अपने मन में खुशियों के दीप जलाये रखिये,
आपकी मुस्कान है बहुत अनमोल इसे अपने होठों पर बनाए रखिए।
- सौम्या गुप्ता
बाराबंकी, उत्तर प्रदेश
सौम्या गुप्ता जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं |
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शुभकामनाएं
दिये की चमक से अँधेरे का सर भी झुक गया,
देखो, हर दहलीज़ पे ख़ुशियों का आसमान बिखर गया।
दिल में दबी कड़वी सी बातों को आतिशबाज़ी में खो जाने दो,
रंगोली के रंगों सा हर दिल का रिश्ता हो जाने दो।
बहुत मुबारक हो आप सभी को इस दिवाली की,
घर-आँगन अपना ख़ुशियों से भर जाने दो।
दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएँ!
© आयुष पंवार, देहरादून
ईमेल- official96500@gmail.com
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शुभकामनाएं
इंसान कई बार 'काश' में फंसकर रह जाता है
इसीलिए वह उदास रह जाता है
काश ऐसा होता, काश वैसा होता
पर जो है जैसा है सिर्फ अभी है।
-
-सौम्या गुप्ता
सौम्या गुप्ता जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं |
यह कविता 'काश' में फंसने और वर्तमान में न जीने के मानवीय स्वभाव पर प्रकाश डालती है, जिससे निराशा और दुःख की भावनाएँ उत्पन्न होती हैं।
इस कविता के माध्यम से कवयित्री क्या संदेश देना चाह रही है उसे कुछ प्रश्नों के माध्यम से आसानी से समझ सकते है :
इस काव्य का केंद्रीय विचार क्या है?
इस काव्य का केंद्रीय विचार यह है कि मनुष्य अक्सर 'काश' या 'अगर ऐसा होता' की दुनिया में खो जाते हैं, जो उन्हें वर्तमान की वास्तविकता से दूर ले जाता है, जिससे निराशा और उदासी की भावना पैदा होती है।
काव्य में 'काश' का क्या अर्थ है?
'काश' का अर्थ है 'अगर', 'यदि', या 'मैं चाहता हूँ' और यह अतीत या भविष्य की उन स्थितियों का प्रतिनिधित्व करता है जिन्हें बदला नहीं जा सकता है, जिससे व्यक्ति दुखी हो जाता है।
काव्य में उदासी का कारण क्या बताया गया है?
पाठ में उदासी का कारण 'काश' की दुनिया में फंसना और वर्तमान में न जीने को बताया गया है। जब व्यक्ति वर्तमान की सराहना करने के बजाय अतीत या भविष्य में खो जाता है, तो वह उदास हो जाता है।
हम वर्तमान में कैसे रह सकते हैं?
वर्तमान में रहने के लिए, हमें अतीत की गलतियों और भविष्य की अनिश्चितताओं के बारे में चिंता करने के बजाय, वर्तमान क्षण पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। हमें वर्तमान में जो कुछ भी है, उसकी सराहना करनी चाहिए और हर पल को जीना चाहिए।
इस काव्य का संदेश क्या है?
इस पाठ का संदेश है कि हमें वर्तमान में जीना चाहिए और 'काश' की दुनिया से बाहर निकलना चाहिए, क्योंकि यही सच्ची खुशी और संतुष्टि का मार्ग है।
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शुभकामनाएं
जिंदगी एक कारवाँ है,
इसमें लोग जुड़ते हैं,
इससे लोग कटते है।
माता-पिता, शिक्षक, दोस्त,
हमसफर इसका हिस्सा हैं
पर वक्त का तकाजा
कभी इन्हें दूर
तो कभी पास लाता है।
पर हमें चलना होता है
और लोग जुड़ें या ना जुड़ें
हमें आगे बढ़ना होता है
कभी किसी साथी के संग
कभी अकेले खुद के हमराही बन
अपनी मंजिल तक पहुंचना होता है।
-सौम्या गुप्ता
सौम्या गुप्ता जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं |
इस कविता के माध्यम से कवयित्री क्या संदेश देना चाह रही है उसे कुछ प्रश्नों के माध्यम से आसानी से समझ सकते है :
इस कविता का मुख्य विषय क्या है?
इस कविता का मुख्य विषय जीवन है, जिसे एक कारवाँ के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह जीवन के सफर में लोगों के साथ आने, बिछड़ने और आगे बढ़ने के बारे में है।
कविता में 'कारवाँ' शब्द का क्या अर्थ है?
यहाँ 'कारवाँ' शब्द जीवन के सफर का प्रतीक है, जिसमें लोग एक साथ चलते हैं, कुछ जुड़ते हैं और कुछ बिछड़ते हैं। यह जीवन की निरंतरता और परिवर्तनशीलता को दर्शाता है।
वक्त का तकाजा' से क्या तात्पर्य है?
वक्त का तकाजा' समय के प्रभाव और परिवर्तनों को दर्शाता है। यह दिखाता है कि कैसे समय के साथ लोग दूर हो जाते हैं या फिर से मिल जाते हैं, और जीवन में बदलाव आते रहते हैं।
हमें आगे क्यों निकलना होता है, चाहे कारवाँ चले या न चले?
हमें आगे निकलना होता है, क्योंकि जीवन एक निरंतर प्रक्रिया है। चाहे हमारे साथ कोई हो या न हो, हमें अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ते रहना चाहिए।
इस कविता का संदेश क्या है?
