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अक्सर हम रिश्तों में उलझकर खो बैठते है खुद को और अपना अस्तित्व
खो जाते है " हम " खुद को किसी न किसी रिश्ते में छुपा कर,
मिट जाता है" मैं", रह जाता है सिर्फ रिश्ता
लेकिन
रहना चाहिए "हम" में भी एक "मैं"
अहम वाला नहीं "अस्तित्व" वाला
हर रिश्ते में देखना चाहिए खुद को भी
औरों से पहले, अपने अस्तित्व के लिए।
- सौम्या गुप्ता
बाराबंकी उत्तर प्रदेश
सौम्या गुप्ता जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं |
इस कविता के माध्यम से कवयित्री क्या संदेश देना चाह रही है उसे कुछ प्रश्नों के माध्यम से आसानी से समझ सकते है :
संदेश में किस बारे में बात की गई है?
संदेश में रिश्तों के महत्व, व्यक्तिगत अस्तित्व, और दूसरों से पहले खुद को देखने की आवश्यकता पर चर्चा की गई है। यह रिश्तों में खो जाने के खतरे और अपनी पहचान को बनाए रखने के महत्व पर प्रकाश डालता है।
संदेश में 'मैं' और 'हम' का क्या अर्थ है?
'मैं' व्यक्तिगत पहचान और आत्म-सम्मान का प्रतीक है, जबकि 'हम' रिश्तों और समुदाय का प्रतीक है। संदेश 'मैं' को 'हम' के साथ संतुलित करने की बात करता है, ताकि रिश्तों में खोने के बजाय अपनी पहचान को बनाए रखा जा सके।
संदेश में 'अस्तित्व' का क्या महत्व है?
'अस्तित्व' का अर्थ है अपनी पहचान, मूल्यों और लक्ष्यों को बनाए रखना। संदेश में कहा गया है कि रिश्तों में शामिल होने के दौरान हमें अपने अस्तित्व को नहीं खोना चाहिए। दूसरों से पहले, हमें खुद को पहचानना और महत्व देना चाहिए।
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शुभकामनाएं
केप्लर के ग्रहीय गति के नियम-
1. केप्लर ने ग्रहों की गति का वर्णन करने वाले ..............नियम प्रतिपादित किए। ये नियम इस प्रकार हैं:
2. कक्षाओं का नियम- प्रत्येक ग्रह सूर्य के चारों ओर एक ...........................कक्षा में परिक्रमा करता है, जिसमें सूर्य दीर्घवृत्त के किसी एक केंद्र पर स्थित होता है।
3. क्षेत्रफल का नियम- ग्रह की गति इस प्रकार परिवर्तित होती है कि सूर्य से ग्रह तक खींची गई त्रिज्या सदिश समान समय में समान .................को घेरती है।
4. सूर्य के चारों ओर ग्रह की समयावधि (परिक्रमा अवधि) का वर्ग अर्ध दीर्घ अक्ष के घन के समानुपाती होता है। परिणामस्वरूप, सूर्य के निकट स्थित ग्रहों की तुलना में दूर स्थित ग्रहों की परिक्रमण अवधि ...........................होगी।
न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण नियम
5.न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम के अनुसार, ब्रह्मांड का प्रत्येक कण प्रत्येक अन्य कण को एक ऐसे बल से आकर्षित करता है जो उनके द्रव्यमानों के गुणनफल के समानुपाती और उनके बीच की दूरी के वर्ग के ....................................होता है।
6. बल की दिशा कणों को मिलाने वाली रेखा के ....................होती है। आनुपातिकता के स्थिरांक को सार्वभौमिक गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक कहा जाता है जिसे G से दर्शाया जाता है,
अर्थात इसका मान पूरे ब्रह्मांड में समान रहता है, चाहे आप जिस भी ग्रह या तारे के लिए गणना कर रहे हों।
7. गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक स्थिरांक G संख्यात्मक रूप से इकाई द्रव्यमान वाले दो कणों, जो एक-दूसरे से इकाई दूरी पर स्थित हैं, के बीच लगने वाले .......................के बराबर होता है।
गुरुत्वाकर्षण बल के महत्वपूर्ण लक्षण
8.दो पिंडों के बीच गुरुत्वाकर्षण बल एक केंद्रीय बल होता है, अर्थात यह दो परस्पर क्रिया करने वाले पिंडों के केंद्रों को मिलाने वाली रेखा के ................कार्य करता है।
