Recent Articles Related To हिंदी साहित्य

अपनी बात या अनुभव लिखने या कहने मे संकोच होता है- जरा सोंचिए ये बात

कई कारणों पर विचार कीजिये 

1. बिना संकोच के अपनी कहानी बयान करिए ये किसी की समझ और हौंसले को बढ़ा सकता है 💐💐

2. मान लीजिये कि प्रोत्साहन पर एक लेख लिखना है अगर आप अपने जीवन से एक भी घटना को साझा कर पाएंगे तो ये लेख को समृद्ध करने मे योगदान देगी|

3.हो सकता है कि आपका लिखा हुआ लेख या आपके भाषण मे कुछ ऐसा हो जो किसी नए इंसान के प्रश्नो का जवाब हो जिसके लिए वो उधेड़बुन मे हो 

4. कई लेखक एक ही बात और एक ही सत्य को अलग अलग तरीके से लिखते हैं और वो अलग अलग लोगों के काम आते हैं, फिर आप क्यों नहीं लिखते अपने तरीके से ? आप क्यों आवाज नहीं बनते उनके जो अपनी तकलीफ, अपनी आकांक्षा कह नहीं पाते |

5.समझदार इंसान राष्ट्र की संपत्ति हैं अगर आपके अनुभव साझा करने से किसी की सोंच विस्तृत होती है तो इससे आपको भी फायदा होगा घूम फिर कर |

अपने अनुभव साझा कीजिये, और साहित्य को समृद्ध कीजिये, इसी तरह के अन्य लेख भी मौजूद हैं, उनकी तरफ भी रुख किया जा सकता है|

शुभकामनाएं

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जीवन एक नदी है- सौम्या गुप्ता

जीवन एक नदी है,

इसको तुम बहने दो,

मत पकड़ो इसको मुट्ठी में,

स्वच्छंद हवा सा बहने दो।

 

नदियों की सुन्दर कल-कल हो,

ऊंचे से गिरता निर्झर हो,

रास्तें हो चाहे कंकटाकीर्ण,

जो कहता है ये कहने दो।

 

ये सोचो मत कल क्या होगा,

जो कल था वो था अच्छा,

या जो आएगा वो अच्छा होगा,

तुम आज से करके दोस्ती,

प्यारी राहों को चलने दो।

 

माना मंजिलें अभी मिली नहीं है,

हो हर पल सुकून ये जरूरी नहीं है,

पर कुछ क्षण तो खुद को ठहरने दो।

 

ये जीवन नदी है बहने दो,

जो कहता है ये कहने दो,

आज को बेहतर करो 

और खुद को खुलकर जीने दो।

 

घूमो- टहलो दुनिया देखो,

जीवन को तुम बहने दो,

 

दौड़ो- भागो मजबूत बनो,

पढ़ो लिखो और समझदार बनो,

व्यक्त करो दैवीयता को, 

और जीवन को बहने दो।

 

-सौम्या गुप्ता

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश 

सौम्या गुप्ता जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं |

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पी॰एस॰ स्पीकिंग - डॉ विजय अग्रवाल- पुस्तक परिचय

  इमेज स्रोत - https://bentenbooks.com/

डॉ॰ विजय अग्रवाल द्वारा लिखित यह प्यारी सी पुस्तक, एक आई.ए.एस. अधिकारी ( व्यक्तिगत सचिव के स्तर के ) के व्यवसायिक और व्यक्तिगत जीवन के साथ उसके मनोभावों के आस पास घूमती है, प्रकाशक बेनतेन बुक्स के शब्दों मे - " यह एक ऐसा उपन्यास है जो इस ग्लोबलाइजे़शन के दौर में किसी भी व्यक्ति को रोज़ मर्रा की ज़िन्दगी से हटकर अपनी निजता को खोजने पर मजबूर करता है। कहानी एक आई.ए.एस. अधिकारी के जीवन के चारों ओर घूमती है और हम सभी के जीवन के अंतर द्वंद्वो तथा समस्याओं पर प्रकाश डालती है। कुलमिलाकर यह हास्य-व्यंग से भरपूर, एक रोचक उपन्यास है जिसे पाठक एक बार शुरू करने पर समाप्त करके ही रखेगा।

मैंने क्या बेहतरी महसूस की खुद में इस पुस्तक को पढ़कर:

