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Companion and path

Choosing companions is choosing ways of life and choosing a road is choosing the landmarks you will encounter.

-Lovekush Kumar

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Recognition, support and survival

The things and practices we glorify and follow survives longer than the practices we discourage, same valid for honesty and impartiality too.

-Lovekush Kumar

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Money, encouragement and future

If you value people on basis of money/assets they possess irrespective of the way they achieved it then people may get encouraged to gather money and assets even by bad means (e.g. corruption) just to gratify their desire of feeling important.

-Lovekush Kumar

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Stress, efficiency and calmness

Assuming an exam as the last chance of proving preparation or treating it as last chance for doing something good is the reason of stress other than the peer pressure and desire of recognition from society.

Take an exam just a test, it's not final, life is full of opportunities to do good for society to do good for yourself, to excel in various fields just maintain calm of your mind by considering the calmness above result of all exam and above situation dependent recognition given by society.

Impact of your work on general public on weaker section of the society can be a good indicator of the goodness of your work/deed.

calmness increases efficiency and decisive power.

 

-Lovekush kumar

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Courage and strength

To develop a child into a strong person inculcate in him/her the sense of responsibility, accountability and courage to accept mistakes, not habit of making excuses.

- Lovekush kumar 

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कृतज्ञता और उन्नति

बच्चों में कृतज्ञता (सही इंसान के प्रति) का भाव पैदा कर दीजिए, तमाम सद्गुण अपने आप आ जायेंगे।

कृतज्ञ व्यक्ति एक से एक ऊंचे काम कर सकता है, क्योंकि ्  कृतज्ञता से जन्मी प्रेरणा अंदरुनी, अनवरत और स्वपोषी होती है।

-लवकुश कुमार 

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मन की शांति और गरिमा

जब मन में शांति हो तब व्यवहार में प्रेम और दूसरों की गरिमा के प्रति सम्मान झलकता है।

-लवकुश कुमार 

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कार्य की गुणवत्ता, मन स्थिति और सफलता का ग्राफ

जब आप कोई भी छोटे से छोटा और बड़े से बड़ा कार्य गुणवत्ता को ध्यान में रखकर करते हैं तो इससे निम्नलिखित फायदे हो सकतें हैं जो आपकी सफलता और समृद्धि के ग्राफ में टिकाऊ इजाफा करने में सक्षम हैं ,

 

१. आपकी मन स्थिति बेहतर होती है और आप आत्मगौरव का एहसास करते हैं, करके देखिए अनुभूति होगी ।

 

२. आपके आसपास के दूसरे लोग आपके काम से प्रभावित हो अनुसरण करेंगे और माहौल की बेहतरी मे योगदान देंगे आखिर आप भी तो किसी के द्वारा प्रदत्त सेवाओं के उपभोक्ता होंगे और उच्चतम गुणवत्ता की उम्मीद रखते होंगे, लीडर बनिए और शुरुआत स्वयं कीजिए, आगे बढिए, सही काम के लिए जरूर आगे बढिए ।

 

३. कुछ लोग आपकी प्रशंसा भी करेंगे और आपको महत्वपूर्ण महसूस करवायेंगे जो आपको और आपके आसपास के कुछ अन्य लोगों को और अधिक गुणवत्तापूर्ण कार्य के लिए प्रेरित करेगा।

 

४. आपका काम अगर सही नजरों में आया या लाया गया तो कद्रदान लोग आपको उचित पदस्थापना देने में पीछे नहीं हटेंगे और आपके सामने मौके और शक्तियां आयेंगी चीजों को बेहतर करने के ।

 

पदस्थापना से भी ऊपर है आपकी मन स्थिति।

आखिरकार हमारे सारे प्रयासों का ध्येय एक बेहतर और सुरक्षित जीवन ही तो है फिर क्यों न इसे पाने के लिए पहले खुद को और फिर लोगों को अपने हाथ में लिए हुए काम को बेहतर तरीके से करने के लिए प्रेरित करने से करें।

 