9.दो पिंडों के बीच गुरुत्वाकर्षण बल मध्यवर्ती माध्यम की प्रकृति से स्वतंत्र होता है।
10. दो पिंडों के बीच गुरुत्वाकर्षण बल अन्य पिंडों की उपस्थिति पर .........................करता है।
11. बल का परिमाण अत्यंत ...................होता है।
गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण
12. गुरुत्वाकर्षण बल (पृथ्वी द्वारा लगाया गया बल) के कारण किसी पिंड में उत्पन्न त्वरण को गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण कहते हैं। इसे आमतौर पर g से दर्शाया जाता है। यह हमेशा पृथ्वी के ...............की ओर होता है।
13. यदि पृथ्वी की सतह पर m द्रव्यमान का कोई पिंड पड़ा है, तो पिंड पर लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल F=mg होता है।
जहाँ g सतह पर गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण है। g = GM/R^2, जहाँ M और R क्रमशः संबंधित खगोलीय पिंड (ग्रह, तारा या
उपग्रह) (उदाहरण के लिए पृथ्वी या चंद्रमा) का द्रव्यमान और त्रिज्या हैं। चूँकि चंद्रमा के लिए M और R छोटे हैं, इसलिए g का मान पृथ्वी के मान से कम होगा, इसलिए चंद्रमा पर किसी पिंड का भार पृथ्वी पर उसके भार से .....................होगा।
भार W=mg है: जहाँ m द्रव्यमान है जो चंद्रमा और पृथ्वी या किसी अन्य ग्रह/उपग्रह पर समान होता है।
गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण में परिवर्तन
गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण का मान ऊँचाई, गहराई, पृथ्वी के आकार और पृथ्वी के अपने अक्ष पर घूर्णन के साथ बदलता रहता है।
14. ऊँचाई का प्रभाव। जैसे-जैसे हम पृथ्वी की सतह से ऊपर जाते हैं, गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण का मान धीरे-धीरे ......................होता जाता है।
15. जैसे-जैसे हम पृथ्वी की सतह के नीचे जाते हैं, g का मान ..........................जाता है।
16. भूमध्य रेखा पर पृथ्वी की त्रिज्या ध्रुवों की त्रिज्या से 21 किमी अधिक है, इसलिए उपरोक्त सूत्र से g का मान भूमध्य रेखा की तुलना में ध्रुवों पर .................है।
17. घूर्णन के कारण g का मान घटता है, इसलिए यह भूमध्य रेखा पर सबसे कम और ध्रुवों पर सबसे अधिक होता है क्योंकि घूर्णन अक्ष ध्रुवों से होकर गुजरता है, इसलिए घूर्णन ध्रुवों पर प्रभाव नहीं डालता है।
गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र
किसी पिंड के चारों ओर का वह स्थान जिसके भीतर उसका गुरुत्वाकर्षण बल अन्य पिंडों द्वारा अनुभव किया जाता है, गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र कहलाता है।
18. गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र की तीव्रता (E) -क्षेत्र में किसी बिंदु पर किसी पिंड के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र की तीव्रता को उस बिंदु पर रखे गए इकाई द्रव्यमान के पिंड द्वारा अनुभव किए गए ..............के रूप में परिभाषित किया जाता है, बशर्ते इकाई द्रव्यमान की उपस्थिति मूल गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र को विचलित न करे। या E = बल/द्रव्यमान। दूरी r पर द्रव्यमान M द्वारा क्षेत्र E = GM/r^2 है।
19. गुरुत्वाकर्षण विभव- किसी पिंड के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में किसी बिंदु पर गुरुत्वाकर्षण विभव को इकाई द्रव्यमान के पिंड को अनंत से उस बिंदु तक लाने में किए गए कार्य के रूप में परिभाषित किया जाता है। U = W / द्रव्यमान जहाँ W किया गया कार्य है |
दूरी r पर द्रव्यमान M द्वारा विभव E = .......................है।
20. गुरुत्वाकर्षण स्थितिज ऊर्जा = गुरुत्वाकर्षण विभव x पिंड का द्रव्यमान। यह एक .................राशि है और इसे जूल में मापा जाता है।
