हाल ही में कोलकाता के आर जी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक ट्रेनी महिला डॉक्टर के बलात्कार के बाद हत्या का मामला सामने आया है, जो बहुत दुःखी करने और झंझोड़ने वाला मामला है, हमें सतही तौर पर लगता है कि सब कुछ सही चल रहा है लेकिन जब ऐसी दुखद घटनाएं सामने आती हैं तो लगता है कि बहुत कुछ है जो ग़लत और सोचनीय है।
जैसे एक अंदर से सड़ा हुआ फल ऊपर से ठीक लगते हुए भी अंदर की सड़न रोक नहीं सकता और अलग अलग समय पर उसके अंदर की सड़न खुद को मैनीफेस्ट करती है सतह पर आकर और हमारे लिए मुश्किल होता है बताना कि सड़न का अगला चकत्ता फल के किस हिस्से में दिखाई देगा, वैसे ही अंदर से सड़ रहे समाज में, अंदर की सड़न खुद को मैनीफेस्ट करती है समय समय पर, कोलकाता के आर जी कर मेडिकल कॉलेज की अत्यंत दुखद घटना भी ऐसा ही एक मैनीफेस्टेसन है अंदर से सड़ रहे समाज का, ये सड़न समाज में कहीं भी हो सकती है, केवल एक राज्य तक सीमित नहीं, अंदर की सड़न का मैनीफेस्टेसन कहीं भी दिखाई दे सकता है।
जरूरत है कि हर इंसान अपने जीवन की प्राथमिकताओं और अपने जीवन दर्शन की समीक्षा कर जांच करे की वो कहीं अनजाने में ही सही, समाज की इस सड़न को बढ़ाने में भागी तो नहीं बन रहा।
इस संबंध में जाने माने वेदांत शिक्षक आचार्य प्रशांत का एक वीडियो हमें बेहतर दृष्टि दे सकता है -
https://app.acharyaprashant.org/?id=9-v7e7e
-लवकुश कुमार
लेखक भौतिकी में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से स्नातक, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली से परास्नातक हैं और वर्तमान में भारत मौसम विज्ञान विभाग में अराजपत्रित अधिकारी हैं।
ऊपर व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार जिनका उद्देश्य समाज की उन्नति और बेहतरी है।