उत्कृष्टता आत्मगौरव प्रदान करती है।
सामान्य ज्ञान जरूरी है ताकि लोगों को और चीजों को समझना आसान हो और निर्णय निर्माण में सहूलियत और सटीकता हासिल हो सके।
वहीं पर किसी एक विषय में निपुणता हमें अपने दैवत्व को व्यक्त करने में मदद करती है।
किसी एक विषय में निपुणता का प्रयास हमारी ध्यान लगाने की क्षमता और तर्कशीलता के साथ शोधक्षमता को बढ़ाता है।
साथ ही ऐसे समाज जहां एक से एक निपुण लोग हों वहां शोध फलता फूलता है और नयी पीढ़ी के लिए उच्च आदर्श प्रस्तुत होते हैं जिससे लोगों की ऊर्जा व्यर्थ कार्यों में मन बहलाने के बजाय उत्कृष्टता और सृजन का स्वाद चखने में लगती है ।
एक विषय में एक स्तर की निपुणता हासिल करने के बाद दूसरे विषयों पर प्रयास किया जा सकता है और यह प्रयास अपेक्षाकृत आसान साबित हो सकता है।
- लवकुश कुमार
लेखक भौतिकी में परास्नातक हैं और वर्तमान में भारत मौसम विज्ञान विभाग में अराजपत्रित अधिकारी हैं।
ये लेखक के निजी विचार हैं और समाज की बेहतरी के प्रयोजन से लिखे गए हैं।
सागर की अपनी क्षमता है
पर माँझी भी कब थकता है
जब तक साँसों में स्पन्दन है
उसका हाथ नहीं रुकता है
इसके ही बल पर कर डाले
सातों सागर पार।
आत्मविश्वासी,उत्साही, परिश्रमी
का ही जग में अभिनंदन है।
वो कहा फिर कही थकता है
न डरता न रुकता है।
कर देता है
सातों सागर पार।।
काहे किंचित भय हो
है सद्गुण तो हो जय जयकार
न रुकता है। न थकता है।
कर देता है सातों सागर पार
-डॉ अनिल वर्मा
कवि कृषि रसायन में परास्नातक हैं और गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर उत्तराखंड में कृषि रसायन पर शोध कार्य कर चुके हैं।
ये कवि के निजी विचार हैं और समाज की बेहतरी के प्रयोजन से लिखे गए हैं।