21. पलायन वेग- किसी पिंड को पृथ्वी की सतह से प्रक्षेपित करने के लिए आवश्यक .............वेग जिससे वह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बाहर चला जाए, पलायन वेग कहलाता है।
22. उपग्रह- उपग्रह वह पिंड होता है जो अपेक्षाकृत बहुत बड़े पिंड (ग्रह) के चारों ओर एक कक्षा में निरंतर परिक्रमा करता रहता है। यह कक्षा वृत्ताकार या दीर्घवृत्ताकार हो सकती है। किसी ग्रह की कक्षा में परिक्रमा करने वाली..................को कृत्रिम उपग्रह कहते हैं।
23. भूस्थिर उपग्रह - पृथ्वी के समान परिक्रमण काल वाले उपग्रह को भूस्थिर उपग्रह कहते हैं। ऐसे उपग्रह भूमध्यरेखीय तल में ...................की ओर घूमते हैं। भूस्थिर उपग्रह की कक्षा को पार्किंग कक्षा कहते हैं। इन उपग्रहों का उपयोग संचार उद्देश्यों के लिए किया जाता है।
एक भूस्थिर उपग्रह पृथ्वी की सतह से लगभग 36,000 किमी की ऊँचाई पर एक वृत्ताकार कक्षा में पृथ्वी के चारों ओर परिक्रमा करता है।
उत्तर :
1.तीन 2.दीर्घवृत्ताकार 3.क्षेत्रफल 4.अधिक 5.व्युत्क्रमानुपाती 6.अनुदिश 7.आकर्षण बल 8.अनुदिश 10.निर्भर नहीं 11.छोटा 12.केंद्र 13.कम 14.कम 15.घटता 16.अधिक 18.बल 19.- GM/r 20. अदिश 21.न्यूनतम 22. मानव निर्मित वस्तु 23.पश्चिम से पूर्व
एक इंसान कुछ अपनी समझ में बेहतर करने के लिए कुछ ऐसा कर रहा है जोकि अपने आप में नया है, लीक से हटकर है, व्यक्तिगत नुकसान होने की भी संभावना है लेकिन दूसरों को कोई भी नुकसान नहीं होना है, फिर भी समाज के कुछ लोग बिना उस इंसान की गरिमा ओर व्यक्तिगत स्वतंत्रता की परवाह किए बस उसे टोंकना शुरू कर देते हैं यहां तक उसे मूर्ख कहना शुरू कर देते हैं ! होना तो ये चाहिए था कि लोग उसकी योजना को समझते और अगर वह व्यक्तिगत या सामाजिक रुप से लाभकारी हो तो उसमें हर संभव सहयोग करते लेकिन होता है उल्टा, जो खुद दो काम करने में चिड़चिड़ा हो जाता है वो दूसरे के नए काम और तरीके का मज़ाक उड़ानें का साहस जुटा लेता है।
इस माहौल को बदलना होगा और नवाचार के लिए माहौल बनाना होगा।
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शुभकामनाएं
अमूमन ऐसा देखा गया है कि किसी इंसान से कोई ग़लती या चूक हो गई या फिर कोई आंकड़ा बताने में कोई मानवीय गलती हो गई, इस पर ही कुछ लोग उस इंसान को नीचा दिखाने में लगे जाते हैं या अपमानजनक तरीके से बात करना शुरू कर देते हैं, जैसे कि बस इंतजार कर रहे हों कि अमुक इंसान से कोई ग़लती हो और इसे नीचा दिखाएं।
इससे कोई लाभ नहीं, न तो इस तरह कोई सामने वाले से कुछ अन्य चीजें जिसमें वो बेहतर है सीख सकता है और नहीं ऐसे इंसान से देशहित में या समाज हित में कोई कार्य ले सकता है।
पारस्परिक सम्मान बिना शर्त होना चाहिए, तब ही हम मिलकर कुछ बेहतर कर सकते हैं और एक दूसरे को निखारने में परस्पर सहयोग कर सकते हैं।
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शुभकामनाएं


जागरूकता, स्पष्टता और उत्साह के संचार के लिए "हारिए ना हिम्मत" पुस्तिका के वितरण का कार्य मैं अपने पंतनगर में तैनाती से कर रहा हूँ और यहाँ पिथौरागढ़ में भी अपने संपर्क में आने वाले लोगों/कर्मियों/अधिकारियों,कलाकारों और छात्रों को इसका वितरण किया हूँ ताकि वो इसे पढ़कर जीवन के मामलों में स्पष्टता हांसिल कर सकें और इस तरह खुद को परेशान, निरोत्साहित, अधीर करने और उधेड़ बुन में डालने वालों से विचारों से मुक्त हो सकें, अपने सामाजिक रिश्तों को सही परिप्रेक्ष्य में देखकर उन्हें उचित तरीके से बेहतर रूप में निभा सकें, अपने काम और तैयारी के बीच उचित प्राथमिकता लाकर उसमे संतुलन बैठा सकें और तो और अपने आस पास, मिलने वालों को बेहतर तरीके से जीवन से जुड़े मुद्दों पर राय दे सकें |
