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It has been noticed that some students lack in problem solving just because they don't attempt the questions on their own.
All are advised to atleast attempt the questions twice as per method taught in class..
It is just like putting value from question to formula.
To understand which formula is to be employed just remember the standard type of questions asked for each formula you learn.
Do it topic by topic and chapter by chapter.
" Repeat the example taught by your teacher atleast 2-3 times untill you become comfortable and confident with that method only then attempt new questions. "
Best wishes
यह देखा गया है कि कुछ छात्र/छात्राएं समस्या समाधान में इसलिए पीछे रह जाते हैं क्योंकि वे *स्वयं* प्रश्नों को हल करने का *प्रयास* नहीं करते।
सभी को सलाह दी जाती है कि वे कक्षा में सिखाई गई विधि के अनुसार प्रश्नों को कम से कम दो बार हल करने का प्रयास करें।
यह प्रश्न से सूत्र में मान डालने जैसा है।
यह समझने के लिए कि कौन सा सूत्र काम में लेना है, बस याद रखें कि आप जो भी सूत्र सीखते हैं, उसके लिए किस प्रकार के *मानक प्रश्न* पूछे जाते हैं।
इसे विषय-दर-विषय और अध्याय-दर-अध्याय अमल में लाएं
*प्रत्येक प्रश्न का 2-3 बार अभ्यास करें जब तक कि आप इस प्रक्रिया के अभ्यस्त या सहज न हो जाएं..*
सीमित समय में प्रश्न हल करने के लिए निम्नलिखित सुझावों पर ध्यान दें:
किसी प्रश्न को हल करने के लिए या तो वांछित मात्रा का सूत्र लिखें और फिर प्रश्न में दिए गए मानों से सीधे या परोक्ष रूप से मान डालें उस विषय का मुख्य समीकरण लिखें ताकि आप जान सकें कि दिए गए मानों और मुख्य समीकरण से कौन सी मात्राएँ निकाली जा सकती हैं उदाहरण के लिए फोटो इलेक्ट्रिक प्रभाव के प्रश्नों में आप हमेशा मुख्य समीकरण लिखकर प्रश्न शुरू कर सकते हैं और फिर दिए गए मान डालकर जाँच कर सकते हैं कि उन मानों को डालकर आप क्या पा सकते हैं।
उपरोक्त मामले में मुख्य समीकरण फोटो इलेक्ट्रिक प्रभाव का आइंस्टीन समीकरण है।
k.e max का फोटो इलेक्ट्रिक प्रभाव समीकरण विभिन्न रूपों में लिखा जा सकता है....
जैसे अगर आवृत्ति दी गई है तो आवृत्ति के संदर्भ में।
अगर तरंगदैर्घ्य दी गई है तो तरंगदैर्घ्य के संदर्भ में।
अगर कट ऑफ तरंगदैर्घ्य दी गई है तो *कार्य फ़ंक्शन* को *hc अपॉन लैम्ब्डा नॉट* से बदला जा सकता है
अगर कट ऑफ आवृत्ति दी गई है तो कार्य फ़ंक्शन को *h nue नॉट* से बदला जा सकता है
गति से संबंधित और बल से संबंधित प्रश्नों का प्रयास करें। आरेख बनाकर।
संकेत- एक खंभे को पार करने के लिए एक ट्रेन को अपनी लंबाई के बराबर दूरी तय करनी होगी... क्योंकि खंभा तभी पार किया जाता है जब गार्ड का वैगन खंभे को पार करता है।
आप सभी को कक्षा में पढ़ाए गए विषयों पर आधारित अधिक से अधिक प्रश्नों को हल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, अनसुलझे प्रश्नों पर कक्षा में अपने शिक्षक से चर्चा करें।
अच्छी तरह से अभ्यास करें। हमेशा प्रश्नों की तुलना कक्षा में हल किए गए प्रश्नों से करने का प्रयास करें ताकि समाधान प्राप्त किया जा सके।
टेस्ट का उद्देश्य आपकी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता का आकलन करना और आपको यह बताना है कि कहाँ सावधानी बरतनी है और कहाँ सामान्य ज्ञान का उपयोग करना है।
इसलिए इसे हल करते समय हल्का महसूस करें।
संख्यात्मक हल के माध्यम से अवधारणाओं की बेहतर समझ की आवश्यकता है।
प्रश्न भले ही नया लगे, उसे हल करने का प्रयास जरूर करें तब ही कान्सेप्ट क्लिअर होगा और कैपेसिटी बढेगी
Jaisa class me karvaya jaye... Waise hi har question ko approach karen
Jo concepts samajh na aa rahe hon... Unhe baar baat likhkar dekhen
Tip-
Question naya lagne par, turant use , class me padhe huye frame me change karne ka try
karen...
regular apni class attend Karen...