  • एक मंत्री जी के व्यक्तिगत सचिव के पास किस किस तरह के काम होते हैं और वह इन्हें कैसे व्यवस्थित करते हैं, इसे जानने और समझने का मौका मिला | 
  • डेलीगेशन के लिए लोगों के चुनाव कैसे होते हैं इसकी एक झलकी मिली |
  • संस्कृति मंत्रालय की प्रष्ठभूमि पर यह उपन्यास लिखा गया अतः इस मंत्रालय के महत्व पर भी काफी कुछ जानने का मौका मिला |
  • अलग अलग इंसान एक ही परिस्थिति को कैसे देखते और कैसे अलग -अलग प्रतिक्रिया देते हैं इसकी एक बानगी मिली |
  • शरीफ होने और शरीफ दिखने में अंतर को समझा |
  •  मानवीय मन के कई आयामों और स्थितियों, माने अहंकार, डर, असुरक्षा की भावना इत्यादि को बेहतर तरीके से समझने का मौका मिला |

" और भी बहुत कुछ जो यहाँ लिखने लग जाऊँ तो फिर एक पुस्तिका तैयार हो जाये " 

मुझे उम्मीद है कि आपको भी इस पुस्तक को पढ़कर मानसिक स्फूर्ति का अहसास होगा और चीज़ों को बेहतर तरीके से समझ पाने का गर्व तथा आत्मसंतोष भी |


अगर आपको चीज़ों की कार्यपद्धति को समझना, मानव मन और व्यवहार को जानना-समझना रोचक और जरुरी लगता है तो आप भी निराश न होंगे |


फिर देर किस बात की !

"पढाई भी और अपने जीवन में उत्कृष्ट काम के लिए प्रयास भी 

शुभकामनाएं"

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प्रतीक्षा - एक लघुकथा

और अनुपमा, कैसी हो ? साधना ने अपनी सहेली के हास्टल के कमरे में घुसते ही पूछा।

ठीक हूं यार, तू बता कैसी है और कैसे हैं मेरे होने वाले जीजा जी, साधना का हांथ पकड़ते हुए आंखों में एक चमक और चेहरे पर ठिठोली का भाव लाते हुए, अनुपमा ने भी सवाल दाग दिया।

वो भी ठीक हैं ( चेहरे पर लालिमा और मुस्कुराहट के साथ ), उनका तबादला बनारस हो गया है और आज ही वो बिजनौर के कार्यालय से रिलीव भी हो गए हैं, साधना ने जवाब दिया, पापा कह रहे थे कि मेरे फाइनल सेमेस्टर के एग्जाम के तुरंत बाद सगाई और नवंबर में शादी!

अब जल्द ही मेरा अकेलापन दूर हो जाएगा, साधना खिलखिलाते हुए बोली।

नहीं प्यारी, अकेलापन दूर नहीं होगा बस दब जायेगा, अनुपमा ने मुस्कुराते हुए आध्यात्मिक ज्ञान का साझा किया |

अकेलापन दूर होता है जब हम किसी बड़े काम में लगते हैं, ऐसा काम जो हमें हमारी उच्चतम संभावनाओं तक ले जाए, अनुपमा ने आगे समझाया |

तो तू कब ढूंढ रही है कोई जो तुझे तेरी उच्चतम संभावनाओं तक ले जाए, साधना ने कुछ खीझकर कहा।

प्रतीक्षा में हूं कि कब कोई मिलेगा ऐसा, जल्दबाजी में मैं किसी ऐसी गाड़ी में नहीं बैठना चाहती जिसमें मुझे खुद ही धक्का लगाना पड़े, इससे बेहतर है कि मैं पैदल ही चलती रहूं, अनुपमा ने गहरी सांस भरते हुए कहा।

- लवकुश कुमार

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दुल्हन- एक लघुकथा

 

५ वर्ष का यथार्थ अपनी दादी के साथ शाम को मोहल्ले की खाली रोड पर टहल रहा है|

स्वच्छ हवा और शांत माहौल में उसके मन में एक पुराना सवाल कौंध आता है और वह अपनी जिज्ञासा हेतु अपनी दादी से पूछता है कि दादी, पलक बुआ कि शादी में जब वो दुल्हन बनी होती हैं तो दूसरी बुआ लोग उनके आगे फूल क्यों डालती हैं ?

 

ताकि बुआ को ऐसा महसूस हो कि वो खास हैं, राजकुमारी हैं हालांकि वो न तो खास हैं और न ही राजकुमारी, दादी का जवाब आता है।

 

- लवकुश कुमार

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हिन्दी की कुछ चुनिन्दा लघु कहानियाँ आडियो फ़ारमैट मे

हिन्दी की चुनिन्दा लघु कहानियाँ यहां से सुन सकते हैं-लघु कहानियाँ

इस लिंक को भारत सरकार की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से भी एक्सेस किया जा सकता है- राजभाषा की वैबसाइट के लिए यहाँ क्लिक करें

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