अगर आप भी स्वयं के लिए या अपने स्वजनों को भेंट स्वरुप इस पुस्तक को देना चाहते हैं तो नीचे दिए गए लिंक से इसे गायत्री परिवार की वेबसाइट पर इस पुस्तक को खरीद सकते हैं -
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आपके निर्णय निर्माण के लिए इस किताब से मेरी कुछ सीख साझा कर रहा हूँ ताकि आप इसके महत्व को आसानी से समझ सकें :
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शुभकामनाएं
आजकल एक बात बहुतायत मे देखने को आ रही है कि समाज के ज़्यादातर वर्ग अपनी पसंद के किसी उपदेशक को इतना मान दे रहे हैं कि उसकी बे सिर पैर की अंधविश्वास फैलाने वाली बातों को भी आँख मूंदकर मान ले रहे हैं, ऐसा अमूमन किसी इंसान को उसकी बात से ज्यादा उसके होने को महत्व दे देने से है, इसमे व्यक्तिगत और सतही स्वार्थ हो सकता है लेकिन लंबे समय अंतराल मे यह आदत इंसान की विवेचन क्षमता पर नकारात्मक असर डालने वाली साबित हो सकती है|, यह देखना हास्यपाद है कि कुछ लोग तो सत्संग मे भी जीवन की गहराई जानने और उसकी सच्चाई जानने के बजाय हँसाने वाली और मन को अच्छी लागने वाली या अहंकार पुष्ट करने वाली बात सुनने जाते हैं
आज किसी उपदेशक की बात सही हो सकती है, कल उसकी बात अतार्किक और सतही भी हो सकती है इसीलिए किसी भी उपदेशक की बात तब ही तक सुननी और माननी है जब तक उसकी बातों मे सत्य, तर्क और व्यावहारिकता है जोकि प्राणियों की गरिमा और उन्नयन की संवाहक/सरंक्षक होती है |
ऐसा देखा जा रहा है कि कुछ उपदेशक सेलेब्रिटी बन जा रहे हैं, यहाँ तक तो तब भी ठीक है लेकिन वो पल चिंता पैदा करने वाला है जब ऐसा देखा जाता है कि लोगों को लगता है कि अमुक उपदेशक को अगर सामने से देख लिया तो जीवन बन जाएगा और वो उसके भक्त बन जा रहे हैं, मुझे व्यक्तिगत रूप से यही लगता है कि अगर कोई तार्किक उपदेशक मिल गया है तो उसके प्रवचन सुनकर खुद को और तार्किक व समझदार बनाओ उनकी बातों को जीवन मे प्रयुक्त करो लेकिन अच्छे से टटोलकर क्योंकि अच्छा लगना और वास्तव मे अच्छा होना, दोनों मे अंतर है और तो ये तो कभी न सोंचो कि अमुक उपदेशक के सामने बैठ जाने से सब दुख दूर हो जाएंगे या कोई चमत्कार हो जाएगा|
संयोग होते हैं सुखद भी और दुखद भी, आपके जीवन मे भी हो सकते हैं, मानसिक रूप से तैयार रहिए सामना करने को, इस दुनिया मे बहुत कम चीज़ें हैं जिनका आप श्रेय ले सकते हैं या जिन्हे आप नियंत्रित कर सकते हैं |
सच्चाई का जीवन जीना है और सच्चाई की कमाई पर ही निर्वाह करना है, शरीर स्वस्थ रहे इसके प्रयास करने हैं और चेतना उठती रहे इसके लिए नियमित अध्ययन करना है, खुद की काबिलियत बढ़ाते हुये खुद को रचनात्मक कार्यों मे लगते हुये बिना डर औए बिना लालच वाला जीवन जीना है, फिर जो होगा देखा जाएगा ऐसा संकल्प करके चलना है, "अशुभ कल्पनाएं उन्हे ही परेशान करती हैं जो यह सोंचते हैं कि सब कुछ अच्छा ही हो उनके साथ" लेकिन मेरा व्यक्तिगत रूप से मानना है हमारे बस मे आज को अच्छे से जीना है और ये संकल्प रखना कि कैसी भी परिस्थिति आ जाए सच और आत्मनिर्भरता का जीवन जीने के सारे प्रयास करने हैं हर हालत मे, "सही प्रयास अपने आपमे में ही जीत है |"
जितने भी महान उपदेशक/शिक्षक/संत/महात्मा हुये हैं सबके उपदेश मे एक बात साझी रही है कि अपने कार्यों के केंद्र मे आत्मवलोकन, जगभलाई, आत्मनिर्भरता और सच्चाई रखिए | लेकिन होता क्या है कि हम इन महान लोगों के बताए रास्ते पर चलने के प्रयत्न करने के बजाय इनकी पूजा करने लगते हैं इस उम्मीद मे कि इनकी पूजा कर लेने भर से हमारी इच्छाएं पूरी हो जाएंगी और जिंदगी बिना किसी कष्ट के कटती रहेगी|