ताकि हम अपने आस पास के लोगों के इतर खुद से दूर दराज के लोगों के जीवन, पहनावे और रहन सहन के बारे में जान सकें।
अच्छा जानना क्यों है दूर वालों के बारे में ?
ताकि
हम जान सकें कि अगर उनमें कुछ बेहतर है हमसे, जिसे अपनाया जा सके।
हम जान सकें उनके जीवन के संघर्षों के बारे में ताकि हमें अपनी दिक्कतें बड़ी न लगें।
हम जान सकें उनकी आकांक्षाओं के बारे ताकि जब कभी उनके साथ काम करना पड़े या उनके लिए नीतियां बनाना पड़े तो हम हम उनके व्यवहार और जरूरतों के पीछे का कारण जान सकें।
इस तरह नए लोगों के साथ काम करना आसान होगा।
समाज के एक तबके का इंसान दूसरे तबके के इंसान के बारे में जान ही तब पाता है जब या तो वो उनके बीच समय बिताए, या उनके बारे में फ़िल्म देखें या फिर साहित्य ( कहानी, कविता, उपन्यास, लेख, रिपोर्ताज, जीवनियां, आत्मकथा इत्यादि) पढ़ें।
फिर वही प्रश्न कि आखिर जानना क्यों है ?
ताकि समाज में आपसी संघर्ष कम हों और सब एक दूसरे को साथ लेकर चलें, एक दूसरे की तकलीफ़ों के प्रति संवेदनशील रहें ताकि स्थायित्व का मार्ग प्रशस्त हो और देश में शांति बनी रहे, जीवन में शांति बनी रहे।
उम्र के एक पड़ाव का इंसान उम्र के दूसरे पड़ाव के इंसान के विचारों और प्राथमिकताओं को जान पाता है, सुविधा असुविधा को जान पाता है साहित्य अध्ययन से नतीजतन तालमेल बिठाकर चलना आसान होता है, जीवन में शांति आती है और क्लेश कम से कम रहता है।
आज का इंसान, अपने पूर्वजों द्वारा अनुभव की गई जीवन और दुनिया की सच्चाई को पुस्तकों द्वारा पढ़कर अपने जीवन को सही दिशा दे सकता है, जिसमें अफसोस का कोई स्थान न हो, हो तो केवल उत्कृष्टता।
फिर क्या सोंच रहे हैं आप ? देंगे एक घंटा रोज का ? साहित्य अध्ययन को
और बच्चों को भी मैथ्स साइंस के साथ-२ साहित्य पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करेंगे और देश को बेहतर और संवेदनशील ( जो दूसरों की तकलीफ़ को समझ सके ) नागरिक देने का प्रयास करेंगे ?
एक सुंदर और सुसज्जित विद्यालय बच्चों को आकर्षित करता है , और बच्चे जब उत्साहित मन से विद्यालय जाते हैं ,नित नया सीखने ,जानने की जिज्ञासा उत्पन्न होती है,क्योंकि
प्रोत्साहन, इंसान को उमंग से भर देता है, और इस तरह बच्चे भी प्रत्येक गतिविधि में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं।
साथ ही स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, उत्कृष्टता और उन्नयन की राह दुरूस्त करती है।
बच्चे देश का भविष्य हैं, ये अगर शिक्षित होंगे, ज्ञानी होंगे, जुझारू होंगे और संवेदनशील भी, तब हमारे देश का भविष्य उज्जवल होगा।
इन्हीं सब बातों के परिप्रेक्ष्य में देखिए उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में धौरहरा ब्लॉक के इस विद्यालय को जिससे जुड़े हुए शिक्षक, प्रधानाध्यापक और अधिकारी बधाई और प्रशंसा के पात्र हैं।
परीक्षाफल वितरण और अलंकरण समारोह से जुड़ी कुछ तस्वीरें, आप सबके लिए।
महसूस कीजिए सुकून और आशा को, एक उज्जवल भविष्य की आशा।
उमाशंकर जायसवाल जी ( स०अ०) का छायाचित्रों के लिए आभार और धन्यवाद।

जीवन में बहुत कुछ संयोग से मिलता है जिसका श्रेय आप नहीं ले सकते और बहुत कुछ तय प्रक्रियाओं से गुजरकर |