इस कविता का संदेश है कि जीवन एक सफर है, जिसमें हमें अकेले या दूसरों के साथ, आगे बढ़ते रहना चाहिए। हमें अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए हमेशा प्रयास करते रहना चाहिए, चाहे रास्ते में कितनी भी बाधाएं आएं।
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शुभकामनाएं
जिंदगी की सार्थकता की नींव पल होते हैं,
हम तलाशते रहते है उसको भविष्य में,
और करते है बस यही नादानी जिंदगी भर,
जैसे हम भागते रहते है अपनी परछाईं के पीछे,
और हो जाते है निराश।
- सौम्या गुप्ता
बाराबंकी उत्तर प्रदेश
इस लघु कविता की रचयिता सौम्या गुप्ता जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं |
इस कविता के माध्यम से कवयित्री यह संदेश देना चाह रही है कि जीवन वर्तमान में होता है उस वर्तमान में हाँथ में लिए हुए कार्य को अच्छे से करें, खुलकर स्वयं को अभिव्यक्त करें, रचनात्मक कार्यों और गरिमापूर्ण आत्मनिर्भर जीवन को आज और अभी जिया जा सके इसके लिए प्रयासरत रहें|
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शुभकामनाएं
मानो तो हर पल खुशरंग है जिंदगी
न मानो तो बिल्कुल बेरंग है जिंदगी
दिल है गर साफ तुम्हारा,
तो दिलदार है जिंदगी
कभी खुशनुमा ख्वाब है जिंदगी
कभी धूप, कभी छाँव है जिंदगी
मानो तो हमसफर है जिंदगी
न मानो तो टूटा दरख़्त है जिंदगी
कभी सब मिले मन का
तो जश्न है जिंदगी
कभी कुछ मिले बुरा,
तो उदास है जिंदगी
कभी कोयल की कूक सी
मिठास है जिंदगी
कभी नीम के पत्तो सी
कड़वी है जिंदगी
पर चाहे जैसी हो जिंदगी
इसके सभी पन्नो में है जिंदगी
क्योंकि हर पन्ने पर ईश्वर का दिया वरदान है जिंदगी
कितनों की है आश तुम्हारी जिंदगी
कितनों के नहीं है पास ये जिंदगी
- सौम्या गुप्ता
बाराबंकी उत्तर प्रदेश
सौम्या गुप्ता जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं |
इस कविता के माध्यम से कवयित्री क्या संदेश देना चाह रही है उसे कुछ प्रश्नों के माध्यम से आसानी से समझ सकते है :
यह एक कविता है जो जीवन के विभिन्न पहलुओं और रंगों का वर्णन करती है। इसमें जीवन की खुशी, दुख, सपने, और वास्तविकता को दर्शाया गया है, जो हमें जीवन के हर पल को महत्व देने की प्रेरणा देती है।
इस कविता में 'जिंदगी' को कैसे परिभाषित किया गया है?
इस कविता में 'जिंदगी' को एक बहुआयामी अनुभव के रूप में परिभाषित किया गया है, जिसमें खुशी, दुख, सपने, वास्तविकता, और हर तरह के रंग शामिल हैं। यह जीवन को एक निरंतर बदलाव के रूप में देखती है, जिसमें हर पल एक नया अनुभव होता है।
कविता में 'हमसफर' किसे कहा गया है?
कविता में 'हमसफर' उस व्यक्ति या वस्तु को कहा गया है जो जीवन के सफर में साथ देता है, चाहे वह खुशी हो या गम। यह एक ऐसे साथी का प्रतीक है जो हमेशा साथ रहता है।
कविता में 'दरख्त क्या दर्शाता है?
कविता में 'दरख्त' दुःख और नुकसान का प्रतीक है। यह दिखाता है कि जीवन में कभी-कभी दुख भी आते हैं, जो हमें तोड़ सकते हैं।
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शुभकामनाएं
अक्सर हम रिश्तों में उलझकर खो बैठते है खुद को और अपना अस्तित्व
खो जाते है " हम " खुद को किसी न किसी रिश्ते में छुपा कर,
मिट जाता है" मैं", रह जाता है सिर्फ रिश्ता
लेकिन
रहना चाहिए "हम" में भी एक "मैं"
अहम वाला नहीं "अस्तित्व" वाला
हर रिश्ते में देखना चाहिए खुद को भी
औरों से पहले, अपने अस्तित्व के लिए।
- सौम्या गुप्ता
बाराबंकी उत्तर प्रदेश
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इस कविता के माध्यम से कवयित्री क्या संदेश देना चाह रही है उसे कुछ प्रश्नों के माध्यम से आसानी से समझ सकते है :
संदेश में किस बारे में बात की गई है?
संदेश में रिश्तों के महत्व, व्यक्तिगत अस्तित्व, और दूसरों से पहले खुद को देखने की आवश्यकता पर चर्चा की गई है। यह रिश्तों में खो जाने के खतरे और अपनी पहचान को बनाए रखने के महत्व पर प्रकाश डालता है।
संदेश में 'मैं' और 'हम' का क्या अर्थ है?
'मैं' व्यक्तिगत पहचान और आत्म-सम्मान का प्रतीक है, जबकि 'हम' रिश्तों और समुदाय का प्रतीक है। संदेश 'मैं' को 'हम' के साथ संतुलित करने की बात करता है, ताकि रिश्तों में खोने के बजाय अपनी पहचान को बनाए रखा जा सके।
संदेश में 'अस्तित्व' का क्या महत्व है?
'अस्तित्व' का अर्थ है अपनी पहचान, मूल्यों और लक्ष्यों को बनाए रखना। संदेश में कहा गया है कि रिश्तों में शामिल होने के दौरान हमें अपने अस्तित्व को नहीं खोना चाहिए। दूसरों से पहले, हमें खुद को पहचानना और महत्व देना चाहिए।
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