प्रतीकों का सम्मान जरूरी है लेकिन इसके साथ उनकी बातों को अमल मे लाने के सच्चे प्रयास भी किए जाएँ तब ही आराधना / साधना सार्थक मानी जाएगी
-लवकुश कुमार
इसी विषय पर इतिहास मे परास्नातक सौम्या गुप्ता जी अपनी बात और समझ कुछ इस तरह व्यक्त करती हैं:-
आज हम कई रूपों मे भगवान को पूजते हैं, जैसे- राम, कृष्ण, बुद्ध, महावीर, पैगम्बर मोहम्मद साहब, ईसामसीह, गुरुनानक जी, साई बाबा।
ये जितने भी गुरु या महान लोग धरती पर आए, वो ये बताने आए थे कि कैसे हम अपनी आत्मा के मूल गुणों, पवित्रता , प्रेम, करुणा और आनंद आदि , इन सब को खुद में पा सकते है। लेकिन हमने क्या किया हमने मान लिया कि उनकी पूजा करनी है बस और बाकी वो ही सब करेंगे और अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट गए।
उन्होंने हमें जो सिखाया अगर हम उस सिखाए हुए पर चलते तो आज लोग/देश सीमाओं में बंटे होते पर. धर्म, पंथ और जाति के नाम पर नहीं। पूरे विश्व में शांति होती, प्रेम, भाईचारा होता और इसी एकता का संदेश उन महान आत्माओं ने दिया था।
वो जीवन जीकर ईश्वर को पाने की कला सिखाने आए थे। हमने उन्हें भगवान माना और हमने अपने हर अच्छे-बुरे के लिए उनको ही जिम्मेदार ठहराया और अपने कर्मों/निर्णयों/प्राथमिकताओं/वृत्तियों पर ध्यान ही नहीं दिया/अवलोकन नहीं किया |
जैसे हम भगवान की पूजा करते हैं वैसे ही अगर ज्ञान को, प्रकृति को, इंसानों की अच्छाइयों को पूजें, महान लोगों के जीवन के पदचिहनों पर चलें और वैसे ही नेक काम करें जैसे उन महान आत्माओं ने किया तो दुनिया बेहतर, सुंदर होकर डर, लालच और घृणा से मुक्त हो जाए |
-सौम्या गुप्ता जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं |
इस लेख के माध्यम से लेखिका क्या संदेश देना चाह रही है उसे कुछ प्रश्नों के माध्यम से आसानी से समझ सकते है :
इस लेख का मुख्य संदेश क्या है?
इस लेख का मुख्य संदेश यह है कि हमें उन महान गुरुओं की शिक्षाओं को याद रखना चाहिए और उनका पालन करना चाहिए। हमें ज्ञान, प्रकृति और मानवता की अच्छाइयों को महत्व देना चाहिए। हमें महान लोगों के जीवन के उदाहरणों से प्रेरित होकर अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने चाहिए।
हमें इन गुरुओं की शिक्षाओं का पालन क्यों करना चाहिए?
हमें इन गुरुओं की शिक्षाओं का पालन इसलिए करना चाहिए क्योंकि उन्होंने हमें जीवन जीने का सही तरीका सिखाया। उनकी शिक्षाएं हमें अपनी आत्मा के मूल गुणों को विकसित करने, दूसरों के प्रति अधिक दयालु होने और दुनिया में शांति और सद्भाव लाने में मदद करती हैं। वे हमें सिखाते हैं कि हमें अपने कर्मों के प्रति जिम्मेदार होना चाहिए।
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शुभकामनाएं
1.अभिकेन्द्रीय बल
अभिकेन्द्रीय बल किसी पिंड को एक वृत्त में एकसमान रूप से गतिमान करने के लिए आवश्यक बल है। यह बल वृत्त की त्रिज्या के अनुदिश और केंद्र .............................कार्य करता है।
2.. अपकेन्द्रीय बल
अपकेन्द्रीय बल वह बल है जो किसी पिंड के वृत्ताकार पथ पर गति करते समय, पिंड की अपनी स्वाभाविक सीधी रेखा में पुनः गति
करने की "प्रवृत्ति" के कारण उत्पन्न होता है।
अपकेन्द्रीय बल का परिमाण अभिकेन्द्रीय बल के परिमाण के ..........................होता है।
या छद्म बल अभिकेन्द्रीय बल के ................................होता है।
3.ऊर्ध्वाधर वृत्त में गति
क्षैतिज वृत्त में, गति गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण (g) से प्रभावित नहीं होती है, जबकि ऊर्ध्वाधर वृत्त की गति में, गति गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण (g) से प्रभावित होती है अतः ऊर्ध्वाधर वृत्त की गति में 'g' का मान महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इस स्थिति में गति एकसमान नहीं रहती है। जब कण अपनी निम्नतम स्थिति से ऊपर की ओर गति करता है, तो उसकी गति तब तक
