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नव वर्ष की शुभकामना और सामाजिक ज़िम्मेदारी
आप सभी को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं, 
विश्वास है कि ये नया साल हम सबमें नयी ऊर्जा और 
उत्साह लायेगा जिससे हम अपनी आकांक्षाओं को पूर्ण करने
और अपने *सामाजिक कर्तव्यों* को अपने व्यक्तिगत हितों के साथ 
देख पाने और उनका निर्वाह करने को मजबूती से आगे बढेंगे 💐💐💐

 

कुछ सामाजिक कर्तव्य 

  • अपने संसाधन (पैसा और समय ) का कुछ हिस्सा अपनी व्यक्तिगत और पारिवारिक जरूरत के अलावा समाज मे शिक्षा और अनुकरणीय कार्यों के प्रचार प्रसार मे खर्च करना 
  • क्षमतानुसार जरूरतमंदों की मदद करना
  • देश के संविधान मे वर्णित मूल कर्तव्य
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उत्कृष्टता, प्रशंसा और बेहतर समाज - आदर किसका

जब हम लोगों के सकारात्मक पहलुओं की प्रसंशा करके
उन्हें बेहतर करने के लिए प्रेरित करते हैं तो यह ज्यादा कारगर होता है,
बजाय उन्हे नीचा/हीन दिखाने वाली आलोचना / तुलना से |

जब हम लोगों को उनके काम, उपलब्धियों और सामाजिक योगदान
से पहचानते हैं तो दुनिया बहुत खूबसूरत लगती है|


आजकल देखने को मिलता है की लोग पैसा देखकर

इज्ज़त करते हैं लोगों की, पैसे का स्रोत क्या है इसकी परवाह नहीं करते,
अगर पैसे का स्रोत कोई ऐसा काम है जो समाज को गंदा कर रहा हो,

नफरत और डर भर रहा हो लोगों मे, या ऐसा कोई काम जो लोगों की

गरिमा को छिन्न भिन्न करे या समाज को कमजोर करे,

अनैतिक रीतियों को जन्म दे/ आगे बढ़ाए फिर ऐसे इंसान

सम्मान के नहीं दंड के भागी हैं, ये उसी हवा को गंदा करते हैं जिसमे सांस लेते है,

बस जरूरत है समय से समझने की उसके लिए हमे

अपनी आँखों से लालच/डर/अकर्मण्यता का चश्मा हटाना होगा |
 

सभी नौनिहालों से उम्मीद है कि अपने सामाजिक कर्तव्य

 ध्यान में रखकर क्षमता निर्माण पर काम करेंगे |


आपके आस पास कोई भी कुछ अच्छा काम करे तो उसकी

प्रशंसा जरूरु करें भले ही आपका उससे कोई सीधा सरोकार

या स्वार्थ न हो क्यूंकी समाज मे उत्कृष्ट कार्यों की तारीफ

और अधिक लोगों को ऐसा करने के लिए प्रेरित करेगी और

इस तरह समाज मे अच्छे लोगों की संख्या बढ़ेगी अतः समय

निकालें सही काम की तारीफ और प्रचार के लिए

"यह बिलकुल उसी तरह है जैसे की अपने पीने वाले पानी मे मिनरल मिलाना |"

कोई आपको अपना काम बहुत अच्छे तरीके से करता दिखे

तो रुककर उसकी तारीफ जरूर करें ताकि ऐसे लोगों की

संख्या बढ़े और लापरवाही से अपना काम करने वालों की संख्या कम हो |

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कितना अच्छा हो अगर हमारे आस पास मुसकुराते चेहरे हों
एक दूसरे की उन्नति में लोग एक दूसरे का सहयोग करें तो 
उन्नति में समग्रता आएगी और *सभी के* रास्ते आसान होंगे|

हम सबकी मदद नहीं कर सकते हैं लेकिन 

हर कोई किसी न किसी की मदद जरूर 

कर सकता है 

आपको मदद भले न मिल रही हो

आप जरूर लोगों की मदद कर 

एक सही काम और सही प्रथा की नीव डालें

कितना अच्छा हो अगर हमारे आस पास मुसकुराते चेहरे हों,

हम अपना गम भूल कुछ देर के लिए तारो ताजा हो जाएंगे, फिर हो सकता है की हमे कोई राह,

कोई समाधान मिल जाए इसीलिए अगर हो सके तो किसीकी मुस्कुराहट का कारण जरूर बने |

अपने फायदे / डर / आलस्य / लापरवाही के चलते कोई भी ऐसा कार्य करने से बचें जो दूसरों के जीवन को खतरे मे डाले या उनके जीवन की गरिमा को कम करे या दो लोगों के बीच अविश्वास पैदा करे |

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कितना अच्छा हो अगर हमारे आस पास मुसकुराते चेहरे हों
एक दूसरे की उन्नति में लोग एक दूसरे का सहयोग करें तो 
उन्नति में समग्रता आएगी और *सभी के* रास्ते आसान होंगे|