 एक अभ्यर्थी के लिए वर्तमान विषय को जुझारूपन के साथ निपुणता हासिल करने के उद्देश्य को ध्यान में लेकर अध्ययन करना ही वास्तव में उसे उपयोगी बनाता है ।

 

 

यह बिल्कुल उसी तरह है जैसे एक अभ्यर्थी द्वारा जिसने अपनी १२वीं तक की पढ़ाई समझकर की हो उसके लिए आगे की पढ़ाई या किसी प्रतियोगिता की तैयारी सुरूचिपूर्ण और अपेक्षाकृत आसान हो जाती है।

 

अतः आज अगर आप इस लेख को पढ़ रहे हैं, उम्र के किसी भी पड़ाव पर तो प्रण लें कि जो भी काम हांथ में लेंगे अपना या दूसरे का तो उसे अधिकतम संभव गुणवत्ता के साथ अंजाम देंगे और यही होगा अपने समय का सही इस्तेमाल और सम्मान।

क्योंकि अगर आप कोई काम बस काम चलाऊ कर रहे हैं तो आप अपनी क्षमता और समय दोनों का अपमान कर रहे हैं और अगर आप खुद ही अपने समय का अपमान करेंगे तो औरों से क्या उम्मीद रखेंगे।

 

- लवकुश कुमार

 

लेखक भौतिकी में परास्नातक हैं और वर्तमान में भारत मौसम विज्ञान विभाग में अराजपत्रित अधिकारी हैं।

ये लेखक के निजी विचार हैं और समाज की बेहतरी के प्रयोजन से लिखे गए हैं।

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निपुण व्यक्ति और उत्कृष्टता का स्वाद

 

उत्कृष्टता आत्मगौरव प्रदान करती है।

 

सामान्य ज्ञान जरूरी है ताकि लोगों को और चीजों को समझना आसान हो और निर्णय निर्माण में सहूलियत और सटीकता हासिल हो सके।

 

वहीं पर किसी एक विषय में निपुणता हमें अपने दैवत्व को व्यक्त करने में मदद करती है।

 

किसी एक विषय में निपुणता का प्रयास हमारी ध्यान लगाने की क्षमता और तर्कशीलता के साथ शोधक्षमता को बढ़ाता है।

 

साथ ही ऐसे समाज जहां एक से एक निपुण लोग हों वहां शोध फलता फूलता है और नयी पीढ़ी के लिए उच्च आदर्श प्रस्तुत होते हैं जिससे लोगों की ऊर्जा व्यर्थ कार्यों में मन बहलाने के बजाय उत्कृष्टता और सृजन का स्वाद चखने में लगती है ।

 

एक विषय में एक स्तर की निपुणता हासिल करने के बाद दूसरे विषयों पर प्रयास किया जा सकता है और यह प्रयास अपेक्षाकृत आसान साबित हो सकता है।

 

- लवकुश कुमार

 

लेखक भौतिकी में परास्नातक हैं और वर्तमान में भारत मौसम विज्ञान विभाग में अराजपत्रित अधिकारी हैं।

ये लेखक के निजी विचार हैं और समाज की बेहतरी के प्रयोजन से लिखे गए हैं।

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कर्मशील

सागर की अपनी क्षमता है

पर माँझी भी कब थकता है

जब तक साँसों में स्पन्दन है

उसका हाथ नहीं रुकता है

इसके ही बल पर कर डाले

सातों सागर पार।

आत्मविश्वासी,उत्साही, परिश्रमी

का ही जग में अभिनंदन है।

वो कहा फिर कही थकता है

न डरता न रुकता है। 

कर देता है

सातों सागर पार।।

काहे किंचित भय हो 

है सद्गुण तो हो जय जयकार

न रुकता है। न थकता है।

कर देता है सातों सागर पार

 

-डॉ अनिल वर्मा 

 

 

कवि कृषि रसायन में परास्नातक हैं और गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर उत्तराखंड में कृषि रसायन पर शोध कार्य कर चुके हैं।

ये कवि के निजी विचार हैं और समाज की बेहतरी के प्रयोजन से लिखे गए हैं।

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