मत दीजिए। जो कुछ महसूस कर रहें उसे सामने व्यक्त करने का |
  • आपका एक लाइन का इनपुट भी मायने रखता है।
  • #opinion_matters

  • कई लोगों के सहयोग से एक समावेशी लेख तैयार हो सकता है जो अलग अलग पृष्ठभूमि के लोगों की समझ को बेहतर करने और उन्हें दूसरों की दिक्कत के प्रति संवेदनशील बनाने में काम आएगा, इस तरह हम समाज के कुछ लोगों को बेहतर करने का काम कर पायेंगे।
  • अगर आपको भी लगता है कि शिकायत करने से बेहतर है चीजों को बदलने के लिए काम करना तो लिख भेजिये अपना अनुभव अपनी बात|
  • आपकी राय चाहे वो भिन्न क्यों ना हो आमंत्रित है नीचे दिए गए लिंक से टाइप कर भेज दीजिये | या फिर lovekush@lovekushchetna.in पर ईमेल कर दीजिये 

    फीडबैक या प्रतिक्रिया या फिर आपकी राय, इस फार्म को भर सकते हैं

    आपकी राय के इंतज़ार में

    आपका

    लवकुश कुमार

    धन्यवाद 

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लिखने के फायदे- एक संक्षिप्त समीक्षा

कुछ लोग पूछते  हैं की ये जो इतना लिखते हो उसका कुछ फायदा भी होता है क्या कोई पढ़ता भी है?

तो ऐसे सभी लोगों से मेरा कहना है कि 

1. एक वक्त मुझे जब चीजों को जानने की जरूरत थी तो मैने भी पुस्तकें पढ़ीं थीं, जिसे कुछ लोगों ने लिखा था, वैसे ही मैं भी लिख रहा हूं ताकि फिर किसी जिज्ञासु को मेरी लेखनी से कुछ स्पष्टता मिल जाए कोई रास्ता मिल जाए 
2. किरण बेदी मैम ने भी यही कहा कि उन्हे लगता है कि उन्हे अपने अनुभव लिखने चाहिए वो जरूर किसी के काम आयेंगे 
3. और फिर ये जनहित का कार्य है तो देर रात तक जाग भी सकते हो, मन प्रफुल्लित रहता है 
4. अच्छे लोग मिलेंगे, लेखन एक बहुत ही जन उपयोगी काम है अगर आप सच लिख रहे हैं तो, बुद्धि इस तरह के सही काम में लगे रहेगो तो फिजूल में न उलझना पड़ेगा, लेखन एक सृजनात्मक कार्य है और सृजन का आनंद क्या होता है उनसे पूछो जिन्हे बागवानी  शरीखे सृजनात्मक कार्यों का शौक है |

5. अगर एक इंसान को भी मेरा लिखा हुआ समझ आ गया या उपयोग का लग गया तो ये लिखना सफल मानूँगा, जब मैंने इतने साहित्य का उपयोग किया तो मै भी क्यों न साहित्य के कोश मे कुछ योगदान दूँ अपनी क्षमता मे |

6. लेखन हमे जीकर दिखाने को भी प्रेरित करता है |

शुभकामनाएं

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काम के हिसाब से (अनुकूल ) जगह और इंसान का चुनाव - वांछित परिणाम को सुनिश्चित करता है

जब मैंने यह वैबसाइट शुरू की तो मेरे मन मे एक विचार आया कि क्यों ने अपने दोस्तों से ( जोकि अपनी मेहनत, मेधा और सुखद संयोग के दम पर अच्छी जगहों पर समाज की सेवा कर रहें हैं ) से कुछ लेख के माध्यम से योगदान देने के लिए कहूँ ताकि यह वैबसाइट सामाग्री के मामले मे समृद्ध हो सके और मैंने कहा भी लेकिन एक दो को छोडकर किसी ने ये कष्ट नहीं उठाया, हाँ तारीफ बहुत लोगों ने की जिससे उत्साह बढ़ा, कुछ सुधी मित्र और पाठकों ने बेहतरी के उद्देश्य से टिप्पड़ी की, जोकि अच्छा लगा, सबके अपने कारण थे किसीने कहा की दूसरे ज्यादा जरूरी काम हैं जिससे मै भी सहमत हुआ , किसी ने कहा की पब्लिक फॉरम पर लिखने का अभ्यास नहीं, फिर भी मैंने लेखन जारी रखा और अभी कुछ दिन पहले की ही बात है ऐसे साथियों से लेख के रूप मे  सहयोग आया जिनसे केवल कुछ महिनो की पहचान है|

तीन  बातों पर ज़ोर देना चाहता हूँ 

1. दोस्ती के नाते कोई लिखने जैसे नए काम नहीं करने लग जाता, जब तक कि कोई परिस्थितगत बाध्यता या मजबूरी न आ जाए | 

2. अनुकूल इंसान को अप्रोच करें जो वो काम करता हो जो आप करवाना चाहते हैं, फिर वो आपका दोस्त भले ही न हो, आपको सहयोग मिला जाएगा |

3. अपना नेक काम जारी रखिए उसे बड़े मंच पर ले जाइए ताकि ज्यादा लोग उसके बारे मे जान सकें, फिर उनमे से कोई अनुकूल इंसान या तो आपसे मिल जाएगा या खुद ही संपर्क करेगा |


ये बातें मामूली लग सकती हैं लेकिन जिन्हे समझ नहीं आती वो confectionary मे जाकर बुखार की दावा मांगते है, मेडिकल का रुख नहीं करते क्योंकि उनके घर के आस पास मेडिकल है नहीं तो सोंचते हैं की confectionary मे ही पता कर लें |

ये मेरे व्यक्तिगत अनुभव हैं |

शुभकामनाएं 

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