हम सबकी मदद नहीं कर सकते हैं लेकिन 

हर कोई किसी न किसी की मदद जरूर 

कर सकता है 

आपको मदद भले न मिल रही हो

आप जरूर लोगों की मदद कर 

एक सही काम और सही प्रथा की नीव डालें

कितना अच्छा हो अगर हमारे आस पास मुसकुराते चेहरे हों,

हम अपना गम भूल कुछ देर के लिए तारो ताजा हो जाएंगे, फिर हो सकता है की हमे कोई राह,

कोई समाधान मिल जाए इसीलिए अगर हो सके तो किसीकी मुस्कुराहट का कारण जरूर बने |

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प्रशंसा नकि हीनभावना और डर - Appreciation not inferiority and fear
हीनता की भावना पैदा करने और तब मान्यता प्राप्त करने
लिए बेहतर करने के लिए मजबूर करने की पद्धति की
तुलना में प्रशंसा बेहतर और सकारात्मक तरीके से
काम कर सकती है। 
Appreciation may work in a better and in
a positive way than the methodology of
instilling feeling of inferiority
and then forcing to do better to get recognition. 
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खुलेपन जैसा कोई ज्ञान नहीं है। There is no wisdom like frankness.

खुलापन रिस्ते/व्यवहार की नीव मे सत्य का समावेश करता है |

उस मजबूत नीव पर आप एक आलीशान मकान बना सकते हैं |

खुलापन हमारी एक सच्ची छवि बनाता है जिससे हम अपने जैसे लोगों को ही आकर्षित करते हैं |

खुलापन हमे भी एक मानसिक स्पष्टता देता है और हमारे लिए निर्णय निर्माण आसान होता है |

खुलापन हमे पहचान के संकट से बचाता है |

खुलापन हमारे अंतर्द्वंद को कम करता है |

खुलापन हमारी विश्वासनीयता को बढ़ा सकता है |

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शिक्षा जो संवेदनशीलता और प्रेम लाये

हमे अपनी शिक्षा मे साहित्य अध्ययन को समुचित महत्व देना चाहिए

ताकि देश के नागरिक अपने देश मे रहने वाले सभी वर्गों और तबकों के संघर्ष,

नजरिए और आकांक्षाओं से परिचित होकर उनके साथ तालमेल बैठकर 

आगे बढ़ सकें और देश की उन्नति मे सहयोग कर सकें |

बहुत बेहतर हो की वो अपनी समझ और विचार को शब्द देकर उसे लिखित/मौखिक रूप से अभिव्यक्त 

कर सकें, ऐसा होने पर ही हम उन्हे सही मायने मे पढ़ा लिखा इंसान बना पाएंगे,

अन्यथा वो जीवन को केवल भोग और विलासिता का जरिया समझकर जीवन बिता देंगे |


 

जब हम किसी से प्रेम करते हैं तो उसके भले और उन्नति की बात सोंचते हैं|

किसी और के लिए भला क्या है इसे जानने से पहले 

हमे खुद के लिए भला क्या है, ये जानना होगा 

जिसके लिए सबसे पहले हमे ये समझना होगा कि

हम एक शरीर मात्र नहीं बल्कि एक बेचैन चेतना हैं 

जिसे चैन चाहिए जो चैन मिलता है जीवन मे 

सत्य, आज़ादी और उत्कृष्टता को उच्चतम स्थान देकर 

बिना  सत्य, आज़ादी और उत्कृष्टता को उच्चतम स्थान दिये 

हम कितना भी भोग (consumption or pleasure) लें हमे 

चैन नहीं मिलना |

अच्छा साहित्य हमारी चेतना को उठाता है और हमे लोगों की 

तकलीफ के प्रति संवेदनशील बनाता है |

हिन्दी साहित्य मे  राहुल सांकृत्यायन, मुंशी प्रेमचंद जैसे महान लेखक हुये हैं,

जिन्हे पढ़कर आप समाज को बेहतर रूप से समझ सकते हैं और अपनी चेतना को ऊपर उठा सकते हैं

"आपकी समझ कभी आपका साथ नहीं छोडती "

समझ परिपक्व होती है, अपने कार्य मे उत्कृष्टता के लिए प्रयास से और 

समझ का दायरा बढ़ता है साहित्य अध्ययन और नए लोगों को जानने समझने  से 

"एक बार समझ का दायरा बढ़ गया फिर लोगों से ताल मेल बिठाना आसान हो जाता है "

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Some habits for strong relationship
If you don't know, Ask.
If you don't agree, Discuss.
We don't like it, Say it Politely.
But we should not start  Judging silently.
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Recognition, support and survival

The things and practices we glorify and follow survives longer than the practices we discourage, same valid for honesty and impartiality too.

-Lovekush Kumar

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Money, encouragement and future

If you value people on basis of money/assets they possess irrespective of the way they achieved it then people may get encouraged to gather money and assets even by bad means (e.g. corruption) just to gratify their desire of feeling important.

-Lovekush Kumar

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