ऐसा हो सकता है कि किसी के जीवन की एक चूक उसे कुछ बहुत महत्व का पाने से वंचित कर दे, ऐसी अवस्था में ऐसे इंसान के द्वारा अमूमन दो तरह की प्रतिक्रियाएं होती हैं एक तो आगे बढ़कर वर्तमान में मौजूद विकल्पों पर विचार और अपनी परिस्थिति और प्राथमिकताओं के अनुसार विकल्प का चयन और दूसरा कि अपना जीवन अफ़सोस और दोषारोपण में बिताना, दूसरी तरह की प्रतिक्रिया बहुत हानिकारक है क्योंकि इस स्थिति में इंसान भूतकाल की याद में वर्तमान की अन्नंत बेहतर संभावनाओ पर ध्यान नहीं दे पाता और फिर से बार बार चूकता रहता है |
जीवन आत्मनिर्भरता, आज़ादी और गरिमा के साथ जीने और लोकसेवा में समर्पण से धन्य होता है फिर क्या फर्क पड़ता है की आपको अमुक क्षण में आपकी मनचाही वस्तु मिली या नहीं बल्कि हमारा ध्यान तो चल रहे और आने वाले हर पल की असीम संभावनाओं को तलाशने और उन्हें जरुरत अनुसार अंगीकार कर आत्मनिर्भरता, आज़ादी, गरिमा और लोकसेवा को समर्पित जीवन जीने पर होना चाहिए |
अगर हम वर्तमान की संभावनाओ के बजाय अपना ध्यान भूतकाल के नुकसान पर लगाये रखेंगे तो हो सकता है की उस पुराने नुकसान/चूक के लिए प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जिम्मेदार इंसान (वो इंसान आप स्वयं भी हो सकते हैं ) को कोसते रहें और अपने जीवन को कडवाहट से भर लें |
हमें ये याद रखना होगा की जिस पेड़ की छाया हम आज ले रहे हैं, बहुत संभावना है की वो पेड़ किसी और ने लगाया हो, एक बार आप भी समीक्षा करें की क्या आप कोई ऐसा काम कर रहें हैं जिसका लाभ ऐसे लोगों को मिल रहा है जिनसे आपका कोई रिश्ता नहीं, अगर नहीं तो मौजूद संसाधन, समय, ताकत और धन का एक हिस्सा इस काम को भी दें, जीवन में उत्कृष्टता आ जाएगी |
होली-होली-होली!
अलस कमलिनी ने कलरव सुन उन्मद अँखियाँ खोली,
मल दी ऊषा ने अम्बर में दिन के मुख पर रोली।
होली-होली-होली!
रागी फूलों ने पराग से भरली अपनी झोली,
और ओस ने केसर उनके स्फुट-सम्पुट में घोली।
होली-होली-होली!
ऋतुने रवि-शशि के पलड़ों पर तुल्य प्रकृति निज तोली
सिहर उठी सहसा क्यों मेरी भुवन-भावना भोली?
होली-होली-होली!
गूँज उठी खिलती कलियों पर उड़ अलियों की टोली,
प्रिय की श्वास-सुरभि दक्षिण से आती है अनमोली।
होली-होली-होली!
फागोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं
डॉ अनिल वर्मा
डॉ अनिल वर्मा, कृषि रसायन में परास्नातक हैं और गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर उत्तराखंड में कृषि रसायन पर शोध कार्य कर चुके हैं।
इनके द्वारा शिक्षण और साहित्य के अध्ययन/अध्यापन का अनुभव एक बेहतर समाज के लिए उपयोगी है |
इस वेबसाइट पर लेखक द्वारा व्यक्त विचार लेखक/कवि के निजी विचार हैं और लेखों पर प्रतिक्रियाएं, फीडबैक फॉर्म के जरिये दी जा सकती हैं|
प्रत्यास्थता की सीमा में, प्रतिबल विकृति के समानुपातिक होता है।
समानुपातिक गुणांक को प्रत्यास्थता गुणांक कहते हैं।
रैखिक विकृति के लिए
प्रतिबल = Y × विकृति
कुछ छात्रों/छात्राओं को भ्रम हो सकता है कि कहीं ये सूत्र
विकृति = Y × प्रतिबल तो नहीं
उनको ये याद रखना होगा कि प्रतिबल, दाब और प्रत्यास्थता गुणांक के मात्रक समान होते हैं और विकृति मात्रक विहीन होती है इसलिए पहला सूत्र ही सही है ताकि प्रतिबल और प्रत्यास्थता गुणांक का अनुपात एक मात्रक विहीन राशि हो सके।
Maximum possible kinetic energy of emitted electron is nothing but the energy remainder when energy consumed in combating the work function is substracted from total energy of incident photon.