निरंतर जाती है जब तक वह अपने वृत्तीय पथ के उच्चतम बिंदु पर नहीं पहुँच जाता। यह गुरुत्वाकर्षण बल के विरुद्ध किए गए
कार्य के कारण होता है। जब कण वृत्त में नीचे की ओर गति करता है, तो उसकी गति ..........................रहती है।
उत्तर :
1.की ओर 2.समान, बराबर और विपरीत 3.घटती, बढ़ती
गतिकी भौतिकी की वह शाखा है जिसमें हम किसी पिंड की गति का अध्ययन उसके कारण, अर्थात् गति उत्पन्न करने वाले बल को
ध्यान में रखकर करते हैं।
1. वह अंतर्निहित गुण, जिसके द्वारा कोई पिंड अपनी गति की अवस्था में किसी भी ........................................का विरोध करता है, जड़त्व कहलाता है।
पिंड जितना भारी होगा, जड़त्व उतना ही ...............................होगा और पिंड जितना हल्का होगा, जड़त्व उतना ही कम होगा।
2. जड़त्व का नियम बताता है कि कोई पिंड अपनी विरामावस्था या एकसमान गति (अर्थात, स्थिर वेग से गति) या गति की दिशा को
स्वयं बदलने में ....................................होता है।
3. न्यूटन के गति के नियम-
नियम 1. कोई पिंड तब तक विरामावस्था में रहेगा या एकसमान वेग से गति करता रहेगा जब तक उस पर कोई ...........................न लगाया
जाए।
गति के प्रथम नियम को '............................. नियम' भी कहा जाता है।
नियम 2. जब किसी स्थिर द्रव्यमान वाले पिंड पर बाह्य बल लगाया जाता है, तो बल एक त्वरण उत्पन्न करता है, जो बल के
........................................और पिंड के द्रव्यमान के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
नियम 3. "प्रत्येक क्रिया की समान और विपरीत प्रतिक्रिया होती है"। जब एक पिंड A, दूसरे पिंड B पर बल लगाता है, तो B, A पर
..............................................और विपरीत बल लगाता है।
4. रैखिक संवेग- किसी पिंड के रैखिक संवेग को पिंड के द्रव्यमान और उसके वेग के ....................................के रूप में परिभाषित किया जाता है।
5. आवेग- अल्प अवधि के लिए कार्यरत बलों को आवेगी बल कहते हैं। आवेग को बल और उस छोटे समय अंतराल के गुणनफल के रूप में
परिभाषित किया जाता है जिसके लिए यह कार्य करता है। किसी बल का आवेग एक ...............................राशि है और इसका SI मात्रक Nm है।
— यदि किसी आवेग का बल समय के साथ बदल रहा है, तो उस बल के लिए बल-समय ग्राफ़ द्वारा परिबद्ध क्षेत्रफल ज्ञात करके आवेग को मापा जाता है।
— किसी दिए गए समय के लिए किसी बल का आवेग, दिए गए समय के दौरान पिंड के संवेग में कुल परिवर्तन के ....................................होता है।
6. संवेग संरक्षण नियम
कणों के एक पृथक निकाय का कुल संवेग संरक्षित रहता है।
दूसरे शब्दों में, जब निकाय पर कोई बाह्य बल नहीं लगाया जाता है, तो उसका कुल संवेग ..................................रहता है। बंदूक का प्रतिक्षेपण, रॉकेट
और जेट विमानों की उड़ान, रेखीय संवेग संरक्षण नियम के कुछ सरल अनुप्रयोग हैं।
7. किसी पिंड का भार- यह वह बल है जिससे पृथ्वी किसी पिंड को अपने केंद्र की ओर आकर्षित करती है। यदि M पिंड का द्रव्यमान
है और g गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण है, तो पिंड का भार ऊर्ध्वाधर ..................................की ओर Mg है।
(ii) अभिलंब बल- यदि दो पिंड संपर्क में हैं, तो संपर्क बल उत्पन्न होता है। यदि सतह चिकनी है, तो बल की दिशा संपर्क तल के अभिलंब होती है। इस बल को हम अभिलंब बल कहते हैं।
8. डोरी में तनाव- मान लीजिए एक गुटका डोरी से लटका हुआ है। गुटके का भार ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर कार्य कर रहा है, लेकिन
