सविता अपने बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति सजग रहती थी। इसलिए वह सदैव उन्हें पौष्टिक भोजन ही कराती थी। सर्दी के मौसम में हल्दी युक्त दूध और विटामिन्स से भरपूर फल खाने के लिए देती और गर्मियों में आम का पन्ना और नींबू की शिकंजी देना न भूलती थी।
लेकिन उसका बेटा आयुष जब से टीनएजर हुआ है और नए स्कूल में जाने लगा है तभी से मित्रों के साथ पीजा - बर्गर, चाईनीज़, इटैलियन जैसे जंक फूड खाने लगा। अब उसे माँ के हाथों का बना खाना बेस्वाद लगने लगा था।
नतीजा यह हुआ कि आयुष की इम्युनिटी बहुत कमजोर हो गयी और आए दिन उसे नजला जुकाम रहने लगे। सुबह सोकर उठता तो उसे एक साथ बहुत सारी छींके आतीं और पूरे दिन नाक से पानी बहता रहता ।
अब यह उसकी रोज की बात हो गई थी।
कुछ महीने पहले आयुष गर्मियों की छुट्टियों में अपने मामा जी घर रहने गया। उसने देखा उसके मामाजी सुबह उठते ही गुनगुने पानी में सेंधा नमक डाल कर एक नली वाले लोटे की सहायता से नाक के एक छिद्र से पानी अन्दर पहुंचा कर दूसरे छिद्र से बाहर निकाल रहे थे।
उनके नजदीक खड़ा आयुष आश्चर्य से ये सब देख रहा था, और साथ ही छींकता भी जा रहा था ।
" मामाजी आप ये क्या कर रहे हैं"। उसने मामा जी से पूछा।
" बेटा ये जल नेति की क्रिया है, वही कर रहा हूं "
" मामा जी इसको करने से क्या लाभ होता है "।
, " बेटा यह नाक की सफाई करती है और सांस नली सम्बन्धी परेशानी, पुरानी सर्दी, दमा, सांस लेने में होने वाली समस्या को दूर करती है।
इससेआंखों में पानी आना और आंख में जलन की समस्या कम होती है। और यह कान, और गले को बीमारियों से भी बचाती है। सिरदर्द, अनिद्रा, सुस्ती में जलनेति करना फायदेमंद है।तुम्हें भी यह नित्य ही करनी चाहिए। "मामा जी ने विस्तार से जानकारी दी।"
परन्तु मुझे तो यह करनी आती ही नहीं
मामा जी"
" कोई बात नहीं मैं सिखाउंगा तुम्हें। क्यों कि यदि जल नेति गलत तरीके से कर ली जाये तो उससे हानि भी हो सकती है"
" कैसी हानि मामाजी" आयुष ने हैरानी से पूछा।
देखो बेटा यदि हम पानी को अधिक गर्म कर लेंगे या नमक अधिक डाल देंगे तो उससे हमारी नाक में जलन हो सकती है, नाक से खून भी आ सकता है। और यदि हमने नासिका के अन्दर से पूरा पानी बाहर नहीं निकाला तो कान नाक में दर्द भी हो सकता है। और यदि लोटा गंदा है तो संक्रमण भी हो सकता है, इसलिए इसे किसी विशेषज्ञ की देखरेख में ही करना चाहिए "।
ठीक है मामाजी आप मुझे भी सिखाइये ये जलनेति"
" ठीक है बेटा"
अगले दिन से मामाजी लम्बी नलकी वाले दो लोटों में चुटकी भर नमक और एक लीटर हल्का गर्म पानी डाल कर ले आये फिर उन्होंने धीरे-धीरे आयुष को नली से नाक में पानी डालने का और बाहर निकलने का अभ्यास कराया।
आयुष जब तक उनके घर रहा तब तक उन्होंने आयुष को जलनेति की क्रिया कराई व उसको ठीक प्रकार से करने की सावधानियां भी समझायीं।
आयुष को अब इससे कुछ लाभ दिखाई देने लगा था तो वह स्वयं ही सुबह उठकर गुनगुने पानी में नमक डालकर जलनेति की क्रिया करने लगा तथा साथ में कपालभाति भी करने लगा।
देखते ही देखते कुछ महीनों में ही उसे छींकें आनी व नाक से पानी आना भी बंद हो गया, साथ ही जुकाम के कारण सिर में जो दर्द रहता था वह भी ठीक हो गया।
अब तो आयुष के घर में भी उसकी देखा देखी सभी लोग इस क्रिया को करने लगे। व मित्रों को भी जलनेति के फायदे समझाने लगे।
- सुनीता त्यागी
राजनगर एक्सटेंशन गाजियाबाद
ईमेल : sunitatyagi2014@gmail.com
आदरणीय सुनीता जी की रचनाएं हमे मानवीय संवेदना, मानवीय भावना के विभिन्न रूप और तीव्रताएं यथा प्रेम, परवाह, चाह और संकल्प इत्यादि, नज़र की सूक्ष्मता, सामाजिक संघर्ष और विसंगतियों पर प्रकाश डालती और लोगों मे संवेदना और जागरूकता जगाने का सफल प्रयत्न करती दिखती हैं, इनकी रचनाएँ पढ़कर खुद को एक संवेदी और व्यापक सोंच और दृष्टिकोण वाला इंसान बनाने मे मदद मिलती है |
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