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जो कुछ पापा सिखा गये |

आज 07/05/2025 को पापा की पुण्य तिथि है,

जो काम मै हर साल पापा की बरसी पर करता हूँ वो है उनकी उन बातों/सीख  को याद करना

जो या तो उन्होने कभी कहीं थी या ज़्यादातर अपने व्यवहार से परिलक्षित की थी

और मेरे खोजी मन ने उन्हे पकड़ लिया| 

आज सोंचा की क्यूँ न उन बातों को लिखकर एक लेख का रूप दे दूँ ताकि यदि मेरे जैसे ही किसी और

लवकुश को इन बातों और सीखों की जरूरत हो तो वो भी इन्हें अपने जीवन को दिशा देने के लिए अमल कर सके ,

अगर एक भी ऐसा इंसान जिसे ये बातें अपने जीवन को बेहतर और गरिमामय बनाने  मे मददगार साबित हो सकें

तो मै अपना लिखना सफल मानूँगा|

  1. जो सबसे पहली बात याद आती है वो उनकी ईमानदारी, जो कहते थे वही करते थे अपने व्यवहार और बातों मे अंतर न रखते थे, जो करना नहीं होता था उसका वादा नहीं करते थे |
  2. उनका मृदु व्यवहार, हर छोटे बड़े का हाल चाल लेना, उनके काम के बारे मे बात करना, कुशल-क्षेम पूछना, उनके इसी व्यवहार के चलते मुझे रिश्तों का ज्ञान हो गया था, जिनको वो चाचा कहते उनको मै बाबा कहता, जो उनको दादा कहे उन्हे मै चाचा/बुआ कहता|
  3. गलत का विरोध करना, उनके आस पास कुछ गलत हो रहा हो तो उसका विरोध करना |
  4. लोगों की दिक्कत पर उनके साथ खड़े रहना, पैसे/समय/साथ से उनकी हर संभव मदद करना |
  5. महत्वाकांक्षी थे लेकिन गलत रास्ता नहीं अपनाया |
  6. व्यापार के काम सिखाते थे लेकिन बीमारी के बावजूद भी मुझे मेरी इच्छा के विरुद्ध अपने काम मे न खींचा |
  7. पढे लिखें लोगों का उचित सम्मान करते थे, इसकी बदौलत पढे लिखे लोगों का मेरे घर आना जाना लगा रहा और मैं उनसे प्रभावित होकर, उनका सम्मान देख पढ़ाई मे अच्छा करने को लालयित रहा |
  8. पढ़ाईं मे मेरी लगन को देख उन्होने अपने व्यक्तिगत हित किनारे कर मुझे 12वीं के बाद पढ़ने महानगर भेजा|
  9. अपनी बीमारी को मेरी पढ़ाई मे बाधा न बनने दिया |
  10. गलती करके सीखने की गुंजाइश दी|
  11. संपत्ति को लेकर कभी भी स्वजनो से विवाद नहीं किया, शांति को उचित प्राथमिकता दी |
  12. अपने से बड़ों की सेवा का उदाहरण प्रस्तुत किया |
  13. बिना परिणाम की परवाह किए गलत के खिलाफ और कमजोर के समर्थन मे खड़े हुये |
  14. घर से बाहर निकल, नए लोगों को जानने और देश दुनिया को देखने समझने को प्रेरित किया |
  15. सबके साथ प्रेमवत रहने की प्रेरणा दी और कभी अपने पराए की भावना मन मे न आने दी |
  16. सस्ती होने पर भी गैर जरूरी चीजों को इकठ्ठा न करने की सलाह दी |
  17. कहने से ज्यादा सुनना और समझना सिखाया |
  18. हर काम को बेहतरीन तरीके से करने की प्रेरणा दी |
  19. आत्मनिर्भर होने की सीख दी |
  20. बिना लाग लपेट के सीधी और साफ बात रखने पर ज़ोर दिया |
  21. अपने से छोटों के प्रति संरक्षक का भाव रखने का उदाहरण बने |
  22. हमेशा प्रयास किया की उनके प्रयास से किसी का रुका हुआ काम बन सके |  

पापा एक व्यापारी थेबात के पक्के व्यापारीअसहायों के मददगार और रखवाले

मृत्यु शय्या पर लेटा व्यक्ति क्या इच्छा जाहिर कर सकता है ?

पापा ने ये इच्छाएँ जाहिर की:

  1. लवकुश को अधिकारी बना देना
  2. छोटी बहन की अच्छी जगह शादी कर देना
  3. अपनी माता और छोटे भाई का ख्याल रखना

इन इच्छाओं पर गौर करने वाला कौन था स्वयं मै (लवकुश कुमार), पापा ने जो समझ, ज़िम्मेदारी लेने की स्वीकार्यता और स्पष्टता दी उसकी बदौलत आज भारत सरकार मे समूह ख का अराजपत्रित अधिकारी हूँ, आगे की यात्रा जारी है,

बहन भी अपने दाम्पत्य जीवन मे खुश है, माता जी का आशीर्वाद बना है और अनुज भी अभियांत्रिकी मे स्नातक की उपाधि के बाद अपने कौशल और समझ के दम पर अपने लिए कर्मभूमि तैयार करने मे लगा है |

जब तक जीवित रहा और कुछ भी करूँगा, पापा द्वारा दी गयी  परवरिश याद रहेगी|

श्रद्धांजलि...