वह गति नहीं कर रहा है, इसलिए इसका भार डोरी द्वारा लगाए गए बल द्वारा संतुलित है। इस बल को 'डोरी में तनाव' कहते हैं।
तनाव एक खिंची हुई डोरी में लगने वाला बल है। इसकी दिशा डोरी के अनुदिश और विचाराधीन वस्तु से .....................ली जाती है।
9. सरल घिरनी - एक non- stretchable डोरी के सिरों पर बंधे m1 और m2 द्रव्यमान के दो पिंडों पर विचार करें, जो एक हल्की और घर्षण रहित घिरनी के
ऊपर से गुजरते हैं। मान लीजिए m1 > m2 है। भारी पिंड (m1) ............................की ओर गति करेगा और हल्का पिंड(m2) ऊपर की ओर गति करेगा।
10. आभासी भार और वास्तविक भार
— यदि कोई पिंड विरामावस्था में है या एकसमान गति की अवस्था में है, तो उसका 'आभासी भार' उसके 'वास्तविक भार' के .................होता है।
— ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर त्वरित गति के लिए किसी पिंड का आभासी भार इस प्रकार दिया जाता है:
आभासी भार = वास्तविक भार + Ma = M (g + a), आप झूले की अवस्था याद कीजिये जब आप ऊपर को और गति कर रहे होते हैं तो लगता है की नीचे की तरफ कोई दबा रहा क्योंकि आभासी भार आपके वास्तविक भार से ज्यादा होता है |
— ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर त्वरित गति के लिए किसी पिंड का आभासी भार इस प्रकार दिया जाता है:
आभासी भार = वास्तविक भार - Ma = M (g - a) आप झूले की अवस्था याद कीजिये जब आप नीचे को और गति कर रहे होते हैं तो लगता है की ऊपर की तरफ कोई उठा रहा माने आप हल्का महसूस कर रहे होते हैं क्योंकि आभासी भार आपके वास्तविक भार से कम होता है |
उत्तर :
1.परिवर्तन, 2.अधिक, असमर्थ, 3.बाह्य बल,जड़त्व का, समानुपाती, समान 4.गुणनफल, 5.सदिश, बराबर 6.स्थिर(constant) 7.नीचे 8.दूर 9.नीचे, 10.बराबर
1.घर्षण - संपर्क में दो सतहों के बीच किसी भी ...............के विरोध को घर्षण कहा जाता है। यह संपर्क में दो सतहों की सतही अनियमितताओं के 'अंतर-जाल' के कारण उत्पन्न होता है।
2. स्थैतिक और गतिज (गतिज) घर्षण - संपर्क में दो सतहों के बीच (i) सापेक्ष गति शुरू होने से ...........और (ii) उनके बीच सापेक्ष गति शुरू होने के ..................... लगने वाले घर्षण बलों को क्रमशः स्थैतिक और गतिज घर्षण कहा जाता है।
3. स्थैतिक घर्षण हमेशा गतिज घर्षण से थोड़ा .......................होता है।
4. गतिज घर्षण बल का परिमाण .................................के समानुपाती होता है।
5. सीमांत घर्षण बल - यह घर्षण बल तब कार्य करता है जब पिंड गति करने वाला होता है। यह संपर्क सतह पर लगने वाला ............................घर्षण बल है। हम
6. घर्षण के नियम:
(i) सीमांत घर्षण बल का परिमाण संपर्क सतह पर अभिलंब बल के ...................................होता है।
(ii) सीमांत घर्षण बल का परिमाण सतहों के बीच संपर्क क्षेत्र पर ..............................करता।
7. घर्षण गुणांक
दो सतहों के बीच घर्षण गुणांक (μ) उनके सीमांत घर्षण बल और उनके बीच अभिलंब बल का .....................होता है |
8. घर्षण कोण
यह वह कोण है जो सीमांत घर्षण बल F और अभिलंब अभिक्रिया R का परिणामी .......................की दिशा के साथ बनाता है।
09. विश्राम कोण
विश्राम कोण (α) एक झुके हुए तल का ...............................के साथ वह कोण है जिस पर उस पर रखा कोई पिंड बिना किसी त्वरण के नीचे की ओर खिसकना शुरू कर देता है।
10. घर्षण का महत्व बिना फिसलन के चलना और जहां दो प्रष्ठों को एक साथ चलाना हो वहाँ है जैसे की पट्टा और इंजिन (आटा चक्की, अन्य यंत्र जहां यंत्र को घुमाने के लिए उसे इंजिन से पट्टे द्वारा बल आघूर्ण देते हैं |)
उत्तर :
1.सापेक्ष गति, 2.पहले, बाद, 3.अधिक, 4. अभिलंब बल (normal reaction), 5. अधिकतम, 6.समानुपाती, निर्भर नहीं 7.अनुपात, 8.अभिलंब अभिक्रिया, 9.क्षैतिज
1. "किसी वस्तु को गतिशील कहा जाता है यदि उसकी स्थिति समय के साथ ...........................है"।
2. बिंदु वस्तु- यदि वस्तु द्वारा तय की गई लंबाई वस्तु के आकार की तुलना में ...............................................है, तो वस्तु को बिंदु वस्तु माना जाता है।
3. एक आयामी गति- एक .........................................में गतिमान कण को एक आयामी गति से गुजरना कहा जाता है। उदाहरण के लिए, एक सीधी रेखा में एक ट्रेन की गति, गुरुत्वाकर्षण के तहत स्वतंत्र रूप से गिरती हुई वस्तु आदि।
4. द्वि-आयामी गति- एक ........................में गतिमान कण को द्वि-आयामी गति से गुजरना कहा जाता है। उदाहरण के लिए, बंदूक से दागे गए गोले की गति, कैरम बोर्ड के सिक्के आदि।
5. त्रिविमीय गति- अंतरिक्ष में गतिमान किसी कण को त्रिविमीय गति कहते हैं। उदाहरण के लिए, आकाश में पतंग की गति, हवाई जहाज की गति आदि।
6. दूरी- गति में किसी कण के लिए, कण की प्रारंभिक और अंतिम स्थितियों के बीच तय किए गए .....................की कुल लंबाई को उसके द्वारा तय की गई दूरी के रूप में जाना जाता है जबकि किसी निश्चित समय में किसी कण का विस्थापन, उस समय के दौरान किसी विशेष दिशा में कण की स्थिति के.............. रूप में परिभाषित होता है। यह उसकी प्रारंभिक स्थिति से अंतिम स्थिति तक खींचे गए सदिश द्वारा दिया जाता है।
7. विस्थापन और दूरी में अंतर करने वाले कारक
—> विस्थापन की एक दिशा होती है। दूरी की कोई................. होती।
विस्थापन का परिमाण धनात्मक और ऋणात्मक दोनों हो सकता है।
—> दूरी सदैव धनात्मक होती है। यह समय के साथ कभी कम नहीं होती।
—> दूरी ≥ | विस्थापन |
8. एकसमान चाल: यदि कोई वस्तु समान समय अंतरालों में ...................दूरी तय करती है, तो उसे एकसमान चाल से गतिमान कहा जाता है।
एकसमान वेग: यदि कोई वस्तु समान समय अंतरालों में समान विस्थापन तय करती है, तो उसे एकसमान वेग से गतिमान कहा जाता है।
9. परिवर्तनशील चाल: यदि कोई वस्तु समान समय अंतरालों में ..........................दूरी तय करती है, तो उसे परिवर्तनशील चाल से गतिमान कहा जाता है।
परिवर्तनशील वेग: किसी वस्तु को परिवर्तनशील वेग से गतिमान कहा जाता है यदि वह समान समय अंतराल में असमान विस्थापन तय करती है।
10. औसत चाल- यह तय की गई ..............पथ लंबाई और संगत समय अंतराल का अनुपात है।
11. किसी वस्तु की औसत चाल किसी निश्चित समय अंतराल में उसके औसत वेग के परिमाण से .................होती है।
12. तात्क्षणिक चाल। किसी क्षण किसी वस्तु की चाल को तात्क्षणिक चाल कहते हैं।
13. तात्क्षणिक वेग - किसी कण का तात्क्षणिक वेग, समय के किसी भी क्षण या उसके पथ के किसी भी बिंदु पर उसका वेग होता है।
नोट- एक पूर्ण यात्रा के लिए दूरी और औसत चाल शून्य नहीं होती, जबकि विस्थापन और औसत वेग ....................होते हैं।
14. त्वरण- जिस दर से वेग में ........................................होता है उसे त्वरण कहते हैं।
15. गतिज रेखाचित्र- किसी कण के 'विस्थापन-समय' और 'वेग-समय' रेखाचित्रों का उपयोग अक्सर हमें कण की गति का दृश्य निरूपण प्रदान करने के लिए किया जाता है। ग्राफ का ‘आकार’ कण के प्रारंभिक ‘निर्देशांकों’ और त्वरण की ..........................पर निर्भर करता है।
उत्तर :
1.बदलती 2. बहुत बड़ी 3. सीधी रेखा 4.समतल 6. वास्तविक पथ, में परिवर्तन 7.दिशा नहीं, 8.समान, 9. असमान, 10. कुल, 11. अधिक या उसके बराबर, 13.शून्य,14. परिवर्तन, 15.‘प्रकृति’